Tamra Sindoor (ताम्र सिन्दूर) : जानें गुण उपयोग एवं फायदे

ताम्र (तांबा), पारद और गंधक के योग से बनी यह औषधि ताम्र सिंदूर (Tamra Sindoor) के नाम से जाना जाता है | इसका उपयोग रक्त विकृति से उत्पन्न विकारों में किया जाता है | आमाशय और यकृत के लिए यह बहुत उपयोगी रसायन है | महिलाओं में रजो अवरोध की समस्या में भी यह बहुत गुणकारी औषधि का कम करती है |

ताम्र सिन्दूर क्या है / What is Tamra sindoor ?

जैसा आपको नाम से प्रतीत हो रहा है ताम्र सिन्दूर ताम्र से बनी एक आयुर्वेदिक औषधि है | यह रसायन बहुत गुणकारी औषधि है जो आमाशय और यकृत के विकारों को दूर करने के लिए उपयोग में ली जाती है | इस लेख में आप ताम्र सिंदूर के घटक द्रव्यों, इसे कैसे बनाते हैं एवं इसके क्या फायदे हैं आदि के बारे में जानेंगे |

ताम्र सिन्दूर के घटक द्रव्य / tamra sindoor ingredients

ताम्र सिन्दूर के गुण

ताम्र सिंदूर बनाने की विधि / Tamra sindoor preparation

  • इस औषधि को बनाने के लिए सबसे पहले पारा और गंधक की कज्जली बना लें |
  • अब तांबे के तारों को छोटे छोटे टुकडो में तोड़ लें |
  • कज्जली और तांबे के तार के टुकड़े आतशी शीशी में डाल लें |
  • इस शीशी को बालुकायंत्र में रख कर आंच दें |
  • 36 घंटे लगातार आंच देने के बाद इसको उतार लें |
  • शीशी को स्वांग शीतल होने पर तोड़ लें |
  • इसके मुंह पर ताम्र सिन्दूर लगा होता है इसे उतार कर सुरक्षित रख लें |
  • शीशी के पैंदे में ताम्र भस्म रहती है इसे थोड़ी और आंच देकर तैयार कर सकते हैं |

इस प्रकार लगभग ३६ घंटे तक आंच देने पर पर ताम्र सिंदूर तैयार हो जाता है |

ताम्र सिंदूर के सेवन की विधि एवं मात्रा / tamra sindoor uses and doses

यह अत्यधिक उष्ण वीर्य रसायन होता है | इसकी सिर्फ एक से दो रत्ती की मात्रा का ही उपयोग किया जाता है | इसका सेवन पान या तुलसी के पत्तो के रस के साथ किया जा सकता है | शहद के साथ भी इसका सेवन कर सकते हैं |

ताम्र सिन्दूर के नुकसान

ताम्र सिन्दूर के फायदे एवं उपयोग / tamra sindoor uses and benefits

गंधक पारा और तांबे से बना यह रसायन उष्ण वीर्य होता है | ताम्र सिन्दूर का उपयोग यकृत विकार और रक्त विकृति के कारण उत्पन्न रोगों में किया जाता है | यह यकृत प्लीहा के रोग एवं अपस्मार को ठीक करने वाला और शुलनाशक रसायन है | आंतो में होने वाले क्षय रोग में भी इसका सेवन अत्यंत फायदेमंद रहता है | यह चर्म रोगों में भी लाभकारी है | आइये जानते हैं रोगानुसार इसके फायदे :-

ताम्र सिन्दूर के फायदे

आमाशय के विकारों में ताम्र सिन्दूर के फायदे :-

यह आमाशय को बल प्रदान करने वाला, ग्राही और कीटाणुओं को नष्ट करने वाला रसायन है | आमाशय में कर्कट स्फोट में इसके सेवन से बहुत लाभ मिलता है | यह आंतो की वात नाड़ियो के क्षोभ को दूर कर दर्द कम करता है |

हैजा रोग में ताम्र सिन्दूर के फायदे :-

हैजा रोग लीवर से जुडी समस्या है | जब हैजा अपनी अवस्था में हो जिसके कारण हृदय दुर्बल हो गया हो, नाड़ी क्षीण हो गयी हो और शरीर ठंडा पड़ गया हो तो ऐसे में ताम्र सिन्दूर के साथ जहर मोहरा खताई का सेवन करने से बहुत लाभ होता है | इसके सेवन से हैजे के कीटाणु मर जाते हैं और हाथ पैरो में होने वाली एंठन भी कम हो जाती है |

सुखी खांसी (कास) में ताम्र सिन्दूर का क्या उपयोग है ?

जब कफ सुख गया हो और छाती में चिपक गया हो तो रोगी को बहुत वेदना होती है | बहुत खांसने पर भी कफ नहीं निकलता और इससे श्वास की दिक्कत भी होने लग जाती है | इस अवस्था में ताम्र सिन्दूर आधा रत्ती, प्रवाल भस्म एक रत्ती और सितोपलादि चूर्ण दो माशा लेकर च्यवनप्राश या शहद के साथ चाटने को दें | उपर से द्राक्षारिष्ट दो तोला बराबर मात्रा में पानी मिलाकर दें |

उल्टी रोकने के लिए ताम्र सिन्दूर का उपयोग कैसे करें ?

जब वमन की उग्र अवस्था हो जाए यानि बहुत जोर से उल्टी आने लग जाए, कुछ भी खाते ही उल्टी हो जाती हो | ऐसे में ताम्र सिंदूर एक रत्ती, मयूरचंद्रिका भस्म दो रती और पीपल छाल की भस्म चार रत्ती शहद के साथ चाटने को दें | इससे शीघ्र लाभ होता है |

महिलाओं को रजो विकार (रजो अवरोध) में ताम्र सिन्दूर के फायदे :-

कभी कभी महिलाओं में रक्त दोष अन्य कारणों से रज रुक जाता है | जब माहवारी नहीं आती है तो पेट और छाती में भयंकर दर्द होने लगता है और स्त्री छटपटाने लगती है | ऐसी अवस्था में ताम्र सिन्दूर एक रत्ती को सोंठ और दालचीनी के चूर्ण के साथ सेवन करने से बहुत लाभ होता है | उपर से कुमार्यासव भी देना चाहिए |

अपस्मार/ मिर्गी में ताम्र सिंदूर के फायदे :-

तंत्रिका तंत्र और मानसिक विकार के कारण मिर्गी के दौरे आना अपस्मार जैसे रोग पकड़ लेते हैं | ऐसे में रोगी को दौरा आने पर बेहोश हो जाना, बडबडाना, मुंह में झाग आना जैसी समस्या होती है | इस समय रोगी को ताम्र सिन्दूर एक रत्ती, लौह भस्म आधा रत्ती शहद के साथ मिलाकर चटायें और मांस्यादि क्वाथ पिलायें |

नुकसान और सावधानियां / side effects and precautions

यह औषधि खनिज भस्मों से बनी होती है और बहुत अधिक उष्णता वाली है | अधिक समय तक इसका सेवन करने से दुष्प्रभाव हो सकता है | अतः चिकित्सक द्वारा बताए अनुसार ही इसका सेवन करना चाहिए | गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को इसका सेवन नहीं कराना चाहिए |

धन्यवाद !

यहाँ पर दी गयी जानकारी सिर्फ शैक्षणिक है | यह कोई चिकित्सकीय सलाह नहीं है | किसी भी दवा का सेवन करने से पहले चिकित्सक की सलाह जरुर लें |

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