पर्पटी क्या है, पर्पटी के गुण उपयोग एवं बनाने की विधि

आयुर्वेद औषधियों का खजाना है | प्रकृति से संचित जड़ी बूटियों और खनिज पदार्थों की सहायता से अलग अलग विधि से अनेकों औषधियां बनायी जाती है | रस रसायन, भस्म औषधियां, वटी गुटिका, घृत औषधियां1, गुग्गुलु, तेल, पर्पटी और अवलेह पाक आदि अनेकों प्रकार की औषधियां आयुर्वेद शास्त्रों में बताई गयी हैं जिनका उपयोग अलग अलग रोगों और अवस्थाओं में किया जाता है |

इस लेख में आप पर्पटी परिकल्पना के बारे में जानेंगे |

  • पर्पटी क्या है ?
  • आयुर्वेद में पर्पटी परिकल्पना की औषधियों का क्या महत्व है ?
  • पर्पटी कैसे बनाते हैं / निर्माण विधि ?
  • किन रोगों में पर्पटी प्रकरण की दवाओं का अधिक उपयोग किया जाता है ?
  • पर्पटी का सेवन करते समय क्या सावधानियां रखनी चाहिए ?
  • पर्पटी के गुण उपयोग एवं फायदे क्या हैं ?

जानें क्या है पर्पटी और आयुर्वेद में इसका क्या महत्व है / What is Parpati and its significance in ayurveda

आयुर्वेद में पर्पटी3 प्रकरण की दवाओं का विशेष महत्व है | आन्त्रिक विकार जैसे गृहणी, अतिसार2, पाचन विकार आदि में पर्पटी परिकल्पना से बनी औषधियों का उपयोग किया जाता है | जब आंतो के इन विकारों में अन्य किसी औषधि से लाभ नहीं हो रहा हो तो इन दवाओं का सेवन करने से आशातीत लाभ होते देखा गया है | परन्तु यह लाभ तभी संभव है जब औषधि पूरी तरह से शास्त्रोक्त विधि से एवं सावधानी पूर्वक बनायी गयी है |

बोल पर्पटी

पर्पटी का उपयोग विशेषतः उस अवस्था में किया जाता है जब रोग बहुत ही जटिल हो गया हो और अन्य किसी दवा से लाभ न हो रहा हो क्योंकि इस दवा का सेवन एक विशेष नियम से किया जाता है एवं खान पान पर पूरी तरह से नियन्त्रण रखना होता है | इसमें मुख्यतः पारद और गंधक की कज्जली का उपयोग प्रधान द्रव्य के रूप में किया जाता है |

पर्पटी निर्माण विधि / parpati preparation process

इस औषधि को बनाने के लिए गंधक और पारद को प्रधान द्रव्य के रूप में लिया जाता है | इसे बनाने के लिए निचे दी गयी विधि का उपयोग किया जाता है :-

  • गंधक और पारद को शुद्ध करके इनकी कज्जली बना ली जाती है |
  • इस कज्जली को लोहे के चम्मच पर घी लगा कर उसमें डाल लें |
  • इस चम्मच को आंच पर रख कर कज्जली को पिघला लें |
  • जब यह पिघल कर गाढ़ी हो जाए तो इसे उतार कर केले के पत्ते पर निकाल लें |
  • केले के पत्ते के बीच में दबा कर ठंडा कर लें |
  • इस तरह ठंडा होने पर इसकी पपड़ी बन जाती है |
  • यही पपड़ी पर्पटी कहलाती है |
पर्पटी

यह पर्पटी योग वाही होती है अतः जो भी द्रव्य इसमें मिलाए जायेंगे उनके गुण इसमें रहेंगे | इसी के आधार पर अलग द्रव्यों का उपयोग करके अनेकों पर्पटी बनायी जाती हैं |

पर्पटी के औषधीय गुण और विशेषताएं / Medicinal properties of parpati

मृदु पाक वाली पर्पटी (जो तोड़ने पर थोड़ा सा मुड़ कर टूटती है) सबसे उत्तम मानी जाती है | अगर यह खर यानि लाल वर्ण में बनी हो तो उपयोगी नहीं होती है | पर्पटी में निम्न गुण होते हैं :-

  • यह योगवाही गुणों वाली होती है |
  • उष्ण गुणों वाली होती है |
  • इसमें पारा और गंधक के गुण विद्यमान होते हैं |
  • यह आंतो के विकारों को दूर करने वाली होती है |
  • कीटाणु नाशक होती है |
  • इसमें पाचक गुण होते हैं |
कुटजा पर्पटी

पर्पटी प्रकरण की दवाओं के नाम / Names of parpati medicine

स्वर्ण, ताम्र एवं अन्य द्रव्यों का उपयोग करके अलग अलग प्रकार की पर्पटी तैयार की जाती है | यह निम्न हैं :-

  • रस पर्पटी
  • गगन पर्पटी
  • ताम्र पर्पटी
  • स्वर्ण पर्पटी
  • लौह पर्पटी
  • बोल पर्पटी
  • पंचामृत पर्पटी
  • विजय पर्पटी
  • मंडूर पर्पटी
  • मल्ल पर्पटी
  • प्राणदा पर्पटी

पर्पटी दवाओं के औषधीय उपयोग / uses of parpati medicines

यह औषधि विशेषतः आंतो के विकारों में उपयोग में ली जाती हैं | संग्रहणी जैसे जटिल रोग में जब अन्य किसी दवा से असर नहीं हो रहा हो तो पर्पटी परिकल्पना की दवाओं का उपयोग बहुत लाभकारी होता है | इसमें कृमिनाशक और ग्राही गुणों के कारण गृहणी, अतिसार, पाचक पित्त का अभाव, पाचन विकार, मन्दाग्नि और अर्श जैसे रोगों में इनका उपयोग बहुत हितकारी होता है |

श्वेत पर्पटी

यकृत विकार हो जाने पर पाचक रस बनना कम हो जाता है, पर्पटी यकृत के सभी विकारों को दूर करके पाचक रस उत्पन्न करने में मदद करती है | इसलिए आंतो और उदर के रोगों में इन औषधियों का उपयोग बेहद फायदेमंद रहता है |

पर्पटी दवाओं का सेवन कैसे करें / how to use parpati medicine

पारद, गंधक और अन्य विशेष द्रव्यों से बनी यह औषधियां बहुत गुणकारी है | लेकिन उष्ण वीर्य होने के कारण इनका उपयोग बहुत सावधानी पूर्वक करना चाहिए | इन दवाओं को सेवन करने की एक विशेष विधि होती है | आइये जानते हैं पर्पटी का सेवन कैसे किया जाए :-

  • प्रायः पर्पटी का सेवन एक से दो रत्ती प्रातः के समय करना चाहिए |
  • पहले दिन के रत्ती, दुसरे दिन दो, तीसरे दिन तीन ऐसे क्रमशः 10 रत्ती तक बढ़ाना चाहिए |
  • इसके बाद उसी क्रम में एक एक रत्ती कम करना होता है |
  • और अंत में कम करते करते बंद कर दें |
  • अगर आवश्यकता हो तो दुबारा यह क्रम दोहराएं |
  • ज्यादा जरूरी हो तो 2-3 रत्ती रोजाना सेवन करें |
  • इसका अनुपान दूध, छाछ, दही या शहद के साथ किया जा सकता है |

सावधानियां / ध्यान देने योग्य बातें :-

पर्पटी का सेवन करते समय तीखे मसाले, उष्ण तासीर वाले भोजन, फ़ास्ट फ़ूड, तेल में तली चीजें आदि का बिल्कुल भी सेवन करें | इसका सेवन करते समय जल का बहुत ही कम ही सेवन करें | छाछ या तक्र का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है | अगर बहुत अधिक प्यास लगे तो संतरा, अनार, निम्बू का जूस पिएं | कच्चे नारियल का पानी पीना भी बहुत फायदेमंद रहता है |

पर्पटी के दुष्प्रभाव / parpati side effects

पारद और गंधक के गुणों के कारण इन औषधियों का सेवन बहुत सावधानी पूर्वक करना चाहिए | गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को इस दवा का सेवन बहुत सावधानीपूर्वक करना चाहिए | जिस प्रसूता को योनी से दुर्गन्ध युक्त स्राव होता है और कमर में दर्द ज्यादा रहता है उसे पर्पटी का सेवन नहीं करना चाहिए |

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