स्वर्ण मालिनी वसंत (Swarn Malini Vasant) : जानें फायदे एवं उपयोग

स्वर्ण मालिनी वसंत एक ऐसा आयुर्वेदिक रसायन है जो स्त्री, पुरुष, बालक, वृद्ध, रोगी और सगर्भा स्त्री सभी के लिए समान रूप से लाभ देने वाला है | इस दवा का उपयोग किसी रोग या ज्वर के बाद आई कमजोरी के लिए अधिक किया जाता है | इसका सेवन करने से सभी धातुओं की वृद्धि होती है और शरीर की कांति पुनः लौट आती है |

इस लेख में हम स्वर्ण मालती वसंत के फायदे क्या हैं, इसे कैसे बनाते हैं एवं इसके घटक द्रव्यों के बारे में जानेंगे |

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स्वर्ण मालिनी वसंत क्या है, कैसे बनाते हैं, इसके फायदे एवं घटक / Swarn malini vasant ingredients, benefits and uses

आयुर्वेद में रस रसायन प्रकरण की औषधियों का बहुत महत्व है, स्वर्ण मालिनी वसंत भी इसी परिकल्पना की दवा है | इसमें स्वर्ण भस्म, प्रवाल पिष्टी, केशर, हिंगुल और मोती भस्म जैसे प्रभावी द्रव्य हैं जो बहुत गुणकारी और बलवर्धक माने जाते हैं | किसी भी कारण से आयी निर्बलता में स्वर्ण मालिनी वसंत का उपयोग कर सकते हैं | यह रक्त रसादि धातुओं को सबल कर शरीर में नयी उर्जा का संचार करती है |

यह दो प्रकार का होता है :-

  • स्वर्ण मालिनी वसंत (वृहत)
  • स्वर्ण मालिनी वसंत (लघु)

जानें स्वर्ण मालिनी वसंत के घटक द्रव्य / Swarn malini vasant ingredients

इस बलवर्धक रसायन में निम्न द्रव्यों का उपयोग किया जाता है :-

  • स्वर्ण भस्म
  • प्रवाल पिष्टी
  • शुद्ध हिंगुल
  • सफ़ेद मिर्च चूर्ण
  • कस्तुरी
  • केशर
  • गोरोचन
  • नागभस्म
  • बंग भस्म
  • अभ्रक भस्म
  • मोती पिष्टी
  • पीपल चूर्ण
  • खर्पर
  • निम्बू का रस

स्वर्ण मालिनी वसंत (लघु) में सिर्फ स्वर्ण भस्म, मोती पिष्टी, खर्पर, सफ़ेद मिर्च चूर्ण और शुद्ध हिंगुल का उपयोग होता है |

स्वर्ण मालिनी वसन्त कैसे बनाते हैं / बनाने की विधि

इस औषधि को बनाने के लिए सबसे पहले कस्तूरी केशर और गोरोचन को छोड़ कर अन्य सभी द्रव्यों को आपस में मिला लें | इस मिश्रण को गाय के मक्खन के साथ मर्दन करें | जब मखन की स्निग्धता दूर हो जाये तो निम्बू का रस डाल कर अच्छे से घोंट लें | अब कस्तूरी केशर और गोरोचन को पीस कर इस में मिला दें और किसी शीशी में सुरक्षित रख लें | इस तरह से Swarn malini vasant तैयार हो जाता है |

स्वर्ण मालिनी वसंत के उपयोग

स्वर्ण मालिनी वसंत का सेवन कैसे करें / How to use swarn malini vasant

इस औषधि का रोगानुसार सेवन इस प्रकार करें :-

  • कमजोरी/ निर्बलता में :- इसकी 150 मिलीग्राम मात्रा का सेवन दिन में दो बार गाय के दूध के साथ |
  • क्षय रोग में :- मक्खन और मिश्री के साथ सेवन करें |
  • हृदय रोग में :- अर्जुन के छाल के क्वाथ के साथ |
  • खांसी/ बुखार में :- पीपल के चूर्ण और शहद के साथ |

स्वर्ण मालिनी वसंत के फायदे एव उपयोग / Swarna malini vasant uses and benefits

यह बलवर्धक एवं धातुओं को पुष्ट करने वाला रसायन है | इसके सेवन से शरीर में आई निर्बलता और थकावट दूर हो जाती है | इसलिए इसका उपयोग क्षय, जीर्ण ज्वर, रक्त प्रदर, श्वेत प्रदर जैसी समस्याओं में करना बहुत फायदेमंद रहता है | वृद्धावस्था में आयी दुर्बलता में भी स्वर्ण मालिनी वसंत के उपयोग से लाभ होता है | यह स्फूर्ति और बल उत्पन्न करता है तथा हृदय और मस्तिष्क के लिए भी बहुत उपयोगी है | आइये जानते हैं इसके फायदे :-

स्वर्ण मालिनी वसंत के नुकसान

शारीरिक कमजोरी एवं दुर्बलता में स्वर्ण मालिनी वसंत के फायदे / Swarn malini uses in general weakness

किसी रोग या उम्र के कारण शरीर में आयी दुर्बलता में यह औषधि बहुत उपयोगी है | इसमें स्वर्ण, केशर,मोती, कस्तूरी एवं बंग भस्म जैसे द्रव्य हैं जो बल और धातुवर्धक हैं | निरंतर पथ्य अपथ्य के साथ दो माह सेवन करने से शरीर जोश और उर्जा से भर जाता है |

क्षय रोग में स्वर्ण मालिनी वसंत के फायदे क्या हैं / Swarna malini vasant benefits in tuberculosis

राजयक्षमा, टीबी या क्षय रोग होने पर शरीर बहुत दुर्बल हो जाता है | इस जीवाणु जनित रोग में में शरीर की प्रतिरक्षा शक्ति बहुत कम हो जाती है | इस अवस्था में शरीर में फिर से उर्जा और बल का संचार करने के लिए स्वर्ण मालिनी वसंत का उपयोग करना बहुत फायदेमंद रहता है | इस रोग में सितोपलादि चूर्ण और प्रवाल पिष्टी के साथ इस रसायन का सेवन करने से बहुत शीघ्र लाभ मिलता है |

स्त्रियों के लिए भी फायदेमंद है स्वर्णमालिनी वसंत / Swarna malini vasant benefits for female

महिलाओं में श्वेत प्रदर, मासिक धर्म में अनियमितता और प्रसुत रोगों के कारण आयी कमजोरी में यह रसायन बहुत लाभप्रद है | श्वेत प्रदर में इसका सेवन गिलोय सत्व और शहद के साथ करने से बहुत लाभ देखने को मिलता है | इसके साथ प्रदरान्तक लौह और प्रदरान्तक रस का सेवन करने से भी बहुत फायदा होता है |

पुरुषों के लिए स्वर्ण मालिनी वसंत के फायदे / Benefits of swarna malini vasant fo male

जिस तरह से प्रदर रोग के कारण स्त्रियों का शरीर जर्जर हो जाता है उसी तरह प्रमेह रोगों के कारण पुरुषों में बहुत कमजोरी आ जाती है | धात गिर जाने और नवीन धातुओं का निर्माण नहीं होने से शरीर कांतिहीन एवं निर्बल हो जाता है | जिससे भूख न लगना, वजन कम जो हो जाना, यौन कमजोरी जैसी अनेको समस्याएं हो जाती हैं |

ऐसी कमजोरी में स्वर्ण मालिनी वसंत के साथ कामसुधा योग, कामेश्वर मोदक या धात्री रसायन का सेवन करना बहुत उपयोगी होता है | इस रसायन से नवीन धातुओं का निर्माण होता है और शरीर में पुनः बल का संचार होता है | साथ ही यह मस्तिष्क और दिमाग को भी बल देता है जिससे रोगी जल्द स्वस्थ हो जाता है |

स्वर्ण मालिनी वसंत का यकृत विकारों में उपयोग / Swarn malini vasant uses for liver

यकृत विकार हो जाने से व्यक्ति की पाचन क्रिया गडबडा जाती है और भूख ना लगना, उल्टी दस्त या कब्ज जैसी समस्याएं भी हो जाती हैं | इस कारण से रोगी अत्यंत निर्बल और दुबला पतला हो जाता है | ऐसे में स्वर्ण मालिनी वसंत का उपयोग करना बहुत फायदेमंद होता है | इसका असर रस रस वाहिनी नाड़ी और यकृत पर होता है | यह यकृत और प्लीहा के दोष को दूर कर पाचन को दुरुस्त करता है |

स्वर्ण मालिनी वसंत के नुकसान / Side effects of swarn malini vasant

यह औषधि सौम्य प्रकृति की है | इसलिए इसका उपयोग बच्चे बूढ़े, स्त्री पुरुष यहाँ तक की गर्भवती महिलाएं भी कर सकती हैं | सामान्यतः इसके कोई साइड इफेक्ट्स देखने को नहीं मिलते | फिर भी चिकित्सक द्वारा बताये गये तरीके और सही मात्रा में ही इसका सेवन करना चाहिए |

धन्यवाद !

सन्दर्भ / reference

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