फिटकरी भस्म (Sphatika Bhasma) के फायदे एवं उपयोग |

फिटकरी से आप सभी परिचित हैं | सभी घरों में यह सुगमता से उपलब्ध हो जाती है | हमारे देश में उतर भारत में फिटकरी वाली मिटटी बहुतायत में पायी जाती हैं एवं यहाँ पर बहुत से फिटकरी बनाने वाले कारखाने हैं | यह दो प्रकार की होती है “लाल एवं सफ़ेद” | फिटकरी भस्म (Sphatika Bhasma) रक्त शोधक एवं नेत्रों के लिए गुणकारी औषधि है | यह सांप एवं बिच्छू के विष को दूर करने में भी सक्ष्म है |

फिटकरी भस्म
फिटकरी (Sphatika) भस्म

क्या आप जानते हैं ?

  • फिटकरी भस्म क्या है ? Fitkari Bhasma Kya hai ?
  • इसे कैसे बनाते हैं ? Sphatika Bhasma kaise bnate hain ?
  • फिटकरी भस्म त्वचा के लिए कितनी फायदेमंद है ? Sphatika Bhasma uses for Skin in Hindi
  • आँखों के लिए फिटकरी भस्म के फायदे क्या हैं ? Sphatika Bhasma Benefits for eyes in hindi
  • सांप एवं बिच्छू का जहर उतारने के लिए फिटकरी भस्म का उपयोग कैसे करें ?
  • प्लेग रोग में “लाल फिटकरी भस्म” का उपयोग करने से क्या फायदा होता है ?
  • फिटकरी भस्म का रोगानुसार सेवन एवं अनुपान कैसे करें ? fitkari Bhasma uses in hindi
  • इसके नुकसान क्या हैं ? Sphatika bhasma side effects

फिटकरी (Sphatika bhasma) क्या हैं एवं इसे कैसे बनाते हैं ?

उतर भारत में पायी जाने वाली खनिज मिटटी जिसे रोल कहते हैं से फिटकरी का निर्माण किया जाता है | फिटकरी के उपयोग से बनने वाली भस्म को फिटकरी भस्म या Sphatika Bhasma कहते हैं | इसे बनाने के लिए निम्न विधि का उपयोग किया जाता है :-

  • सबसे पहले फिटकरी को अच्छे से साफ किया जाता है |
  • अब इसके छोटे छोटे टुकड़े किये जाते हैं |
  • इन छोटे टुकड़ो को मिट्टी की हांडी में डाल कर उपर से बंद कर दें |
  • फिटकरी भस्म बनाने के लिए अब इसे गजपुट यन्त्र में रख कर आंच दें |
  • फिर इसे स्वांग शीतल होने पर निकाल लें |
  • इस तरह से मुलायम, श्वेत एवं स्वच्छ भस्म तैयार हो जाती है |
  • यह सफ़ेद रंग की फिटकरी भस्म होती है |

लाल फिटकरी भस्म बनाने की विधि / red Sphatika bhasma bnane ki vidhi :-

यह लाल रंग वाली फिटकरी से बनायी जाती है | आइये जानते हैं कैसे :-

  • लाल फिटकरी को घृत कुमारी के रस में खरल कर लें |
  • जब यह रस पूरी तरह सुख जाये तो इसे भांगरे के रस में एक दिन खरल करें |
  • अब इसकी टिकिया बना कर धूप में सुखा लें |
  • सूखने के बाद इसे सराब संम्पुट में रख कर आंच दें |
  • जब यह स्वांग शीतल हो जाये तो भस्म को निकाल लें |
  • इस तरह से लाल रंग की फिटकरी भस्म तैयार हो जाती है |

फिटकरी भस्म क गुण एव उपयोग / Sphatika bhasma uses in hindi

यह एक बहुत ही चमत्कारी दवा है | इसमें रक्त शोधक गुण होते हैं | इसके अलावा यह कफ़ निसारक एवं विषनाशक गुणों वाली भी होती है | फिटकरी भस्म नेत्रों एवं त्वचा के लिए भी अत्यंत गुणकारी औषधि का काम करती है | आइये जानते हैं Fitkari Bhasma (Sphatika Bhasma) का उपयोग किन किन रोगों में किया जाता है :-

  • रक्त शोधन के लिए |
  • प्लेग रोग में |
  • मलेरिया रोग की दवा के रूप में |
  • छाती में जमा कफ़ को निकालने के लिए |
  • रक्त प्रदर को रोकने के लिए |
  • निमोनिया एवं पुरानी खांसी के लिए |
  • राज्यक्षमा एवं कुक्कर खांसी में |
  • गर्भाशय से खून गिरने की समस्या में |

फिटकरी भस्म के फायदे क्या हैं / Sphatika (fitkari) Bhasma benefits in hindi

यह एक उपयोगी एवं गुणकारी भस्म है | इसका उपयोग से बहुत से घरेलु नुस्खों में भी किया जाता है | फिटकरी के रक्त शोधक गुणों से आप सभी परिचित हैं | इसके अलावा त्वचा रोगों एवं फोड़े फुंसियो में भी फिटकरी भस्म का उपयोग प्राचीन समय से ही किया जाता रहा है | इसके सेवन से रक्तवाहिनी संकुचित हो जाती हैं एवं यह बहते रक्त को भी रोकने के लिए फायदेमंद है | यह विषनाशक भी होती है | अब जानते हैं रोगानुसार Sphatika Bhasma के फायदे :-

रक्त शोधन के लिए फिटकरी (sphatika) भस्म के फायदे

फिटकरी में रक्त को शुद्ध करने वाले गुण होते हैं अतः इसकी भस्म एक उत्तम रक्त शोधक के रूप में उपयोग में ली जाती है | रक्त में दोष के कारण होने वाले त्वचा रोगों में इसका सेवन बहुत फायदेमंद होता है | यह रक्त वाहिनियों को संकुचित कर देती है अतः बहते हुए खून को रोकने के लिए बहुत उपयोगी है | अगर किसी घाव से खून बहता हो तो कच्ची फिटकरी को चूर्ण बना कर घाव पर बांध दे खून तुरंत बंद हो जायेगा | यह कीटाणुनाशक भी होती है |

कुक्कर खांसी में फिटकरी भस्म के फायदे एवं सेवन की विधि

यह अधिकांशतः छोटे बच्चो में पायी जाती है | इतनी जोर से खांसी उठती है की कई बार वमन (उल्टी) तक हो जाती है | इस खांसी को दूर करने के लिए फिटकरी भस्म एक रत्ती, प्रवाल पिष्टी आधी रत्ती एवं काकड़ासिंगी चूर्ण दो रत्ती को मिलाकर शहद के साथ सेवन कराएं |

फिटकरी (Sphatika) भस्म के विषनाशक के रूप में फायदे एवं उपयोग

यह भस्म विषनाशक भी होती है | सभी प्रकार के विष में इसका अच्छा प्रभाव देखने को मिलता है | आइये जानते हैं इसका कैसे उपयोग करें :-

  • अगर सांप काट ले तो उसे तुरंत एक माशे फिटकरी भस्म एवं 5 तोला घी का सेवन कराएं इससे कुछ समय के लिए विष शरीर में आगे नहीं फैलता है |
  • बिच्छु का विष दूर करने के लिए 1 Sphatika (Fitkari) Bhasma को 5 तोला पानी में मिलाकर बार बार काटे हुए स्थान पर लगायें |
  • शीशा (नाग) भस्म के ज्यादा सेवन से पेट में दर्द हो तो Fitkari Bhasma एक रत्ती, अफ़ीम 1/8 रत्ती एवं कपूर 1/4 रत्ती को पानी के साथ सेवन करें | इससे नाग भस्म का विष दूर हो जाता है |

प्लेग रोग में फिटकरी भस्म के फायदे / Fitkari bhasma Benefits in Plague

इस रोग में बुखार बहुत तेज हो जाता है एवं रोगी गर्मी से व्याकुल हो जाता है | ऐसे में Fitkari Bhasma 3 रत्ती को एक माशे मिश्री के साथ सेवन कराएं और रोगी को दवा देने के एक घंटे बाद तक पानी न पिने दें | इससे बहुत फायदा मिलता है |

त्वचा रोगों में Sphatika Bhasma के फायदे / Sphatika Bhasma uses for Skin in hindi

यह खून को साफ करने वाली भस्म है | इसका उपयोग फोड़े फुंसी जैसी समस्याओं में करने से फायदा होता है | किसी चोट से घाव हो जाने की स्थिति में Fitkari Bhasma का उपयोग करने से फायदा होता है | इस भस्म को घी में मिलाकर घाव पर लगाने से खून बहना बंद हो जाता है एवं घाव बिना पके भर जाता है |

आँखों के लिए बहुत गुणकारी औषधि है फिटकरी भस्म / Sphatika Bhasma Uses for eyes in hindi

नेत्रों के लिए फिटकरी बहुत उपयोग है | एक रत्ती Sphatika bhasma को गुलाब जल में मिलाकर इस लोशन को आँखों में लगाने से आँखों की सुर्खी एवं आँख आने की समस्या नष्ट हो जाती है | कभी कभी आँख में एक बाल उग आता है जिसे परबाल कहते हैं | इस रोग के लिए कच्ची फिटकरी को हांड़ी में आंच देकर पिघला लें एवं उसमें सोना गेरू का चूर्ण मिला कर अच्छे से घोंट लें | इसे खरल में घोंट कर अंजन जैसा हो जाने पर आँखों में डाल लें | इससे इस रोग में शीघ्र लाभ मिलता है |

मलेरिया में Sphatika (Fitkari) Bhasma के सेवन से क्या फायदे हैं ?

जब मलेरिया में बार बार बुखार आता हों एवं किसी दवा से ताप कम नहीं हो रहा हो तो लाल फिटकरी भस्म 4 रत्ती, शुद्ध संखिया सफेद 1/10 रत्ती को मधु के साथ बुखार आने से एक घंटा पहले देने पर 2-3 बार के बाद शीत ज्वर जरुर रुक जायेगा |

रक्त प्रदर एवं नकसीर में फिटकरी भस्म के फायदे

फिटकरी में ग्राही गुण होते हैं | इसके अलावा यह नाड़ियो को संकुचित करती है | इसलिए इसका उपयोग रक्तस्राव को रोकने में भी किया जाता है | स्त्रियों में रक्तप्रदर को रोकने के लिए इस भस्म के साथ मिश्री को मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है | गर्मी हो जाने पर नाक से खून बहने लगता है ऐसे में फिटकरी (Sphatika) भस्म को ससूंघने से तुरंत लाभ होता है |

ध्यान रखें :- यहाँ पर दी गयी जानकारी सिर्फ शैक्षिणक है | किसी भी औषधि का उपयोग करने से पहले चिकित्सक की उचित सलाह अवश्य ले लेवें |

Reference (संदर्भ) :-

Clinical Appraisal on Therapeutic Efficacy of Tankana & Sphatika Bhasma With Madhu Pratisarana In Tundikeri

PHARMACEUTICO -PRELIMINARY ANALYTICAL STUDY OF SPHATIKA SHODHANA BY TWO DIFFERENT METHODS

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