शुद्ध केसर की पहचान – जानें इसके स्वास्थ्य लाभ, फायदे और गुण धर्म |

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केसर

परिचय – केसर के इस्तेमाल से होने वाले स्वास्थ्य लाभों से प्राय सभी परिचित है | गुणों की द्रष्टि से देखा जाए तो केसर आयुवर्द्धक , बजिकारक , उतेजक , मेध्य आदि से भरपूर होती है | औषध द्रव्यों में केसर काफी महंगा द्रव्य है | भारतीय रसोई और आयुर्वेद चिकित्सा शास्त्र में केशर का अपना एक स्थान है | सौन्दर्य और सेहत के लिए केशर का इस्तेमाल प्राचीन समय से ही किया जाता है , लेकिन वर्तमान समय में जितनी उपयोगी केसर साबित हुई है शायद प्राचीन समय में इतनी उपयोगी न थी |

केसर के फायदे और गुण धर्म

कैसे करें केसर की पहचान 

आज कल बाजार में दुकान दार अधिक फायदा कमाने के लिए केसर में इसकी शुद्धता की पहचान करने के लिए निम्न बातों को अपनाएं

  1. असली केसर टूटने में थोड़ी कठिन होती है | अगर केसर को तोड़ने पर यह जल्दी टूट जाए तो समझ जाना चाहिए की केसर नकली हो सकती है |
  2. स्वाद में तिक्त होती है अर्थात कडवी होती है |
  3. बाजार में मिलने वाली केसर 70% नकली होती है | इसकी पहचान के लिए केसर को हाथ पर रख कर थोडा पानी डालें और मसले – शुद्ध केसर में अच्छी सुगंध और रंग दिखेगा |

केसर के बारे में कुछ रोचक तथ्य 

केसर के गुण और फायदे

केसर के फुल

इसके फायदे से आप सभी अब परिचित है, लेकिन केसर के बारे में कुछ तथ्य इतने रोचक है| जिन्हें जानना काफी दिलचस्प होगा |

केसर खाद्य पदार्थो में सबसे महंगा पदार्थ है | भारत में सामान्य रूप से मिलने वाला केसर 70% नकली होता है |

केसर भारत का देशज उत्पाद नहीं है यह मूल रूप से दक्षिणी यूरोप का देशज पौधा है जिसे बाद में भारत में उगाया जाने लगा |

भारत में केसर को पारसी समुदाय के लोग लेकर आये थे , लेकिन लम्बे समय तक वे इसे उगा नहीं सके |

भारत में जामु और कश्मीर के अलावा इसे दूसरी जगह उगाया नहीं जा सकता | क्योकि इसके लिए उपयुक्त जलवायु जम्मू और कश्मीर में ही मिलती है |

दुनिया में सबसे ज्यादा केसर ईरान में पैदा होती है एवं वहां की केसर भी उच्च कोटि की होती है |

केसर फुल से नहीं प्राप्त होता बल्कि केसर पौधे की कलि से प्राप्त होता है | तभी तो यह बर्फ़बारी और शीत हवाओं को सहन कर सकता है | लेकिन अगर कलि से बाहर निकलने के बाद बर्फ और वर्षा हो जाए तो पूरी फसल चोपट हो जाती है |

क्या आपने सुना है की किसी खाद्य पदार्थ को लेकर भी युद्ध हो सकता है ? बिलकुल, इतिहासकारों के अनुसार सन 1374 में स्विट्ज़रलैंड और आस्ट्रिया के बीच केसर को लेकर युद्ध हो चूका है | जिसे ‘Saffron War’ कहा जाता है |

पुराने समय में मिस्र के लोग केसर के तकिये बना कर सोते थे , उनका मानना था की इससे अच्छी नींद आती है |

ईरान देश में पुराने समय में केसर से कपडे भी बनाये जाते थे | ईरान में केसर को मिलकर कपडे बनाते थे |

 

वानस्पतिक परिचय

केसर मुख्यतया शीत प्रदेशो में पायी जाती है | इसका पौधा 6 से 10 इंच ऊँचा बहुवर्षायु क्षुप होता है | केसर के पौधे में कांड नहीं होता लेकिन इसका मूल कोषवृत्त कंदरूप होता है | इसके पत्र रेखाकार होते है तथा मुड़े हुए किनारों वाले होने से नालीदार हो जाते है | इसके पुष्प द्विकोष्ठीय होते है जो लम्बे और सुगन्धित होते है | इनका रंग बैंगनी होता है | पुष्प के कंठ भाग पर रोएँ होते है जिसे पुन्केषर कहते है | ये पुन्केशर नर केसर में पीतवृणी तथा स्त्री केसर में लाल रंग के होते है |

एक पुष्प से तीन केसर के तंतु प्राप्त होते है | केसर के लगाये गए कंद से 10 से 15 वर्षों तक पौधा उगता रहता है | हर वर्ष पुराने कंद से एक नया कंद निकलता है , जिसपर पुष्प शरद ऋतू में आते है | केसर का प्राप्ति स्थान फ्रांस , स्पेन , इटली , ग्रीस , तुर्की , भारत और चीन है | भारत में कश्मीर जिले के पंपुर क्षेत्र और जम्मू के किस्तवार क्षेत्र में इसकी खेती की जाती है |

केसर का रासायनिक संगठन

केशर में तीन प्रकार का रंजक द्रव्य पाया जाता है | एक प्रकार का उड़नशील तेल और 1.37% स्थिर तेल भी मिलता है | विटामिन ए , फोलिक एसिड , ताम्बा , पोतेसियम , कैल्शियम , मैगनीज , लोहा , सेलेनियम आदि तत्व भी मिलते है | केशर में 13% क्रोसिन नामक एक ग्लूको – साइड पाया जाता है इसके अलावा फास्फोरस भी कुछ मात्रा में मिलता है |

केसर के औषधीय गुण धर्म

केशर का रस कटु और तिक्त होता है | गुणों में यह स्निग्ध और लघु होती है | इसका वीर्य उष्ण होता है अर्थात इसकी तासीर गरम होती है एवं पचने पर विपाक कटु ही होता है | इन्ही गुणों के कारण यह वात एवं कफ शामक होती है | जीवनी शक्ति और बाजीकरण को बढ़ाने में भी केसर महत्वपूर्ण साबित होती है | केसर के कुच्छी भाग यानि केसर का इस्तेमाल ही औषध उपयोग और अन्य उपयोग में किया जाता है | केसर आमवात , पांडू , क्लैव्य , नाड़ी शूल और रक्त विकारों में उपयोगी होती है |

केशर के विशिष्ट योग – कुंकुमादी तैल, केशरादी वटी और रोमेंदु वटी आदि के निर्माण में केसर का पर्योग किया जाता है |

भिन्न भाषाओ में पर्याय

संस्कृत – कुंकुम , घ्रिसृंण, रक्त , काश्मीर , बाल्हिकी आदि

हिंदी – केसर , केशर |

मराठी केसर |

गुजराती – केसर |

बांग्ला – जाफरन, कुंकुम आदि |

अंग्रेजी – Saffron

लेटिन – Crocus Sativa , Cocrus Saffron .

जाने केसर के फायदे / स्वास्थ्य लाभ 

महिलाओं के लिए केसर के स्वास्थ्य उपयोग

केसर के इस्तेमाल से महिलाओं को काफी फायदे मिलते है | अनियमित मासिक धर्म , गर्भाशय की सुजन , मासिक चक्र के समय होने वाला दर्द आदि में अगर महिला केसर का प्रयोग करे तो जल्द ही इन उपद्रवों से निजात पा सकती है | गर्भवती महिलाओं को शुद्ध केसर मिला दूध पीना चाहिए | क्योकि केसर के इस्तेमाल से होने वाला बच्चा गौरा और स्वस्थ पैदा होगा | अगर आप नहीं जानते तो आपको बतादे की केसर एक उत्तम सौन्द्रिय वर्द्धक है | इसके इस्तेमाल से त्वचा का रंग सुधरता है और त्वचा हमेशां जवान बनी रहती है |

अनिद्रा रोग

अगर कोई व्यक्ति नींद न आने की वजह से परेशान है तो केसर इसका रामबाण उपाय है | अनिद्रा रोग में केसर का प्रयोग चमत्कारिक परिणाम देता है | रात्रि में सोने से पहले एक गिलास दूध में 2 या 3 केसर डालकर पीने से अनिद्रा रोग दूर होता है साथ ही अवसाद भी दूर होता है |

ज्वर होने पर केसर के उपयोग

केसर में ‘क्रोसिन’ नामक तत्व पाया जाता है जो मुख्यरूप से ज्वर के लिए ही एक औषधि होती है  | ज्वर होने पर एक गिलास दूध में केसर डालकर पीने से जल्द ही बुखार उतर जाती है |  इसके साथ – साथ यह तत्व स्मरण शक्ति को बढ़ाने और रिकाल क्षमता को बढाने में काफी फायदेमंद होता है |

बच्चों में होने वाली सर्दी में केसर के फायदे

बच्चो को अक्सर सर्दी और जुकाम की दिक्कत होती रहती है | अत सामान्य सर्दी और जुकाम में दवा न देकर केसर मिला दूध देने से बच्चो की जुकाम ठीक हो जाती है |  केसर में एंटीएजिंग और रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढाने वाले गुण मौजूद होते है , अत: इसके इस्तेमाल से बच्चो का स्वास्थ्य और क्षमता में इजाफा होता है |

गर्भावस्था रोग

गर्भावस्था में महिलाए अक्सर गैस और सूजन से परेशान रहती है | गर्भवती महिला कई बार अवसाद से भी ग्रषित रहती हैं | इस समय रोग एक गिलास दूध में केसर मिलाकर पीना गर्भवती महिलाओं को गैस , सुजन और अवसाद जैसे उपद्रवो से सुरक्षित रखती है | केसर का इस्तेमाल करने से गर्भवती महिलाओं में होने वाली पाचन सम्बन्धी परेशानी भी ठीक हो जाती है | जिन महिलाओं को गर्भावस्था में किसी सुगन्धित खाद्य पदार्थ से एलर्जी रहती हो वे चिकित्सक से परामर्श करके के केसर का इस्तेमाल कर सकती है |

उम्र बढ़ने को करती है धीमा

केसर में पाए जाने वाले एंटी एजिंग और एंटी ओक्सिडेंट गुण बुढ़ापे को देरी से आने देते है | नियमित तौर पर अगर केसर का इस्तेमाल किया जाए तो यह काफी हद तक बुढ़ापे को लक्षणों को रोके रखती है | त्वचा पर पड़ने वाली झुरियों , डार्क सर्किल और धब्बे आदि को केसर के इस्तेमाल से रोका जा सकता है | चेहरे को सुन्दर रखने के लिए दूध में केसर को भिगो कर इसकी मालिश करने से दाग – धब्बों , झाइयों , ब्लैक हैड, कील – मुंहासो से छुटकारा पाया जा सकता है | त्वचा पर केसर के फायदे बहुत जल्दी होते है |

दमा रोग

केशर दमे के रोग में भी काफी फायदेमंद औषधि है | इसके इस्तेमाल से दमे का अटैक नहीं पड़ता | नियमित तौर पर केसर का इस्तेमाल करने से यह दमे के रोगी के फेफड़ो  में होने वाली सुजन को कम करती है एवं स्वास नली में भी सुजन को खत्म करती है | दमे के रोगी को केसर का इस्तेमाल आवश्यक रूप से करना चाहिए |

 

 

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