घृत (Ghrita) क्या है, इसे कैसे बनाते हैं एवं गुण व फायदे ?

घृत क्या है

आयुर्वेद औषधियों में घृत प्रकरण की औषधियां बहुत ही सोम्य प्रकृति की एवं अमृत समान उपयोगी होती हैं | आयुर्वेद में आहार विहार का बहुत महत्व है, मह्रिषी कश्यप के अनुसार आहार (पथ्य भोजन) के समान कोई औषधि दुनिया में नहीं है अर्थात अगर आपका आहार सही है तो आपको किसी दवा की जरूरत ही नहीं होगी | एक और बार उन्हें बताया है की शरीर और रोग दोनों का निर्माण आहार से ही होता है यानि अगर आप पथ्य आहार लेंते हैं संतुलित भोजन करते हैं तो आपका शरीर हष्ट पुष्ट रहता है और वहीं अगर आप अपथ्य भोजन करते हैं तो आप रोग ग्रसित हो जाते हैं |

घृत क्या है
घृत क्या है

हमारी संस्कृति (भारतीय सभ्यता) में घी (घृत) का प्राचीन काल से ही बहुत महत्व रहा है | यह हमारे खान पान का अहम हिस्सा है | आयुर्वेद में अलग अलग जानवरों के दूध से अलग अलग 8 प्रकार के घृत (घी) का वर्णन किया गया है इसमें गाय के घी (गो घृत) को सबसे उत्तम बताया गया है | वहीं आचार्य चरक के अनुसार भेड़ के दूध से बना घृत स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है खासकर हृदय के लिए |

Post Contents

घृत क्या है एवं इसे कैसे तैयार करते हैं ?

घृत बनाने के लिए पहले घी को मूर्छित किया जाता है और इसके बाद इसमें दूध, जल, क्वाथ आदि योगानुसार डाल कर पकाया जाता है | इसे आप औषधीय घी भी कह सकते हैं | आयुर्वेद में अलग अलग रोगों की दवा के रूप में अलग अलग तरह के घृत का वर्णन है जैसे ब्राह्मी घृत, अर्जुन घृत, अशोक घृत, जात्यादी घृत एवं महात्रिफलादी घृत आदि |

गाय का घी अत्यंत स्निग्ध एवं पौष्टिक होता है | अगर इसे औषधियों द्वारा सिद्ध कर लिया जाये तो यह उत्तम पाचक, आंतो को साफ करने वाला, नेत्र ज्योति बढ़ाने वाला, हृदय के लिए लाभदायक एवं धातुओं को पुष्ट करने वाला हो जाता है | आइये जानते है औषधीय घृत कैसे बनाते हैं ?

  • सबसे पहले घी को मूर्छित किया जाता है |
  • इसके लिए इसे मन्दाग्नि पर पकाया जाता है |
  • घी के ऊपर आने वाली फेन को अलग कर दिया जाता है |
  • अब हरड, बहेड़ा, आंवला, हल्दी एवं नागरमोथा सभी की कुल ४ तोला की मात्रा लेलें |
  • इन सब को बिंजोरा निम्बू के रस में पीस कर कल्क बना लें |
  • इस कल्क को घी के बराबर जल डाल कर घी में डाल कर पका लें |
  • इस तरह से घी साफ़, आमदोष रहित एवं वीर्यवान हो जाता है |
  • अब इस घृत को योगानुसार अलग अलग औषधियों के साथ पका कर विभिन्न प्रकार के घृत तैयार किये जाते हैं |

विभिन्न औषधीय घृत एवं आयुर्वेदानुसार उनके गुण एवं फायदे

मूर्छित घी को विभिन्न औषधियों के कल्क के साथ पका कर अलग अलग घृत का निर्माण किया जाता है | जिनका उपयोग विभिन्न रोगों की दवा के रूप में किया जाता है | इस लेख में हम आपको ऐसे ही गुणकारी औषधीय घृत (घी) के बारे में बतायेंगे |

1. अर्जुन घृत के फायदे गुण एवं उपयोग :-

इस घृत में अर्जुन की छाल के कल्क का उपयोग होता है | यह हृदय के लिए गुणकारी औषधि है | आइये जानते हैं इसके फायदे :-

  • गरिष्ट भोजन करने से उदर में गैस बन जाती है |
  • इससे घबराहट होना, दिल की धड़कन तेज होना आदि समस्याएं हो जाती है |
  • ऐसे में अर्जुन घृत का सेवन बहुत लाभकारी होता है |
  • मिश्री के साथ इसका सेवन करने से अपच एवं गैस दूर हो जाती है |
  • यह निरंतर सेवन करने पर हृदय के सभी रोगों को ठीक करता है |
अर्जुन घृत
अर्जुन घृत

इसकी ३ से ६ माशे की मात्रा को मिश्री के साथ सेवन करके उपर से गो दुग्ध का सेवन करना चाहिए |

2. अशोक घृत के फायदे गुण एवं उपयोग :-

यह घृत स्त्रियों के लिए बहुत उत्तम औषधि है | इसमें निम्न द्रव्यों का कल्क उपयोग में लिया जाता है :-

  • अशोक छाल, जीरा, बकरी का दूध, भांगरे का रस
  • चावल का पानी, जीवनीय गण, चिरोंजी
  • फालसा, रसौत, मुलेठी
  • मुन्नका, शतावर, चौलाई की जड़
अशोक घृत
अशोक घृत

गुण एवं फायदे :-

  • स्त्रियों के लिए अमृत के समान लाभदायक है |
  • यह सभी प्रकार के प्रदर रोगों को नष्ट करता है |
  • भूख न लगना, कमर दर्द एवं सर दर्द में उपयोगी है |
  • यह प्रकुपित वायु एवं पित्त का शमन करता है |
  • यह पाचन को ठीक करता है |

3. अश्वगंधादि घृत के फायदे गुण एवं उपयोग

यह घृत सभी प्रकार के वात रोगों में गुणकारी है | संधि शूल (जोड़ो में दर्द), किसी भी अंग में आयी अशक्तता एवं अनिद्रा की समस्या इस घृत से दूर हो जाती है | इसे बनाने के लिए असगंध के कल्क का उपयोग होता है | इसके प्रमुख फायदे निम्न हैं :-

अश्वगंधादि घृत
अश्वगंधादि घृत
  • यह पौष्टिक एवं उत्तम वाजीकर है |
  • इसके सेवन से शरीर हष्ट पुष्ट एवं बलवान बनता है |
  • यह वात रोगों में बहुत कारगर है |
  • इससे जोड़ो में दर्द, कमर दर्द आदि में आराम मिलता है |

4. कल्याण घृत क्या है, इसके फायदे एवं उपयोग

दिमाग की कमजोरी या बौद्धिक परिश्रम करने वालों के लिए यह अमृत समान उपयोगी है | इसमें निम्न जड़ी बूटियां उपयोग में ली जाती हैं :-

  • इन्द्रायण, त्रिफला, देवदारु, रेणुका
  • एलुवा, शालपर्णी, तगर, अनंतमूल
  • हल्दी, दारुहल्दी, नीलकमल, फूलप्रियंगु
  • नीलकमल, इलायची, दंतिमुल, मंजीठ
  • अनार दाना, तालीसपत्र, बड़ी कंटेली, नागकेशर
  • चमेली के फल, वायविडंग, प्रश्न्प्रणि, कुष्ठ, चन्दन, पद्म्काष्ठ

कल्याण घृत के फायदे :-

  • यह दिमाग के लिए बहुत कारगर औषधि है |
  • उन्मांद, अपस्मार, दिमाग की कमजोरी, यादाश्त की कमी में इसका सेवन करना चाहिए |
  • बच्चों में तुतलाने की समस्या में भी यह फायदेमंद है |
  • गर्भपुष्टि के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है |
  • पागलपन, मिर्गी, हिस्टेरिया जैसे रोगों में बहुत फायदेमंद है |

5. कासिसादि घृत क्या है एवं इसके फायदे ?

यह घृत त्वचा रोगों में बहुत लाभकारी है | यह मलहम की तरह काम में लिया जाता है | इसमें निम्न द्रव्य होते हैं :-

  • कासीस, हल्दी, दारूहल्दी, नागरमोथा, अशुद्ध हरताल, अशुद्ध मैनशील
  • कबीला, अशुद्ध गंधक, वायविडंग, अशुद्ध गुग्गुल, काली मिर्च, कूठ, मोम, अशुद्ध तूतिया
  • सफ़ेद सरसों, रसौत, लाल चन्दन, सिंदूर, राल, इरिमेद की छाल
  • नीम पत्ती, करंज के बीज, अनंतमूल, बच, मंजीठ, मुलेठी, जटामांसी, सिरस की छाल

जाने फायदे :-

  • यह सभी प्रकार के चर्म रोगों में फायदेमंद है |
  • दाद, खुजली, विसर्प रोग, सिर के फोड़े आदि इसको लगाने से ठीक हो जाते हैं |
  • यह बहुत गुणकारी मलहम का काम करता है |

6. कामदेव घृत क्या है, इसके फायदे एवं उपयोग ?

यह एक उत्तम पौष्टिक एवं वाजीकर औषधि है | पुरुषों के लिए यह बहुत लाभकारी है | इसके सेवन से सभी तरह की यौन कमजोरियां दूर हो जाती हैं | इसके आलावा यह रक्तपित्त की कमी, कामला जैसे रोगों में भी गुणकारी है | आइये जानते हैं इसके घटक :-

  • असगंध, गोखरू, बलियारा, गिलोय, सरिबन, विदारीकन्द, सोंठ, शतावरी, पीपल की कोंपल
  • गंभारी के फुल, कमल गट्टा, उड़द, मेदा, महामेदा, जीवक, ऋषभक, काकोली, क्षीरकाकोली
  • ऋधी, कूठ, पद्माख, लाल चंदन, तेज पत्ता, छोटी पीपल, मुनक्का, कौंच बीज
  • नीलकमल, नागकेशर, अनंतमूल, कंधी

कामदेव घृत के फायदे :-

  • यह शुक्र विकारों को नष्ट कर देता है |
  • वाजीकर एवं पौष्टिक है |
  • वीर्य वाहिनी नाड़ियो में दुर्बलता के कारण हुयी नपुंसकता में बहुत लाभदायक है |
  • यह शुक्राणुओं की वृद्धि करता है एवं उनमें बीज शक्ति बढाता है |
  • शरीर में दुबलापन हो एवं कमजोरी होतो इसका सेवन करना चाहिए |

7. कुमारकल्याण घृत के गुण, उपयोग और फायदे

यह घृत बालकों के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है | इसके सेवन से बालकों में शोष के कारण आयी कमजोरी, दान्त आने के समय होने वाला दर्द, कुक्कुर खांसी आदि रोग नष्ट हो जाते हैं | यह रुचिकर एवं बलवर्धक औषधि है | इसके उपयोग से बच्चों में मेधा एवं कांति बढ़ती है | इसमें निम्न जड़ी बूटियों का कल्क उपयोग में लिया जाता है :-

  • शंखाहुली, बच, ब्राह्मी, कुठ, हरड़, बहेड़ा, आंवला, मुन्नका, मिश्री
  • सोंठ, जीवंती, बरियार, जीवक, कचूर, धमासा, बेल, अनार
  • तुलसी, सरबिन, नागरमोथा, पुष्करमूल, छोटी इलायची, छोटी पीपल
  • खस, गोखरू, अतीस, वायविडंग, आकनादिपाठा, गोखरू
  • देवदारु, मालती के फुल, महुवा के फुल, खजूर, मीठे बेर, वंशलोचन

8. चित्रकादि घृत क्या है एवं इसके फायदे

यह औषधीय घी अग्नि प्रदीपक, तिल्ली, उदर रोग एवं बवासीर को नष्ट करने वाला है | यह मन्दाग्नि दूर कर भूख बढाता है | इसमें चित्रक, धनियाँ, जीरा, अजवायन, पाठा, त्रिकुटा, अम्लवेत, बेलगिरी, अनारदाना, जवाखार, पिपलामुल और चव्य का कल्क उपयोग में लिया जाता है |

9. चैतस घृत के फायदे एवं उपयोग

यह घी अधिकतर मानसिक रोगों में उपयोगी है | इसका सेवन उन्माद रोग की प्रारंभिक अवस्था में करने से बहुत लाभ होता है | इसमें शालप्रणी, प्रश्नप्रणी, कन्टेली, गंभारी की छाल, गोखरू, रासना, एरंडमूल, खरेंटी, मुर्वा और शतावरी का कल्क उपयोग में लिया जाता है |

10. जात्यादी घृत के उपयोग एवं फायदे जानें :-

ज्यातादी घृत
ज्यातादी घृत

यह घृत फोड़ा फुंसी एवं नाड़ीव्रण रोगों में बहुत कारगर है | मकड़ी के घाव, अग्नि से जलने के घाव एवं किसी चोट के घाव को ठीक करने के लिए इसका उपयोग मलहम की तरह किया जाता है | यह चमेली के पत्ते, नीम के पत्ते, परवल के पत्ते, हल्दी, दारूहल्दी, कुठ, मंजीठ,मुलेठी, करंज, माँ, खस, अनंतमूल, तूतिया के कल्क से बनाया जाता है |

11. महात्रिफलादि घृत क्या है, इसके फायदे एवं उपयोग ?

यह आँखों के लिए बहुत गुणकारी औषधि है | आँख में दर्द होना, रतौंधी, तिमिर, कम दिखायीं देना जैसे रोग इसके सेवन से नष्ट हो जाते हैं | त्रिफला आँखों के लिए बहुत उपयोगी होता है | इस महात्रिफला घृत को बनाने के लिए निम्न औषधियों का उपयोग किया जाता है |

  • त्रिफला क्वाथ, भांगरे का रस, बांसे का रस, शतावरी रस
  • बकरी का दूध, आमला रस, गिलोय रस

12. दूर्वादि घृत क्या है एवं इसके फायदे ?

इसमें दूब का उपयोग कल्क में होता है इसलिए इसे दूर्वादि घृत कहते हैं | यह रक्त विकारों में बहुत उपयोगी है | मुख से, नाक से, गुदा से, योनी से एवं लिंग से रक्त आने पर इसका उपयोग किया जाता है | इसका उपयोग उत्तर बस्ती, अनुवासन बस्ती एवं नस्य आदि के लिए किया जाता है | शरीर में जलन, गला सुखना, दाह, बार बार प्यास लगना आदि समस्याओं में इसका सेवन करने से बहुत लाभ होता है | आइये जानते हैं इसके घटक :-

  • दूब, अनार के फुल, मंजीठ, कमल, केशर, गुलर के फुल, खस
  • नागरमोथा, पद्माख, अडूसा के फुल, गेरू, बकरी का दूध, नागकेशर, पेठे का रस

13. पंचगव्य घृत क्या है, जानें इसके फायदे एवं उपयोग ?

यह पंचगव्य (गाय का दूध, गोबर का रस, गो मूत्र, दही, एवं घी) से बनाया जाता है | पंचगव्य में मौजूद विशिष्ट औषधीय गुणों के कारण इनका उपयोग अनेक आयुर्वेदिक औषधियों में किया जाता है | यह घी मुख्यतः उन्माद, अपस्मार, क्षय, पेट दर्द एवं हाथ पांव में आयी सूजन को कम करने के लिए उपयोग में लिया जाता है | इसके अलावा धातु क्षीणता में भी इसका उपयोग फायदेमंद रहता है | आइये जानते हैं इसके घटक द्रव्य :-

  • पंचगव्य, दशमूल, त्रिफला, त्रिकुटा, मुर्वा, भारंगी, गजपीपल, छतिबन
  • अपामार्ग, अमलतास, कठगुलर, चित्रक, निशोथ, पाठा, दारुहल्दी
  • पुष्करमूल, कुटकी, यवासा, दंतीमूल, बच, नील का पंचांग, वायविडंग

14. पंचतिक्त घृत के गुण एवं फायदे

इस घी का उपयोग करने से सभी प्रकार के कुष्ठ एवं वात- पित्त रोग नष्ट हो जाते हैं | रक्त एवं चर्म दोष में यह बहुत गुणकारी है | इसमें निम्न जड़ी बूटियां उपयोग में ली जाती हैं :-

  • नीम की छाल, पटोलपत्र, कटेरी पंचांग, वासा पंचांग, गिलोय, त्रिफला चूर्ण

15. बलादि घृत क्या है एवं इसके फायदे क्या हैं ?

यह पौष्टिक और बलवर्धक औषधीय घी है | इसका सेवन हृदय के लिए बहुत गुणकारी होता है | खांसी एवं रक्त पित्त में इसका उपयोग करने से शीघ्र लाभ होता है | इसके घटक द्रव्य :-

  • बला की जड़, नागबला की मूल, अर्जुन छाल, मुलेठी

16. ब्राह्मी घृत के फायदे एवं उपयोग क्या हैं ?

यह घी मस्तिष्क के लिए बहुत उत्तम है | मस्तिष्क के विकारों जैसे उन्माद, दिमाग की कमजोरी, अपस्मार, तुतलाना, मिर्गी आदि रोगों में बहुत फायदेमंद है | इसके सेवन से यादाश्त बढती है | साथ ही यह स्वर सुधारक भी है | इसका लगातार सेवन करने से वाणी में मधुरता आ जाती है | अगर नियमपूर्वक एक माह तक इसका सेवन कराया जाये तो स्मरण शक्ति बहुत बढ़ जाती है | आइये जानते हैं इसके घटक :-

  • ब्राह्मी(मूल एव पत्र सहित), बच, कुठ, शंखपुष्पी

17. महातिक्त घृत क्या है, जाने फायदे ?

यह तिक्त घृत अनेकों रोगों का नाश करने वाला है | त्वचा एवं रक्त विकारों के लिए यह बहुत ही उत्तम औषधि है | फोड़े फुंसी, रक्त पित्त, शरीर पर लाल चकते हो जाना, दाह रोग, खाज खुजली आदि रोग इसके सेवन से नष्ट हो जाते हैं | इसमें निम्न घटक द्रव्य उपयोग में लिए जाते हैं :-

  • सतौने की छाल, अतीस, अमलतास, कुटकी, पाठा, नागरमोथा, खस, हर्रे, बहेड़ा, आंवला
  • पटोल की पत्ती, नीम की छाल, पित्त पापड़ा, धमासा, लाल चंदन, छोटी पीपल, पद्माख
  • हल्दी, दारू हल्दी, बच, इन्द्रायण, शतावर, अनंतमूल, वासा, कूड़ा की छाल, जवासा
  • मुर्वा, गिलोय, चिरायता, मुलेठी, त्रायमाणा

18. महाचैतस घृत के फायदे एवं उपयोग

यह मस्तिष्क के लिए बहुत गुणकारी घी है | इसके सेवन से उन्माद एव अपस्मार जैसे रोग नष्ट हो जाते हैं | यह शुक्राषय एवं गर्भाषय को सबल बनाने वाली औषधि है | इसके सेवन से श्वास एवं कास रोगों में भी बहुत फायदा होता है | इसमें निम्न जड़ी बूटियां उपयोग में ली जाती हैं :-

  • सन के बीज, निशोथ, एरंड मूल, दशमूल, शतावर, रास्ना, पीपल, सहजन की छाल, विदारीकन्द
  • मुलेठी, मेदा, महामेदा, काकोली, मिश्री, खजूर, मुन्नका, इन्द्रायण मूल, त्रिफला, गोखरू, तालीस पत्र
  • छोटी इलायची, मंजीठ, दंतिमुल, अनारदाना, केशर, चमेली के फुल, वायविडंग

19. शतावरी घृत क्या है, इसके गुण एवं फायदे ?

यह घी शीतवीर्य, वाजीकर एवं पौष्टिक औषधि है | यह पुरुषों के प्रमेह रोगों में गुणकारी है | इसके सेवन से शीघ्रपतन जैसी समस्या में बहुत फायदा होता है | इसके उपयोग से रक्तपित्त रोग नष्ट हो जाते हैं | यह शरीर में बल, वीर्य, कांति की वृद्धि कर शरीर को हष्ट पुष्ट बनाता है | इसके घटक :-

शतावरी घृत
शतावरी घृत
  • शतावरी रस या क्वाथ, गो दुग्ध, जीवक, ऋषभक, मेदा, महामेदा, काकोली
  • क्षीर काकोली, मुन्नका, मुलेठी, माषपर्णी, विदारीकंद एवं लाल चन्दन

20. पुराना घृत क्या है एवं इसके फायदे

जैसा नाम से पता लग रहा है यह पुराना घी होता है | गाय के शुद्ध घी को चीनी मिटटी या कांच के बर्तन में भरकर ढककर 5 वर्ष बाद उसका उपयोग किया जाता है | यह उत्तम पौष्टिक एवं मेधावर्धक होता है | इसकी मालिश करने से छाती में जमा कफ बड़ी आसानी से निकल जाता है | इसके अलावा यह उन्माद अपस्मार जैसे रोगों में भी बहुत फायदेमंद है |

पुराना घृत
पुराना घृत

Reference :-

१. A comparative study on chronic administration of Go Ghrita (cow ghee) and Avika Ghrita (ewe ghee) in albino rats

२. Studies on Ashwagandha Ghrita with reference to murcchana process and storage conditions

३. CLINICAL TRIAL OF PHALAGHRITA ON FEMALE INFERTILITY

४. Beneficial effect of Brahmi Ghrita on learning and memory in normal rat

धन्यवाद

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Open chat
Hello
Can We Help You