गुग्गुल का औषधीय पौधा (Guggul in Hindi)

गुग्गुल को गुग्गुलु, कौशिक, गुगल आदि नामों से भी जाना जाता है | आज इस आर्टिकल में हम आपको गुग्गुल का पौधा के औषधीय गुण धर्म गुग्गुल के लाभ, फायदे एवं चिकित्सकीय उपयोग के बारे में बताएँगे |

हमारे भारतवर्ष में वैदिक काल से गुग्गुल के औषधीय एवं अन्य उपयोगो का ज्ञान रहा है | यह बहुत ही विश्वनीय आयुर्वेदिक वनस्पति है जिसका उपयोग आयुर्वेद चिकित्सा में बढ़ – चढ़ कर किया जाता है |

गुग्गुल

उपयोग की द्रष्टि से देखें तो यह सभी प्रकार के वातरोगों, दर्द, सुजन, मोटापा घटाने वाला, प्रमेह, पत्थरी, आमवात और गण्डमाला जैसे रोगों में प्रयोग होने वाला आयुर्वेदिक वनस्पति है | आयुर्वेद चिकित्सा में इसके गोंद का अधिकतर प्रयोग होता है |

तो चलिए अब जानते है | गुग्गुल का पौधा के वानस्पतिक परिचय के बारे में

गुग्गुल के पौधे का वानस्पतिक परिचय / Guggul ke Poudhe ka Prichay

गुग्गुल का पौधा

हमारे भारत में यह राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, आसाम, बंगाल आदि राज्यों के शुष्क पहाड़ी क्षेत्रों में पाया जाता है | गुग्गुल के दिव्य औषधीय वनस्पति है | अत: अब इसकी खेती भी की जाने लगी है |

लेकिन प्राकृतिक रूप से पहाड़ों पर पाया जाने वाला गुग्गुल अधिक उपयोगी साबित होता है | वैसे आयुर्वेद में इसकी कई प्रजातियाँ बताई गई है | भावप्रकाश निघंटु में वर्ण भेद से 5 प्रजातियाँ बताई गई है |

व्यवहार में तीन प्रकार के गुग्गुल ही देखने को मिलते है –

  1. कण गुग्गुल
  2. भैंसा गुग्गुल
  3. सलई गुग्गुल

इन सब में राजस्थान में पाया जाने वाला कण गुग्गुल उत्तम किस्म का होता है एवं औषधीय उपयोग में मनुष्य के लिए हितकर होता है |

गुग्गुल का पौधा – इसका पौधा पहाड़ों पर प्राकृतिक रूप से पाया जाता है | पौधा झाड़ीनुमा भूरे रंग का होता है | पते बिलकुल छोटे एवं गोलाकार होते है | पौधे पर हरितलाल रंग के फल लगते है | तने पर एक सफेद रंग की त्वचा हमेंशा निकलती हुई दिखाई देती है |

इस पौधे के तने पर घाव करने पर एक प्रकार का निर्यास निकलता है जो बाद में गोंद के रूप में परिवर्तित हो जाता है |

पौधे में एक विशेषप्रकार की सुगंध आती है | आदिवासी लोगों द्वारा इन पौधों पर घाव करके निर्यास को इक्कठा किया जाता है जो असल में गुग्गुल होता है |

गर्मी ऋतू में सूर्य की किरणों से इसका निर्यास पिघलकर अधिक निकलता है अत: गुग्गुल का संग्रह काल ग्रीष्म ऋतू में माना गया है | यह निर्यास सुखकर सुर्खलाल रंग का हो जाता है जो गुग्गुल कहलाता है |

चलिए अब जानते है गुग्गुल के औषधीय गुण – धर्म

गुग्गुल के औषधीय गुण धर्म / Guggul Medicinal Properties

रस – तिक्त और कटु

गुण – लघु, रुक्ष, तीक्ष्ण, विसद, सूक्ष्म, सर, सुगन्धित एवं स्निग्ध – पिच्छल

वीर्य – उष्ण

विपाक – कटु

दोषकर्म – त्रिदोषहर, वातशामक, कफ शामक |

धातुकर्म – वृष्य, रसायन एवं बल्य |

गुग्गुल के स्वास्थ्य लाभ / Health Benefits of Guggulu

सुजन, घाव, अपच, मोटापा, प्रमेह, बवासीर, गण्डमाला जैसे रोगों में गुग्गुल का प्रयोग आयुर्वेद चिकित्सा में औषध योग स्वरुप पुराने समय से ही किया जाता रहा है | यहाँ हम गुग्गुल के लाभ के बारे में आपको संक्षिप्त रूप में बता रहें है |

घाव में गुग्गुल के लाभ

गुग्गुल मेदोधातु एवं दोषपचनार्थ उपयोगी होता है | हरीतकी, गिलोय, पुनर्नवा जैसे औषध द्रव्यों के साथ गुग्गुल का प्रयोग करवाने से घाव ठीक होता है एवं साथ ही पेट के रोग भी दूर होते है | यह त्वचा में स्थित दोषों को ठीक करके क्लेद का पाचन करता है अत: गुग्गुलु औषधि विशेषत: प्रमेह घावों में विशेष उपयोगी साबित होती है |

गण्डमाला में गुग्गुल के लाभ

गण्डमाला की समस्या में गुग्गुल को कांचनार के साथ विशेषकर उपयोग में लिया जाता है | कांचनार गुग्गुलु आयुर्वेदिक औषधि का प्रयोग आयुर्वेदिक चिकित्सक गण्डमाला रोग में प्रमुखता से करते है | साथ ही गुग्गुल का प्रभावित स्थान पर लेप करने से भी अत्यंत लाभ मिलता है |

आमवात में गुग्गुल के फायदे

गुग्गुल उष्ण प्रकृति का औषध द्रव्य है | अत: यह अपने उष्ण वीर्य गुण से आम का पाचन करता है | आम पाचन होने से आमवात में आराम मिलता है | साथ ही जोड़ो के दर्द एवं सुजन में भी इसके विशेष प्रभाव पड़ते है | वायु का नाश करने के कारन वातरक्त में भी उपयोगी है |

अर्श रोग

अर्श में अग्निमंध्य एवं अजीर्ण होकर अमाशय, गृहणी एवं पक्वाशय में विकृति उत्पन्न होकर विबंध हो जाता है | जिसमे गुग्गुलु का प्रयोग शैथिल्य दूर करके अग्निको प्रदीप्त करती है | कब्ज खत्म होती है एवं गुग्गुल का गुदा में लेप करने से सुजन भी दूर होती है |

गुग्गुल का आमयिक प्रयोग / Guggul common uses

  • सुजन में गोमूत्र के साथ गुग्गुलु का सेवन करवाया जाता है | यह प्रयोग सुजन दूर करता है |
  • गुग्गुल की धुप सुगन्धित होती है |
  • गुग्गुल का नियमित सेवन करने से अम्लपित रोग दूर होता है |
  • सुजन, गंभीर घाव एवं वेदना में गूगल का घी के साथ सेवन करवाने से लाभ मिलता है |
  • त्रिफला क्वाथ के साथ गुग्गुलु का प्रयोग करने से भगंदर रोग में लाभ मिलता है |
  • साईटिका में रासना एवं गुग्गुल का मोदक बना कर सेवन करवाने से लाभ मिलता है |

गुग्गुल से बनने वाली विशिष्ट आयुर्वेदिक दवाएं / Ayurvedic Medicine Made From Guggul

  1. महायोगराज गुग्गुलु
  2. कैशोर गुग्गुल
  3. त्रिफला गुग्गुल
  4. कांचनार गुग्गुल
  5. गोक्षुरादी गुग्गुल
  6. आरोग्यवर्धिनी वटी
  7. चन्द्रप्रभा वटी
  8. योगराज गुग्गुलु

गुग्गुल सेवन विधि एवं मात्रा / Doses

औषध उपयोग में गुग्गुल का पौधा गुग्गुल के निर्यास का ही प्रयोग किया जाता है | बाजार में मिलने वाला गुग्गुल के प्रकार का गोंद है जो गुग्गुल के पौधे से प्राप्त किया जाता है |

अत: सेवन के लिए इस गोंद का ही प्रयोग करना चाहिए | सेवन की मात्रा चूर्ण रूप में 1 से 2 ग्राम तक की जा सकती है | अनुपान के रूप में अलग – अलग रोगों में अलग – अलग अनुपान का प्रयोग किया जाता है जैसे त्रिफला क्वाथ, रासना क्वाथ, गिलोय आदि |

गुग्गुल सेवन के परहेज

इसका सेवन करते समय अम्लीय पदार्थ, तीक्ष्ण भोजन, विदाही आहार, शराब, मांस – मछली, मैथुन क्रोध आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए | साथ ही व्यायाम, क्रोध, बिना पचे ही भोजन आदि से भी बचना चाहिए |

गुग्गुल का शोधन कैसे होता है ?

इसका शोधन करने के लिए गाय के दूध में गुग्गुल निर्यास को डालकर स्वेदन करवाया जाता है जिससे गुग्गुल का शोधन हो जाता है | शोधित गुग्गुल को ही औषध उपयोग में लिया जाता है |

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