प्रवाल (मूंगा) क्या है ? – प्रवाल पिष्टी के स्वास्थ्य लाभ

प्रवाल (मूंगा) / Corallum Rubrum

आयुर्वेद में इसे जान्तव द्रव्यों में स्थान दिया गया है | वस्तुत: प्रवाल एक सामुद्रिक शैल ( चट्टान ) है जो एक विशेष समुद्री जीवो द्वारा छोड़े गए कैल्शियम कार्बोनेट से निर्माण होता है | ये समुद्री जीव मधुमखियो की तरह एक जगह बैठते है और एक लाल रंग की चट्टान के निर्माण करते है जो तीन भागो में विभक्त होती है – मूल , शाखा और मूंगा रत्न वाला भाग 

praval pishti
प्रवाल शैल 

प्रवाल में कैल्शियम और मैग्नेशियम मौजूद होता है जो इसे औषध उपयोगी बनाता है , प्रवाल रस में मधुर और अम्ल , इसके गुण – लघु और रुक्ष , प्रवाल का वीर्य – शीत और विपाक – मधुर होता है | यह पित्त और कफ शामक,  दाहनाशक, रक्त-पित्त , रक्त प्रदर , अम्लपित, त्रिदोष शामक दीपन , पाचन , स्वेदहर और ज्वरहर होता है | आयुर्वेद में इसका उपयोग भस्म या पिष्टी के रूप में किया जाता है | 

प्रवाल पिष्टी के स्वास्थ्य लाभ / Health Benefits of Praval Pishti

प्रवाल पिष्टी कैल्शियम का  अच्छा स्रोत है अत: यह महिलाओ और बच्चो के लिए अच्छी औषधि है | बढ़ते बच्चो, रजोनिवृत महिलाओ को अधिक कैल्शियम की आवश्यकता पड़ती है इसके लिए प्रवाल पिष्टी का इस्तेमाल किया जा सकता है क्योकि यह रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढाती है और शरीर बिना किसी रूकावट के अवशोषित हो जाती है |

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इसके आलावा प्रवाल पिष्टी का इस्तेमाल सामान्य कमजोरी, ज्वर , मानसिक तनाव , अधिक कफ की स्थति में , हृदय की धड़कन बढ़ने पर , रक्तप्रदर, रक्तपित्त , अम्लपित आदि रोगों में इसका इस्तेमाल किया जाता है | अधिक समय तक बुखार रहने के बाद शरीर में आई कमजोरी को दूर करने के लिए प्रवाल पिष्टी एक अच्छा विकल्प है | प्रवाल पिष्टी का इस्तेमाल अन्य आयुर्वेदिक औषधियों के साथ किया जाता है | अगर अकेली प्रवाल पिष्टी लेनी पड़े तो शहद के साथ लेनी चाहिए |

प्रवाल पिष्टी की मात्रा और सेवन विधि 

इसकी मात्रा 125 से 250 mg अर्थात 1 से 2 रति तक ले सकते है | प्रवाल पिष्टी का सेवन शहद के साथ मिलकर करे या आप अनार के रस या गुलकंद के साथ भी इसे ले सकते है |

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