अफीम (Afim) के फायदे, गुण एवं नुकसान |

मादक गुणों वाला यह पौधा आयुर्वेद में अपने अनगिनत औषधिय गुणों के लिए जाना जाता है | अफीम (Opium) मुख्यतः राजस्थान, उतरप्रदेश, बिहार एवं बंगाल में होता है | सामान्यतः आप सभी अफीम के बारे में यही जानते होंगे की इसका उपयोग नशे के लिए किया जाता है | आज हम आपको अफीम के फायदे बतायेंगे जिन्हें जानकर आप हैरान हो जायेंगे | इस लेख के माध्यम से हम इन बातों को जानेंगे:-

  • अफीम क्या है ? यह कैसा होता है ?
  • इसका का कोनसा भाग (प्र्योज्यांग) उपयोग में आता है ?
  • ओपियम (अफीम) का बोटैनिकल नाम एवं अन्य भाषा में नाम क्या हैं ?
  • आयुर्वेद में अफीम का क्या उपयोग है ?
  • अफीम के क्या क्या फायदे या उपयोग हैं ?
  • अफीम का उपयोग किन किन दवाओं में किया जाता है ?
  • बवासीर में अफीम कितना फायदेमंद होता हैं ?
  • क्या शीघ्रपतन में अफीम फायदेमंद होता है ?
  • अतिसार में अफीम का क्या उपयोग है ?
  • गर्भावस्था में रक्तस्राव (गर्भपात ) रोकने के लिए अफीम के फायदे क्या हैं ?
  • अहिफेनासव क्या है ? इसमें अफीम का क्या उपयोग है ?
  • अफीम खाने के दुष्प्रभाव क्या हैं ?

जाने बार बार गर्भपात का रामबाण इलाज !

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आइये जानते हैं:- अफीम क्या हैं एवं इसके फायदे (अफीम के फायदे) क्या हैं ?

अफीम का नाम सुनते ही आपके दिमाग में आता होगा की यह तो नशा है | और इसमें कोई दोराय भी नही है | क्योंकि नशे के लिए अफीम का उपयोग बहुत अधिक किया जाता है | आमजन इस बात से परिचित ही नही है की जिसका उपयोग हम सिर्फ नशे के लिए कर रहें है उसमे आयुर्वेदिक औषधिय गुणों का खजाना है | आज हम यहाँ पर अफीम के बारे में पूरी जानकारी देंगे |

अफीम (ओपियम) क्या है ? यह कैसा होता है ?

यह उत्तर भारत में पाया जाने वाला 3 से 4 फीट ऊँचा पौधा है | स्थानीय भाषा में इसे आफू या अमल भी कहते है | इसके फुल बड़े एवं सफ़ेद या बैंगनी रंग के होते हैं | इसके फल किसी छोटे अनार के समान होते हैं | फल के छिलके को पोस्त कहते हैं जिसका उपयोग नशे के लिए भी किया जाता है | इसके बीज सफ़ेद या क्रष्ण मधुर स्निग्ध होते हैं | अफीम के फलनिर्यास एव बीजो का उपयोग विभिन्न आयुर्वेदिक दवाओं एवं उपचार के लिए किया जाता है |

ओपियम (अफीम) का कोनसा भाग काम में लिया जाता है ?

इसके बीज एवं फल निर्यास का उपयोग होता है |यहाँ फल निर्यास मतलब इसके फल से निकाला गये दूध से है | अफीम के कच्चे फल के चारों ओर सांयकाल एक चीरा लगाया जाता है | जिससे सुबह तक इस पर दूध जमा हो जाता है | इस जमे हुए दूध को इक्कठा कर लिया जाता है | फल निर्यास एवं बीज का उपयोग करके बहुत सी दवाओं का निर्माण किया जाता है |

अफीम का फूल
अफीम फल निर्यास

ओपियम (अफीम) का बोटैनिकल नाम एवं अन्य भाषाओं में नाम क्या है ?

यह Papaveraceae कुल की वनस्पति है | संस्कृत एवं अन्य भाषाओं में इसे भिन्न नामो से जाना जाता है | आइये जानते है इसके नाम क्या क्या हैं ?

  • बोटैनिकल नाम (वानस्पतिक नाम) :- Papaver somniferum (पपवेर सोम्निफेरुम)
  • अफीम का स्थानीय नाम :- आफु, अमल
  • संस्कृत नाम :- तिलमेद, खाखस, आफुक, अहीफेनक, खसतिल
  • अग्रेजी (इंग्लिश नाम ) नाम :- ओपियम (Opium)

आयुर्वेद में अफीम का क्या उपयोग है एवं इसके गुण क्या हैं ?

मादकता वाले गुणों के लिए जाना जाने वाला यह पौधा आयुर्वेद में अपने विशिष्ट गुणों के कारण बहुत उपयोगी है | इसका उपयोग विभिन्न दवाओं के निर्माण में किया जाता है | रक्तस्राव रोकने, अनिद्रा, मधुमेह एवं शीघ्रपतन जैसे रोगों में इसका उपयोग किया जाता है | आइये जानते हैं इसके गुणों के बारे में :-

  • रस :- तिक्त एवं कषाय होता है |
  • गुण :- लघु, रुक्ष, सूक्ष्म, व्यवायी एवं विकासी |
  • वीर्य :- उष्ण होता है |
  • विपाक :- कटु |
  • प्रभाव :- मादक |
  • त्रिदोष प्रभाव :- कफ शामक, वात शामक एवं पित्त प्रकोपक |

क्या आप जानते हैं, अफीम के फायदे एवं उपयोग क्या हैं ?

यह उष्ण वीर्य, मादक प्रभाव एवं कफवात शामक होता है | इसका उपयोग बहुत सारे रोगों को ठीक करने के लिए किया जाता है | आइये जानते हैं किन रोगों में इसका उपयोग लाभदायक होता है :-

  • अर्श नाशक होता है | अफीम का उपयोग बवासीर की दवा बनाने में किया जाता है |
  • रक्त स्राव रोकता है |
  • दर्द नाशक होता है | इसके उपयोग से कमर दर्द, पेट दर्द एवं अन्य दर्द में लाभ होता है |
  • चिंता एवं तनाव कम करने में बहुत लाभ देता है |
  • मधुमेह नाशक होता है |
  • डर लगना, उदासिनता, वेदना एवं प्रक्षोभ में अफीम रामबाण औषधि है |
  • अनिद्रा रोग में अत्यंत उपयोगी है |
  • शीघ्रपतन एवं कामोत्तेजना की रामबाण औषधि है अफीम |

अफीम का उपयोग किन किन दवाओं में किया जाता है ?

अनगिनत औषधिय गुणों के कारण इसका उपयोग हर छोटे बड़े रोग में होता है | जानते हैं कुछ आयुर्वेदिक दवाओं के नाम जिनमे अफीम का उपयोग होता है |

  • कर्पुर रस में अफीम का उपयोग होता है |
  • दुग्धवटी |
  • अहिफेनासव |
  • जातिफलादीवटी |
  • विर्यस्तम्भन वटी |
  • आकारकरमादीवटी |
  • मधुमेह की दवाओं में |
  • यौन शक्तिवर्धक दवाओं में |
  • गर्भपात में |

बवासीर रोग में अफीम के फायदे क्या हैं ?

अर्श या बवासीर बहुत पीड़ादायी रोग है | इस रोग को ठीक करने के लिए आयुर्वेद में बहुत सारे नुश्खे एवं जड़ी बूटियां हैं | अफीम अर्श नाशक होता है | अफीम के फायदे से अर्श जैसा रोग ठीक हो जाता है | बवासीर का रोग होने पर 12 ग्राम अफीम, 50 ग्राम माजूफल एवं 200 ग्राम धोया घृत का मलहम बना कर लगाने से बहुत लाभ होता है |

क्या शीघ्रपतन में अफीम फायदेमंद होता है ?

शीघ्रपतन का सबसे बड़ा कारण वीर्य का पतला हो जाना होता है | अफीम उष्ण वीर्य वाला होता है | इसके प्रभाव से विर्यस्तम्भन में लाभ मिलता है | अपने मादक गुण के कारण यह कामोत्तेजना भी बढाता है | अगर आप शीघ्रपतन की समस्या से पीड़ित हैं तो अफीम के फायदे से इस रोग को खत्म कर सकते हैं | शीघ्रपतन में अफीम, जायफल, जावित्री, लोंग, अकरकरा, केसर एवं छोटी एला के दाने (12-12 ग्राम) को 3 ग्राम भीमसेनी कपूर के साथ नागरबेल के रस में 12 घंटे तक खरल करके उसकी गोली बना कर सेवन करें |

अतिसार में अफीम से क्या फायदे होते हैं ?

अतिसार (दस्त) में दस्त पतले हो जाते हैं | इस रोग में रोगी को बार बार मल त्याग होता है | अफीम के उपयोग से दस्त रोकने में लाभ होता है | अतिसार में 12 ग्राम अफीम के साथ 25-25 ग्राम कर्पुर एवं सोठ मिला कर रोजाना 2-3 बार सेवन करें | इससे अतिसार में लाभ मिलेगा |

अफीम क्या है
अफ़ीम

गर्भावस्था में स्राव (गर्भपात) रोकने में अफ़ीम के फायदे

अफीम शरीर के सभी प्रकार के स्राव रोकने के लिए कारगर औषधि है | गर्भावस्था में अगर रक्त स्राव होने लगे तो इससे गर्भपात होने का खतरा हो जाता है | प्रेगनेंसी में रक्तस्राव को रोकने के लिए अहिफेनासव का उपयोग फायदेमंद होता है | अफीम एवं खर्जुर का सेवन करने से गर्भस्राव रुक जाता है |

अहिफेनासव क्या है ? इसमें अफीम का क्या उपयोग है ?

यह गंभीर दस्त एवं हैजा जैसे रोगों को ठीक करने के लिए एक आयुर्वेदिक योग है | इसके सेवन से दस्त में बहुत जल्दी राहत मिलती है | इसमें निम्न जड़ी बूटियों का इस्तेमाल होता है :-

  • अहिफेन या अफीम
  • जातिफल
  • मोथा
  • कुटज
  • इला
  • अल्कोहोल

अफीम में शरीर में होने वाले किसी भी प्रकार के स्राव ( चाहे वो रक्त स्राव हो, दस्त हो या फिर गर्भस्राव ) को रोकने के उत्तम गुण होते हैं | इसलिए अफीम एवं अन्य जड़ी बूटियो को मिलाकर बना ये आयुर्वेदिक योग (अहिफेनासव) इन रोगों में बहुत कारगर साबित होता है |

अफीम के शरीर पर होने वाले दुष्प्रभाव क्या हैं ?

यूँ तो अफीम का उपयोग बहुत से रोगों की दवा के रूप में किया जाता है | लेकिन इसका ज्यादा सेवन करने या उचित परामर्श के बिना सेवन करने से शरीर पर बहुत गंभीर दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं | आइये जानते हैं :-

  • साँस लेने में दिक्कत होना |
  • चक्कर आना |
  • दिल की धडकन कमजोर पड़ जाना |
  • वेदना या तनाव महसूस करना |
  • सर दर्द होना |
  • असहज महसूस करना |
  • सीने में दर्द होना |
  • कम दिखाई देना |
  • ज्यादा पसीना आना |
  • बेहोश हो जाना |

इस लेख में दी गयी जानकारी आपके ज्ञानवर्धन के लिए है | किसी भी रोग में अफीम या इसके किसी उत्पाद का इस्तेमाल करने से पहले चिकित्सक की उचित सलाह जरुर लें |

धन्यवाद

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