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माँ का दूध बढ़ाने की दवा के बारे में जानने से पहले यह जान लेना जरुरी है की स्तनपान क्यों जरुरी है ? गर्भधारण के बाद से ही माता के शरीर में बदलाव आने लग जाते हैं | गर्भधारण से लेकर शिशु के जन्म तक यह सब एक प्रक्रिया के तहत होता है | शिशु के जन्म के उपरांत माँ के स्तन में दूध बनने लग जाता है | माँ के दूध में प्रयाप्त पोषक तत्व एवं रोग प्रतिरोधक गुण होते हैं, जो शिशु को संक्रामक रोगों से बचाते हैं | जन्म के उपरांत शिशु के लिए सबसे जरुरी एवं पौष्टिक आहार होता है माँ दूध | अगर माँ की सेहत कमजोर हो या अन्य किसी कारण से प्रयाप्त दूध नही बन पा रहा हो तो यह शिशु के लिए हानिकारक हो सकता है | क्योंकि स्तनपान ही प्रारंभ के 6 महीनों तक बच्चे के लिए उचित आहार होता है |

यह भी पढ़ें:- गर्भवस्था में कैसे देखभाल करें ?

Post Contents

इस लेख में हम स्तनपान से जुड़े सभी विषयों एवं माँ का दूध बढाने की दवा के बारे में जानेंगे |

  • स्तनपान क्या है ?
  • क्यों जरुरी है स्तनपान ?
  • शिशु को स्तनपान कब से कराना शुरू करें ?
  • माँ का दूध पिने से शिशु को क्या फायदा होता है ?
  • स्तनपान कब तक कराना चाहिए ?
  • स्तनपान कराने से माता के शरीर में क्या बदलाव होता है ?
  • दूध पिलाने से माता को क्या फायदा होता है ?
  • क्या दूध पिलाने से ब्रैस्ट का साइज़ बढ़ जाता है ?
  • स्तनपान के दौरान क्या खाना बेहतर होता है ?
  • क्या चाय या कॉफ़ी का सेवन करना शिशु के लिए खतरनाक होता है ?
  • क्या स्तनपान के समय शराब का सेवन किया जा सकता है ?
  • किस उम्र में दूध पिलाना बंद कर देना चाहिए ?
  • दूध पिलाने (स्तनपान) से माँ के शरीर में क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं ?
  • किन अवस्थाओं में शिशु को स्तनपान नहीं कराना चाहिए ?
  • दूध ना पिलाने से माँ के शरीर पर क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं ?

स्तनपान क्या है एवं शिशु को दूध पिलाना कब शुरू करना चाहिए ?

गर्भधारण के बाद महिला के शरीर में बदलाव आने लग जाते हैं | यह एक प्राकर्तिक बदलाव है जो शिशु के विकास के लिए होता है | गर्भावस्था में माँ के ब्रैस्ट (स्तन) में दूध बनना शुरू हो जाता है | नवजात शिशु को माँ का दूध पिलाना स्तनपान कहलाता है | शिशु के जन्म के 2-3 घंटे बाद उसे दूध पिलाना चाहिए यह उसके लिए बहुत जरुरी है | यह समय माँ के लिए बहुत कठिन होता है लेकिन बच्चे के स्वास्थय के लिए माँ का दूध ही सबसे उत्तम आहार है |

शिशु को माँ का दूध पिलाना क्यों जरुरी है ?

माँ के दूध में वो सभी पौषक तत्व मौजूद होते हैं जो एक नवजात शिशु के लिए आवश्यक होते हैं | आइये जानते हैं स्तनपान क्यों जरुरी है :-

  • यह प्राकर्तिक है एवं बच्चे के विकास के लिए इसमें सभी पौषक तत्व होते हैं |
  • शिशु के लिए माँ का दूध पीना आसान होता है |
  • इससे बच्चे को किसी तरह का इन्फेक्शन होने का खतरा कम हो जाता है |
  • स्तनपान करने वाले शिशु को एलर्जी होने का खतरा कम हो जाता है |
  • यह माँ के लिए भी आसान है |

नवजात शिशु को माँ का दूध पिलाने का क्या फायदा होता है ?

आयुर्वेद एवं आधुनिक चिकित्सा दोनों का ही कहना है कि स्तनपान ही बच्चे के लिए सबसे अच्छा अनुपूरक है | माँ का दूध पिने से शिशु को निम्न स्वास्थय लाभ होते हैं :-

  • शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है |
  • एलर्जी होने का खतरा कम होता है |
  • बाहरी दूध या खाना खिलाने से नवजात को इन्फेक्शन होते का खतरा रहता है |
  • स्तनपान से इन्फेक्शन नही होता |
  • शिशु कम बीमार पड़ता है |
  • माँ का दूध पिने से शिशु सुरक्षित महसूस करता है |

नवजात शिशु को स्तनपान कब तक कराना चाहिए ?

आरम्भ के 6 महीनों तक शिशु के लिए स्तनपान बहुत जरुरी है | WHO के अनुसार भी शुरू के 6 महीनो तक बच्चे को सिर्फ माँ का दूध ही पिलाना चाहिय उसे बाहर का आहार नही देना चाहिए | इसके उपरांत उसे धीरे धीरे अन्य अनुपूरक आहार देना शुरू करें | आप 2 साल तक शिशु को स्तनपान कराए यह शिशु एवं माँ दोनों के लिए फायदेमंद रहता है |

शिशु को स्तनपान कराने से माँ को क्या फायदा होता है ?

नवजात शिशु को माँ का दूध पिलाना बच्चे एवं माँ दोनों के लिए लाभदायी होता है | माँ को स्तनपान से होने वाले लाभ :-

  • ब्रैस्ट कैंसर का खतरा कम हो जाता है |
  • डायबिटीज जैसे रोग होने का खतरा भी कम होता है |
  • हाइपर टेंशन में लाभ होता है |
  • रक्तचाप के लिए उचित है |
  • बार बार शिशु के लिए अनुपूरक तैयार नही करना पड़ता |
  • दूध पिलाने से दूध का उत्पादन होता है जिससे दूध बढाने की दवा खाने की जरुरत नही होती |

शिशु को दूध पिलाना बंद करने की सही उम्र क्या है ?

सामान्यतः एक से दो साल तक शिशु को माँ का दूध पिलाना उचित रहता है | इसके बाद उसे स्तनपान कराना बंद कर देना चाहिए | लेकिन ध्यान रखें कि आरम्भ के 6 महीनो तक सिर्फ माँ का दूध ही पिलाया जाए | इसके उपरांत उसे थोड़ा बहुत बाहरी खाना देना शुरू कर सकते हैं |

क्या ब्रैस्ट फीडिंग से ब्रैस्ट (स्तन) का साइज़ बढ़ जाता है ?

शिशु के जन्म के बाद स्तनपान कराने से माँ के स्तनों में दूध बनता है इससे उनका बड़ा होना स्वाभाविक है | जब शिशु को दूध पिलाना बंद कर दिया जाता है तो कुछ समय में फिर से ब्रैस्ट का आकार सामान्य हो जाता है |

स्तनपान कराते समय माँ को क्या खाना चाहिए ?

प्रसव के बाद माँ को अपना और शिशु दोनों का ख़याल रखना होता है | इस समय उसे ऐसे पोषण एवं ताकत वाले खाने की जरुरत होती है जो शिशु एवं माँ दोनों के लिए सही हो | इसमें यह भी देखना आवश्यक है कि खाना ऐसा हो जिससे प्रयाप्त दूध भी बन सके ताकि शिशु की उचित पोषण मिल पाए एवं वह भूखा न रहे | स्तनपान के समय क्या खाए :-

  • गाय का दूध :- गाय के दूध में उचित पोषण एवं रोग प्रतिरोधक गुण होते हैं | इसका सेवन करने से माँ का दूध भी बढ़ता है |
  • हरी सब्जियों का सेवन करें |
  • सोया दाल खाएं |
  • बादाम का सेवन बहुत फायदेमंद होता है |
  • चावल का सेवन करें |
  • घी खाना प्रसव के बाद शारीरिक ताकत बढाने के लिए फायदेमंद रहता है |
  • स्तनपान के समय तरबूज का सेवन करें |

स्तनपान के समय चाय या कॉफ़ी का सेवन करना शिशु के लिए दुष्प्रभावी हो सकता है |

चाय या कॉफ़ी का अधिक सेवन नही करना चाहिए | कैफीन की अधिक मात्रा नवजात शिशु के लिए हानिकारक होती है | अगर हो सके तो स्तनपान के समय चाय या कॉफ़ी का सेवन न करें |

क्या शिशु को दूध पिलाने के दौरान शराब का सेवन किया जा सकता है ?

शराब एवं अन्य मादक द्रव शरीर के लिए बहुत हानिकारक होते हैं | इनका सेवन करना स्वास्थय के लिए अच्छा नही होता | खासकर शिशु को स्तनपान कराने वाली माँ को तो शराब का सेवन कैतई नही करना चाहिए |

स्तनपान से माँ के शरीर पर होने वाले दुष्प्रभाव |

नवजात शिशु के लिए माँ का दूध अमृत के समान है | यह उसे सभी प्रकार के रोगों से बचाता है | माँ के लिए भी स्तनपान कराना फायदेमंद ही होता है इसका कोई खास दुष्प्रभाव उसके शरीर पर नही होता है | फिर भी इसके निम्न प्रभाव हो सकते हैं |

  • स्तनों में ज्यादा दूध आ जाने से तनाव एवं दर्द होना |
  • निप्पल में क्रैक हो जाना |
  • स्तनों में सुजन आ जाना |
  • ब्रैस्ट का आकार बढ़ जाना

और पढ़ें :- ब्रैस्ट बढाने का घरेलु तरीका एक आयुर्वेदिक तेल जो स्तनों को कर देगा – पहाड़ जैसा कठोर ( Home Remedies for Breast Tightness )

किन अवस्थाओं में नवजात शिशु को स्तनपान नही कराना चाहिए ?

नवजात शिशु के लिए माँ का दूध ही सबसे बेहतर आहार है | लेकिन स्तनपान कराते समय कुछ बातों का ध्यान रखना भी आवश्यक है | अगर माँ का स्वास्थ्य ठीक नहीं है या किसी संक्रामक रोग से ग्रसित है तो इस अवस्था में बच्चे के लिए यह हानिकारक हो सकता है | इसलिए यह आवश्यक है की माँ अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखे |

स्तनपान नहीं कराने से माँ के शरीर पर होने वाले दुष्प्रभाव |

बच्चे के जन्म के बाद स्तनों में दूध का बनना प्राकर्तिक होता है | अगर माँ बच्चे को दूध न पिलाये तो यह शिशु एवं माँ दोनों के लिए हानिकारक हो सकता है | इसके निम्न दुष्प्रभाव हो सकते हैं :-

  • स्तनपान नही कराने से दूध स्तन में जम सकता है |
  • ब्रैस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है |
  • स्तन में गांठ बन सकती है |
  • दूध नहीं पिलाने से धीरे धीरे दूध बनना बंद हो जाता है |

माँ का दूध बढाने की दवा एवं घरेलु उपचार |

स्तनपान के फायदों के बारे में आप जान चुके हैं | किसी भी अवस्था में आरम्भ के 6 महीनो तक बच्चे को केवल माँ का दूध ही आहार के रूप में देना चाहिए | स्तनपान से जुड़ी एक समस्या है प्रयाप्त मात्रा में दूध नही उतरना | अगर माँ के स्तनों में इतना दूध नही बन पा रहा है तो इसके लिए दूध बढाने वाली दवा एवं उचित खान पान का सेवन करना चाहिए | अभी हम माँ का दूध बढ़ाने की दवा एवं आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के बारे में बात करेंगे जिनके सेवन से दूध का बनना बढ़ जायेगा |

दूध बढाने की दवा
दूध बढाने की दवा

दूध बढाने की 10 बेहतरीन दवा एवं हर्बल मेडिसिन

कभी कभी माँ शारीरिक रूप से कमजोर होने या फिर उचित खान – पान के अभाव में दूध कम बनता है | जिससे बच्चे को प्रयाप्त आहार नही मिल पाता एवं इससे वह कमजोर पड़ सकता है | नवजात शिशु के सम्पूर्ण विकास के लिए जरुरी है की उसे हर 3-4 घंटे बाद 10 से 15 मिनट के लिए दूध पिलाया जाए | जिससे शिशु तंदरुस्त एवं स्वस्थ रहे | आइये जानते दूध बढाने वाली 10 बेस्ट आयुर्वेदिक दवाओं के बारे में :-

1. सौंफ है दूध बढाने की सबसे कारगर दवा |

सौंफ से आप सभी परिचित है | जितना सुगन्धित होती है उससे भी कही ज्यादा उपयोगी होती है सौंफ | गर्भावस्था के विकारों, सर दर्द, गैस एवं दूध बढाने के लिए यह बहुत विश्वसनीय दवा के रूप में काम आती है | सौंफ का सेवन करने से दूध का उत्पादन बढ़ जाता है | क्योंकि इसमें एस्ट्रोजन हार्मोन होता है जो दूध का उत्पादन बढाने का काम करता है | दूध बढाने की दवा के रूप में आप सौंफ का सेवन कर सकती हैं |

यह भी पढ़ें :- शुक्राणु की कमी में सौंफ के फायदे |

2. स्तन्य जनक है जीरा, दूध बढाने के लिए करे सेवन |

खाना बनाने में जीरा के उपयोग से आप सभी परिचित है | खाने का स्वाद बढाने के लिए इसका उपयोग होता है | जीरा बलवर्धक एवं स्तन्य जनक होता है | स्तनपान कराने वाली माँ का दूध बढाने के लिए इसका सेवन बहुत फायदेमंद रहता है | जाने कैसे उपयोग करें :-

  • दूध बढाने के लिए गुड़ के साथ जीरे का चूर्ण सेवन करे |
  • भुने हुए जीरे का सेवन करें |
  • जीरे से बने उत्पादों का उपयोग करे |

3. स्तनपान कराने वाली माँ का दूध बढाने के लिए शतावरी का उपयोग करें |

शतावरी आयुर्वेद में अपने औषधीय गुणों के कारण अत्यंत उपयोगी माना जाता है | यह पुष्टिकारक, बल वर्धक, शुक्रजनक एवं स्तन्य जनक होता है | शतावरी का उपयोग माँ का दूध बढ़ाने के लिए किया जाता है | आइये जानते है माँ का दूध बढाने की दवा के रूप में इसका उपयोग कैसे करें :-

  • स्तनपान कराने वाली माँ को शतावरी का सेवन गाय के दूध के साथ करना चाहिए |
  • दूध बढाने के लिए शतावरी चूर्ण का सेवन दूध या शहद के साथ करें |
  • इसका उपयोग अन्य दवाओं के साथ भी कर सकती हैं |
  • शतावरीघृत का उपयोग करें |

और पढ़ें :- जाने शतावरी के औषधीय गुण एवं फायदे !

4. अश्वाग्नधा के माँ दूध बढाने की दवा के रूप में फायदे |

अश्वगंधा एक बहु उपयोगी आयुर्वेदिक औषधि है | इसका इसका उपयोग 50 से ज्यादा रोगों की दवा बनाने में किया जाता है | स्तनपान कराने वाली माँ का दूध बढाने की दवा के लिए अश्वगंधा का उपयोग बहुत फायदेमंद रहता है | स्तन्यवर्धन के लिए शतावरी का उपयोग :-

  • अश्वगंधा चूर्ण का सेवन गाय के दूध के साथ करें |
  • विदारीकन्द, मुलेठी एवं अश्वगंधा से क्षीरपाक बना कर खाएं |
  • स्तनपान कराने के लिए दूध बढाने के लिए अश्वगंधादिचूर्ण का सेवन करें |

5. मुलेठी का सेवन करा बढाए स्तनपान कराने वाली माँ का दूध |

आयुर्वेद में स्तन्यवर्धनार्थ जिन जड़ी बूटियों का उपयोग किया जाता है उसमे मुलेठी बहुत फायेदेमंद है | इसे मधुयष्टी के नाम से भी जाना जाता है | माँ का दूध बढाने की दवा के रूप में इसका उपयोग प्राचीन काल से ही किया जाता रहा है |

  • मुलेठी का चूर्ण दूध के साथ सेवन करने से दूध बढ़ जाता है |
  • शतावरी के साथ इसका उपयोग करके दूध बढ़ाने की दवा बनायी जाती है |
  • यह शुक्रवर्धक भी है |

6. स्तन्य वर्धन के लिए स्तनपान कराने वाली माँ को मेथी का सेवन कराएं |

हमारे यहाँ प्रसव के बाद माँ को मेथी का सेवन कराना प्राचीन काल से ही चला आ रहा | मेथी बलवर्धक एवं दूध बढाने वाली होती है | प्रसूता को मेथी का सेवन कराना बहुत लाभदायी होती है | आइये जानते है दूध बढाने के लिए मेथी का सेवन कैसे करें :-

  • स्तनपान कराने वाली माँ को मेथी के लड्डू बना कर खिलाये |
  • माँ का दूध बढाने के लिए मेथी की लापसी बना कर सेवन करें |
  • मेथी का चूर्ण गुड़ के साथ सेवन करें |

7. खरपतवार नही दूध बढाने की दवा है काँटा चौलाई |

काँटा चौलाई एक ऐसी खरपतवार है जिससे किसान बहुत परेशान रहता है | लेकिन आयुर्वेद में इसके औषधीय गुणों के कारण इसे बहुत से रोगों की दवा के रूप में प्रयोग किया जाता है | दूध बढाने के लिए काँटा चौलाई एक विश्वसनीय दवा का काम करती है |

  • दूध बढाने के लिए इसके पंचांग का क्वाथ सेवन करें |
  • चौलाई का साग बना कर सेवन करें |
  • दाल में उपयोग करके भी इसका सेवन किया जा सकता है |

8. स्तनपान कराने वाली माँ को कराए तोदरी का सेवन |

तोदरी बहुत ही पौष्टिक, कामोत्तेजक एवं स्तन्यजनक होती है | इसके बीज मसूर की दाल की तरह होते है | इसका उपयोग बहुत सी दवाओं में किया जाता है | दूध बढाने के लिए तोदरी का उपयोग :-

  • इसके बीजो का चूर्ण दूध के साथ सेवन करें |
  • दूध बढाने के लिए तोदरी के बीज दूध में पका कर सेवन करें |

9. नरकल है दूध बढ़ाने की आयुर्वेदिक दवा |

इसे नल एवं धमन भी बोला जाता है | यह बांस की तरह होता है | इसका मूल एक उपयोगी औषधि के रूप में काम आता है | स्तनपान कराने वाली माँ के लिए इसका सेवन करना लाभदायी होता है | आइये जानते है दूध बढाने के लिए इसका सेवन कैसे करें :-

  • नरकल के मूल का क्वाथ सेवन करें |
  • पंचतृण मूल क्वाथ का उपयोग करें |
  • स्तन्य वर्धन एवं शुक्रवर्धन में यह बहुत लाभदायी है |

10. विदारीकन्द है माँ का दूध बढाने की सबसे विश्वसनीय दवा |

  • विदारीकन्द के चूर्ण का सेवन दूध के साथ करें |
  • इसके स्वरस का सेवन मिश्री के साथ करें |
  • दशमूलारिष्ट एवं नवजीवन योग में इसका उपयोग होता है |

यह एक ऐसी लता है जिसमे अनगिनत औषधीय गुण हैं | जीवनीय शक्ति बढाने के लिए यह बहुत उपयोगी है | प्रसूता के लिए विदारीकन्द का सेवन करना बहुत लाभदायी होता है | जाने दूध बढाने के लिए इसका उपयोग कैसे करें :-

स्तन्यवर्धन (दूध बढाने वाली) के लिए कुछ बेहतरीन आयुर्वेदिक दवाएं |

आयुर्वेद प्रकर्ति का वो वरदान है जो है जो हमें स्वस्थ एवं खुशहाल जीवन जीने की कुंजी देता है | स्तनपान कराने वाली माँ का दूध बढाने के लिए आयुर्वेद में में कुछ विश्वसनीय एवं कारगर दवाओ के नाम हम निचे लिस्ट में दे रहें है | आप इन्हें ऑनलाइन या आयुर्वेदिक दवा स्टोर से प्राप्त कर सकते हैं |

  1. श्री श्री ममत्वा ग्रेनुल्स (Sri Sri Mamtava Granules)
  2. वरदान आयुर्वेदिक लैकटेसन (Vardaan Ayurvedic Lactation)
  3. प्रेलिपिड कैप्सूल (Prelipid capsule)
  4. मह्रिषी आयुर्वेद हेर्बोनिक (Mahrishi Ayurveda Herbonic)

यह भी पढ़े :- आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों की रोगोनासर लिस्ट |

स्तनपान कराने वाली माँ का दूध बढाने के लिए कारगर घरेलु उपचार |

माँ का दूध नवजात शिशु के लिए बहुत जरुरी अनुपूरक है | अगर प्रयाप्त मात्रा में बच्चे को माँ का दूध न मिले तो वह कमजोर एवं बीमार पड़ सकता है | ऐसी बहुत सी जड़ी बूटियां एवं घरेलु नुश्खे हैं जिनका उपयोग करके माँ का दूध बढ़ाया जा सकता है | आइये जानते हैं कुछ आसन एवं कारगर घरेलू नुश्खो के बारे में :-

  1. मेथी के लड्डू बना कर सेवन करें |
  2. गाय का घी एवं दूध खाए |
  3. सौंफ एवं जीरा दूध बढाने में बहुत उपयोगी होते है |
  4. हरी सब्जियों का सेवन करें |
  5. बादाम पाक का सेवन करें |
  6. खर्जुर का सेवन दूध के साथ करें |
  7. कांटा चौलाई की सब्जी बना कर खाएं |
  8. आयरन युक्त फल एवं सब्जियों का सेवन करें |

यहाँ पर दी गयी जानकारी आपके ज्ञानवर्धन के लिए है | किसी भी दवा का उपयोग करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह जरुर लें |

धन्यवाद |

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