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Shukranu Badhane ki Dawa आयुर्वेद के द्वारा यौन रोग, नपुंसकता एवं शुर्क्रणुओं की कमी का इलाज किया जा सकता है | आयुर्वेद के आठ अंग हैं इनमें से वाजीकरण विशेषतः यौन रोगों पर केन्द्रित है | वजी यानी घोडा, वाजीकरण यानी घोड़े की शक्ति पैदा करना | घोड़ा यौन शक्ति एवं मर्दाना ताकत का प्रतिक माना जाता है | वाजीकरण के अंतर्गत शुक्राणुओं की कमी (शुक्राणु बढ़ाने की दवा), इन्द्रिय शिथिलता, कामोत्तेजना में कमी, वीर्य की कमी एवं सभी प्रकार के यौन रोगों के इलाज एवं दवा के बारे में बताया गया है |

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शुक्राणु बढ़ाने की आयुर्वेदिक दवा एवं उपचार (Increase Sperm Count)

चरक संहिता, शुश्रुत संहिता, वात्स्यान का कामसूत्र एवं कल्याणमाला का अनंगा रंग ऐसे ग्रन्थ हैं जिनमें यौन रोगों एवं उनके इलाज के बारे में विस्तृत जानकारी दी गयी है | Shukranu Badhane ki dawa के रूप में बहुत सारी जड़ी बूटियों का उल्लेख इन आयुर्वेदज्ञों द्वारा अपने ग्रंथो में किया गया है | इस लेख में हम उन 35 आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के बारे में बतायेंगे जिनसे शुक्राणुओं की कमी को दूर किया जा सकता है | मुख्य बिन्दु :-

  • शुक्राणु क्या है ?
  • सामान्यतः शुक्राणुओं की संख्या कितनी होनी चाहिए ?
  • शुक्राणु की कमी के कारण क्या है ?
  • किन लक्षणों से शुक्राणुओं की कमी का पता चलता है ?
  • शुक्राणु की कमी के क्या प्रभाव होते है ?
  • शुक्राणु बढ़ाने की आयुर्वेदिक दवा एवं जड़ी बूटियां कोनसी हैं ?
  • क्या शुक्राणु की कमी से प्रजनन पर असर पड़ता है ?
  • शुक्राणु बढ़ाने की दवा पतंजलि एवं अन्य दवाएं ?
  • nil shukranu badhane ki dawa |

शुक्राणु क्या है एवं स्वस्थ व्यक्ति में शुक्राणुओं की संख्या कितनी होनी चाहिए ?

शुक्राणु बढाने की दवा
शुक्राणु

आयुर्वेदानुसार एक स्वस्थ व्यक्ति का वीर्य गाढ़ा, सफ़ेद, स्निग्ध, पिचिल एवं मधुगंधी होना चाहिए | अगर वीर्य में तरलता ज्यादा है तो इसका मतलब है की शुक्राणु की कमी है | शुक्राणु पुरुषो का प्रजनन (Reproductive cell) उत्तक है | शुक्राणु से जुड़े कुछ तथ्य :-

  • WHO के मुताबिक एक स्वस्थ पुरुष रोजाना लाखो शुक्राणु का उत्पादन करता है |
  • एक स्वस्थ व्यक्ति में शुक्राणुओं के संख्या 20 लाख प्रति ml होती है |
  • वीर्य स्खलन में स्वस्थ व्यक्ति कम से कम 2 ml वीर्य स्खलन करता है |
  • शुक्राणु की कमी होने से प्रजनन क्षमता पर असर पड़ सकता है |

शुक्राणु की कमी के लक्षण क्या हैं ?

एक स्वस्थ व्यक्ति में का वीर्य गाढ़ा एवं सफ़ेद या पीले रंग का होता है | वीर्य में अगर तरलता ज्यादा हो तो शुक्राणु की कमी हो सकती है | आइये जानते है इसके क्या लक्षण दिखायी देते हैं :-

  • वीर्य में पानी या तरलता ज्यादा होना |
  • इन्द्रिय शिथिलता या लिंग में तनाव न होना |
  • कामोत्तेजना में कमी |
  • लम्बे समय तक सम्भोग के बाद भी मादा का गर्भ धारण नहीं करना |
  • पेसाब के समय दर्द होना |
  • वृषण में सुजन एवं दर्द होना |

शुक्राणु की कमी के कारण क्या हैं ?

आयुर्वेदानुसार शुक्राणु की कमी के निम्न कारण हो सकते हैं :-

  • अनुचित खान-पान :- ज्यादा मसाले एवं तली हुई चीजें खाने से शुक्राणु की कमी हो सकती है |
  • आनुवंशिक कारणों से भी यह समस्या हो सकती है |
  • तनाव:- आधुनिक समय में यह तनाव शुक्राणु की कमी का सबसे आम कारण है |
  • धुम्रपान एवं शराब का अधिक सेवन करने से |
  • प्रोस्टेट ग्रंथि में किसी तरह का संक्रमण हो जाने से |
  • प्रयाप्त नींद नहीं लेने से भी शुक्राणु की कमी हो सकती है |
  • मोटापा भी इस समस्या का एक कारण है |
  • ज्यादा स्टेरॉयड खाने से भी शुक्राणु की कमी हो जाती है |

शुक्राणुओं की कमी हो जाने से क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं ?

आयुर्वेद के अनुसार एक स्वस्थ एवं खुशहाल जीवन के लिए जरुरी है कि आपकी सम्भोग एवं प्रजनन क्षमता अच्छी हो | सम्भोग से आप अपने साथी को प्यार का इजहार करते हैं एवं प्रजनन के माध्यम से एक खुशहाल पारिवारिक जीवन जीते हैं | सहवास में कमी की वजह आपके जीवन पर बहुत विपरीत प्रभाव डाल सकती है | शुक्राणुओं की कमी से सम्भोग क्षमता पर असर पड़ता है एवं Shukranu Badhane Ki dawa से इसका उचित इलाज करना जरुरी है | शुक्राणुओं की कमी के दुष्प्रभाव :-

  • शरीर में दुर्बलता आना |
  • इन्द्रिय शिथिलता या लिंग में प्रयाप्त दृढ़ता नही होना |
  • शीघ्रपतन हो जाना |
  • कामोत्तेजना में कमी |
  • प्रजनन क्षमता में कमी |

क्या शुक्राणु की कमी से प्रजनन क्षमता कम हो जाती है ?

वैसे तो एक शुक्राणु भी प्रजनन के लिए काफी होता है | लेकिन शुक्राणु की कमी होने से प्रजनन होने के चांस भी कम हो जाते है | अगर शुक्राणुओं की कमी ज्यादा हो जाये तो इससे बाँझपन जैसी समस्या भी हो सकती है | इसलिए उचित समय पर इसका इलाज करना बहुत आवश्यक है | आयुर्वेद में शुक्राणु की गुणवता एवं संख्या बढाने के लिए उचित उपचार एवं दवा उपलब्ध है |

यह भी पढ़ें :- नपुंसकता की दवा पतंजलि !

Shukranu Badhane Ki Dawa :- आयुर्वेदिक दवा एवं जड़ी – बूटियां

आयुर्वेद चिकित्सा सबसे ज्यादा तर्कसंगत एवं प्रामाणिक चिकित्सा विज्ञानं है | शुक्राणु की कमी से व्यक्ति की यौन क्रिया करने की क्षमता कमजोर हो जाती है | जिससे उसके पारिवारिक जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ता है एवं मानसिक तनाव जैसी स्थितियां उत्पन हो जाती है | शुक्राणु की गुणवता बढ़ाने एवं Shukranu Badhane के लिए आयुर्वेद में व्यापक औषधियां बतायी गयी हैं | Shukranu Badhane ki Dawa के रूप में इन जड़ी बूटियों का प्रयोग करके अपनी यौन क्षमता को बढाया जा सकता है |

जाने वाजीकरण क्या है एवं वाजीकरण जड़ी बूटियों के बारे में !

1. शतावरी है वीर्य बढाने की आयुर्वेदिक दवा, जाने इसके फायदे !

यह कांटेदार लता होती है जो भारत में सर्वत्र पायी जाती है | इसका मूल औषधि के रूप में काम में लिया जाता है | आयुर्वेद में शतावरी का उपयोग बहुत से रोगों के उपचार के लिए किया जाता है | यह वात एवं पित्त नाशक होती है | आइये जानते है Shukranu Badhane ki dawa करे रूप में शतावरी का इस्तेमाल कैसे करें :-

  • शुक्र वृधि के लिए :- शतावरी, गोखरू, कौंच बीज एवं ताल मखाना का चूर्ण रोजाना सोने से पहले दूध के साथ सेवन करें |
  • वीर्य गाढ़ा करने के लिए :- शतावरी कल्क (1 भाग), गो घृत(4 भाग), शतावरी रस (16 भाग) से घृत सिद्ध कर शक्कर के साथ सेवन करे |
  • शुक्राणु बढ़ाने के लिए :- शतावरी घृत (10 ग्राम) रोजाना सेवन करें |
  • कामोत्तेजना बढाने के लिए :- शतावरी रस एवं दूध (10 किलो) को 1 किलो गो घृत में सिद्ध करके 500 ग्राम पिप्पली का चूर्ण मिलकर सेवन करें |

2. अश्वगंधा है Shukranu Badhane ki Dawa, जाने इसके औषधीय प्रयोग |

इसे असंग या असगंध नाम से भी जाना जाता है | अंग्रेजी में अश्वगंधा को Winter Cherry बोला जाता है | यह कफ एवं वात शामक गुणों वाली होती है | आयुर्वेद में अश्वगंधा का उपयोग बहुत सी औषधियों में किया जाता है | शुक्राणु बढ़ाने की दवा के रूप में इसका उपयोग करने से बहुत लाभ मिलता है | इसके उपयोग से शुक्राणु की कमी दूर हो जाती है | आइये जानते है इसका सेवन कैसे करें :-

  • अश्वगंधा का चूर्ण (3 ग्राम) रोजाना दूध के साथ सेवन करें से शुक्राणु बढ़ जाते हैं एवं स्तम्भन दोष भी खत्म हो जाता है |
  • Shukranu Badhane ki dawa :- अश्वगंधा, मिश्री, घी, शहद (12 ग्राम) को 1 ग्राम पिप्पली चूर्ण के साथ क्षिरपाक बना कर सेवन करें |

3. सफ़ेद मूसली है शुक्राणु बढाने की आयुर्वेदिक दवा | जाने कैसे करें औषधीय प्रयोग |

मर्दाना कमजोरी या नपुंसकता में सफ़ेद मूसली एक रामबाण दवा का काम करती है | शुक्राणु बढ़ाने, वीर्य स्तम्भन, शीघ्रपतन एवं इन्द्रिय शिथिलता जैसे रोगों में इसका उपयोग बहुत कारगर साबित होता है | शुक्राणु बढ़ाने की दवा के रूप में यह एक उत्तम औषधि है | Shukranu Badhane ki dawa :-

  • सफ़ेद मूसली का चूर्ण (10 ग्राम) रोजाना सेवन करने से शुक्राणु की कमी दूर हो जाती है |
  • मूसली पाक का रोजाना सुबह शाम सेवन करने से शीघ्रपतन, धातु दुर्बलता एवं इन्द्रिय शिथिलता में बहुत लाभ मिलता है |
  • शुक्राणु बढ़ाने की दवा :- 120 ग्राम सफ़ेद मूसली चूर्ण को 5 किलो दूध में मिलाकर मावा निकाल लें एवं इसमें केसर, इलायची, प्रवाल, मुक्ता एवं जायफल मिलाकर दो महीने तक सेवन करें |

4. सालम पंजा (सालम मिश्री) से कामशक्ति बढ़ाये एवं शुक्राणु की कमी करें दूर

इसे संस्कृत में मुजान्तक के नाम से जाना जाता है | इसका कंद बहुत गुणकारी होता है | जिसका उपयोग आयुर्वेद में विभिन्न रोगों की दवा बनाने में किया जाता है | Shukranu Badhane ki dawa के रूप में भी सालम पंजा का उपयोग किया जाता है | कामोदीपक चूर्ण शीघ्रपतन एवं शुक्राणु बढ़ाने की विश्वसनीय आयुर्वेदिक दवा है | सालम मिश्री का शुक्राणु बढ़ाने की दवा के रूप में प्रयोग :-

  • सालम पंजा चूर्ण एवं बादाम चूर्ण बराबर भाग में लेकर घी में सेक कर लड्डू बना लें |
  • कामोदिपक चूर्ण का सेवन करें |
  • सालम पाक का सेवन करने से मर्दाना कमजोरी दूर होती है |
  • सालम चूर्ण, मूसली, तालमखाना, एवं गोंद से क्षीर पाक बना कर सेवन करने से शुक्राणु की कमी दूर हो जाती है |

क्या आप जानते है सालम पंजा के औषधीय गुण ?

5. Shukranu Badhane ki dawa के रूप में काली मूसली का सेवन करें |

काली मूसली को संस्कृत में तालमूली या तालपत्री के नाम से जाना जाता है | इसके पत्ते खजूर के जैसे पर कुछ पतले होते हैं | यह लगभग 1 फीट ऊँचा बहुवर्षीय पौधा है | आयुर्वेद में इसके औषधीय गुणों के कारण बहुत सी दवा में इसका प्रयोग किया जाता है | शुक्राणु बढाने की दवा के रूप में :-

  • 250 ग्राम दूध में 10 ग्राम चूर्ण मिलकर पाक बना कर सेवन करें |
  • बादाम, जायफल एवं मिश्री के साथ मिलाकर दूध में पका कर सेवन करें |
  • मूसली पाक का सेवन करें |

6. शुक्राणु की कमी में रूमी मस्तंगी के फायदे एवं औषधीय प्रयोग !

इसके काण्ड एवं शाखाओं से एक गाढ़ा जमा हुवा गोंद निकलता है | जिसका उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है | Shukranu Badhane ki dawa:-

  • वाजीकरण के लिए 3 ग्राम गोंद दूध के साथ सेवन करें
  • सालम पाक में इसका उपयोग होता है |
  • कौंच बीज चूर्ण, बादाम एवं रुमिमस्तंगी गोंद को दूध में मिलाकर मावा बना कर सेवन करें |
  • इसका सेवन करने से शुक्राणु की कमी में लाभ मिलता है |

7. तालमखाना Shukranu Badhane ki dawa के रूप में बहुत उपयोगी जड़ी बूटी है !

ताल तलैया में उगने वाली यह वनस्पति शुक्रवर्धन के लिए बहुत कारगर औषधि है | इसके बीज , मूल एवं क्षार का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है |

Shukranu Badhane ki dawa के रूप में कैसे प्रयोग करें :-

  • तालमखाना के क्वाथ को दूध के साथ सेवन करें |
  • इसके बीज (3 ग्राम) को दूध के साथ लें |
  • सालम पाक में उपयोग होता है |
  • कौंच पाक में उपयोग होता है |
  • शुक्राणु बढाने में उत्तम औषधि है |
  • वाजीकरण के लिए बहुत सी आयुर्वेदिक औषधियों में उपयोग में ली जाती है |

8. अतिबला का सेवन करने से दूर हो जाती है शुक्राणुओं की कमी !

डाबी-डबला के नाम से भी जाना जाता है | अतिबला के बीज एवं मूल का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है | शुक्राणु बढ़ाने के लिए इसका प्रयोग :-

  • 4 ग्राम बीज चूर्ण सुबह शाम दूध के साथ सेवन करें |
  • अतिबला चूर्ण को दूध में मिलाकर मावा बना कर 2 महीने तक सेवन करें |
  • वाजीकरण औषधियों में इसका उपयोग किया जाता है |
  • इसका सेवन करने से वीर्य गाढ़ा होता है |
  • Shukranu Badhane ki dawa के रूप में सेवन करें |

9. शुक्राणु बढ़ाने की दवा में अकरकरा बहुत उपयोगी जड़ी बूटी है |

अकरकरा का मूल औषधि बनाने के काम में लिया जाता है | यह एक कामोत्तेजक औषधि है | इसका सेवन करने से वीर्य गाढ़ा होता है | Shukranu Badhane ki dawa में इसका उपयोग मुख्य है | जानते है इसके प्रयोग :-

  • अकरकराभादीवटी का सेवन करने से शुक्राणु की कमी दूर होती है |
  • यह शुक्र जनक होता है |
  • वाजीकरण वटी में इसका उपयोग किया जाता है |
  • अकरकरादि गुग्गुलू में इसका उपयोग होता है |

10. गौखरू के सेवन से बढ़ाये शुक्राणु | जाने इसका उपयोग कैसे करें ?

बड़ा गोखुरू बल्य एवं वाजीकर होता है | पौरुष शक्ति बढ़ाने के लिए इसका उपयोग होता है | इसके पत्र एवं फल का उपयोग आयुर्वेदिक औषधियों में किया जाता है | Shukranu Badhane ki dawa के रूप में इसका क्या उपयोग है :-

  • गोखरू, गिलोय, एवं आंवले का चूर्ण शक्कर में मिलाकर दूध के साथ सेवन करने से वीर्य गाढ़ा होता है |
  • शुक्राणु बढाने के लिए इसके फल का फाँट सेवन दें |
  • गौक्षुरावादी क्वाथ में इसका उपयोग होता है |
  • इसका सेवन करने से स्वपन दोष दूर हो जाता है |
  • कामोत्तेजना में कमी में यह बहुत लाभप्रद औषधि है |

11. मखाना है शुक्राणु बढाने की सबसे अच्छी आयुर्वेदिक दवा !

कमल की तरह तालाबों में होने वाली यह वनस्पति बहुत गुणकारी औषधि है | उतर भारत एवं बंगाल में उत्पन होती है | इसके बीज बल्य, वाजीकर, गर्भस्थापक एवं रक्त संग्राहक होते हैं | शुक्राणु बढाने के लिए आयुर्वेदिक दवा के रूप में इसका उपयोग किया जाता है |

  • मखाना की खीर खाने से वीर्य की अल्पता (शुक्राणु की कमी) दूर हो जाती है |
  • शुक्र स्राव में भी इसका सेवन लाभदायी होता है |
  • पौष्टिक चूर्ण एवं च्यवनप्राश में इसका उपयोग होता है |
  • मखाना Shukranu Badhane ki Ayurvedic Dawa है |

12. विदारीकंद का सेवन कर शुक्राणुओं की कमी को करें दूर !

विलाई कन्द के नाम से भी जानते है | मोती आवर्तनी वाली लता होती है | इसका कंद बहुत उपयोगी होता है | शुक्राणु बढ़ाने की दवा के रूप में इसका प्रयोग किया जाता है |

  • शुक्राणु बढाने के लिए विदारीकंद चूर्ण जिसमे 21 भावना इसके रस की दी हो का सेवन करें |
  • विदारीकंद के स्वरस को मिश्री के साथ सेवन करें |
  • इसका उपयोग च्यवनप्राश, नवजीवन योग एवं नारसिंह चूर्ण में भी होता है |

13. वाराहीकंद के Shukranu Badhane ki Dawa के रूप में लाभ |

यह भी विदारीकंद की तरह एक लता होती है | हिमालय में 600 फीट की ऊंचाई पर पायी जाती है | इसके पत्र, मूल एवं पुष्प बहुत गुणकारी होते हैं | इनका प्रयोग आयुर्वेदिक दवाओं में किया जाता है | जानते हैं Shukranu Badhane ki Dawa के रूप में इसका प्रयोग कैसे करें ?

  • इसके कंद (5 ग्राम) का सेवन दूध के साथ करें |
  • शुक्राणु बढ़ाने के लिए दशमूलारिष्ट में इसका उपयोग होता है |
  • नारसिंह चूर्ण में भी इसका उपयोग होता है |
  • नारसिंह चूर्ण पौरुष शक्ति वर्धक औषधि है |

14. सकाकुल मिश्री पुरुष कामशक्ति वर्धक एवं शुक्राणु बढ़ाने वाली उत्तम औषधि है |

यह कश्मीर एवं अफगानिस्तान में पाया जाने वाला गाजर के जैसे पौधा है | पुरुषों के लिए यह एक रामबाण औषधि है | वैध हकीम इसका उपयोग मर्दाना कमजोरी एवं शुक्राणु बढाने के रूप में करते हैं | इसका मूल वीर्यवर्धक, शुक्रवर्धक एवं कामोत्तेजक होता है | शुक्राणु बढाने की दवा के रूप में इसका प्रयोग :-

  • इसका चूर्ण दूध के साथ सेवन करने से वीर्य गाढ़ा होता है |
  • इसके सेवन से शुक्राणु की उत्पादकता में वृद्धि होती है |
  • इसके योग से लबूब कबीर नाम की दवा बनायी जाती है |
  • लबूब कबीर यौन शक्ति वर्धक एवं शुक्राणु बढ़ाने की दवा है |

15. श्रंगाटक या सिंघाड़ा का सेवन कर शुक्राणुओं की कमी को करें दूर |

सिंघाड़ा से आप सभी परिचित हैं | यह तालाबों में पैदा होने वाली वनस्पति है | इसका उपयोग आयुर्वेद में अतिसार, गर्भस्राव एवं शुक्रक्षय को रोकने के लिए किया जाता है | शुक्राणु की कमी को दूर करने के लिए यह बहुत विश्वसनीय औषधि है |

  • शुक्राणु बढ़ाने के लिए सिंघाड़े का चूर्ण दूध के साथ सेवन करें |
  • वीर्य गाढ़ा करने के लिए सिंघाड़े के साथ कमल गट्टा एवं मखाने का चूर्ण मिलाकर दूध के साथ सेवन करें |
  • शुक्राणु की कमी दूर करने के लिए सिंघाड़े के लड्डू बना कर खाएं |
  • चिंचाबीजादियोग में इसका उपयोग होता है |

16. Madhuyashti (मुलेठी) ka Shukranu Badhane ki dawa ke rup me upyog

कश्मीर एवं देहरादून में पाया जाने वाला यह पौधा बहुत गुणकारी औषधि है | यह बल वर्धक, वीर्यवर्धक एवं कफ निसारक रसायन है | इसके मूल का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है |

  • शुक्राणु बढाने के लिए मुलेठी का चूर्ण शहद के साथ सेवन करें |
  • मुलेठी का सेवन करने से वीर्य गाढ़ा होता है |
  • मधुयष्टयाधव्लेह में इसका उपयोग होता है |

17. गोरखमुंडी से करें शुक्राणुओं की कमी की समस्या का इलाज

वाजीकर गुणों वाली यह वनस्पति धान या रबी के खेतो में उगती है | भारत के उष्ण प्रदेशो में यह पायी जाती है | इसके पंचांग का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है | शुक्राणु बढ़ाने, वीर्य गाढ़ा करने एवं इन्द्रिय शिथिलता जैसी यौन समस्यों में इसका उपयोग गुणकारी होता है |

  • पौरुष ग्रथि शोथ के लिए इसका अर्क या स्वरस उपयोग में लेते हैं |
  • शुक्राणु बढाने के लिए इसका चूर्ण दूध के साथ सेवन करें |
  • मर्दाना कमजोरी में इसको सोंठ, शतावरी, ब्रह्मदंडी एवं तज के साथ मिलाकर चूर्ण बना कर दूध के साथ सेवन करें |

18. मांस रोहिणी वीर्यवर्धक गुणों वाला वृक्ष है |

इसे रोहन के नाम से भी जाना जाता है | यह दक्षिण भारत में पर्वतों पर पाया जाता है | इसके त्वक का उपयोग औषधि के रूप में होता है | शुक्राणु बढाने की दवा के रूप में भी इसका उपयोग किया जाता है |

  • शुक्राणु बढ़ाने के लिए इसके क्वाथ का सेवन करें |
  • यह वीर्य वर्धक एवं पौष्टिक होता है |
  • अतिसार एवं ज्वर में भी उपयोगी है |

19. महाबला का सेवन कर दूर करें शुक्राणुओं की कमी |

शुक्राणु की कमी में महाबला बहुत फायदेमंद आयुर्वेदिक दवा है | यह झाड़ीदार 5 फीट ऊँचा पौधा होता है | इसको पीलाबरीयार भी कहते हैं | महाबला के पत्र एवं मूल का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है | शुक्राणु बढाने की दवा के रूप में इसका उपयोग फायदेमंद रहता है |

  • Shukranu badhane ki dawa के रूप में इसका क्वाथ सेवन करें |
  • यह बलवर्धक एवं वीर्य स्तंभक औषधि है |

20. नागबला है शुक्राणु बढाने की आयुर्वेदिक दवा, जाने इसका उपयोग कैसे करें |

इसे गुडखंडी के नाम से भी जाना जाता है | यह उत्तर पश्चिम भारत एवं नेपाल में पायी जाती है | इसकी मूल काफी गुणकारी होती है | इसका उपयोग करके विभिन्न रोगों की दवा तैयार की जाती है | Shukranu badhane ki dawa के लिए इसका उपयोग कैसे करें :-

  • यह बलवर्धक एवं शुक्राणु वर्धक गुणों वाली होती है |
  • नागबला की मूल का चूर्ण दूध के साथ रोजाना सेवन करने से शुक्राणु की कमी दूर हो जाती है |
  • इसका उपयोग गर्भ स्थापना की दवा में भी किया जाता है |
  • शुक्राणु बढाने के लिए दिन में दो बार दूध के साथ एक महीने तक सेवन करें |

21. अंगूर (दाख) का सेवन करने से बढ़ जाते है शुक्राणु !

अंगूर से आप सभी परिचित हैं | इसे द्राक्षा के नाम से भी जाना जाता है | यह ज्वर नाशक, वीर्य वर्धक पुष्टिकारक एवं स्वर सुधारने वाला होता है | Shukranu badhane ki dawa के रूप में यह बहुत गुणकारी औषधि है | शुक्र तारल्य में इसका उपयोग कैसे करें :-

  • शुक्राणु बढाने के लिए द्राक्षा, खर्जुर एवं पीपल को पीसकर घी में सेक कर सेवन करें |
  • सूखे अंगूर रात को पानी में भिगो दे एवं रोजाना सूबह 2 महीने तक सेवन करें |
  • वीर्यवर्धन के लिए द्राक्षासव एवं द्राक्षावलेह का सेवन करें |

22. खर्जुर है Shukranu badhane ki dawa, जाने इसके फायदे |

खजूर सभी प्रकार की दुर्बलता दूर करने के लिए उपयोगी होता है | यह बलवर्धक, पौष्टिक, कामोत्तेजक एवं रुचिकर गुणों वाला होता है | Shukranu badhane के लिए इसका सेवन कर सकते हैं |

  • खर्जुर के वृक्ष का रस वीर्यवर्धक एवं पौष्टिक होता है |
  • शुक्राणु बढाने के लिए नित्य दूध के साथ सेवन करें |
  • खर्जुरासव औषधि में इसका उपयोग होता है |

23. शुक्राणु बढाने के लिए सौंफ है उत्तम आयुर्वेदिक दवा |

सौंफ से आप सभी परिचित हैं | घर में बहुत से पकवानों में इसका उपयोग किया जाता है | पाचन एवं सर दर्द में यह बहुत गुणकारी है | आइये जाने शुक्राणु बढाने की दवा के रूप में इसका उपयोग कैसे करें |

  • रात में सौंफ को मिश्री के साथ भिगो दे एवं सुबह इसको पीस कर सेवन करें |
  • सौंफ एवं धनिया को पीसकर घी शक्कर के साथ सेवन करने से शुक्राणु की कमी में लाभ मिलता है |
  • पंचसकार चूर्ण का सेवन कर शुक्राणु बढाए |
  • शत्पुश्पादी चूर्ण का सेवन करें |

24. वीर्यवर्धक, शुक्र वर्धक एवं बलवर्धक औषधि है कौंच बीज |

कौंच को कपिकच्छु के नाम से भी जाना जाता है | पुरुष कामशक्ति वर्धक दवा के रूप में कौंच बीज का उपयोग होता है | इसके फल, पत्र एवं गोंद का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है | Shukranu badhane ki dawa में भी इसका प्रयोग होता है | आइये जानते हैं शुक्राणु बढाने के लिए इसका सेवन कैसे करे:-

  • सभी वाजीकरण औषधियों में इसका उपयोग होता है |
  • कौंच पाक शुक्राणु वर्धक एवं बलवर्धक आयुर्वेदिक औषधि है |
  • विर्यस्तंभन एवं शीघ्रपतन में कोंच बीज व मूल बहुत फायदेमंद होता है |
  • कामसुधा योग का सेवन करें |

यह भी पढ़ें :- कौंच है सबसे अच्छी पुरुष कामशक्ति वर्धक दवा |

25. जमीकंद (सुरण) है Shukranu badhane ki dawa |

इसे ओल के नाम से भी जाना जाता है | इसका मूल आयुर्वेदिक दवा बनाने के लिए उपयोग में लिया जाता है | यह अग्निदीपक, बल वर्धक, शुक्रजनक एवं अर्श नाशक होता है | शुक्राणु बढाने के लिए इसका सेवन फायदेमंद होता है |

  • शुक्राणु की कमी में इसकी कंद का चूर्ण दूध के साथ सेवन करें |
  • यह वीर्य को गाढ़ा करता है |
  • सुरणमोदक चूर्ण का उपयोग करें |

26. शुक्रजनन में बहुत फायदेमंद है माष (उड़द) करें इसका सेवन |

सभी दालें पुष्टिवर्धक होती हैं | उड़द में बल वर्धक, शुक्रजनन एवं वाजीकरण गुण होते हैं | उड़द की दाल शुक्र जनन के लिए बहुत उपयोगी दवा है | Shukranu badhane ki dawa के रूप में इसका उपयोग :-

  • वीर्य की अल्पता (शुक्राणु की कमी) में उड़द दाल की खीर बना कर खावें |
  • वाजीकरण के लिए उड़द के मोदक बना कर खावें |
  • उड़द की दाल का सेवन पुरुष कामशक्ति बढाने के लिए करें |

27. गजपुत्री (रेणुका) के बीज हैं शुक्राणु बढाने की आयुर्वेदिक दवा (Shukranu badhane ki dawa) |

रेणुका लता या बेल प्रजाति की वनस्पति है | यह नेपाल एवं आसाम में होती है | इसके बीज बहुत उत्तम औषधि के रूप में काम आते है | रेणुका बीज पाचन वर्धक एवं नपुंसकता नाशक होते हैं | शुक्राणु बढाने की दवा के तौर पर इसका उपयोग करते हैं | इसका सेवन करके शुक्राणु की कमी दूर करें |

  • इसके बीजो का चूर्ण दूध के साथ सेवन करें |
  • वृहतयोगराज गुग्गुलू का सेवन करें |
  • यह शक्ति वर्धक एवं शुक्र वर्धक होता है |

28. आम खाने से दूर हो जाएगी शुक्राणुओं की कमी |

फलों का राजा कहे जाने वाला ये फल जितना स्वादिष्ट है उतना ही गुणकारी भी है | इसमें बलकारक, शुक्रवर्धक, ह्रदय हितकारी एवं वाजीकर गुण होते हैं | आम खाने से शुक्राणु का उत्पादन बढ़ता है | Shukranu badhane ki dawa के रूप में इसका सेवन करना चाहिए |

  • आम खाने से शुक्राणु की कमी दूर होती है |
  • चंदनासव में इसका उपयोग होता है |
  • चंदनासव बलवर्धक एवं वीर्यवर्धक औषधि है |
  • महिलाओं में यौन समस्याओं के लिए पुष्यानुग चूर्ण में इसका उपयोग होता है |

जाने चंदनासव के फायदे

29. धातुवर्धक है दुग्धिका, शुक्राणु की कमी में करें इसका सेवन |

इसे दुधी के नाम से भी जाना जाता है | यह वर्षायु में उगती है | भारत के उष्ण प्रदेशो में पायी जाने वाली यह वनस्पति बहुत गुणकारी होती है | इसके पंचाग औषधि के रूप में उपयोग में लिए जाते हैं | यह धातुवर्धक एवं पुष्टि वर्धक होती है |

  • इसके पंचाग का रस शुक्राणु बढाने के लिए लाभप्रद होता है |
  • बालरक्षक तेल में प्रयोग किया जाता है |

और पढ़ें :- धातुवर्धक जड़ी बूटियां एवं दवा

30. Shukranu badhane ki dawa के रूप में धतुरा का सेवन करें |

धत्तूर या धतुरा का आयुर्वेद में बहुत से रोगों की दवा बनाने के लिए उपयोग किया जाता है | भारत में सर्वत्र पायी जाने वाली यह जड़ी बूटी बहुत गुणकारी है | इसके फल , पुष्प एवं बीज का उपयोग औषधियों में किया जाता है | यह शुक्र स्तंभक एवं शीघ्रपतन नाशक औषधि है | पुरुष कामशक्ति बढाने में यह बहुत लाभदायी है | शुक्राणु की कमी को दूर करने के लिए करे प्रयोग :-

  • शुक्राणु बढाने के लिए शुद्ध धत्तूर बीज, अकरकरा एवं लवंग को खरल करके 1 महीने तक सेवन करें |
  • धातु दुर्बलता के लिए धत्तूर बीज, केसर, जायफल एवं शीलाजीत को गाय के दूध में पका कर सेवन करें |
  • ह्रदय रोगी को इसका सेवन नहीं करना चाहिए |
  • मर्दाना ताकत बढाने के लिए पारद-गंधक की कज्जली को धतूरे के तेल से घोटकर दूध के साथ सेवन करें |

जाने धातु दुर्बलता क्या है एवं इसका आयुर्वेदिक उपचार

31. खरेंटी (बला) है शुक्राणु बढाने की उत्तम आयुर्वेदिक दवा |

समस्त भारत में पायी जाने वाली यह वनस्पति एक बलवर्धक एवं शुक्रल (शुक्राणु बढाने वाली) औषधि है | इसके बीज एवं मूल का उपयोग औषध निर्माण में होता है | शुक्राणु बढाने एवं धातु दुर्बलता के लिए यह बहुत कारगर औषधि है | जाने इसका उपयोग कैसे करें:-

  • शुक्राणु बढाने के लिए इसके मूल का चूर्ण दूध के साथ लें |
  • इसकी कच्ची फली स्तंभक होती है |
  • शीघ्रपतन में फली को शक्कर के साथ सेवन करें |
  • बला के पंचांग का स्वरस सेवन करें |
  • धातु दुर्बलता में शतावरी, बला बीज एवं विदारीकन्द को दूध के साथ सेवन करें |

32. कशेरुक का सेवन कर वीर्य अल्पता (शुक्राणु की कमी) को दूर करें |

इसे राज कशेरुक या चिंचोढ भी बोला जाता है | इसके मूलकंद का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है | बार बार होने वाले गर्भपात की यह बहुत ही उत्तम औषधि है | शुक्रवर्धन के लिए इसका उपयोग किया जाता है | शुक्राणु बढाने के लिए :-

  • इसके मूल कंद का चूर्ण दूध के साथ सेवन करें |
  • स्तन्यवृद्धि के लिए भी इसका चूर्ण लाभदायक है |

और पढ़ें :- ब्रैस्ट बढाने की आयुर्वेदिक दवा

33. पेठा (कुष्माण्ड) खाने से दूर हो जायेगी शुक्राणु की कमी (Shukranu badhane ki dawa) |

भारत के सभी प्रान्तों में पेठा पाया जाता है | इसके उपयोग से आप सभी परिचित हैं | यह पुष्टि कारक एवं शुक्र जनक होता है | इसका सेवन करने से शरीर में शुक्राणु जनन में वृद्धि होती है | पेठा के बीज एवं फल खा कर शुक्राणु की कमी को दूर किया जा सकता है |

34. शुक्राणु बढाने की दवा है तरबूज, करें इसका सेवन |

तरबूज का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है | यह जितना स्वादिष्ट है उतना ही गुणकारी भी | गर्मियों में इसका सेवन बहुत लाभदायी होता है | इसके बीज, मज्जा एवं फल का उपयोग बहुत गुणकारी होता है | शुक्राणु बढाने के लिए इसका उपयोग करें :-

  • रोजाना तरबूज खाने से शुक्राणु की कमी दूर होती है |
  • इसका सेवन करने से तृप्ति का अहसास होता है |
  • इसके बीज बल वर्धक होते हैं |
  • तरबूज के बीजो का उपयोग मेवे के रूप में किया जाता है |
  • इसके बीजो का सेवन करने से वीर्य वर्धन होता है |

35. शुक्रजनक (Shukranu badhane ki dawa) है जीवंती |

इसे डोडीशाक भी कहते हैं | यह पश्चिम एवं दक्षिण भारत में पायी जाती है | इसके मूल का उपयोग Shukranu badhane ki dawa के रूप में किया जाता है | शुक्राणु बढाने के लिए :-

  • जीवंती मूल एवं सेमल कंद चूर्ण दूध घृत के साथ सेवन करें |
  • जीवन्त्यादिघृत का सेवन करें |
  • च्यवनप्राश में भी इसका उपयोग होता है |

शुक्राणु बढाने के लिए त्रिवंग भस्म बहुत कारगर आयुर्वेदिक औषधि है |

जाने शीघ्रपतन एवं शुक्राणु की कमी में त्रिवंग भस्म के फायदे |

यहाँ पर दी गयी जानकारी सिर्फ आपके ज्ञानवर्धन के लिए है | किसी भी रोग में इसे चिकित्सकीय सलाह ना माने |

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