आयुर्वेदिक एंटीबायोटिक हर्ब(Antibiotic Herb) और मेडिसिन

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Antibiotic Herb के बारे में बताने से पहले बैक्टीरिया (जीवाणु) के बारे में जान लेना जरुरी है | हमारे शरीर में लाखों जीवाणु(बैक्टीरिया) रहते हैं | इनमें से कुछ बैक्टीरिया अच्छे होते है एवं कुछ शरीर के लिए हानिकारक | सामान्यतः हानिकारक जीवाणु हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण नष्ट हो जाते है या फिर वो अपनी संख्या नहीं बढ़ा पाते | लेकिन रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाए तो ये जीवाणु शरीर में घातक रोगों को जन्म देते हैं |

antibiotic herbs
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हानिकारक जीवाणुओं से होने वाले रोगों कुछ प्राणघातक रोग :-

  • प्लेग
  • नेमोनिया
  • क्षय
  • हैजा
  • तपेदिक
  • मियादी बुखार जैसे प्राणघातक रोग शामिल हैं |

एंटीबायोटिक दवाओं के रूप में आधुनिक चिकित्सा ने इन रोगों से लोगों की जान बचाने का काम किया है | लेकिन एंटीबायोटिक दवाओं का शरीर पर बहुत घातक दुष्प्रभाव होता है | किडनी, लीवर एवं हार्ट के लिए एंटीबायोटिक मेडिसिन दुष्प्रभावी होती हैं | लम्बे समय तक एवं अधिक मात्रा में सेवन से व्यक्ति के शरीर पर इनके प्राणघातक दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैं | कुछ सामान्य दुष्प्रभाव :-

  • किडनी स्टोन या पथरी की समस्या |
  • लीवर में सुजन |
  • डायरिया |
  • पेट में समस्या |
  • खून में दुष्प्रभाव |
  • पाचन ख़राब हो जाना |
  • मुंह में इन्फेक्शन हो जाना |

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Ayurvedic Antibiotic Herbs का उपयोग कर दुष्प्रभावों से बचें |

इन दुष्प्रभावों से बचने के लिए हमें पुनः पुरातन आयुर्वेद चिकित्सा शैली को अपनाना पड़ेगा | आयुर्वेद बहुत ही व्यापक एवं प्रभावी चिकित्सा शैली है | ऐसी बहुत सी जड़ी बूटियां (एंटीबायोटिक हेर्ब्स ) हैं जिनका उपयोग हम आयुर्वेदिक एंटीबैक्टीरियल मेडिसिन के रूप में कर सकते हैं | आइये जानते हैं आयुर्वेदिक एंटीबायोटिक हेर्ब्स (Antibiotic Herbs) के बारे में |

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15 बेस्ट आयुर्वेदिक एंटीबैक्टीरियल हेर्ब्स एंड मेडिसिन्स

आयुर्वेद सबसे प्राचीन एवं उत्तम चिकित्सा पद्धति है | आयुर्वेद औषध शास्त्र भी बहुत व्यापक है इसमें लगभग हर रोग के इलाज के लिए दवाओं और जड़ी बूटीयों का उल्लेख मिलता है | प्राचीन काल से ही हल्दी, तुलसी एवं अजवायन जैसी जड़ी बूटियों (Antibiotic Herbs) का उपयोग जीवाणुओं से होने वाले रोगों से रक्षा एवं उपचार के लिए किया जाता रहा है | इस लेख में हम उन 15 जड़ी बूटियों के बारे में बतायेंगे जिनका उपयोग Antibiotic Herbs के रूप में करके रोगों एवं अंग्रेजी एंटीबायोटिक दवाओं से होने वाले दुष्प्रभाव, दोनों से बचा जा सकता है |

1. हल्दी है जीवाणु रोधी गुणों (Antibiotic Herbs) से भरपूर |

इसे हरिद्रा के नाम से भी जाना जाता है | मसालों के रूप में हल्दी का उपयोग आप सभी जानते हैं | हल्दी में एंटीबैक्टीरियल एवं एंटीफंगल गुण होते हैं | हमारे यहाँ प्राचीन काल से ही हल्दी का उपयोग बहुत से रोगों के उपचार के लिए किया जाता रहा है | आइये जानते है एंटीबैक्टीरियल हेर्ब्स के रूप में हल्दी के औषधीय गुणों के बारे में :-

  • Antibacterial गुणों से भरपूर होती है हल्दी |
  • हल्दी में एंटीबायोटिक गुण होते हैं |
  • स्किन इन्फेक्शन में हल्दी बहुत लाभदायी है |
  • जीवाणु से होने वाले रोगों नेमोनिया, श्वास एवं एलर्जी में बहुत उपयोगी है |
  • शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है |
  • एंटीबायोटिक दवाओं से होने वाले दुष्प्रभाव को कम करती है |
  • एंटीबायोटिक हेर्ब्स के रूप में हल्दी का सेवन करने से जीवाणुओं से होने वाले रोगों से बचा जा सकता है |

2. दारुहरिद्रा है आयुर्वेदिक एंटीबायोटिक मेडिसिन |

इसे इंडियन बर्बेर्री भी बोला जाता है | यह एक छोटा झाड़ीनुमा वृक्ष है | इसके फल, मूल एवं काण्ड का उपयोग दवा के रूप में किया जाता है | दारुहल्दी में एंटीबायोटिक, एंटीऑक्सीडेंट एवं एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं | इसका उपयोग करके बैक्टीरिया से होने वाले रोगों से बचा जा सकता है | Antibiotic Herbs में दारुहरिद्रा बहुत उपयोगी हर्ब है | आइये जानते है इसके फायदे एवं उपयोग :-

  • ज्वर में बहुत उपयोगी औषधि है | बुखार में इसकी जड़ एवं छाल का काढ़ा सेवन करें |
  • एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण यह जीवाणु के विकास को रोकती है |
  • यह रक्त में शर्करा को कम करती है इसलिए इसका उपयोग डायबिटीज में भी किया जाता है |
  • यह एक बेस्ट आयुर्वेदिक एंटीबैक्टीरियल मेडिसिन है |
  • दस्त एवं पेचिस जैसी समस्याओं में बहुत लाभदायी है |
  • एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण कैंसर के रोगियों के लिए इसका सेवन फायदेमंद होता है |

3. कुष्ठ का उपयोग करें आयुर्वेदिक एंटीबायोटिक दवा के रूप में |

Antibiotic Herbs वो जड़ी बूटियां हैं जिनमे जीवाणु रोधी गुण पाए जाते है | एंटीबायोटिक दवा की जगह इनका उपयोग करके शरीर पर एंटीबायोटिक दवाओं से होने वाले दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है | कुष्ठ या कूठ भी एक हर्बल एंटीबायोटिक दवा के रूप में काम आने वाली जड़ी बूटी है | आइये जानते हैं इसके स्वास्थ्य लाभ :-

  • इसमें एंटीबायोटिक एवं एंटी एलर्जिक गुण होते हैं |
  • कफ एवं श्वास की समस्या में बहुत उपयोगी है |
  • जीवाणुओं से होने वाले रोगों में लाभदायी है |
  • पाचन शक्ति बढ़ाती है |
  • हर्बल एंटीबायोटिक के रूप में इस्तेमाल करे |

4. हर्बल एंटीबायोटिक मेडिसिन है अजवायन, जानें इसके फायदे |

अजवायन का उपयोग बहुत से घरेलु नुश्खों में किया जाता है | पेट दर्द में यह बहुत उपयोगी है | एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण इसका उपयोग एक हर्बल एंटीबायोटिक मेडिसिन के रूप में किया जाता है | Antibiotic Herbs के रूप में इसके फायदे :-

  • पेट की सभी समस्याओं में उत्तम औषधि है |
  • प्लीहा रोग में बहुत उपयोगी है |
  • पाचक के रूप में उपयोग करें |
  • शीतपित एवं ज्वर में उपयोगी है |
  • कृमि नाशक है |

5. लहसुन है सबसे उत्तम आयुर्वेदिक एंटीबायोटिक मेडिसिन |

लहसुन हमारे दैनिक खान-पान का हिस्सा है | आयुर्वेद में लहसुन का उपयोग प्राचीन काल से एक Antibiotic Herb के रूप में किया जा रहा है | इसमें Allicin कंपाउंड होता है जो एक प्रभावी एंटीबायोटिक है | लहसुन जीवाणुओं के प्रोडक्शन को रोकता है एवं उन्हें नष्ट करता है | यह जीवाणु जनित रोगों में बहुत कारगर है | आइये जानते है इसके फायदे :-

  • बेहतरीन एंटीफंगल एवं एंटीबायोटिक हर्बल मेडिसिन है |
  • त्वचा में होने वाले फंगल इन्फेक्शन में लहसुन का रस रामबाण औषधि का काम करता है |
  • जीवाणु से होने वाले ज्वर एवं अन्य रोगों में उपयोगी है |
  • हानिकारक बैक्टीरिया को ख़त्म कर देता है |
  • नेमोनिया, श्वास, कफ विकार जैसे रोगों में हर्बल एंटीबायोटिक का काम करता है |
  • आयुर्वेदिक एंटीबैक्टीरियल हर्ब के रूप में इसको उपयोग फायदेमंद है |

और पढ़ें :- लहसुन खाने के अनगिनत फायदे

6. Antibiotic Herbs ही नही अमृत के समान है गिलोय |

गिलोय के फायदों से आप सभी परिचित होंगे | यह औषधीय गुणों से भरपूर है | गिलोय में एंटीबायोटिक, एंटीएलर्जिक, एंटीऑक्सीडेंट एवं एंटी डायबिटिक गुण होते है | आयुर्वेद में गिलोय को अमृत के समान बताया गया है | जितनी भी Antibiotic Herbs हैं उनमे गिलोय सबसे महत्वपूर्ण है | शरीर के रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढाने के लिए गिलोय का सेवन बहुत फलकारी होता है | आइये जानते हैं हर्बल एंटीबायोटिक गिलोय के लाभ एवं उपयोग :-

  • यह सभी जीवाणु जनित रोगों का रामबाण इलाज है |
  • एंटीबायोटिक गुणों के कारण इसका उपयोग बहुत सी आयुर्वेदिक दवाओं में किया जाता है |
  • डेंगू, स्वाइनफ्लू एवं जीका वायरस जैसे रोगों में बहुत असरदार है |
  • डायबिटीज रोग में इसका उपयोग अत्यंत गुणकारी है |
  • नेचुरल इम्युनिटी बूस्टर है |
  • आयुर्वेदिक एंटीबैक्टीरियल मेडिसिन है गिलोय |

जाने गिलोय का इस्तेमाल हर रोग की दवा के रूप में कैसे करें

7. आयुर्वेदिक एंटीबैक्टीरियल हर्ब के रूप में पटोल का करें उपयोग |

इसे परवल के नाम से भी जाना जाता है | यह ज्वर एवं कृमि नाशक गुणों वाली लता है | एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण इसका उपयोग एंटीबायोटिक दवाओं में किया जाता है | इसके अलावा त्वचा विकारों में भी यह बहुत लाभदायी औषधि है | आइये जानते है इसके उपयोग एवं फायदे:-

  • पटोल का क्वाथ सभी प्रकार के ज्वर में लाभकारी है |
  • एलर्जी में इसका उपयोग फायदेमंद है |
  • त्वचा रोगों में पटोल के पत्तो का रस लगाने से फायदा होता है |

8. Antibiotic Herbs शोभांजन का उपयोग कैसे करें ?

सहजन और ड्रम स्टिक के नाम से भी जाना जाता है | सहजन के बीज बहुत गुणकारी होते हैं | इनमे एंटीबैक्टीरियल गुण होते है जिसकी वजह से Antibiotic Herbs के रूप में इनका उपयोग किया जाता है |

  • बैक्टीरिया के विकास को रोकता है |
  • ज्वर में उपयोगी औषधि है |
  • आयुर्वेदिक एंटीबायोटिक दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है |
  • आंत्रकृमि में सहजन की फली का साग बहुत उपयोगी है |
  • दांतों में कीड़े पड़ने पर इसके क्वाथ से कुल्ले करें |

9. सत्यानाशी है सबसे अच्छी आयुर्वेदिक एंटीबैक्टीरियल मेडिसिन |

चर्म रोगों की रामबाण औषधि के रूप में काम आने वाला यह पौधा अपने गुणों के कारण Antibiotic Herbs के रूप में भी उपयोगी है | इसमें एंटीफंगल गुण होते हैं | जिसके कारण इसका उपयोग त्वचा रोगों में बहुत लाभदायी होता है | इसके उपयोग :-

  • कफज विकारों में उपयोगी है |
  • नेचुरल एंटीफंगल एवं एंटीबायोटिक है |
  • त्वचा रोगों में बहुत कारगर है |

10. तेजपत्र का उपयोग करें Antibiotic Herbs के लिए |

इम्युनिटी बढाने के लिए इसका उपयोग फायदेमंद है | च्यवनप्राश में इसका उपयोग किया जाता है | ज्वर एवं कफ में तेजपात का सेवन लाभदायी होता है | आयुर्वेदिक एंटीबायोटिक के रूप में इसका सेवन किया जा सकता है | तेजपत्र के उपयोग एवं फायदे :-

  • रोगप्रतिरोधक क्षमता बढाता है |
  • ज्वर में उपयोगी है |
  • कफ को नष्ट करता है |
  • दमे की समस्या में लाभदायी है |

11. Antibiotic Herb गुग्गुलु जीवाणु नाशक है |

गुग्गुलु बैक्टीरिया से होने वाले रोगों में बहुत असरदार औषधि का काम करता है | यह एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है | हर्बल एंटीबैक्टीरियल मेडिसिन के रूप में इसका उपयोग कर सकते हैं | एंटीबायोटिक हर्ब के तौर पर गुग्गुलु का उपयोग :-

  • यह जीवाणु (बैक्टीरिया) नाशक है |
  • पुराने कफ विकारो में इसका उपयोग बहुत लाभदायी होता है |
  • सभी चर्म रोगों में इसका उपयोग फायदेमंद होता है |
  • रोगप्रतिरोधक क्षमता भी बढाता है |

12. बच का उपयोग करें हर्बल एंटीबायोटिक के रूप में |

इसे अंग्रेजी में स्वीट फ्लैग के नाम से जाना जाता है | यह नेचुरल एंटीबायोटिक है | सभी प्रकार के जीवाणु जनित रोगों में इसका उपयोग होता है | जाने इसका उपयोग :-

  • बैक्टीरिया नाशक है |
  • बुखार में बहुत उपयोगी है |
  • श्वास एवं खांसी के लिए कारगर औषधि है |
  • उपयोगी एंटीबायोटिक हर्ब है |
  • ह्रदय की गति को मंद करता है |

13. वासा है एंटीबायोटिक मेडिसिन का आयुर्वेदिक विकल्प |

इसे स्थानीय भाषा में अडूसा के नाम से भी जाना जाता है | इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं | वासा का उपयोग श्वास, कफ, कुष्ठ, एवं त्वचा रोगों में किया जाता है | ज्वर में भी इसका उपयोग फायदेमंद होता है | जानते है आयुर्वेदिक एंटीबायोटिक दवा के रूप में इसका उपयोग :-

  • पीलिया रोग में इसका उपयोग बहुत असरदार रहता है |
  • ज्वर में इसका सेवन करने से फायदा होता है |
  • Antibiotic Herbs के रूप में अच्छा आयुर्वेदिक विकल्प है |
  • त्वचा रोगों की असरदार दवा है |

14. त्रिजात को Antibiotic Herbs के रूप में उपयोग में लिया जा सकता है |

इलायची, तेजपत्र एवं दालचीनी के मिश्रण को त्रिजात कहते हैं | ये तीनो जड़ी बूटियां अपने एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण बहुत उपयोगी होती है | यह एक औषधि है | जिसका उपयोग मुख्यतः पेट की समस्यों में किया जाता है | हर्बल एंटीबायोटिक के रूप में भी यह बहुत उपयोगी है | इसका उपयोग करने से बैक्टीरिया का प्रभाव कम हो जाता है |

15. जीवाणु(बैक्टीरिया) जनित रोगों में कुटकी का उपयोग करें |

यह हिमालय में पायी जाने वाली वनस्पति है | प्राचीन काल से ही कुटकी का उपयोग नेचुरल एंटीबायोटिक दवा के रूप में किया जा रहा है | उदर रोग, ज्वर, खांसी एवं श्वास की समस्या में इसका उपयोग अत्यंत लाभदायी होता है | यह हानिकारक बैक्टीरिया के शरीर पर होने वाले दुष्प्रभाव को कम करती है | आयुर्वेद में इसका उपयोग Antibiotic Herbs के रूप में किया जाता है | जानते हैं इसके उपयोग :-

  • उदर रोगों में कुटकी का उपयोग करें |
  • कुटकी का अर्क बुखार की आयुर्वेदिक दवा है |
  • पीलिया में कुटकी का क्वाथ शहद के साथ मिलकर खाने से बहुत फायदा होता है |
  • यह एंटीबायोटिक गुणों से भरपूर है |
  • आरोग्यवर्धिनी वटी में इसका उपयोग होता है |

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यहाँ पर दी गयी जानकारी सिर्फ आपके ज्ञानवर्धन के लिए है | किसी भी दवा का उपयोग करने से पहले चिकित्सक का उचित परामर्श अवश्य ले लेवें |

धन्यवाद !

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