प्रेगनेंसी में पहले 12 सप्ताह (Weeks) के लक्षण – Diagnosis of Early Pregnancy

प्रेगनेंसी के शुरूआती सप्ताह के लक्षण 

पुरुष एवं महिला में सहवास होने के बाद निषेचन की क्रिया होती है | जैसे – जैसे समय बीतता जाता है महिला में प्रेगनेंसी के लक्षण प्रकट होने लगते है | प्रेगनेंसी चेक करने के लिए आजकल टेस्ट किट का इस्तेमाल किया जाने लगा है | लेकिन फिर भी बहुत सी एसी महिलाऐं है जो गर्भाधान की कोई प्लानिंग भी नहीं कर रही होती है एवं उनको भूलवश गर्भाधान हो जाता है | अब जब तक अगले महीने के पीरियड्स नहीं आ जाते महिला इस और ध्यान भी नहीं देती | लेकिन जब कभी पीरियड्स मिस हो जाते है तो वे घबरा जाती है |

 

शुरूआती weeks में होने वाले प्रेगनेंसी के लक्षणों का सिर्फ गर्भवती महिला को ही आभास होता है | जिसे सद्योगृहीत गर्भा के लक्षण भी कहा जाता है | अगर महिला ध्यान और संयम से अपने शरीर में होने वाले परिवर्तनों को जाने तो उसे गर्भवती होने का पता आसानी से चल सकता है |

प्रेगनेंसी के लक्षण शुरूआती सप्ताह में लक्षण / Pregnancy Symptoms in First Week in Hindi

आचार्य चरक ने सद्योगृहीत गर्भा की निम्नलिखित लक्षण बताये है |

“निष्ठविका गौरवमंग्सादस्तन्द्राप्रह्श्रो हृदये व्यथा च |

तृप्तिश्च बीज्ग्रहण च योन्या ग्रभस्य सद्योनुगत्स्य लिंगम ||

अर्थात

  • मुंह से बार – बार पानी आना |
  • शरीर में भारीपन रहना |
  • अंगो में स्थिलता का अहसास होना |
  • तन्द्रा |
  • रोमांच महसूस करना |
  • घबराहट रहना , हृदय में वेदना का अहसास होना |
  • पुरुष सहवास में पूर्ण संतुष्टि का महसूस होना |
  • शारीरिक थकावट लगाना |
  • ग्लानी, प्यास अधिक लगना , गुप्तांगो में स्फुरण या परिवर्तन लगना |
  • वमन की इच्छा होना या जी मचलाना |

इन लक्षणों के आधार पर महिला अपने प्रेग्नेंट होने का पता लगा सकती है | लेकिन ये लक्षण सभी महिलाओं को महसूस हो ये जरुरी नहीं है | क्योंकि हरेक महिला की संवेदनशीलता अलग – अलग होती है | कोई एक महिला इन लक्षणों को महसूस कर सकती है, वहीँ कोई दूसरी महिला के लिए इन लक्षणों को पहचानना मुस्किल होता है | वैसे वर्तमान समय में प्रेगनेंसी की जांच बहुत ही आसन है | इसके लिए सिर्फ एक प्रेगनेंसी टेस्ट किट की आवश्यकता होती है और बस आप घर पर ही प्रेगनेंसी चेक कर सकती है |

प्रारंभिक (12 weeks) गर्भावस्था के लक्षण / Symptoms of Early (12 Weeks) Pregnancy

एक महिला का सम्पूर्ण प्रेगनेंसी काल या गर्भावस्था का समय लगभग 280 दिन का होता है | इनमे से प्रथम तीन महीनो में महिलाओं के शरीर में निम्न लक्षण प्रकट होते है –

1. व्यव्हार में परिवर्तन 

माहवारी आने के तीसरे सप्ताह में महिला में अंडाणु के निर्माण का समय होता है | इस समय अगर महिला गर्भवती है तो उसके स्वभाव में परिवर्तन होता है | इस समय हार्मोनल परिवर्तन के कारण महिला का व्यवहार भी परिवर्तित रहता है | कभी स्वाभाव उखड़ा हुआ या कभी बहुत ही सेंसेटिव हो जाता है |

2. पीरियड्स का न आना 

शुरूआती तीन महीनो तक अगर मासिक स्राव न आये तो इसे गर्भवती महिला का एक लक्षण कहा जा सकता है | वैसे निषेचन के अगले महीने से ही मासिक धर्म बंद हो जाता है | लेकिन कई महिलाओं में किसी अन्य कारण से भी मासिक धर्म की अवधि बढ़ जाती है |

3. जी मचलाना

ज्यादातर प्रथम तीन महीनों में गर्भवती महिलाओं को जी मचलाने (Morning Sickness) की शिकायत रहती है | ये प्राय: सुबह के समय अधिक होता है एवं कई बार महिला को उल्टी भी हो जाती है |

4. स्तनों में परिवर्तन 

शुरूआती तीन महीनो में ही गर्भवती महिला के स्तनों में काफी बदलाव आ जाता है | स्तनों का रंग थोडा श्यामवर्णी हो जाता है | स्तन कुच्छ बढ़ने लगते है एवं स्तनों के निप्पल को दबाने पर पीताभ रंग का जलीय द्रव्य बाहर निकलने लगता है | साथ ही महिलाओं को स्तनों में कुछ पीड़ा का भी सामना करना पड़ता है |

5. अन्य लक्षण 

प्रथम 12 सप्ताह में इन लक्षणों के अलावा कुछ अन्य लक्षण भी गर्भवती महिलाओं में देखने को मिलते है | जैसे रेगुलर आहार का सेवन करने के बाद भी पेट आदि का फुला हुआ लगना , बार – बार पेशाब आना, किसी विशेष गंध से परेशानी होना , आँखों की पलकों का भरी होना , भोजन से अरुचि, शारीर में थकावट और भारीपन का महसूस होना , पैरों में सुजन, मुंह में बार – बार पानी आना , खट्टे पदार्थों के सेवन की इच्छा बढ़ना , नींद का अधिक आना आदि लक्षण है जो शुरुआती तीन महीनो में महिलाओं को होने लगते है |

धन्यवाद |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

जानें आहार के 15 नियम हमेंशा इनका पालन करके ही आहार ग्रहण करना चाहिए

प्रत्येक व्यक्ति के लिए ये नियम लागु होते है इन्हें सभी को अपनाना चाहिए पढ़ें अधिक 

Open chat
Hello
Can We Help You