आयुर्वेद की सांकेतिक परिभाषा क्या है? कर्म आधारित द्रव्यों के प्रकार एवं उनका विवरण

आयुर्वेद में विभिन्न औषधीय द्रव्यों के लिए सांकेतिक नाम काम में लिया जाता है | इनका नाम कर्म के आधार पर निर्धारित होता है | अर्थात कहने को हम कह सकते है कि कर्म के आधार पर औषध द्रव्यों के प्रकार का निर्धारण होता है जैसे जो जड़ी बूटियां या द्रव्य जठराग्नि को प्रदीप्त करते हैं उन्हें आयुर्वेद में दीपन द्रव्य कहते है |

इसी प्रकार विभिन्न जड़ी-बूटियों का समूह जो एक विशेष कार्य को करें वो एक समूह में आते है एवं उन्हें एक विशेष सांकेतिक नाम से जाना जाता है |

यहाँ हमने आयुर्वेद चिकित्सा में काम आने वाले सभी सांकेतिक नामों को पारिभाषिक रूप से समझाया है | चलिए जानते है कर्मों के आधार पर द्रव्यों के प्रकार एवं उनके सांकेतिक नाम

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सांकेतिक नाम (कर्म आधारित द्रव्यों के प्रकार)

यहाँ हमने 50 से भी अधिक सांकेतिक नामों के अर्थ एवं परिभाषा के बारे में उल्लेख किया है | आप सभी का कर्मानुसार अर्थ एवं परिभाषा पढ़ सकते है |

1. दीपन द्रव्य क्या है ?

जो द्रव्य जठराग्नि को प्रदीप्त करता किन्तु आम को नहीं पचाता, उसे दीपन कहते है, जैसे सौंफ, अजवायन आदि |

2. पाचन द्रव्य क्या है ?

जो द्रव्य आम को पचाता और जठराग्नि को प्रदीप्त नहीं करता, उसे पाचन कहते है | अर्थात वे द्रव्य जो आम को पचाकर भूख को न बढ़ाएं उन्हें पाचन द्रव्य कहते है | उदहारण के लिए नागकेशर |

3. संशमन द्रव्य क्या है ?

जो द्रव्य वात, पित्त और कफादि दोषों को न शमन करे और न प्रकुपित करे किन्तु बढे हुए दोषों का शमन कर दे, उसे ‘संशमन’ कहते है | जैसे गिलोय आदि

4. अनुलोमन क्या है ?

जो द्रव्य अपक्व मल को पकाकर अधोमार्ग द्वारा देह से बाहर निकाल दे, उसे अनुलोमन कहते है | जैसे हरड |

5. भेदन द्रव्य कौनसे हैं ?

जो द्रव्य पतला-गाढ़ा या पिंडाकार रूप में मल को भेदन करके अधोमार्ग से गिरा दे, उसे भेदन कहते है | यथा कुटकी जड़ी बूटी इसका एक उदहारण है |

6. विरेचन द्रव्य क्या है ?

जो द्रव्य पक्व अथवा अपक्व मल को पतला बनाकर अधोमार्ग से बाहर फेंक दे, उसे ‘विरेचन द्रव्य’ कहते है | जैसे त्रिवृता, दंती, इन्द्रायण मूल |

7. वामक किसे कहते है ?

जो द्रव्य कच्चे ही पित्त-कफ एवं अन्नादि को मुख से बाहर बलात रूप से बाहर निकाल फेकें, उसे वामक द्रव्य कहा जाता है | जैसे मनैफल |

8. शोधक किसे कहते है ?

जो द्रव्य देह में संचित मलों को अपने स्थान से हटाकर मुख या अधोमार्ग द्वारा निकाल दे, उसे ‘शोधक’ कहते है | यथा – देवदाली (बेन्दाल) का फल |

9. छेदन द्रव्य क्या है ?

जो द्रव्य देह में चिपके हुए कफादी दोषों को बलात उन्मूलन (उखाड़ना) करता है, उसको ‘छेदन’ कहते है | यथा – सब प्रकार के क्षार, कालीमिर्च, शिलाजीत आदि |

10. लेखन द्रव्य किसे कहते है ?

जो जड़ी-बूटियां शरीरस्थ धातु (रस रक्तादी) और मल (मूत्र – पुरिषादी) को सुखाकर उखाड़ कर बाहर निकाल दे, उसे लेखन द्रव्य कहा जाता है | लेखन कर्म करने वाली जड़ी-बूटियां है – शहद, गर्मजल, बच, जौ आदि |

11. ग्राही जड़ी बूटियां कौनसी है ? (ग्राही किसे कहते है)

जो जड़ी-बूटियां (द्रव्य) दीपन और पाचन है एवं अपने उष्ण गुण के कारण शरीर में रहने वाले जल को सुखाकर उसे ग्राही कर देते है उन्हें ग्राही कहते है | यथा – सौंठ, जीरा, गज-पीपल आदि |

12. स्तम्भन किसे कहते है ?

जो द्रव्य रुक्ष, शीतल, कषाय और पाक में लघु गुण होने से वात-वृद्धक तथा स्तंभक गुणवाला हो, उसको स्तंभक कहते है | जैसे इन्द्र्जो और सोनापाठा (श्योनाक) आदि |

13. रसायन किसे कहते है ?

जो द्रव्य जरा (बुढ़ापा) और व्याधियों के आक्रमण से शरिर की रक्षा करें, उसे ‘रसायन’ कहा जाता है | जैसे गिलोय, गूगल, रूद्रवन्ति और हर्रे आदि |

14. वाजीकरण द्रव्य किसे कहते है ?

जिन द्रव्यों के सेवन से पुरुष की रति शक्ति की वृद्धि हो, अर्थात जिनका सेवन करने से यौन शक्ति का संचार हो वे वाजीकरण द्रव्य या औषधियाँ कहलाती है | जैसे – नागबला, कौंच के बीज और अश्वगंधा आदि |

15. शुक्रल क्या है ?

जिस द्रव्य के सेवन से शुक्र की वृद्धि हो, उसको ‘शुक्रल’ कहते है | जैसे अश्वगंधा, सफ़ेद मुसली, मिश्री और शतावरी आदि |

16. शुक्रप्रवर्तक किसे है ?

शुक्र (वीर्य) को उत्पन्न करने वाले एवं प्रवर्तन करने वाले आयुर्वेदिक द्रव्यों को शुक्र – प्रवर्तक कहते है | जैसे गो दुग्ध, उड़द, भिलावे की गिरी एवं आंवला |

17. सूक्ष्म द्रव्य किसे कहते है ?

शरीर के सूक्षम छिद्रों में जो द्रव्य प्रवेश कर जाय, उसे ‘सूक्ष्मद्रव्य’ कहते है | यथा – सेंधा नमक, शहद, नीम एवं एरंड आदि |

18. व्यवायी द्रव्य क्या है ?

व्यवायी द्रव्य वे होते है जो अपक्ववस्था में ही सम्पूर्ण शरीरी में फ़ैल जाये, फिर पचने लगे उसको व्यवायी कहते है | जैसे – अफीम, भांग आदि |

19. विकाशी क्या है ?

जो द्रव्य शरीर में फ़ैल कर ओज को सुखाकर जोड़ों के बंधन को ढीला करे, उसे ‘विकाशी’ कहते है | जैसे – सुपारी और कोद्रव आदि |

20. मदकारी द्रव्य कौनसे होते है ?

जो द्रव्य तमोंगुण प्रधान होते हैं और जिनके सेवन से बुद्धि का लोप हो जाता है, उन्हें ‘मद्कारी’ कहते है | जैसे – मद्य, ताड़ी आदि |

21. विष वर्ग के द्रव्य कौनसे है ?

जो द्रव्य व्यवायी, विकाशी, कफनाशक, मदकारक, आग्नेयगुण – विशिष्ट, जीवन नाशक और योगवाही हो, उसको ‘विष’ कहते है | जैसे – वत्सनाभ, संखिया, अफीम आदि |

22. प्रमाथी वर्ग के द्रव्य कौनसे है ?

जो द्रव्य अपनी शक्ति से रस- रक्वाही स्रोतों के भीतर संचित दोष (विकार) को दूर करता है, उसको ‘प्रमाथी’ कहते है | यथा कालीमिर्च और वच |

23. अभिष्यंदी द्रव्य क्या होते है ?

जो द्रव्य अपने प्रक्रम से रसवाही स्रोतों को अवरुद्ध कर शरीर में गुरुता उत्पन्न करे, उसे अभिष्यंदी द्रव्य कहते है | उदहारण के लिए दही एक अभिष्यंदी द्रव्य की श्रेणी में आता है |

24. योगवाही द्रव्य क्या है ?

जो द्रव्य पच्यामानाव्स्था में सांसर्गिक गुण को ग्रहण कर लेते है, उन्हें ‘योगवाही’ कहते है | यथा – शहद, घी, जल, तेल, पारद और लौह आदि धातु |

25. विदाही द्रव्य कौनसे है ?

जिस द्रव्य के सेवन से खट्टी – खट्टी डकारें आने लगे, प्यास लगे और हृदय में दाह हो तथा भोजन का परिपाक देर से हो, उसे विदाही कहते है |

26. शीतल द्रव्य कौनसे हैं ?

जो द्रव्य स्तंभक और ठंडा तथा सुखप्रद हो और प्यास, मूर्च्छा, दाह एवं स्वेद का शमन करें उसे शीतल द्रव्य कहते है |

27. उष्ण द्रव्य क्या है ?

जो द्रव्य शीत गुण के विपरीत अर्थात प्यास, दाह, मूर्च्छा और उत्पन्न करने वाला विशेषत: घाव को पकाने वाला हो उसे उष्ण द्रव्य कहा जाता है | ये द्रव्य उष्ण प्रकृति के होते है |

28. स्निग्ध द्रव्य कौनसे है ?

जो द्रव्य स्नेहयुक्त (चिकना) और कोमलता उत्पन्न करने वाला तथा बल वर्ण की वृद्धि करने वाला हो, उसे स्निग्ध कहते है |

29. त्रिकटु किसे कहते है ?

सोंठ, पिप्पल और कालीमिर्च के सम्भाग मिश्रण को ‘त्रिकटु’ कहते है |

30. त्रिफला किसे कहते है ?

आंवला, हर्रे और बहेड़ा के संभाग मिश्रण को ‘त्रिफला’ कहते है |

31. त्रिकंटक किसे कहते है ?

कटेली, धमाशा और गोखरू को ‘त्रिकंटक’ कहते है |

32. त्रिमद किसे कहते है ?

एकत्र मिले हुए वायविडंग, नागरमोथा और चित्रक को ‘त्रिमक के नाम से जानते है |

33. त्रिजात किसे कहते है ?

दालचीनी, तेजपता और इलायची के मिश्रण को त्रिजात कहते है |

34. त्रिलवण किसे कहते है ?

मिले हुए सेंधा नमक, काला नमक और विडनमक को ‘त्रिलवण’ कहते है |

35. क्षारत्रय किसे कहते है ?

यवक्षार, सज्जीखार और सुहागा के मिश्रण को ‘क्षारत्रय’ कहते है |

36. मधुरत्रय कौनसी जड़ी बूटियां होती है ?

न्यूनाधिक मात्रा में एकत्र मिले हुए घृत, मधु और गुड़ को मधुत्रय कहते है |

37. त्रिगंध क्या है ?

मिले हुए गंधक, हरिताल एवं मनेशिला को त्रिगंध कहते है |

38. चातुर्जात द्रव्य किसे कहते है ?

एकत्र मिले हुए दालचीनी, तेजपात, इलायची और नागकेशर को ‘चातुर्जात’ कहते है |

39. चातुर्भद्र किसे कहते है ?

एकत्र मिले हुए सोंठ, अतिस, मोथा और गिलोय को ‘चातुर्भद्र’ कहते है |

40. चातुर्बीज किसे कहते है ?

मेथी, अजवायन, काला जीरा और हालों के बीज को चातुर्बीज कहते है |

41. पंचवल्कल किसे कहते है ?

आम, बाद, गुलर, पीपल, पाकड़ इन पांचक्षीर वृक्षों के वल्क्लों के मिश्रण को पञ्चवल्कल कहा जाता है |

42. तृणपंचमूल किसे कहते है ?

एकत्र मिले हुए कुश, कांश, सरकंडा, डाभ और गन्ने के मूल को ‘तृणपंचमूल’ कहा जाता है |

43. अम्लपंचक किसे कहते है ?

एकत्र मिले हुए बिजौरा, संतरा, इमली, अम्लवेत और जम्भिरी निम्बू को ‘अम्ल्पन्चक’ कहा जाता है |

44. लघुपंचमूल किसे कहते है ?

शालिपर्णी, पृष्णपर्णी, छोटी कटेरी, बड़ी कटेली और गोखरू को ‘लघुपंचमूल’ कहा जाता है |

45. वृहतपंचमूल किसे कहते है ?

अरणी, श्योनाक, पाढ़ की छाल, बेल और गंभारी को ‘वृहतपंचमूल’ कहते है |

46. पंचकोल द्रव्य कौनसे होते है ?

एकत्र मिले हुए पीपल, पीपलामूल, च्वय, चित्रक, नागर (सोंठ) को पंचकोल कहा जाता है |

47. अष्टवर्ग के द्रव्य के कहते है ?

मेदा, महामेदा, काकोली, क्षीरकाकोली, जीवक, ऋषिभक, ऋद्दी और वृद्धि को ‘अष्टवर्ग’ कहते है |

48. दशमूल द्रव्य कौनसे होते है ?

लघुपंचमूल और वृहतपंचमूल को मिला देने से ‘दशमूल’ बन जाता है |

49. नवरत्न द्रव्य कौनसे होते है ?

हीरा, मोती, पन्ना, प्रवाल, लहसुनियाँ, गोमेदमणि, माणिक्य, नीलम और पुखराज – ये सभी नवरत्न द्रव्य कहलाते है |

50. सप्तधातु किसे कहते है ?

सुवर्ण, चांदी, ताम्र, बंग, यशद, शीशा और लोहा को ‘सप्तधातु’ कहते है |

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