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नागकेशर के स्वास्थ्य लाभ

नागकेशर एक सदाबहार वृक्ष है जो अधिकतर भारत में असम और बर्मा , बांग्लादेश ,श्रीलंका आदि देशो में बहुतायत से पाया जाता है | नागकेशर की पतिया पतली और घनी होती है इसलिए यह घने छायादार वृक्ष होता है | इसकी शाखाए और तना इतना कठोर होता है की इसे काटने वाले की कुल्हाड़ी मुद जाती है इसलिए इसे वज्रकाठ भी कहते है | नागकेशर के सूखे फुल औषध काम और रंग बनाने के काम आता है | नागकेशर के बीजो में गाढ़ा तेल निकलता है जिसे औषध उपयोग और दिया जलने के काम में लिया जाता है | भारत में इसके तेल को वात रोगों में मला जाता है |

पत्र – डेढ़ इंच चौड़े नुकीले 2″ से 6″ तक लम्बे झुके हुए रहते है |

पुष्प – वसंत ऋतू में सफ़ेद या नारंगी रंग के 2″ से 4″ की परिधि में गोल लगते है | सफ़ेद पुष्प वाले वृक्ष अधिक मिलते है | नारंगी रंग के फूलो वाले वृक्ष कम मिलते है | इन्ही नारंगी रंग के फूलो की केशर को नागकेशर कहते है |

रासायनिक संगठन –  हलके पीले रंग का तेल निकलता है ‘

गुणधर्म 

रस – कसाय
गुण – रुक्ष , लघु , उष्ण , आमपचन , रक्त्स्कंदन |
वीर्य – उष्ण
विपाक – कटु

दोष प्रभाव – पित कफ शामक |

रोग प्रभाव – ज्वर , छर्दी , हल्लास , अतिस्वेद , कंडू , रक्तस्राव , रक्तप्रदर , रक्तार्श |

उपयोग मात्रा – 1 से 2 ग्राम

औषधि प्रयोग अंग – फल एवं पुष्प |

आयुर्वेदिक विशिष्ट योग – नाग्केशरादी योग , नागकेशर चूर्ण , पुष्यानुग चूर्ण |

नागकेशर के स्वास्थ्य लाभ 

खांसी – खांसी होने पर नागकेशर की जड़ और छाल का काढ़ा बना कर पिने से खांसी जल्दी ही ठीक हो जाती है |

चर्म रोग – नागकेशर से निकलने वाले तेल को अगर चर्म रोग से प्रभावित स्थान पर लगाया जावे तो आराम मिलता है |

वातरोग / गठिया रोग – वात रोगों में एवं गठिया रोग में नागकेशर के तेल से मालिश करने से गठिया रोग से होने वाले दर्द एवं इसके उपचार में सहायता मिलती है |

खुनी बवासीर – खुनी बवासीर में नाग केशर को रात के समय पानी में भिगो दे सुबह इसे छान कर और शहद मिलकर सेवन करे खुनी बवासीर में तुरंत लाभ होगा |

रक्त प्रदर – रक्तप्रदर में नागकेशर चूर्ण का सेवन करने से जल्दी यह रोग ठीक हो जाता है |

धन्यवाद 

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