जहरमोहरा खताई (पिष्टी): एक औषधीय पत्थर, जानें इसके फायदे

जहरमोहरा खताई एक पत्थर है | यह पत्थर अत्यंत गुणकारी औषधीय गुणों से युक्त है | इस पत्थर का अधिक उपयोग यूनानी पद्धति में किया जाता है | इस पत्थर को शोधित करके इसकी भस्म बना कर आयुर्वेद में दवा के रूप में उपयोग किया जाता है | इसका उपयोग दाह, अतिसार एवं हैजा जैसी समस्याओं में किया जाता है |

जहरमोहरा खताई क्या है / Jahar mohara Khatai kya hai ?

यह एक औषधीय पत्थर है | यह सफ़ेद रंग या कुछ पीलापन लिए हुए कभी या हल्के हरे रंग का होता है | यूनानी वैद्य इसका उपयोग अधिक करते हैं | इस पत्थर को शोधित करके इसकी भस्म बनायी जाती है | इस भस्म का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है | आइये जानते हैं जहर मोहरा खताई का शोधन कैसे किया जाता है :-

  • इस पत्थर को अग्नि में तपाया जाता है |
  • ऐसे 21 बार तपा कर गो दुग्ध या आंवले के रस से बुझाया जाये |
  • इस तरह से यह शुद्ध हो जाता है |

जहरमोहरा भस्म बनाने की विधि / Jahar mohara Bhasma

जहरमोहरा भस्म के फायदे

इस पत्थर की भस्म बनाने के लिए निम्न विधि का उपयोग किया जाता है :-

  • सबसे पहले जहर मोहरा पत्थर को शोधित करें |
  • अब इसका महीन चूर्ण बना लें |
  • इस चूर्ण को 6 घंटे तक खरल करें |
  • जब यह टिकिया बनाने लायक हो जाये तो इसकी छोटी छोटी टिकिया बना लें |
  • अब इस टिकिया को सुखा कर सराब सम्पुट विधि से भस्म बना लें |

जहरमोहरा पिष्टी बनाने की विधि / Jahar mohara pishti kaise banaye

जहरमोहरा पिष्टी

पिष्टी और भस्म दोनों समान गुणों वाली ही होती हैं | इनमें बस बनाने के तरीके का अंतर होता है | आइये जानते हैं जहर मोहरा पिष्टी कैसे बनाएं :-

  • अच्छी श्रेणी के जहर मोहरा पत्थर लें |
  • इन पत्थरों को पानी से अच्छे से धो कर सुखा लें |
  • अब इसे पीस कर महीन चूर्ण बना लें |
  • इस चूर्ण को खरल में गुलाब जल या चंदनादि अर्क के साथ खूब घोंटे |
  • जब यह अच्छे से घुट जाये तो इसे सुखा लें |
  • इसे ही जहर मोहरा पिष्टी कहते हैं |

जहरमोहरा खताई (पिष्टी/भस्म) का सेवन कैसे करें / How to use Jahar mohra pishti/ Bhasma ?

इसकी एक से दो रत्ती की मात्रा दिन में तीन चार बार शहद, गाय के दूध या मौसम्बी के रस के साथ लें | इसके अलावा अनार के रस एवं दाड़िमावलेह के साथ भी इसका सेवन कर सकते है |

जहरमोहरा खताई (भस्म/पिष्टी) के फायदे एवं उपयोग / Jahar mohra pishti/ bhasma uses and benefits

यह औषधि समशीतोष्ण गुणों वाली होती है अर्थात यह ना ही तो उष्ण होती है और ना ही शीत | इसलिए इस औषधि का उपयोग वात पित्त एवं कफ़ तीनो प्रकृति वाले व्यक्ति कर सकते हैं | यह हृदय एवं मस्तिष्क को बल देने वाली एवं पित्तनाशक है | आइये जानते हैं जहरमोहरा पिष्टी/ भस्म के फायदे :-

जहरमोहरा भस्म
  • यह दाह रोग में बहुत कारगर मानी जाती है |
  • इसके सेवन से शरीर में बल एवं वीर्य की वृद्धि होती है |
  • हैजा रोग में जहरमोहरा भस्म का उपयोग बहुत फायदेमंद रहता है |
  • जहरमोहरा पिष्टी/ भस्म का उपयोग अतिसार रोग में भी किया जाता है |
  • यकृत विकार होने पर यह दवा बहुत गुणकारी होती है |
  • बच्चों में हरे पीले दस्त हो जाने पर इस दवा का उपयोग फायदेमंद रहता है |
  • प्लेग, हैजा, मलेरिया एवं माता जैसे संक्रामक रोगों में यह दवा बहुत गुणकारी होती है |
  • पाचन इन्द्रियों को जहर मोहरा खताई से बल मिलता है |

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