प्रदररिपु रस (Pradarripu Ras) : घटक द्रव्य, गुण उपयोग एवं फायदे

प्रदररिपु रस के फायदे

पुरुषों में प्रमेह एवं महिलाओं में प्रदर रोग बहुत भयानक होते हैं | प्रदर रोग के कारण महिला का शरीर कमजोर हो जाता है | अधिक समय तक प्रदर रोग रह जाये तो बहुत भयंकर परिणाम देखने को मिलते हैं | इससे महिला का गर्भाशय भी कमजोर हो जाता है एवं गर्भधारण में भी समस्या आती है | प्रदररिपु रस महिलाओं के लिए अमृत योग्य औषधि है | यह सभी प्रकार के प्रदर रोगों में गुणकारी है |

प्रदररिपु रस (Pradarripu ras) क्या है एवं इसके घटक क्या हैं ?

यह रस प्रकरण की आयुर्वेदिक औषधि है | प्रदर रोगों में इसका सेवन अत्यंत लाभकारी होता है | प्रदररिपु रस महिलाओं के लिए बहुत गुणकारी औषधि है | यह उनके शरीर में प्रदर रोगों के कारण आई कमजोरी को ख़त्म करके शरीर में ओज एवं बल की वृद्धि करता है | इस औषधि के घटक द्रव्य :-

  • नाग भस्म – एक तोला
  • शुद्ध पारद – एक तोला
  • गंधक (शुद्ध) – एक तोला
  • रसौत – तीन तोला
  • लौध्र चूर्ण – छः तोला
  • वासा रस – घोंटने के लिए

Pradarripu ras बनाने की विधि

यह रस प्रकरण की औषधि है | इसको बनाने के लिए निम्न विधि का उपयोग होता है :-

  • सर्वप्रथम पारा एवं गंधक की कज्जली बना लें |
  • अब इसमें बाकि औषधियों का चूर्ण मिला दें |
  • इस मिश्रण में अब वासा का रस डाल कर घोंटे |
  • इसे कम से कम एक दिन वासा के रस में अच्छे से घोंटा चाहिए |
  • जब पूरी तरह घुट जाए तो इसकी छोटी छोटी गोलियां बना लें |

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Pradarripu ras का सेवन कैसे करें ?

प्रदर रोग होने पर प्रदररिपु रस की एक से दो गोली रोजाना मधु के साथ सेवन करना चाहिए | इसके साथ उपर से अशोक की छाल का क्वाथ या चावल का पानी पीना चाहिए | यह रजोविकारों में बहुत उपयोगी है |

प्रदररिपु रस क्या है
प्रदररिपु रस क्या है

प्रदररिपु रस के फायदे एवं उपयोग / Pradarripu ras benefits and uses

पुरुषों में शुक्र विकार होने से शुक्र पतला होकर बहने लगता है इसे प्रमेह रोग कहते हैं | ऐसे ही महिलाओं में रज पतला होकर स्राव होने लगता है | अधिक समय तक प्रदर रोग होने से शरीर जर्जर हो जाता है एवं तमाम तरह की कमजोरियां आ जाती है | प्रदररिपु रस इस अवस्था में एक सुरक्षित औषधि है | इसके सेवन से स्राव रुक जाता है एवं शरीर में पुनः ताक़त आने लग जाती है | आइये जानते हैं Pradarripu ras के फायदे :-

  • यह रज स्राव को रोकता है |
  • प्रदर रोगों के कारण आयी कमजोरी को दूर करता है |
  • Pradarripu ras गर्भाशय की कमजोरी को दूर करता है |
  • इसको कुमार्यासव या पत्रांगासव के साथ सेवन करने से बद्ध कोष्ठता दूर होती है |
  • अशोकारिष्ट के साथ उपयोग करने से बढे हुए प्रदर रोग में तुरंत आराम मिलता है |

Pradarripu ras के नुकसान / side effects

यह औषधि बहुत गुणकारी है लेकिन इसमें पारा एवं गंधक जैसे रसायन है अतः इसका अधिक मात्रा में सेवन करना हानिकारक हो सकता है | इसलिए हमेशा चिकित्सक की सलाह पर ही सेवन करें एवं बतायी गयी मात्रा एवं सेवन की विधि का ध्यान रखें |

इस लेख में दी गयी जानकारी शैक्षिणिक है, इसे चिकित्सकीय सलाह न समझें | किसी भी दवा का सेवन करने से पहले चिकित्सक से उचित परामर्श जरुर कर लें |

धन्यवाद !

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