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जानें खुरासानी अजवायन क्या है – गुण धर्म, फायदे एवं उपयोग

हिंदी में इसे खुरासानी अजवायन कहते है | संस्कृत में पारसिक यामानी, तुरुष्का मद्कारिणी आदि नामों से पुकारा जाता है | अजवायन के दो प्रकार होते है – खुरासानी अजवायन एवं दूसरी जंगली अजवायन |

खुरासानी अजवायन का वृक्ष हिमालय में काश्मीर से गढ़वाल तक आठ सौ फीट से ग्यारह सौ फीट तक की ऊंचाई पर पैदा होते है | यह एक क्षुप जाती का पौधा होता है | इसका काण्ड सीधा और पुष्ट होता है |

खुरासानी अजवायन
खुरासानी अजवायन

इसमें एक प्रकार की तेज सुगंध आती है, जो कुछ – कुछ अप्रियसी होती है | पते कटे हुए , फुल पीलापन लिए हुए हरे एवं कंही – कंही पर बैंगनी रंग की धारियों से युक्त भी होते है |

खुरासानी अजवायन के औषधीय गुण

इसके बीज तीखे कडवे , गरम, अग्नि को दीप्त करने वाले, आंतो को सिंकोड़ने वालें, मादक, भारी, अग्निवृद्धक तथा अजीर्ण, अपच, पेट के कीड़े, आमशुल और कफ को नष्ट करने वाले होते है |

खुरासानी अजवायन पित्त की वृद्धि करता है | अत: पितज प्रकृति के लोगों के लिए ये नुकसान दाई साबित होते है | पित्त प्रकृति वाले लोगों के द्वारा अधिक सेवन से उन्हें सिरदर्द, सीने में जलन, एसिड बनना एवं वमन आदि से परेशान होना पड़ सकता है |

इसके अधिक मात्रा में सेवन से हृदय विकार की सम्भावना रहती है अत: सिमित एवं चिकित्सकीय निर्देशित मात्रा में ही सेवन किया जाना चाहिए |

खुरासानी अजवायन के फायदे एवं उपयोग

  • इसकी अवसादक क्रिया मष्तिष्क, जननेंद्रिय और आंतो पर विशेष रूप से दिखलाई देती है | इस औषधि के देने से गहरी नींद आ जाती है | नींद लाने के लिए और वेदना को शमन करने के लिए इसके मुकाबले की दूसरी औषधि अफीम है | लेकिन जिन रोगियों को अफीम नहीं दी जा सकती, उन्हें इसकी खुराक देना फायदेमंद रहता है |
  • वातव्याधि – गठिया, संधिवात, जोड़ो की सुजन, रक्तपित इत्यादि रोगों पर इसका लेप करना चाहिए |
  • खुरासानी अजवायन को राल के साथ पीसकर दांतों की खोखल में रखने से दांतों की पीड़ा दूर होती है |
  • इसको गुड में गोली बनाकर देने से पेट की वायु – पीड़ा मिटती है |
  • प्रात:काल के समय थोड़ा गुड़ खिलाकर बासी पानी केसाथ इसकी फंकी देने से पेट के कीड़े मर जाते है |
  • कब्ज की समस्या में भी खुरासानी अजवायन फायदेमंद है | खुरासानी अजवायन को देने से कब्जियत की समस्या नहीं होती |
  • इस औषधि का प्रधान उपयोग मस्तिष्क सम्बन्धी रोगों में होता है | नए उन्मादी (पागलपन) के रोगों में इसका सेवन से फायदा मिलता है | इसको देने से रोगी को अच्छी नींद आती है |

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