अमलतास – अमलतास के गुण एवं फायदे और औषध प्रयोग |

अमलतास (आरग्वध) – Cassia fistula Linn

परिचय – पीले व्रण के फूलो से अच्छादित रहने वाला | सड़क किनारे या बाग़ बगीचों में अपनी पीत वृणी छटा फैलता यह पौधा भारत में हर जगह देखने को मिलता है | अमलतास को घर या बाग़ – बगीचों में सुन्दरता बढाने के लिए लगाया जाता है, परन्तु आप इसे केवल शोभा बढाने वाला वृक्ष न समझे | आयुर्वेद और घरेलु चिकित्सा पद्धति में अमलतास का अपना एक विशिष्ट स्थान है |

अमलतास

अमलतास का वृक्ष मध्यम आकृति का 25 से 30 फीट ऊँचा होता है | इसका तना किंचित धूसर वर्णी या रक्ताभ वृणी होता है | इसका वृक्ष ज्यादा ऊँचा नहीं होता , प्राय भारत के सभी प्रान्तों में आप इसे देख सकते है | इसके पत्र (पते) संयुक्त रूप से लगते है जो 1 फीट तक लम्बे 8-12 की संख्या में लट्टवकार – स्पष्टसिरायुक्त 2 से 7 इंच लम्बे होते है |

अमलतास के फुल 

इसके के फुल मंजरी रूपी लम्बी और निचे की तरफ झूलती रहती है जिस पर चमकीले पीले रंग के फुल लगते है | इन पुष्प का व्यास 1.5 से 2.5 इंच होता है , फुल 5 अंतर्दल से ढका रहता है जिसे खोलने पर अन्दर पुकेषर निकलते है जिनकी संख्या 5 से 10 हो सकती है |

फल 

इसके फल – फली के रूप में लगते है | यह फली 1 से 2 फीट लम्बी , 1 इंच व्यास परिधि कठिन , आगे से नुकीली और बेलनाकार होती है | इसकी फली कच्ची अवस्था में हरी और पकने पर कृष्ण व्रण की हो जाती है | फली के अन्दर का भाग अलग – अलग कोष्ठों में विभक्त होता है जिसमे 30 से 100 तक धूसर रंग के बीज हो सकते है | इसकी फली कुछ  – कुछ सहिजन की फली में मिलती है लेकिन इसपर किसी प्रकार की रेखाए नहीं होती |

रासायनिक संगठन 

अमलतास की फलमज्जा में एन्थ्राक्विनीन , ग्लूटिन , पेकिटिन , रंजक द्रव्य, कैल्शियम ओक्सेलेट, क्षार , निर्यास आदि होते है , इसकी फलमज्जा में 60% शर्करा होती है | अमलतास के तने की छाल में 10 से 20% टेनिन तत्व होता है , इसके अलावा फ्लौवेफिन एवं एन्थ्राक्विनीन भी होते है | इसके पतों और फूलो में ग्लैकोसाइड तत्व पाया जाता है |

अमलतास के गुण – धर्म

इसका रस – मधुर | इसके गुण – गुरु, स्निग्ध और मृदु | इसका वीर्य – शीत होता है एवं विपाक – मधुर होता है | अमलतास गुणों में मधुर और स्निग्ध होने के कारण वात एवं शीत वीर्य होने के कारण पित्त का शमन करता है | यह रेचक स्वाभाव का होता है इसलिए यह कोष्ठगत पित्त और कफ का संसोधन भी करता है |

अमलतास के प्रयोज्य अंग

औषधीय उपयोग में  फुल , फल का मज्जा , बीज और पत्ते काम में आते है | इसके तने के छाल के क्वाथ का इस्तेमाल भी किया जाता है | पत्तो का इस्तेमाल बाह्य रूप में किया जाता है |

पर्याय ( विभिन्न भाषाओँ में )

संस्कृत – आरग्वध ( रोगों को नष्ट करने वाला ), राजवृक्ष ( सुन्दर वृक्ष ), शम्पाक ( कल्याणकारी फल देने वाला ), चतरंगुल, आरेवत, व्याधिपात,  कृतमाल, सुवृणक , दीर्घफल , स्वर्णभूषण |

हिंदी – अमलतास , सियरलाठी |

गुजराती– गरमालो |

पंजाबी – गिर्द्नाली |

मराठी – बाहवा |

बंगाली – सोंदाल |

कश्मीरी – फलुस |

फारसी – खियार चंवर |

अमलतास के फायदे / Health Benefits of Amaltas

➤ त्वचा सम्बन्धी विकारो में अमलतास के फायदे

इसकी पत्तीओं का बाह्य प्रयोग आयुर्वेद में बताया गया है | त्वचा विकारो में अमलतास की पतियों को छाछ के साथ मसल ले और इसे संक्रमित त्वचा पर लगाये लाभ मिलेगा | दाद , खाज – खुजली में अमलतास और नीम की पतियों को बराबर मात्रा में लेकर इनकी लुग्दी बना ले और प्रभावित स्थान पर बांधे | दाद , खाज – खुजली की समस्या से निजात मिलेगा |

➤ कब्ज में अमलतास के फायदे

जिन्हें कब्ज की शिकायत रहती हो , वे अमलतास के 10 ग्राम गुदे में बराबर मात्रा में मुन्नका मिला कर सेवन करने से कब्ज ख़त्म हो जाती है | रात के समय 50 ग्राम इसके गुदे को पानी में भिगो दे सुबह इस पानी में 25 ग्राम मिश्री मिलाकर सेवन कब्ज की समस्या जाती रहेगी |

➤ बुखार में प्रयोग 

बुखार को कम करने में भी अमलतास का काफी सहयोग मिलता है | बुखार होने पर इसके गुदे को 3 ग्राम की मात्रा में सुबह – शाम नियमित 5 दिन लेने से लाभ मिलता है , इस प्रयोग से बुखार तो कम् होता ही है साथ में बुखार के कारण होने वाले बदन दर्द में रहत मिलती है |

➤ गले के रोगों में अमलतास के फायदे

गले के विकारो में इसकी छाल का इस्तेमाल लाभदायक है |  छाल का काढ़ा बना ले और इस काढ़े से गरारे करे | गले की सुजन , जलन और दर्द में लाभ मिलेगा |

➤ घावों को भरने में औषध प्रयोग 

अमलतास चोट के कारण हुए घावों को जल्दी भरने में सहयोग करता है | घावों के लिए इसकी पतियों का रस निकाल ले और इसे संक्रमित स्थान या घाव् पर लगाये , घाव जल्दी भरेगा | आप अमलतास की छाल का काढ़ा घावों को धोने के लिए प्रयोग में ला सकते है | इससे घाव के सभी प्रकार के इन्फेक्शन से निजात मिलती है |

➤ बच्चो के पेट के रोगों में 

बच्चो के पेट दर्द ,  गैस और पेट फूलना जैसी समस्या में अमलतास के गुदे को  बच्चे के नाभि के आस – पास लगाने से बच्चो के पेट दर्द से छुटकारा मिल जाता है |

➤ मुंह के छाले

मुंह में छाले होने पर अमलतास की गिरी के साथ बराबर की मात्रा में धनियाँ मिलाकर पिसले और इसे कत्थे साथ मिलाकर चुसे | दिन में दो – तीन बार चूसने से ही मुंह के छाले ठीक हो जाते है |

➤ बवासीर

बवासिर में इसकी फलियों का 10 ग्राम गुदा, 10 ग्राम द्राक्षा और 5 ग्राम हरड़ को पिस ले | अब आधा लीटर पानी में इन्हें  पकाए जब पानी एक चौथाई रह जाए तब उतर कर ठंडा करके प्रयोग में लावे | इस काढ़े के  4- 5 दिन के प्रयोग से ही  बवासीर में लाभ मिल जायेगा |

➤ कुष्ठ में प्रयोग 

कुष्ठ रोग में भी यह काफी फायदेमंद होता है | इसके पत्तो की लुगदी कुष्ठ प्रभावित त्वचा पर लगाई जाए तो कुष्ठ में काफी लाभ प्राप्त होता है | कुष्ठ में आप इसकी जड़ का इस्तेमाल भी कर सकते है – इसकी  जड़ को कूट कर लुग्दी बना कर कुष्ठ से प्रभावित त्वचा पर लगाया जा सकता है जो कुष्ठ रोग में गली सड़ी त्वचा को सही करने में सहयोग करता है |

➤ कान  बहने पर 

कान के बहने पर अमलतास के पतों का काढ़ा बना ले और इस काढ़े का इस्तेमाल कान को धोने एवं कान में डालने के लिए करे | जल्द ही कान की मवाद साफ़ होगी और बहना रुक जायेगा |

➤ दमा रोग में अमलतास के फायदे 

दमा रोग में इसकी गिरी का काढ़ा बना कर सेवन करना चाहिए , इससे शरीर में उपस्थित कफ मल के माध्यम से बाहर निकल जायेगा और दमा में आराम मिलेगा |

➤ अंगो का सूनापन 

शरीर के अंगो के सूनेपन में अमलतास के पत्तो को मसल कर प्रभावित अंग पर बांधने से अंगो का सूनापन ठीक होता है |

➤ वमन करवाने में 

अगर रोगी को वमन करवाना हो तो अमलतास के 5 – 7 बीजों का चूर्ण बना ले और रोगी को खिला दे , तुरंत प्रभाव से रोगी उल्टी करने लगेगा |

➤ विरेचन करवाने में 

अगर रोगी को विरेचन करवाना हो तो अमलतास के गुदे का इस्तेमाल किया जा सकता है |अमलतास का गुदा मृदु विरेचक होता है | अमलतास के गुदे को मुन्नका के साथ देने पर विरेचन हो जाता है |

➤ अंडकोष वर्द्धि में अमलतास का फायदा 

बढे हुए अंडकोष में अमलतास की फली एक चम्मच गुदे को एक कप पानी में उबाल कर काढ़ा बना ले | जब काढ़े में पानी आधी मात्रा में रह जाए तब उतार कर ठंडा करके – एक चम्मच घी मिला कर खड़े – खड़े पीना चाहिए | अंडकोष वर्द्धि के रोग में लाभ मिलता है |

➤ लकवे में 

लकवे से ग्रषित अंग पर अमलतास की पत्तियों का रस लगाने और मालिश करने से लकवे में काफी लाभ मिलता है | आप अमलतास की पत्तियों का रस का सेवन भी कर सकते है

➤ पेट की सफाई 

उदर की सफाई करने के लिए आप इसके पत्तो के साथ नमक और मिर्च मिला कर सेवन कर सकते है पेट की सफाई हो जाएगी |

➤ पीलिया में 

पीलिया रोग में अमलतास का गुदा , पीपला मूल , नागरमोथा, नागरमोथा और जंगी हरेड सभी को 5 – 5 ग्राम की मात्रा में लेकर काढ़ा बना कर इस्तेमाल करने से पीलिया रोग में लाभ मिलता है |

➤ मधुमेह रोग में 

मधुमेह रोग में अमलतास के गुदे को थोडा गरम कर ले और इसकी मटर के दाने के बराबर गोलियां बना ले और इसका सेवन 2 – 2 गोली  नित्य रूप से करे यह आपके रक्त में शुगर के लेवल को बैलेंस रखेगा और मधुमेह में आराम देगा |

➤ गठिया रोग में अमलतास के फायदे 

अमलतास के पत्तों को सरसों के तेल में तल ले और इनका सेवन भोजन के साथ करे | आपके जॉइंट्स के दर्द को कम कर देंगे |

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