वृद्ध दंड चूर्ण के फायदे, घटक, एवं सेवन की विधि | Vriddha Danda Churna in Hindi

वृद्ध दंड चूर्ण आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति की ताकतवर दवा है | यह पुरुषों के लिए उपयोगी है | यह धातुक्षीणता, स्वप्नदोष, एवं वातज शूल में प्रयोग की जाने वाली आयुर्वेदिक दवा है | इस दवा का वर्णन रसतंत्रसार व सिद्ध प्रयोग संग्रह के प्रथम ग्रन्थ में होता है |

आज के इस लेख में हम आपको वृद्ध दंड चूर्ण के फायदे, घटक, सेवन विधि एवं सेवन की सावधानियों के बारे में बताएँगे | तो चलिए जानते है इसके घटक द्रव्यों के बारे में |

वृद्धदण्ड चूर्ण

वृद्ध दंड चूर्ण के घटक द्रव्य | Ingredients of Vriddhadand Churna

इसमें निम्न जड़ी-बूटियों का समावेश होता है –

  1. सफ़ेद मुसली
  2. सेमलकंद की छाल
  3. गिलोय सत्व
  4. आंवला
  5. कौंच के बीज
  6. गोखरू
  7. एवं मिश्री

इन घटक द्रव्यों के वृद्ध दंड चूर्ण में निम्न फायदे होते है | इन्हें आप यहाँ समझ सकते है –

घटक का नाम उपयोग
सफ़ेद मुसली यह वीर्य को गाढ़ा करने एवं स्खलन को रोकने में फायदेमंद है |
सेमलकंद की छाल धातुओं को मजबूती देने एवं पुष्टिकारक है |
गिलोय सत्व यह रोगप्रतिरोधक क्षमता का वर्द्धन करता है एवं शरीर में उष्णता नहीं बढ़ने देता
आंवला विटामिन सी से भरपूर एवं एंटीओक्सिडेंट गुणों से युक्त
कौंच के बीज वीर्य स्तम्भन करने एवं यौन दुर्बलताओं को दूर करने में उपयोगी
गोखरू मूत्र विकारों में लाभदायक
मिश्री शीतल

वृद्ध दंड चूर्ण के फायदे | Vriddhadand Churna Benefits in Hindi

इस आयुर्वेदिक चूर्ण के निम्न लाभ है –

  • धातुक्षीणता में फायदेमंद – वृद्ध दंड चूर्ण धातुक्षीणता को दूर करने में अत्यंत लाभदायक है | इस चूर्ण के सेवन से धातुओं की कमजोरी दूर होने लगती है |
  • स्वप्नदोष – स्वप्नदोष की समस्या में वृद्ध दंड चूर्ण को 5 से 10 ग्राम की मात्रा में दिन में दो बार दूध के साथ सेवन करने से जल्द ही समस्या में लाभ मिलता है |
  • यौनदुर्बलता – यौन दुर्बलताओं में यह लाभदायक औषधि है | इसका सेवन महीने भर करने से सभी प्रकार की यौन दुर्बलताओं जैसे नपुंसकता, शीघ्रस्खलन आदि में लाभ मिलता है |
  • वातजमेह – वृद्धावस्था में वात दोष के असंतुलन के कारण वातजमेह की समस्या हो जाती है | इसमें भी वृद्ध दंड चूर्ण अच्छा लाभ देता है | यह वात असंतुलन को दूर करता है |
  • कटीशूल – कमर दर्द की समस्या वात के असंतुलन के कारण अगर हो तो वृद्धदण्ड चूर्ण का सेवन करवाने से लाभ मिलता है |
  • मूत्र विकार – मूत्र संस्थान के विकार जैसे मूत्रकृच्छ्ता, प्रोस्टेट की समस्या एवं धातु गिरना आदि समस्याओं में यह लाभ देती है |

सेवन की विधि | Dosage

इस चूर्ण का सेवन सुबह – शाम 6 से 12 ग्राम की मात्रा में सामान्यत: करवाया जाता है | अनुपान के लिए गुनगुने दूध का विधान है | अर्थात इसे सुबह शाम गुनगुने दूध के साथ प्रयोग करना चाहिए | रोग एवं रोगी की प्रकृति के अनुरूप वैद्य इसका सेवन अलग अनुपान एवं मात्रा में करवा सकते है | अत: सेवन से पहले वैद्य सलाह अवश्य लें |

सावधानियां | Precautions

वृद्ध दंड चूर्ण पूर्णत: सुरक्षित औषधि है | इसका प्रयोग करने से किसी भी प्रकार का साइड इफेक्ट्स प्रकट नहीं होता | हालाँकि इसे निर्धारित मात्रा में ही सेवन करना चाहिए | अगर अधिक मात्रा में लिया जाये तो सीने में जलन एवं एसिडिटी जैसी समस्या हो सकती है |

धन्यवाद

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