जवान लड़कियों की सबसे बड़ी समस्या (प्रॉब्लम) PCOD / PCOS का आयुर्वेदिक इलाज और मेडिसिन

पॉली सिस्टिक ओवेरियन डिसऑर्डर (pcod) – युवा लड़कियों और महिलाओं की एक खतरनाक बीमारी है | यह रोग आजकल 70% लडकियों में देखने को मिलता है | इसका कारण है अनुचित खान पान और गर्भनिरोधक दवाओं का दुष्प्रभाव | प्रजनन आयु की लडकियों में आज यह सबसे सामान्य और गंभीर समस्या है | इस रोग में ओव्यूलेशन में दिक्कत होती है जो सबफर्टिलिटी का कारण बनता है | PCOD और PCOS को आयुर्वेद में अर्थवक्षय के साथ compare किया जा सकता है | इसका इलाज जानने से पहले इस रोग के बारे में जानना बहुत जरुरी है |

pcod kya h in hindi | पीसीओडी रोग क्या है ?

पॉली सिस्टिक ओवेरियन डिसऑर्डर एक ऐसी स्थिति है जिसमे महिला की ओवरी में सिस्ट हो जाते हैं | इन सिस्ट (pcod in hindi) की वजह से ओवरी से अन्डो का उत्सर्जन नहीं हो पाता है | इसकी वजह से महिला को बहुत सारी दिक्कते हो जाती हैं | जैसे पीरियड अनियमित हो जाना, पीरियड नहीं आना, दर्द होना, वजन बढ़ जाना, प्रेगनेंट नहीं होना आदि |

pcod ilaj in hindi

PCOD में शरीर में बहुत से बदलाव होने लगते हैं | इससे बाल झड़ने लग जाते हैं, मुहांसे हो जाते हैं, वजन बढ़ जाता है और संभोग में रूचि कम हो जाती है | इस रोग का सीधा सीधा प्रभाव शादी शुदा जीवन पर पड़ता है और बांझपन का खतरा हो जाता है |

pcod का meaning in hindi :-

जब पीसीओडी रोग में सिस्ट ज्यादा हो जाते हैं और रोग असाध्य हो जाता है तो इसे पीसीओएस (PCOS) पॉली सिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम कहते हैं | इस अवस्था के बाद यह रोग बहुत जटिल हो जाता है और मुश्किल से ठीक होता है |

pcod और pcos को ठीक करने के लिए आयुर्वेदिक उपचार पद्धति सबसे सफल साबित होती है | क्योंकि इस रोग में दवा के साथ साथ खान पान और योग व्यायाम की बहुत महता होती है | अगर आप pcod को ठीक करना चाहती हैं तो सबसे जरुरी है अपना वजन न बढ़ने दें एवं संतुलित आहार का सेवन करें |

pcod क्यों होता है ?

इस समस्या का कोई एक कारण नहीं है | pcod in hindi आनुवांशिकी कारणों से भी हो सकता है या इसके निम्न कारण भी हो सकते हैं :-

  • हार्मोन्स में असंतुलन की वजह से
  • इन्सुलिन बढ़ने की वजह से
  • मोटापे के कारण
  • गर्भनिरोधक दवाओं के दुष्प्रभाव से
  • असंतुलित खान पान की वजह से

PCOD / PCOS के symptoms in hindi – लक्षण हिंदी में

pcod में बहुत अलग अलग तरह के symptoms देखने को मिलते हैं | ये लक्षण (symptoms in hindi) निम्न हो सकते हैं :-

  • पीरियड्स नहीं आना
  • अनियमित माहवारी आना
  • बाल झड़ने लग जाना
  • चिडचिडापन रहना
  • मुहांसे हो जाना
  • बालो का पतला होना
  • सिर दर्द होना
  • जी मतलाना

pcod / pcos का आयुर्वेदिक इलाज क्या है ?

PCOD ka ayurvedic ilaj – आयुर्वेद में शोधन, शमन और तर्पण के सिद्धांत पर इस समस्या का प्रभावी इलाज किया जाता है | यह समस्या बहुत जटिल है इसलिए इसका इलाज करने के लिए जीवनशैली में बदलाव की बहुत आवश्यकता होती है | PCOD KA ILAJ IN HINDI में जानिए कैसे इस रोग को ठीक किया जा सकता है |

आयुर्वेद के तहत इसका उपचार (pcod treatment in ayurveda) 3 स्टेज में किया जाता है | सबसे पहले रोगी के पाचन को सही करने वाली दवाओं का उपयोग किया जाता है | उसके बाद माहवारी नियमित करने वाली दवाओं का उपयोग होता है और अंत में रोग नाशक दवाओं का उपयोग करके उपचार बंद करते हैं |

pcod का आयुर्वेदिक इलाज – फर्स्ट स्टेप

प्रथम चरण में माहवारी के बाद 1 से 14 दिन तक रोगी को शोधन वाली दवाएं देते हैं | आयुर्वेदिक उपचार pcod का यह सबसे पहला स्टेप है | इससे शरीर का purification होता है | इस चरण में निम्न दवाओं का उपयोग किया जाता है |

  • त्रिफला चूर्ण
  • मणिभद्र चूर्ण
  • चंद्रप्रभा वटी

pcod ka ilaj ayurvedic – सेकंड स्टेप

जब प्रथम चरण पूरा हो जाता है तो शरीर का शोधिकरण पूरा हो जाता है | अब पीसीओडी के इलाज का दूसरा चरण शुरू होता है | यह 15 दिन से 4 महीने पुरे होने तक चलता है | इसमें हार्मोनल संतुलन बनाने वाली, दर्द नाशक और इम्युनिटी बढाने वाली दवाओं का उपयोग किया जाता है | इस चरण में पथ्य अपथ्य और योग व्यायाम का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है | तभी pcod रोग ठीक होने की संभावना होती है | ये दवाएं और योग प्राणायाम ही pcod को ठीक करने में अहम भूमिका निभाते हैं |

pcod second step ayurvedic medicine (दुसरे चरण में उपयोग में ली जाने वाली दवाएं) :-

  • शतपुष्पा
  • गुडूची
  • शतावरी
  • कृष्ण जीरक

pcod के आयुर्वेदिक इलाज का तीसरा चरण – थर्ड स्टेप

दूसरा चरण पूरा होते होते रोगी के मासिक धर्म नियमित हो जाते हैं और cyst भी धीरे धीरे कम हो जाते हैं | अब रोगी को हार्मोन में गड़बड़ी को ठीक करने वाली और सहचर दवाओं का उपयोग किया जाता है | इसमें 4th से छठे महीने तक आयुर्वेदिक इलाज (pcod का ayurvedic ilaj) दिया जाता है |

तीसरे चरण की दवाएं (pcod ayurvedic medicine for third step treatment) :-

  • अतिबला
  • शतपुष्पा
  • रसायन कल्प

अतिबला का उपयोग हार्मोन्स में असंतुलन को ठीक करने के लिए किया जाता है | सहचर का प्रयोग करके अवांछित follicles को हटाया जाता है |

पीसीओडी का आयुर्वेदिक इलाज कितना कारगर रहता है ?

एक सर्वे के अनुसार तीनो चरण का इलाज लेने के बाद 70 % pcod की रोगी ठीक हो जाती हैं | उनकी माहवारी नियमित हो जाती है एवं cyst ख़त्म हो जाती हैं | जिन महिलाओं को इलाज पूरा होने के बाद भी लाभ नहीं मिलता उन्हें फिर से परिक्षण करवा के दुबारा उपचार की सलाह दी जाती है |

इस तरह से pcod का आयुर्वेदिक उपचार बहुत कारगर रहता है बशर्ते खान पान और योग व्यायाम का पूरा ध्यान रखा जाये | यह रोग लाइलाज नहीं है लेकिन इसको ठीक होने में समय लगता है |

pcod / pcos को ठीक करने के लिए कौनसी ayurvedic medicine का उपयोग किया जाता है ?

pcod ki ayurvedic medicine – पॉली सिस्टिक ओवेरियन डिसऑर्डर के लिए कोई एक विशेष दवा का उपयोग नहीं किया जाता | इस रोग में मेदोहर दवाएं, हार्मोन्स को बैलेंस करने वाली मेडिसिन, पीरियड्स को सही करने वाली मेडिसिन, ओवरी में cyst को ख़त्म करने वाली दवा सभी का योग काम में आता है | इसके अलावा pcod की वजह से प्रेगनेंसी की समस्या में गर्भधारण वाली दवाओं का भी साथ में उपयोग किया जाता है |

कभी कभी pcod की वजह से गर्भधारण के बाद गर्भपात की समस्या भी हो जाती है | ऐसे में गर्भपात रोकने वाली दवाओं का सेवन भी इस रोग में करना अनिवार्य हो जाता है |

पॉली सिस्टिक ओवेरियन डिसऑर्डर की आयुर्वेदिक दवा –

  • अशोकारिष्ट
  • शतपुष्पा
  • गुडूची
  • गिलोय आंवला स्वरस
  • त्रिफला चूर्ण
  • त्रिफला क्वाथ
  • मणिभद्र चूर्ण
  • चंद्रप्रभा वटी
  • पुष्यानुग चूर्ण

pcod का ilaj करते समय दिनचर्या कैसी हो (lifestyle tips during pcod)

  • रोज योग व्यायाम करें |
  • प्राणायाम अपनाकर मानसिक तनाव से दूर रहें |
  • प्रातःकाल भ्रमण करें |
  • समय पर सो जाएँ |
  • खाली पेट न रहें |
  • भोजन समय पर करें |
  • फल और हरी सब्जियां ज्यादा खाएं |

pcod में क्या सावधानी रखें ?

इस रोग में दिनचर्या और खान पान का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है | इसका उपचार तभी संभव है जब आप संतुलित आहार विहार का पालन करें आर जरुरी आयुर्वेद दवा का सेवन करें | इसके लिए निम्न बातों का ध्यान रखें :-

  • ज्यादा वसा वाली चीजें न खाएं
  • अपना वजन न बढ़ने दें
  • गर्भनिरोधक दवा न लें
  • फ़ास्ट फ़ूड और जंक फ़ूड से दूर रहें
  • रात में देर तक न जागें
  • खाली पेट न रहें

धन्यवाद ||

Reference :-

Clinical efficacy of Ayurveda treatment regimen on Subfertility with Poly Cystic Ovarian Syndrome (PCOS)

Herbal medicine for the management of polycystic ovary syndrome (PCOS) and associated oligo/amenorrhoea and hyperandrogenism; a review of the laboratory evidence for effects with corroborative clinical findings

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *