मधुमेह नाशिनी गुटिका के फायदे उपयोग एवं बनाने की विधि |

मधुमेह नाशिनी गुटिका जैसा आपको नाम से प्रतीत हो रहा है मधुमेह रोग के लिए एक उत्तम आयुर्वेदिक औषधि है | इसके उपयोग से प्रमेह रोगों में अपूर्व लाभ होता है | त्रिवंग भस्म, गुडमार की पत्ती एवं शिलाजीत आदि मधुमेह नाशक द्रव्यों से बनी यह औषधि इस रोग को नियंत्रित करने के लिए एक बेहतर विकल्प है क्योंकि इसका कोई दुष्परिणाम शरीर पर नहीं होता है |

वर्तमान समय में डायबिटीज (मधुमेह) एक भयानक व्याधि का रूप ले चूका है | यह रोग दिनचर्या एवं चयापचय से जुड़ा हुवा है | जो लोग शारीरिक मेहनत कम करते हैं उनमें यह रोग ज्यादातर देखने को मिलता है | इसके अलावा आनुवंशिक कारणों से भी यह रोग हो सकता है | आधुनिक चिकित्सा पद्धति में इसका कोई उचित इलाज नहीं है | आपको इन्सुलिन इंजेक्शन एवं दवाओं पर निर्भर रहना पड़ता है जिनका प्रभाव भी दिन प्रतिदिन कम होता जाता है | आयुर्वेद मधुमेह रोग के लिए एक बेहतर विकल्प उपलब्ध कराता है |

मधुमेह नाशिनी गुटिका क्या है, इसके फायदे एवं बनाने की विधि |

यह एक शास्त्रोक्त आयुर्वेदिक औषधि है जिसका उपयोग मधुमेह को नियंत्रित रखने के लिए किया जाता है | मधुमेह रोग में व्यक्ति शारीरिक रूप से काफी कमजोर हो जाता है एवं उसे हृदयाघात, टीबी जैसे रोगों का खतरा बढ़ जाता है | उचित इलाज के आभाव एवं अनदेखी करने से कालांतर के बाद यह रोग भयानक रूप ले लेता है एवं रोगी की मृत्यु तक हो जाती है |

ऐसे में आयुर्वेद मधुमेह को नियंत्रित रखने के लिए सहज एवं प्रभावी इलाज उपलब्ध कराता है | उसी में से एक है मधुमेह नाशिनी गुटिका | इस औषधि को बनाने के लिए निम्न द्रव्यों का उपयोग किया जाता है :-

मधुमेह नाशिनी गुटिका के घटक द्रव्य :-

बनाने की विधि :-

मधुमेह नाशिनी गुटिका को बनाने के लिए निम्न विधि का उपयोग होता है :-

मधुमेह नाशिनी गुटिका के फायदे
मधुमेह नाशिनी गुटिका
  • गुडमार की पत्ती, नीम के पती एवं शिलाजीत का महीन चूर्ण बना लें |
  • इन सभी द्रव्यों के चूर्ण को अच्छे से मिला लें |
  • अब इसमें त्रिवंग भस्म को भी मिला लें |
  • इस मिश्रण को खरल में डाल जल के साथअच्छे से मर्दन करें |
  • जब यह मिश्रण गोली बनाने लायक हो जाये तो इसकी छोटी छोटी गोलियां बना लें |
  • इनको छाया में सुखा लें |

अगर इस योग में १ तोला स्वर्ण भस्म, जामुन की मींगी का चूर्ण (12 तोला) मिला कर गिलोय स्वरस, गुलर पत्र स्वरस एवं विजयसार क्वाथ की एक एक भावना देकर, मर्दन कर गोली बनाएं तो इसके गुण और अधिक बढ़ जाते हैं |

मधुमेह नाशिनी गुटिका के फायदे एवं उपयोग |

प्रायः अधिक पौष्टिक भोजन करने वाले लोग जो शारीरिक परिश्रम नहीं करते हैं उन्हें मधुमेह रोग हो जाता है | यह काफी जटिल रोग है एवं सीधे सीधे आपके जीवन को प्रभावित करता है | मधुमेह नाशिनी गुटिका (बटी) इस रोग को नियंत्रित करने के लिए एक किफायती एवं उपयोगी औषधि है | आइये जानते हैं इसके फायदे :-

मधुमेह नाशिनी गुटिका के उपयोग
मधुमेह नाशिनी गुटिका
  • यह मधुमेह को नियंत्रित रखती है |
  • इसके सेवन से मधुमेह के कारण होने वाले रोगों का खतरा कम हो जाता है |
  • लगातार सेवन करने पर नवीन मधुमेह नष्ट हो जाता है |
  • यह रक्त रसादि धातुओं को पुष्ट करती है |
  • शरीर के अवयवों को मधुमेह से होने वाली क्षति को कम करती है |
  • इसे मधुमेहारि योग के नाम से भी जाना जाता है |

मधुमेह नाशिनी वटी (गुटिका) का सेवन या अनुपान कैसे करें ?

2-3 गोली दिन में तीन चार बार या चिकित्सक के परामर्श के अनुसार उपयोग करें | इसके साथ निम्न द्रव्यों का अनुपान करें :-

  • हल्दी स्वरस
  • आंवला स्वरस
  • जामुन की गुठली का चूर्ण
  • गिलोय का स्वरस
  • गुलर का चूर्ण
  • बीलपत्र का स्वरस

धन्यवाद ! किसी भी दवा का सेवन करने से पहले चिकित्सक की उचित सलाह जरुर ले लें |

Reference :-

Ayurvedic treatments for diabetes mellitus

Madhumeha (Diabetes mellitus)

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