जातिफलादि वटी (स्तंभक) वियाग्रा का आयुर्वेदिक विकल्प है |

जातिफलादि वटी

जातिफलादि वटी (बटी) को आयुर्वेदिक वियाग्रा कहने का कारण है इसका तुरन्त असर करना | यह एक आयुर्वेदिक औषधि है, जो शीघ्रपतन एवं नपुंसकता में बहुत कारगर सिद्ध होती है | दोस्तों आमतौर पर यौन कमजोरियों में लोग वियाग्रा जैसी अंग्रेजी दवाओं का उपयोग करते हैं क्योंकि ये तुरंत असर करती हैं एवं आप यौन संबंधों का आनंद ले पाते हैं | वियाग्रा में सिल्डेनाफिल नामक ड्रग होता है जो जननांगो में रक्त संचार को बढाता है जिससे तनाव (इरेक्शन) में सहायता मिलती है एवं अधिक समय तक तनाव बना रहता है |

जातिफलादि वटी स्तंभक
जातिफलादि वटी स्तंभक

लेकिन इन ड्रग्स (वियाग्रा) के बहुत दुष्परिणाम देखने को मिलते हैं | सर चकराना, पेट में जलन होना, एसिडिटी एवं उल्टी हो जाना इसके साधारण प्रभाव हैं | अगर अधिक समय तक इनका इस्तेमाल किया जाए तो इसके बहुत घातक दुष्प्रभाव हो सकते हैं |

आयुर्वेद में यौन कमजोरियों के लिए बहुत सी दवाएं मौजूद हैं | जिनमें वृहिनी गुटिका, शक्र वल्लभ रस, कामसुधा योग, कामेश्वर मोदक, जातिफलादि वटी एवं कामदेव चूर्ण प्रमुख हैं | इनमें से जातिफलादी बटी तुरंत असर करने वाली दवा है | जानें :-

  • जातिफलादि वटी क्या है ?
  • इसे आयुर्वेदिक वियाग्रा क्यों कहतें हैं ?
  • यह किस तरह से काम करती है ?
  • जातिफलादी बटी का सेवन कैसे करें ?
  • इसमें किन जड़ी बूटियों का उपयोग किया जाता है ?
  • यह कैसे बनती है ?
  • शीघ्रपतन एवं नपुंसकता में इसके क्या लाभ (फायदे) हैं ?
  • इसका सेवन करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?
  • इसके दुष्प्रभाव क्या हैं एवं उनसे कैसे बचा जा सकता है ?

जातिफलादी वटी (स्तंभक) क्या है एवं इसे आयुर्वेदिक वियाग्रा क्यों कह सकते हैं ?

यह एक विश्वसनीय एवं परीक्षित आयुर्वेदिक औषधि है जो केसर, अफीम, अकरकरा एवं सफ़ेद चन्दन आदि गुणकारी जड़ी बूटियों के योग से बनायी जाती है | यौन कमजोरियों में इस्तेमाल होने वाली औषधियां वातवाहिनी एवं शुक्रवाहिनी नाड़ी पर असर करती हैं एवं उसे बल देती हैं जिसके फलस्वरूप शीघ्रपतन एवं स्तम्भन दोष जैसी समस्याएँ ठीक हो जाती हैं |

बैद्यनाथ जातिफलादि वटी स्तंभक
बैद्यनाथ जातिफलादि वटी स्तंभक

जातिफलादि वटी भी इसी तरह काम करती है यह स्नायु संकोचक है | इसका प्रभाव शुक्रवाहिनी नाड़ी पर विशेष होता है एवं यह वीर्य के स्खलन को रोकती है | वीर्य स्खलन उसी समय होता है जब स्नायु ढीली पड़ जाये | इस दवा के असर से लम्बे समय तक स्नायु कड़ी रहती है एवं वीर्य स्खलन नही होता है और आप लम्बे समय तक यौन सम्बन्ध बना पाते हैं | यह शीघ्रपतन को रोकती है एवं इसी कारण इसे आयुर्वेदिक वियाग्रा कहते हैं |

अब जानते हैं इसके घटक द्रव्य क्या हैं ?

जातिफलादि वटी में निम्न घटक द्रव्यों (जड़ी बूटियों) का उपयोग किया जाता है :-

  • अकरकरा – एक तोला
  • सोंठ – एक तोला
  • पीपल – एक तोला
  • केसर – एक तोला
  • लौंग – एक तोला
  • सफ़ेद चन्दन – एक तोला
  • जायफल – एक तोला
  • शीतल चीनी – एक तोला
  • अफ़ीम – चार तोला

जातिफलादि वटी कैसे बनायी जाती है (बनाने की विधि)

इसे बनाने के लिए निम्न विधि का इस्तेमाल करें :-

  • सबसे पहले सभी जड़ी बूटियों को पीस कर चूर्ण बना लें (अफ़ीम एवं केसर को छोड़कर)
  • अब इस चूर्ण को साफ कपड़े से छान लें |
  • इस मिश्रण में अब केसर एवं अफ़ीम को अच्छे से मिला लें |
  • अब इसका मर्दन करें |
  • जितना अच्छे से इसका मर्दन किया जाएगा उतना ही इसका प्रभाव बढेगा |
  • जब यह मिश्रण गोली बनाने लायक हो जाये तो इसकी छोटी छोटी गोलियां बना लें |
  • इन गोलियों को छाया में रख कर सुखा लें |
  • इस तरह से उत्तम एवं गुणकारी जातिफलादि वटी बन के तैयार हो जाती है |

जानें जातिफलादि वटी (बटी) के फायदे क्या हैं ?

  • यह वीर्य स्तंभक है | इसके सेवन से वीर्य स्खलन देर से होता है |
  • इसका असर वातवाहिनी एवं शुक्रवाहिनी नाड़ी पर होता है |
  • शीघ्रपतन एवं स्तम्भन दोष में बहुत उपयोगी है |
  • यह स्नायु संकोचक है |
  • इसके असर से स्नायु ढीली नहीं पड़ती और वीर्य स्राव रुकता है |
  • यह तुरंत असर करती है |
  • इसका इस्तेमाल आप वियाग्रा की जगह कर सकते हैं |
  • यह वीर्य विकारों में बहुत उपयोगी है |

इसके नुकसान क्या हैं एवं उनसे कैसे बचा जाये ?

इस औषधि का सेवन बहुत सावधानी से करना चाहिए क्योंकि इसमें अफ़ीम की मात्रा ज्यादा होती है | यह अधिक समय तक वीर्य को रोक के रखती है जिसके फलस्वरूप जब वीर्य स्खलन होता है तो बहुत अधिक मात्रा में होता है | ज्यादा मात्रा में वीर्य स्खलन होने से शरीर में कमजोरी आ सकती है | इसलिए ध्यान रखें जब भी इस दवा का सेवन करें तो साथ में पौष्टिक खान-पान जरुर करें | दूध मलाई, घी एवं रबड़ी जैसे पदार्थों का सेवन करके इसके दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है |

जातिफलादि वटी का सेवन कैसे करें ?

यह एक उत्तम वाजीकर औषधि है | वीर्य स्तम्भन के लिए इसका सेवन बहुत फायदेमंद है | इसका सेवन करके आप लम्बे समय तक यौन सुख का आनंद ले सकते हैं | रात को बिस्तर पर जाने से पहले एक गोली दुग्ध या शहद के साथ सेवन करें |

ध्यान रखें यहाँ पर दी गयी जानकारी सिर्फ जातीफलादि वटी के बारे में आपके ज्ञानवर्धन के लिए है | इसे चिकित्सकीय सलाह न समझें | किसी भी दवा का उपयोग करने से पूर्व चिकित्सक से उचित परामर्श जरुर करें |

अगर आपके कोई सवाल हैं या आप किसी अन्य औषधि के बारे में जानना चाहते हैं तो हमें कमेंट करके बताएं | धन्यवाद !

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