सारस्वतारिष्ट / Sarasawatarishta के घटक, बनाने की विधि एवं फायदे

सारस्वतारिष्ट :- एक क्लासिकल आयुर्वेदिक सिरप है | इसका निर्माण आयुर्वेद की आसव एवं अरिष्ट कल्पना के तहत किया जाता है | आसव एवं अरिष्ट आयुर्वेद चिकित्सा की वे दवाएं जिनका निर्माण सिरप फॉर्म में किया जाता है |

अर्थात आयुर्वेद में सिरप बनाने की प्रक्रिया आसव – अरिष्ट कल्पना के अंतर्गत आती है | सारस्वतारिष्ट भी अरिष्ट कल्पना के द्वारा तैयार होने वाली शास्त्रोक्त दवा है | यह मानसिक विकारों, उन्माद (पागलपन), मिर्गी, भूलने की समस्या आदि में कार्य करती है |

सारस्वतारिष्ट क्या है ? / What is Sarasawatarishta in Hindi

सारस्वतारिष्ट

इसे आयुर्वेद की शास्त्रोक्त सिरप फॉर्म की दवा कह सकते है | आयुर्वेद के अरिष्ट प्रकरण में इसका वर्णन प्राप्त होता है | सारस्वतारिष्ट मानसिक विकार, स्त्रियों के मासिक धर्म की समस्या एवं हृदय को बल प्रदान करने वाली दवा है |

सारस्वतारिष्ट में लगभग 20 से भी अधिक आयुर्वेदिक जड़ी – बूटियों का समावेश होता है जो इसे आयु वर्द्धक, बल वर्द्धक, हृदय को बल देने एवं शरीर को कांति प्रदान करने में कारगर साबित करते है | यहाँ हम सरवातारिष्ट स्वर्ण युक्त का वर्णन कर रहें है |

सारस्वतारिष्ट के घटक द्रव्य / Ingredients of Sarasawatarishta in Hindi

इसमें निम्न घटक द्रव्य है एवं इनकी मात्रा भी निचे बताई गई है –

घटक द्रव्य (जड़ी – बूटियां का नाम) निर्माण में उपयोगी मात्रा
क्वाथ के लिए जड़ी – बूटियां
ब्राह्मी (Bacopa Monnieri)1 किलो
शतावरी (Aspragus Racemosa)240 ग्राम
विदारी कंद (Pueraria Tuberosa)240 ग्राम
बड़ी हरड (Terminalia Chebula)240 ग्राम
खस (Vetiveria Zizanioides)240 ग्राम
सोंठ (zinziber Officinale)240 ग्राम
सौंफ (Fennel)240 ग्राम
जल 12.8 लीटर
शहद 500 ग्राम
धातकी पुष्प 240 ग्राम
निर्गुन्डी 12 ग्राम
पिप्पली 12 ग्राम
त्रिवृत 12 ग्राम
विभिताकी 12 ग्राम
गिलोय 12 ग्राम
अश्वगंधा 12 ग्राम
वच 12 ग्राम
लौंग 12 ग्राम
कुष्ट 12 ग्राम
छोटी इलायची 12 ग्राम
वायविडंग 12 ग्राम
दालचीनी 12 ग्राम
स्वर्ण पत्र 12 ग्राम
शक्कर 1 किलो
भैसज्य रत्नावली – रसायन प्रकरण

सारस्वतारिष्ट बनाने की विधि / Making Procedure

सबसे पहले ब्राह्मी से लेकर सौंफ तक सभी जड़ी – बूटियों को जौकुट करके निर्देशित मात्रा में जल के साथ ओटाकर काढ़ा बना लें | जब जल एक चौथाई बचे तब इसे निचे उतर कर ठंडा करलें | अच्छी तरह ठंडा होने के पश्चात बाकि बचे द्रव्यों का चूर्ण बना लें |

इस ठन्डे काढ़े में धातकी पुष्प से लेकर स्वर्ण पत्र तक सभी द्रव्यों का महीन चूर्ण करके इसमें मिला दें एवं महीने भर के लिए इसे संधान के लिए निर्वात (जहाँ हवा न आती हो) पर रखदें | महीने भर पश्चात संधान परिक्षण करके छान कर उपयोग में लिया जा सकता है |

इस प्रकार से सारस्वतारिष्ट का निर्माण होता है |

सारस्वतारिष्ट के फायदे एवं स्वास्थ्य उपयोग / Helath Benefits of Sarasawatarishatam in Hindi

  • मानसिक विकारों में सारस्वतारिष्ट का सेवन फायदेमंद रहता है |
  • स्मरण शक्ति की कमी, भूलने की बीमारी में भी इसका प्रयोग फायदेमंद है |
  • उन्माद एवं मिर्गी रोग में चिकित्सकीय परामर्श से सेवन करवाया जाता है |
  • हृदय विकार जैसे हृदय की कमजोरी एवं तेज धड़कन में लाभदायक है |
  • यह आयु, स्मृति एवं वीर्य को बढ़ने वाली दवा है |
  • इसे सभी उम्र के लोग बालक, युवा एवं वृद्ध सेवन कर सकते है |
  • पुरुषों के वीर्य दोषों को दूर करने का कार्य करती है |
  • स्त्री के रजो दोषों को दूर करती है |
  • माहवारी के समय होने वाले दर्द, अनियमित माहवारी आदि मासिक धर्म की खराबी में सेवन लाभदायक है |
  • महिलाओं को आने वाले चक्कर, घबराहट, चित में अशांति आदि विकारों में भी इसके सेवन से तुरंत लाभ मिलता है |
  • यह वातवाहिनि नाड़ियों पर विशेषकर प्रभाव दिखाती है |
  • पित्त नाशक औषधि है |
  • महिलाओं में उम्र होने के पश्चात भी मासिक धर्म न आना या कम आना आदि समस्याओं में भी सारस्वतारिष्ट के सेवन से तुरंत लाभ मिलते है |
  • महिलाओं में होने वाली रक्त की कमी को दूर करती है एवं गर्भस्य को बलवान बनाने में कारगर औषधि है |

सेवन की विधि एवं मात्रा / Dosages

सारस्वतारिष्ट का सेवन आयुर्वेदिक वैद्य या उपवैद्य के दिशा निर्देश में करना चाहिए | सेवन की मात्रा के रूप में 10 मिली से 20 मिली तक की मात्रा में समान भाग जल मिलाकर करना चाहिए | इसका सेवन खाना खाने के पश्चात दिन में 2 बार सुबह – शाम करना चाहिए |

नुकसान / Side Effects

निर्देशित मात्रा में सेवन करने पर इस दवा के कोई साइड इफेक्ट्स नहीं है | अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से लीवर एवं किडनी पर दुष्प्रभाव हो सकते है | पेट में जलन एवं दिमाग में चक्कर आने जैसी समस्याएँ अधिक मात्रा में सेवन करने पर दिखाई दे सकती है |

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