दालचीनी के फायदे, स्वास्थ्य उपयोग एवं नुकसान (Dalchini ke Fayde, Upyog aur Nukshan)

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दालचीनी (Daalchini or Cinnamon) भारतीय घरों में मसाले के रूप में प्रमुखता से प्रयोग होने वाली औषधीय वनस्पति है | अधिकतर हमारे यहाँ इसे मसाले के रूप में ही प्रयोग किया जाता है | क्योंकि लोग दालचीनी के फायदे के बारे में अधिक नहीं जानते |

आयुर्वेद चिकित्सा शास्त्र के अनुसार दालचीनी के उपयोग से विभिन्न रोगों का उपचार संभव होता है | Dalchini ke Fayde बहुत से रोगों में स्वास्थ्य लाभ पहुंचाते है |

तो चलिए जानते है दालचीनी क्या है ? इसके क्या फायदे है एवं अधिक सेवन क्या नुकसान हो सकते है |

Post Contents

दालचीनी क्या है ? (What is Cinnamon in Hindi)

दालचीनी के फायदे

दालचीनी (Cinnamon in Hindi) एक औषधीय मसाला है | यह वनस्पति हिमालय, सीलोन और मलाया प्रायद्वीप में पैदा होती है | दालचीनी के पौधे की छाल तेजपता के छाल से काफी पतली एवं सुगन्धित होती है | यह मझले कद का हराभरा वृक्ष होता है | इसकी छाल कुछ मोटी, फिसलानी और फीके रंग की होती है | इसके पते 7 से 20 सेंटीमीटर तक चौड़े होते है | इसकी पतियों से काफी तेज गंध आती है |

विभिन्न भाषाओँ में दालचीनी के नाम (Dalchini Name in Different Languages)

दालचीनी के विभिन्न भाषाओँ में निम्न नामों से पुकारा जाता है |

Name of Cinnamon In Different Languages

Cinnamon in Sanskrit – त्वक, तनुत्वक, दारुसिता, चोचम, व्रांग, भृंग

Cinnamon in Hindi – दारचीनी, कलमी, दारचीनी

Cinnamon in Urdu – दारचीनी

Cinnamon in Oriya – दालोचिनी (dalochini), दरुचिनी (daruchini)

Cinnamon in Gujrati – तज, दालचीनी

Cinnamon in Punjabi – दालचीनी, किरका

Cinnamon in Bangali – दालचीनी

Cinnamon in Tamil – लवंग पत्ते (Lavang Patai)

Cinnamon in Malayalam – एरिकोलम (Erikkolam), वारनम (Varnam)

Cinnamonin Arabic – दारसिनी (Darsini), किर्फा (Qriffa)

दालचीनी के औषधीय गुण (Cinnamon Aushdhiya Guna)

आयुर्वेद के अनुसार इसकी छाल कड़वी, तीक्ष्ण और सुगन्धित रहती है | यह कामोद्दीपक, कृमिनाशक, पौष्टिक और वात, पित्त, प्यास, गले का सुखना, वायु नलियों का प्रदाह, अतिसार, खुजली और हृदय पीड़ा एवं गुदा द्वार की बिमारियों में लाभदायक है | इसका तेल रक्त्स्राव्रोधक, पेट के आफरे को दूर करने वाला और अरुचि, वमन एवं दस्तों के रोग में लाभदायक है |

दालचीनी के फायदे (cinnamon Benefits in Hindi)

आयुर्वेद के अनुसार यह विभिन्न रोगों में फायदेमंद औषधि है | इसको खाने से श्लेष्मत्वचा को उत्तेजना मिलती है, जिससे भूख बढती है और अन्न पचता है | उष्ण वीर्य होने के कारण पेट के अन्दर वायु पैदा नहीं होने देती एवं पूर्व संचित वायु को बाहर निकलने में फायदेमंद होती है |

यहाँ हम इसके अन्य लाभ (Daalchini ke Fayde) बता रहें है

मुंह के छालों में दालचीनी का सेवन (Dalchini Benefits for Mouth Ulcers in Hindi)

दालचीनी के पत्तों का काढ़ा बना कर उससे कुल्ला करने से मुंह के छाले जल्दी ही ठीक हो जाते है | देखा सामान्य सी दिखने वाला यह मसाला आपके कितना काम आ सकता है | रसोई की शान यह मसाला मुंह छालों की समस्या में भी उतना ही महत्वपूर्ण है |

सुखी खांसी में दालचीनी का प्रयोग (Cinnamon in Dry Cough)

सुखी खांसी होने पर यह जान पर बन आने वाली साबित होती है | रोगी खांस – खांस कर अपना गला ख़राब कर लेता है | लेकिन क्या आप जानते है दालचीनी के एक छोटे से प्रयोग से सुखी खांसी चुटकी में खत्म हो सकती है |

दालचीनी के साथ अडूसा के पतों को चूसने या काढ़ा बना कर सेवन करने से सुखी खांसी छूमंतर हो जाती है |

यह भी पढ़ें खांसी ठीक करने के सुगम उपचार

हिचकी रोग में दालचीनी का सेवन (Cinnamon Uses in Hiccup Disease in Hindi)

हिचकी होने पर व्यक्ति काफी परेशान होता है | रोगी को समझ नहीं आता कि इसके लिए उसे क्या सेवन करना चाहिए | लेकिन आपकी रसोई की शान दालचीनी बड़े आसानी से आपको इस समस्या से निजात दिला सकती है |

दालचीनी के काढ़े का सेवन 10 से 20 मिली की मात्रा में सेवन करने पर जल्द ही आराम मिलता है |

पढ़ें – हिचकी (हिक्का) रोग के आसान उपचार

दस्त रोकने के लिए दालचीनी का प्रयोग (Dalchini Uses for Diarrhea in Hindi)

  • दस्त रोकने के लिए दालचीनी की छाल 4 माशे लेकर उसमे 1 टोला कथा मिलाकर पीस लेना चाहिए | इसमें 25 टोला खौलता हुआ पानी डालकर ढँक देना चाहिए | दो घंटे बाद उसको छान कर दो हिस्से करके पीना चाहिए | इससे दस्त बंद हो जाते है |
  • दुसरे प्रयोग के रूप में दालचीनी का चूर्ण 6 रत्ती और कत्था 6 रत्ती इन दोनों को पीसकर लेने से भी दस्त बंद हो जाते है |

इन्फ्लुएंजा में दालचीनी के फायदे (Daalchini Benefits in Influenza in Hindi)

दालचीनी, लौंग, सोंठ इन तीनो को एक सेर पानी में डालकर काढ़ा बना लें | जब एक चौथाई पानी बचे तब उतार कर छान लें | इस काढ़े को दिन में 3 बार 5 तोले की मात्रा में लेने से इन्फ्लुएंजा में लाभ मिलता है |

दालचीनी के फायदे सिरदर्द में दे राहत (Dalchini Uses in Headache)

यह अत्यंत सुगन्धित औषधि है | इससे निर्मित होने वाले तेल का प्रयोग सिरदर्द में करना लाभदायक होता है | दालचीनी के तेल को माथे पर मलने से सिरदर्द ठीक हो जाता है | यह प्रयोग सर्दी की वजह से होने वाले सिरदर्द में लाभदायक है |

भूख बढाने एवं कब्ज दूर करने में उपयोग दालचीनी (Dalchini Uses in Appetite & constipation)

सोंठ 5 ग्राम, दालचीनी 5 ग्राम और इलायची 5 ग्राम – इन तीनों को पीसकर भोजन के पहले लेने से खुल कर भूख लगती है एवं पाचन सुधर कर कब्ज जैसी समस्या से राहत मिलती है |

और पढ़ेंकब्ज कैसे ठीक करें ?

आफरे की समस्या में दालचीनी के फायदे (Benefits of Cinnamona in Aafra)

आफरा एक पीड़ादायक स्थिति है | अगर आप आफरे से परेशान है तो दालचीनी के 3 ग्राम चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर चाटलें | यह प्रयोग दिन में 2 से 3 बार करने पर आफरे में आराम मिलता है |

दालचीनी के विभिन्न रोगों में अन्य स्वास्थ्य लाभ

  • दांत दर्द में दालचीनी के तेल का फोया बनाकर दांत की पोल में दाबने से दांत दर्द ठीक हो जाता है |
  • आंतो में खिंचाव हो तो इसके तेल को पेट पर कुछ समय के लिए मालिश करें | आँतों का खिंचाव ठीक हो जायेगा |
  • कान के बहरेपन में इसके तेल की दो बुँदे नित्य कान में टपकने से बहरेपन में लाभ मिलता है |
  • दालचीनी के हरे पत्तों को निम्बू के साथ पत्थर पर बाँट कर इसका लेप लगाने से एग्जिमा में राहत मिलती है |
  • अजीर्ण (Indigestion) की स्थिति में सोंठ, दालचीनी एवं इलायची का बनाया हुआ चूर्ण खाने से पहले 2 ग्राम तक सेवन करने से अजीर्ण रोग में आराम मिलता है |
  • वाजीकारक औषधि है अत: पुरुषों के यौन कमजोरियों में फायदेमंद है | इसे अन्य बल वर्द्धक जड़ी – बूटियों के साथ अल्प मात्रा में यौन शक्ति वर्द्धन के लिए प्रयोग करवाया जाता है |
  • तुतलाने की समस्या में दालचीनी के छोटे से टुकड़े को मुंह में रख कुछ दिन चुसना चाहिए | इससे तुतलाना कम होता है |
  • जुकाम होने पर दालचीनी के साथ सोंठ और 5 कालीमिर्च डालकर तैयार किया गया काढ़ा सेवन करना लाभदायक रहता है |
  • कोलेस्ट्रोल कम करने में भी cinnamon in hindi फायदेमंद औषधि है |

दालचीनी के औषध उपयोगी अंग (Uses Part of Dalchini)

आयुर्वेद में इसका प्रयोग कई प्रकार से किया जाता है | औषध उपयोग में इसके निम्न भाग काम आते है |

  1. पत्ते
  2. जड़
  3. दालचीनी की छाल
  4. दालचीनी का तेल

दालचीनी के प्रतिनिधि द्रव्य एवं सेवन की मात्रा

इसके प्रतिनिधि औषध द्रव्य कबाबचीनी और कुलचन है | इसकी मात्रा निम्न प्रकार से सेवन की जा सकती है

  • Daalchini ka Churna – 3 से 5 ग्राम
  • पत्तों का चूर्ण – 3 ग्राम तक
  • दालचीनी का तेल – 5 बूंद
  • दालचीनी का काढ़ा – 10 से 20 मिली तक

दालचीनी के नुकसान (Side Effects of Dalchini in Hindi)

इस औषधीय वनस्पति के कोई ज्ञात दुस्प्रभाव नहीं है | अगर सिमित एवं निर्देशित मात्रा में सेवन की जाये तो स्वास्थ्य लाभ देती है | अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से पेट में जलन जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है |

दालचीनी का तेल कफ एवं वायु का शमन करता है अर्थात यह कफ एवं वात को शरीर में संतुलित करने का कार्य करता है | गर्भवती महिलाओं के लिए दालचीनी का सेवन वर्जित है | क्योंकि गर्भवती महिलाओं में इसके सेवन से उल्टी एवं अन्य गर्भविकार होने की सम्भावना रहती है | अत: गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन चिकित्सक के परामर्शानुसार ही करना चाहिए |

धन्यवाद |

Mr. Yogendra Lochib

Mr Yogendra Lochib is a experienced and qualified Ayurveda Nurse & Pharmacist. He was Graduated (2009-2013) from Dr Sarvepalli Radhakrishnan Rajasthan Ayurved University, Jodhpur.He has Good Knowledge about Ayurvedic Herbs, Medicine, Panchkarma Procedure & Naturopathy. The Author believes in sharing the knowledge of Ayurveda (As it was shared 5000 years ago orally) using online platforms, and he is doing well.

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