हिचकी (हिक्का) रोग / Hiccough – रोकने के उपाय

हिक इति कृत्वा कायति शब्दायते इति हिक्का |

अर्थात शरीर के द्वारा ( उदान , प्राणवायु, यकृत , प्लीहा और आंतो के द्वारा ) “हिक्क” ऐसे शब्द के साथ श्वास को फेंका जाना हिचकी रोग कहलाता है |

हिचकी वैसे तो कोई रोग नहीं है लेकिन जब यह अपने तीव्र अवस्था में होती है तो बड़े बड़ो को घायल कर देती है | हिचकी होने पर न तो आप आसानी से कुछ खा सकते है और न ही कुछ पिया जाता है | “हिक्क-हिक्क” की आवाज के साथ व्यक्ति का जी हलक तक आ जाता है अर्थात व्यक्ति घबराहट महसूस करने लगता है |

हिचकी रोकने के उपाय
हिचकी रोकने के उपाय

हिक्का रोग मुख्तय: श्वसन तंत्र से सम्बंधित रोग है , परन्तु पाचन तंत्र की गड़बड़ी के कारण हिचकी का जन्म होता है | अत: इसे श्वसन व् पाचन तंत्र का रोग कहा जा सकता है | आयुर्वेद में इसे किसी अन्य व्याधि का लक्ष्ण भी माना जाता है अर्थात हिचकी स्वंय एक व्याधि या किसी पाचन संबधी रोग के लक्षण विशेष के रूप में प्रकट हो सकती है |

हिचकी के प्रकार

आयुर्वेद के अनुसार हिचकी 5 प्रकार की होती है |

  1. अन्नजा हिक्का – अधिक गरिष्ट भोजन करने , गलत आहार , अधिक मद्यपान आदि कारणों से दूषित हुई वायु श्वास नलिका और फुफ्फसो में आकर अन्नजा हिचकी को पैदा करती है | यह सामान्य प्रकार की हिचकी है जो कुछ समय बाद अपने आप ही ठीक हो जाती है एवं व्यक्ति इससे अधिक परेशान नहीं होता |
  2. यमला हिचकी – आसत्म्य अन्न के पच जाने के बाद दुबारा हिचकी शुरू हो जाती है , इस प्रकार की हिचकी अतिवेग से आती है , एवं रोगी को अधिक परेशान करती है |
  3. क्षुद्रा हिक्का – अधिक श्रम करने के कारण वायु दूषित होकर श्वसन मार्ग में धक्का देती है , यह क्षुद्रा हिचकी कहलाती है | यह हिचकी धीरे – धीरे पैदा होती है | अधिक श्रम से उत्पन्न होती है एवं भोजन करने के बाद रुक जाती है |
  4. गंभीरा हिचकी – जिस व्यक्ति के शरीर में कफ और वात की अधिकता हो गई हो , वह इस प्रकार की हिचकी से पीड़ित होता है | यह हिचकी नाभि के पास से शुरू होती है एवं गंभीर शब्द करती है |
  5. महाहिक्का – किसी रोग के कारण या किसी अन्य कारण से जिस व्यक्ति का मांस , बल , प्राण एवं तेजस क्षीण हो गया हो , एसे व्यक्तियों में कफ अचानक से श्वरयंत्र को आक्रांत कर के अत्यधिक ऊँचे .शब्दों में (हिक्क – हिक्क) उत्पन्न करता है | व्यक्ति के पुरे शरीर को कम्प देती है एवं व्यक्ति आलाप व् अशांति महसूस करता है |

हिचकी के कारण

आयुर्वेद के अनुसार हिचकी रोग कफ और वायु के दूषित होने पर होती है | अधिक मिर्च मसाले वाले पदार्थो को खाना , फ़ास्ट फ़ूड व अधिक नशीले पदार्थो के सेवन से भी हिचकी हो जाता है .| इसके अलावा तीव्रता से भोजन करना , विरुद्ध आहार का सेवन , शोक , चिंता , अपच , अजीर्ण आदि कारणों से भी हिचकी आ सकती है |

आधुनिक मतानुसार शरीर में स्थित डायफ्राम के अनियमित संकुचन के कारण उरोगुहा की शुन्यता व इपिग्लोटिस के खुलने की प्रक्रिया में गड़बड़ी होने के कारण श्वास वायु मार्ग में अवरुद्ध हो जाती है .| एसी स्थिति में शरीर वायु को बाहर निकलने के लिए दबाव के साथ “हिक्क – हिक्क” शब्द उत्पन्न करता है |

हिचकी रोकने के उपाय

अगर आप भी हिचकी से पीड़ित है तो इन हिचकी रोकने के उपाय को अपना कर हिचकी को रोक सकते है |

  • मोर के पंख की चन्द्रिका को जला कर , इसकी राख का सेवन करने से जल्द ही हिचकी से निजात मिलेगी | इसके लिए आप बाजार में मिलने वाली “मयुरपिच्छ भस्म” का इस्तेमाल भी कर सकते है | मयूरपिच्छ भस्म का सेवन 500mg की मात्रा में शहद मिलाकर  करे |
  • जैसे ही हिचकी शुरू हो तुरंत निम्बू पर काला नमक छिड़कर चूसने से हिचकी में आराम मिलता है |
  • एक चम्मच निम्बू का रस , एक कप गर्म पानी, थोडा सा काला नमक , एवं एक चम्मच शहद को मिलाकर चाटने से हिचकी आना तुरंत बंद हो जाता है |
  • हिचकी रोकने के उपाय में अगर लहसुन को सुंघाया जाए तो भी हिचकी आना बंद हो जाती है |
  • लहसुन , प्याज, अदरक, पोदीना, काली मिर्च, साधारण नमक, जीरा, मुन्नका , और निम्बू को मिलाकर बनाई गई चटनी भी हिचकी रोकने के उपाय में कारगर उपचार है |
  • मुलहठी का चूर्ण शहद के साथ चाटने से जल्द ही हिचकी रुक जाती है |
  • लौंग को मुंह में रखकर चूसने या दो लौंग को चबा कर ऊपर से गरम पानी पीने से हिचकी बंद हो जाती है |
  • पोदीने के पतों के साथ शक्कर डालकर चबाने से हिचकी बंद हो जाती है |
  • हिचकी रोकने के उपाय में अगर आधा चम्मच काला नमक को एक चम्मच शहद के साथ चाटने से जल्द ही हिक्का दूर होती है |

  • काला नमक को पानी में डालकर सूंघने से भी हिचकी बंद हो जाती है |
  • एक चम्मच सेंधा नमक व एक चम्मच राई को पीसकर आधा कप पानी में मिलाकर घूंट – घूंट पीने से भी हिचकी बंद होती है |
  • आधा चम्मच बड़ी इलायची के दाने सेक कर दो चम्मच चीनी के साथ मिलाकर हरेक घंटे के अन्तराल से 3 खुराक लेते ही हिचकी बंद हो जाती है |
  • देशी घी को गर्म करके नाभि पर लगाने से हिक्का रोग में राहत मिलती है |

हिचकी रोकने के आयुवेदिक उपाय

आयुर्वेदिक उपचार में रोगी को कृष्णाद्यचूर्ण , हरीतकी चूर्ण , क्षारयुषप्रयोग , चन्द्रशूरवीजहीम, दशमुलादी योग आदि का प्रयोग किया जाता है |

उदहारण

मयुरपिच्छ भस्म – ५००mg

शंख भस्म – ५००mg

सूतशेखर रस – २५०mg

इलायची – २g

सभी औषधियों को मिलाकर दिन में तीन बार शहद के साथ प्रयोग करवाते है | ध्यान दे यह एक उदाह्रानात्मक प्रयोग है | हर व्यक्ति की प्रकृति और शारीरिक क्षमता के आधार पर चिकित्सक अलग औषध निर्धारण करते है | अत: इसे अपनाने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श जरुर ले |

धन्यवाद |

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