चन्दनासव / Chandanasav – फायदे, रोगोपयोग एवं निर्माण विधि

चन्दनासव / Chandanasav – यह उत्तम शीतल गुणों से युक्त होती है | पेशाब में धातु जाना, पेशाब में जलन, पेशाब में इन्फेक्शन एवं महिलाओं के श्वेत प्रदर जैसे रोगों में लाभदायक औषधि साबित होती है | चन्दनासव में एंटीबैक्टीरियल गुण होते है जो इसे और अधिक उपयोगी औषधि बनाते है |

चन्दनासव

यह शरीर में जलन, उष्णता एवं पत्थरी के निर्माण को रोकने का कार्य करती है | अश्मरी रोग एवं हृदय की कमजोरी में भी यह लाभदायक परिणाम देती है | सफ़ेद चन्दन, निलोफर एवं मंजिष्ट आदि कुल 26 द्रव्यों के इस्तेमाल से आयुर्वेद की आसव विधि द्वारा इसका निर्माण किया जाता है | जिन व्यक्तियों के शरीर में अधिक गर्मी एवं दाह (जलन) की परेशानी रहती हो उन्हें इसका सेवन अवश्य करना चाहिए |

चन्दनासव बनाने की विधि 

इसका निर्माण आयुर्वेद की आसव (Syrup) विधि द्वारा किया जाता है | आसव विधि भी अरिष्ट की तरह ही होती है इनमे अंतर सिर्फ इतना होता है की आसव में क्वाथ का निर्माण नहीं किया जाता है अर्थात औषध द्रव्यों को सीधे जल में घोल कर संधान के लिए रख दिया जाता है | | चन्दनासव में निम्न घटक द्रव्यों का इस्तेमाल होता है |

चन्दनासव के घटक द्रव्य

चन्दनासव के घटक द्रव्य

अन्य

जल = 24.576 लीटर

कैसे बनता है चन्दनासव ?

चन्दनासव बनाने के लिए एक संधान पात्र (यह मिट्टी या लकड़ी का बड़ा पात्र होता है) की आवश्यकता होती है | सर्वप्रथम संधान पात्र में जल डालकर इसमें द्राक्षा, गुड एवं शर्करा को डालकर अच्छी तरह मिलालेते है | अब बाकी बची जड़ी – बूटियों का यवकूट मिश्रण तैयार करते है एवं इन्हें इस घोल में डाल देते है |

अंत में धातकी पुष्प को डालकर संधान पात्र का मुख अच्छी तरह बंद कर देते है | अब इस पात्र को निर्वात स्थान पर महीने भर के लिए रख दिया जाता है | महीने भर पश्चात् सन्धान परिक्षण विधि से इसका परिक्षण करके , तैयार होने पर बोतलों में भर देते है |

इस प्रकार से चन्दनासव का निर्माण होता है | बाजार में पतंजलि, डाबर, बैद्यनाथ एवं धूतपापेश्वर जैसी कंपनियों का चन्दनासव आसानी से उपलब्ध हो जाता है | इस आयुर्वेदिक सिरप को निर्देशित मात्रा में लिया जाए तो इसके कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होते |

चन्दनासव के उपयोग या फायदे 

चन्दनासव का निम्न विकारों में सेवन फायदेमंद होता है |

  • शरीर में अधिक गर्मी एवं जलन की समस्या होने पर इसका सेवन लाभ देता है |
  • पेशाब में रूकावट, जलन, संक्रमण आदि में फायदेमंद है |
  • स्त्रियों के श्वेत प्रदर की समस्या में लाभदायक |
  • पत्थरी में भी उपयोगी आयुर्वेदिक औषधि है | यह पत्थरी को बढ़ने नहीं देती |
  • बहुमूत्रल गुणों से युक्त है |
  • शरीर को बल प्रदान करती है |
  • हृदय को ताकत देती है |
  • सम्पूर्ण शरीर को पौषित करती है |
  • एंटीबैक्टीरियल गुणों से युक्त होने के कारण बैक्टीरिया के इन्फेक्शन को खत्म करती है |
  • सभी 20 प्रकार के प्रमेह में लाभदायक है |
  • अग्नि को बढाकर दीपन और पाचन का कार्य करती है |
  • पेशाब के साथ धातु गिरने की समस्या में भी अतिलाभदायक है |
  • यह एक प्रकार की आयुर्वेदिक टॉनिक है |

सेवन की मात्रा एवं विधि 

इसका सेवन 20 से 30 मिली. दिन में दो बार भोजन के पश्चात् करना चाहिए | अनुपन स्वरुप बराबर मात्रा में जल का उपयोग करना होता है |

आपके लिए अन्य महत्वपूर्ण आर्टिकल्स 

खून की खराबी में चमत्कारिक आयुर्वेदिक दवाई 

वजन घटाने के लिए अपनाये ये 7 योग 

पीलिया रोग क्या है – जाने इसके कारण, लक्षण और इलाज 

धन्यवाद |

 

Related Post

शास्त्रोक्त विधि से बनाये च्यवनप्राश – बढाए ... च्यवनप्राश / Chywanprash च्यवनप्राश आयुर्वेद की सबसे अधिक बिकने वाली औषधि है | रोगप्रतिरोधक क्षमता बढाने , रसायन व वाजीकरण के लिए इस औषध योग का सेवन ...
ब्रोंकाइटिस / Bronchitis के लक्षण, कारण, प्रकार और... ब्रोंकाइटिस / Bronchitis in Hindi ब्रोन्कियल ट्यूब्स में होने वाली सुजन को ब्रोंकाइटिस कहा जाता है | ब्रोंकियल ट्यूब्स (Bronchial Tubes) एक प्रकार की...
अकरकरा औषधि परिचय एवं स्वास्थ्य उपयोग या फायदे जान... अकरकरा - इस आयुर्वेदिक औषध द्रव्य से कम लोग ही परिचित है | आयुर्वेद के आर्ष संहिताओं में भी इस द्रव्यों का वर्णन उपलब्ध नहीं होता | इसका सर्वप्रथम वर्...
मुनक्का (दाख) / Vitis vinifera – औषधीय गुण, ... मुनक्का (दाख) / Vitis vinifera दाख / मुनक्का का प्रयोग आयुर्वेद में पुरातन समय से ही होता आया है | मुनक्का की प्रकृति गरम होती है , सर्दियों में इसका...
Content Protection by DMCA.com

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.