अमृतादि गुग्गुल के फायदे एवं नुकसान | Amrutadi Guggulu Benefits in Hindi

अमृतादि गुग्गुल के फायदे : यह आयुर्वेद चिकित्सा की क्लासिकल मेडिसिन है अर्थात इस दवा का वर्णन आयुर्वेद के पुरातन ग्रंथों में मिलता है | इसका निर्माण भी ग्रंथो में वर्णित विधि द्वारा ही किया जाता है अत: इसे शास्त्रोक्त औषधि पुकारा जा सकता है | अमृतादि गुग्गुल स्किन समस्याओं, आर्थराइटिस एवं घाव आदि के उपचार में काम आने वाली आयुर्वेदिक दवा है |

यूरिक एसिड बढ़ने या गाउट (Gout) की समस्या में अमृतादि गुग्गुल बहुत ही फायदेमंद आयुर्वेदिक औषधि है | क्योंकि गाउट में वात की वृद्धि होकर रक्त दूषित हो जाता है जिसे वातरक्त भी बोलते है | वातरक्त की स्थिति में सम्पूर्ण शरीर में बहुत तेज दर्द होता है | शरीर में सुजन एवं त्वचा रुखी हो जाती है एसे में अमृतादि गुग्गुल के फायदे इस रोग को ठीक करते है |

अमृतादि गुग्गुल के घटक द्रव्य / Ingredients of Amritadi Guggul

इसमें त्रिफला, त्रिकटु, गिलोय एवं गुग्गुलु जैसे घटक द्रव्य होते है | इन्ही घटक द्रव्यों के कारण यह वातरक्त, गठिया, पाचन की कमजोरी एवं कब्ज आदि में फायदेमंद होती है |

अमृतादि गुग्गुल के फायदे

चिकित्सकीय गुण धर्म

इसमें निम्नलिखित चिकित्सकीय गुण धर्म पाए जाते है – इसे आप अमृतादि गुग्गुल के फायदे भी मान सकते है कि कौनसे रोगों में यह काम आती है |

  1. सुजन नाशक – सुजन को दूर करने वाले प्रधान गुणधर्म मौजूद है |
  2. दर्दनाशक – इसमें दर्दनाशक गुण भी प्रधान है |
  3. जीवाणुरोधी – जीवाणुओं का सफाया करती है |
  4. वात नाशक – शरीर में बढ़ी हुई अतिरिक्त वात को दूर करती है |
  5. रेचक गुण – इसमें मृदु रेचक गुण विद्यमान है |
  6. उदरकृमि नाशक – यह पेट के कीड़ों को खत्म करने वाले गुणों से युक्त औषधि है |
  7. दीपन पाचन – दीपन एवं पाचन का कार्य करती है |

अमृतादि गुग्गुल के फायदे या लाभ / Benefits of Amritadi Guggul in Hindi

  • इसके सेवन से शरीर में बढे हुए यूरिक एसिड का खात्मा होता है | यह गुर्दे के विकारों को दूर करके उसकी कार्यकुशलता को बढाती है एवं अतिरिक्त यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने में मदद करती है |
  • यूरिक एसिड कम होने से जोड़ों के दर्द एवं सम्पूर्ण शरीर के दर्द से राहत मिलती है अत: जोड़ो के दर्द में भी अमृतादि गुग्गुल फायदेमंद है |
  • इसके जीवाणु रोधी गुण इसे त्वचा विकारों में फायदेमंद साबित करते है | फोड़े-फुंसी एवं घाव आदि को जल्द ठीक करने में मदद करती है |
  • इसमें त्रिफला होने के कारण यह पाचन को भी सुधारने वाले गुणों से युक्त हो जाती है | अत: कमजोर पाचन की समस्या में भी अमृतादि गुग्गुल के फायदे देती है |
  • यह औषधि मोटापे को भी कम करती है | क्योंकि पाचन को सुधारने से अतिरिक्त वसा पर भी असर पड़ता है |
  • ,मधुमेह रोग में इसके औषधीय गुण इसे फायदेमंद साबित करते है |
  • संधिशोथ, जोड़ो के दर्द, गठिया रोग में इसके सेवन से लाभ मिलता है |
  • इसे वातरक्त की विशेष औषधि माना जाता है | क्योंकि यह रक्त को शुद्ध करके यूरिक एसिड को कम करती है |
  • कुष्ठ एवं त्वचा विकारों में भी इसके जीवाणुरोधी गुण फायदा करते है |
  • यह पाचन को सुचारू करती है अत: मन्दाग्नि अर्थात भूख की कमी में यह औषधि लाभदायक है | अमृतादि गुग्गुल के फायदे के रूप में आप इसे देख सकते है |
  • घाव, नाड़ीवर्ण एवं सुजन में अमृतादि गुग्गुल फायदेमंद दवा है |
  • इस दवा का असर वातवाहिनी शिरा एवं रक्त पर सर्वप्रथम असर होता है | अत: यह दुष्टवर्ण एवं रक्त विकार पर तुरंत असर करती है |
  • अपने रेचक गुणों के कारण कब्ज को भी जल्द ही ठीक करती है |
  • इसी कारण यह बवासीर एवं भगंदर रोग में भी फायदेमंद औषधि है |

सेवन की मात्रा एवं विधि

अमृतादि गुग्गुल का सेवन शास्त्रों में 10 ग्राम की मात्रा तक बताया हुआ है लेकिन वर्त्तमान समय के रोगियों की सौम्य प्रकृति के कारण इतनी मात्रा अधिक प्रतीत होती है अत: इसे 250 से 500mg या 1 ग्राम की तक की अधिकतम मात्रा वैद्य निर्धारित करते है | अनुपान के रूप में गिलोय क्वाथ का उपयोग किया जा सकता है |

वैद्य इसकी मात्रा का निर्धारण रोगी की प्रकृति, अग्नि एवं बल देखकर करते है | अत: सेवन से पहले वैद्य परामर्श अवश्य लेना चाहिए |

अमृतादि गुग्गुल के नुकसान

इस आयुर्वेदिक औषधि के कोई ज्ञात दुष्प्रभाव नहीं है | लेकिन इसकी मात्रा का निर्धारण वैद्य द्वारा किया जाता है अत: निर्देशित मात्रा में ही सेवन करना चाहिए | अधिक मात्रा में सेवन करने से दस्त एवं सिरदर्द की शिकायत हो सकती है | यह भी अधिकतर उन रोगियों में नहीं देखने को मिलती जिनका बल ठीक है |

अत: निश्चित तौर पर यह औषधि कोई नुकसान नहीं करती लेकिन रोग पर पूर्ण विराम लगाने के लिए वैद्य सलाह से ही इसका उपयोग करना चाहिए |

सामान्य सवाल – जवाब

अमृतादि गुग्गुल क्या है ?

यह आयुर्वेद की क्लासिकल अर्थात शास्त्रोक्त दवा है जिसका उपयोग त्वचा विकार, गठिया, कब्ज एवं वातरक्त आदि व्याधियों में किया जाता है | इसका वर्णन भावप्रकाश निघंटु में मिलता है |

क्या यह गिलोय से बनती है ?

जी हाँ इसका प्रधान द्रव्य (जड़ी-बूटी) गिलोय है लेकिन गिलोय के साथ गुग्गुलु, त्रिफला, त्रिकटु, दालचीनी, वायविडंग एवं दंतिमुल भी समाहित है |

अमृतादि गुग्गुल के फायदे क्या है ?

यह वातरक्त, गुल्म, गठिया, जोड़ो के दर्द, पाचन, कब्ज, भगंदर, कुष्ठ रोग, फोड़े – फुंसी, रक्त विकार, प्रमेह, आमवात, सुजन एवं नाड़ीवर्ण को ठीक करती है |

अमृतादि गुग्गुल का क्या मूल्य (Price) है ?

यह निर्भर करता है कि आप किस फार्मेसी की अमृतादि गुग्गुल खरीद रहें है | सामान्यत: यह आपको 200 से 250 रूपए के बीच 60 टैब की मात्रा में उपलब्ध हो जाती है |

क्या इसका सेवन कोई भी कर सकता है ?

इस दवा का सेवन सौम्य प्रकर्ति के रोगी, बुजुर्ग, महिला एवं बच्चे सभी को करवाया जा सकता है लेकिन मात्रा का निर्धारण वैद्य सलाह से होना चाहिए |

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