गर्भपाल रस(Garbhpal Ras) है गर्भपात का रामबाण इलाज |

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गर्भपाल रस गर्भावस्था में माँ के लिए अमृत समान औषधि है | संतान प्राप्ति मनुष्य के जीवन में आने वाली सबसे बड़ी ख़ुशी होती है | लेकिन अगर गर्भावस्था में उत्पन्न विकारों के कारण अगर गर्भस्राव (गर्भपात) हो जाए तो यह माता पिता के लिए बहुत पीड़ादायी अनुभव होता है | इसलिय गर्भावस्था में माँ को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है | अगर किसी तरह की कोई समस्या दिखाई दे तो तुरंत उपचार कराना बहुत जरुरी है |

गर्भपाल रस
गर्भपाल रस

आइये जानते हैं गर्भपाल रस क्या है ?

गर्भपाल रस (Garbhpal Ras) गर्भिणी रोग की अचूक दवा है | गर्भाशय कमजोर होने, गर्भधारण न होने एवं बार बार गर्भपात होने जैसी समस्याओं में यह रामबाण औषधि का काम करता है | नाग भस्म, बंग भस्म एवं हिंगुल आदि औषधियों से मिलकर बना यह उत्पाद गर्भाशय के सभी विकारों को दूर करने की क्षमता रखता है |

अब जानते हैं इस रस के घटक द्रव्यों के बारे में |

यह एक शास्त्रोक्त औषधि है | इस दवा के निर्माण में बहुत विशेष एवं ताक़तवर घटकों का इस्तेमाल होता है | आइये जानते हैं इनके बारे में :-

  • नाग भस्म, शुद्ध सिंगरफ, मिर्च
  • बंग भस्म, दालचीनी, काला जीरा
  • तेजपता, सोंठ, चव्य
  • इलायची (छोटी), पीपल
  • धनियाँ, मुन्नका, देवदारु

उपरोक्त सभी घटक 1 – 1 तोला लेना है | इसकेअलावा लौह भस्म आधा तोला एवं सफ़ेद अपराजिता का रस (घोंटने के लिए) भी लेना है |

गर्भपाल रस बनाने की विधि के बारे में जानें |

गर्भिणी स्त्री के लिए उपयोगी इस महाऔषधि को आसानी से बना सकते हैं | इसे निम्न विधि से तैयार किया जा सकता है :-

  • ऊपर बताई गयी जरुरी सामग्री को चूर्ण बना लें |
  • इन सब को अच्छे से मिला लें |
  • अब इसे सफ़ेद अपराजिता के रस में घोंट लें |
  • घ्यान रखें की घोंटने के बाद यह गोलियां बनाने के लायक हो जाए |
  • अब इसकी एक एक रत्ती की गोलियां बना लें |
  • इन गोलियों को अच्छे से सुखा लें |
  • इस तरह से गर्भपाल रस तैयार हो जाता है |

जाने गर्भावस्था में इसका उपयोग कैसे करें ?

गर्भावस्था में 1 या 2 गोली शहद या गुडूची सत्व के साथ सेवन करें | बंध्यात्व दोष में अष्टमूर्ति रसायन के साथ उपयोग करें अथवा वैद्य के परामर्श से लें |

गर्भपाल रस (garbhpal ras) के फायदे क्या हैं ?

इस रस में उपयुक्त द्रव्य बहुत ताक़तवर एवं उपयोगी हैं | नाग एवं बंग भस्म गर्भाशय को पुष्ट करती हैं | अपराजिता वात वाहिनी नाड़ी को बल देती है | त्रिजात एवं जीरा पित्तशामक हैं एवं कोष्ठ के क्षोभ को दूर करते हैं |

कभी कभी गर्भाशय में विकार से या दुग्ध दोष से उदर या यकृत विकार होने पर शिशु गर्भ में ही खत्म हो जाता है | यह दोष बार बार गर्भपात का कारण बन जाता है जो माँ के लिए बहुत दुःख देने वाला होता है | गर्भपाल रस गर्भाशय के सभी दोषों को खत्म करने का सामर्थ्य रखता है |

आइये अब जानते हैं इसके फायदे क्या हैं ?

  • गर्भाशय को पुष्ट करता है |
  • गर्भ्पाल रस के सेवन से गर्भिणी के सभी विकार दूर हो जाते हैं |
  • कोष्ठ के क्षोभ को दूर करता है |
  • प्रसव के बाद आई कमजोरी में बहुत उपयोगी है |
  • कमर दर्द, चक्कर आना, सर दर्द एवं जी मितलाना जैसी समस्याओं में रामबाण औषधि है |
  • गर्भधारण की कमजोरी को दूर करता है |
  • बांझपन दूर कर सकता है |
  • सगर्भा (प्रेग्नेंट) के सभी दोषों को दूर करता है |

गर्भपाल रस गर्भिणी के लिए बहुत उपयोगी एवं असरदार दवा है | लेकिन इसका इस्तेमाल करने से पूर्व चिकित्सक से उचित सलाह ले लें |

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