यौन कमजोरियों का वाजीकरण (आयुर्वेद) से उपचार |

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आयुर्वेद जीवन का विज्ञानं है | यह सबसे प्राचीन एवं संगठित चिकित्सा प्रणाली है | वाजीकरण आयुर्वेद की एक शाखा है | आयुर्वेद का मुख्य उद्देश्य निरोगी, सुखी एवं दीर्घायु जीवन प्रदान करना है | यह शरीर, मन एवं आत्मा के लिए 5000 वर्ष से भी प्राचीन एक व्यापक चिकित्सा प्रणाली है | आयुर्वेद के माध्यम से प्रकृति में निहित सिद्धांतो का प्रयोग करके व्यक्ति के शरीर, मन एवं आत्मा को प्रकृति के साथ पूर्ण रूप से संतुलन में रख कर व्यक्ति एक स्वस्थ एवं सुखी जीवन का निर्वाह कर सकता है |

वाजीकरण
वाजीकरण

स्वस्थ एवं सुखी जीवन के तीन मुख्य आधार हैं :-

  • शुद्ध एवं संतुलित आहार |
  • अच्छी नींद |
  • स्वस्थ यौन संबंधो से भरा वैवाहिक जीवन |

यह तीनों आधार एक दुसरे से इतने जुड़े हैं कि किसी एक में कमी होने से बाकि दोनों भी प्रभावित होते हैं, एवं व्यक्ति मानसिक एवं शारीरिक असंतुष्टि महसूस करता है |

वैवाहिक जीवन एवं यौन सम्बन्ध |

यौन संबंधों का जीवन में बहुत महत्व है | सहवास की सहायता से आप अपने साथी से प्यार का इजहार करतें हैं | एवं एक दुसरे को शारीरिक एवं मानसिक तृप्ति का अहसास कराते हैं | लेकिन किसी कारणवश अगर आप अपने जीवनसाथी को यौन तृप्ति नहीं दे पाते तो इसका सीधा सीधा असर आपके वैवाहिक जीवन पर पड़ता है | यौन कमजोरियां आपके जीवन में तनाव एवं असंतुष्टि का कारण बन जाती हैं |

आयुर्वेद में है यौन कमजोरियों से मुक्ति पाने का राज |

आयुर्वेद दैवीय चिकित्सा पद्धति है | इसमें जीवन के हर पहलु को जगह दी गयी है | आयुर्वेद शरीर, मन एवं आत्मा तीनों को स्वस्थ करने वाला विज्ञानं है | आयुर्वेद की आठ शाखाएं हैं |

  1. काया चिकित्सा :- आंतरिक एवं बाह्य शरीर के उपचार को समर्पित है |
  2. बाल चिकित्सा :- शिशुओं से सम्बंधित रोगों पर आधारित है |
  3. ग्रह चिकित्सा :- मानसिक रोगों के उपचार के लिए |
  4. उर्द्वांगा चिकित्सा :- कान, नाक एवं गले के रोगों के लिए |
  5. शल्य चिकित्सा :- शल्यक्रिया पर आधारित है |
  6. विष चिकित्सा :- टोक्सिंस से सम्बंधित उपचार |
  7. रसायन प्रकरण :- सप्त धातु को सन्तुलित रखने के लिए |
  8. वाजीकरण :- यौन कमजोरियों से मुक्ति के लिए |

वाजीकरण आयुर्वेद की वो शाखा है जो सीधे सीधे आपके यौन स्वास्थ्य पर आधारित है | यह विषय स्वस्थ एवं सुदृढ़ काया, कामोत्तेजना, पौरुष शक्ति, शीघ्रपतन, स्तम्भन दोष एवं संतान प्राप्ति से सम्बंधित है | मह्रिषी चरक के अनुसार यौन स्वस्थता के लिए उचित खान पान, सही दिनचर्या एवं अच्छी नींद बहुत जरुरी है |

आयुर्वेदानुसार किसी व्यक्ति की यौन क्षमता को चार भागो में विभाजित किया गया है |

  1. चटक (Sparrow) :- इस प्रकृति का व्यक्ति कम समय तक सहवास कर पाता है एवं वीर्य की मात्रा भी कम होती है |
  2. गज (Elephant) :- बहुत अधिक समयांतराल में यौन सम्बन्ध बनाता है | वीर्य स्खलन की मात्रा बहुत अधिक होती है |
  3. वरुषा(Bull) :- अधिक मात्रा में वीर्य के साथ नियमित एवं अधिक समय तक सहवास की क्षमता |
  4. अश्व (Horse) :- यौन शक्ति का प्रतिक माना जाता है, अच्छी स्तम्भन शक्ति एवं यौन क्षमता से भरपूर होता है |

घोड़े एवं बैल जैसी यौन शक्ति प्राप्त करने के लिए वाजीकरण में बताये गए योगो (दवाओं), खान-पान एवं दिनचर्या का कड़ाई से पालन करना बहुत आवश्यक है |

वाजीकरण में बताये गए उपायों का उपयोग करके व्यक्ति 8 साल के घोड़े जैसी अच्छी काया, सामर्थ्य, कामोत्तेजना एवं यौन शक्ति प्राप्त कर सकता है | चरक संहिता के अनुसार यौन संतुष्टि, सुख की प्राप्ति एवं संतानोत्पति के लिए वाजीकरण का सहारा लेना चाहिए | वाजीकरण का प्रमुख लक्ष्य स्वस्थ मैथुन एवं प्रजनन क्षमता विकसित करना है | इसकी सहयता से व्यक्ति महिला के साथ घोड़े जैसी शक्ति से सम्भोग कर सकता है |

वाजीकरण में त्रिदोष एवं सप्त धातु असंतुलन का प्रभाव |

आयुर्वेदानुसार मनुष्य ब्रह्माण्ड का एक अभिन्न अंग है | हमारा शरीर ब्रह्माण्ड का एक अंश है | त्रिदोष (वात, पित्त एवं कफ) व्यक्ति की प्रकृति को दर्शाते हैं | इन तीनों दोषों में असंतुलन हो जाये तो व्यक्ति के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है |

  • वात :- धरती एवं हवा (Earth + Air)
  • पित्त :- अग्नि एवं पानी (Fire + Water)
  • कफ :- पानी एवं अग्नि (Water + Fire)

ख़राब दिनचर्या, अनुचित खान-पान एवं खाद्य पदार्थो का अनुचित संगम त्रिदोष असंतुलन का मुख्य कारण है | इससे व्यक्ति का स्वास्थय एवं यौन शक्ति प्रभावित होती है |

इसके साथ ही आयुर्वेद में सप्त धातु का वर्णन है | ये धातुएं एक नियमित संतुलन में शरीर में मौजूद होती है | इनमें किसी भी तरह की गड़बड़ी या असंतुलन बीमारियों का कारण बनता है | ये धातुएं हैं :-

  • रस (Plazma)
  • रक्त (Blood)
  • स्नायु (Muscle)
  • वसा (Fat)
  • अस्थि (Bone)
  • मज्जा (Bone Marrow)
  • शुक्र (Reproductive liquid)

वाजीकरण अपनाकर पायें घोड़े जैसी अपार यौन शक्ति |

संस्कृत में वाजी का अर्थ है घोड़ा, वाजीकरण यानि घोड़े जैसे ताक़त एवं यौन शक्ति प्राप्त करना | आयुर्वेद की इस शाखा में उन सभी उपायों एवं उपचारों का उल्लेख है जिनका उपयोग करके व्यक्ति अपार यौन सामर्थ्य एवं बल प्राप्त कर सकता है | इस विषय में ऐसी आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों एवं रसायनों की जानकारी दी गयी है जो शीघ्रपतन, यौन दुर्बलता, धात की कमी, शुक्राणु की कमी, स्तम्भन दोष एवं कामोत्तेजना में कमी जैसी समस्याओं को जड़ से खत्म करने का सामर्थ्य रखती हैं |

लेकिन इनका पुर्णतः लाभ तभी मिल पाता है जब आप स्वस्थ जीवनशैली, उचित खान-पान एवं परहेज अपनाते हैं | इसलिए वाजीकरण द्रव्यों का इस्तेमाल करने के साथ अपनी जीवनशैली में बदलाव करना भी जरुरी है |

बाजार में मिलने वाले बहुत से वाजीकरण रसायन एवं दवाइयां इसलिए अपेक्षित लाभ नहीं करती क्योंकि या तो उनमे मिलावट होती है, या फिर आप उपयुक्त आहार एवं जीवनशैली नहीं अपना रहें है |

यौन शक्ति बढाने के लिए सबसे प्रभावी वाजीकरण रसायन एवं दवाएं |

आधुनिक समय में बाजार में आयुर्वेद एवं वाजीकरण के नाम पर यौन शक्ति बढाने वाले बहुत से उत्पाद उपलब्ध हैं | इन रसायनों एवं दवाओं की विश्वसनीयता पर बहुत शक है | किसी भी आयुर्वेदिक दवा की उपयोगिता इस बात पर निर्भर करती है की उसमें उपयोग में ली गयी जड़ी बूटियां एवं खनिज कितने शुद्ध हैं | विज्ञापनों के इस दौर में असली नकली की पहचान कर पाना बहुत कठिन काम है |

वाजीकरण में 100 से भी ज्यादा रसायनों एवं दवाओं का वर्णन है जो कामशक्ति बढाने के लिए बेहद लाभदायी हैं | यहाँ पर हम आपको वाजीकरण में वर्णित सबसे प्रभावशाली रसायनों एवं दवाओं के बारे में बतायेंगे | अगर ये रसायन आप को शुद्ध एवं मिलावट रहित मिल जाए तो आप अपनी यौन कमजोरियों को बड़ी आसानी से दूर कर सकते हैं |

1.वृहनी गुटिका (VRIHANI GUTIKA) :-

यह सबसे शक्तिशाली वाजीकरण रसायन है | वाजीकरण रसायन विशेष श्रेणी के रसायन होते हैं | ये हमारे मस्तिष्क एवं शरीर पर इस तरह से असर करते हैं की कामशक्ति एवं प्रजनन क्षमता दोनों में वृधि होती है | इनके सेवन से मानसिक तनाव एवं शारीरिक कमजोरी भी दूर होती है | वृहनी गुटिका सबसे ताक़तवर रसायन है, आइये जानते हैं इसके बारे में :-

वृहनी (Vrihani) गुटिका घटक द्रव्य :-

  • शारा जड़ (Roots of Saccharum Munja), इक्षु जड़ (Roots of Saccharum officinarium)
  • कांदेक्शु (Asteracantha longifolia), इक्शुवालिका (Hygrophila spinosa)
  • शतावरी (Asperagus racemosus), पयास्य (Holostemma rheedianum)
  • विदारीकन्द (Diascorea bulbifera), काँटाकरिका (Solanum indicum)
  • जीवंती (Leptadonia reticulata), जीवक (substitute Pueraria tuberosa)
  • मेदा (substitute Asparagus racemosus), ग्वारपाठा (Aloe Vera)
  • रिश्भाक (substitute Pueraria tuberosa), बला (Sida cordifolia)
  • रिद्धि (substitute Diascorea bulbifera), गोक्षुर (Tribulus terrestris)
  • रसना (Pluchea lanceolata), कपिकच्छु (Mucuna pruriens)
  • पुनर्नवा (Boerhaavia diffusa), घी (clarified butter)
  • दूध (Milk), वंशलोचन (Bambusa erandinacia), पिप्पली (Piper longum)
  • मरीच (Piper nigram), त्वक (Cinnamomum zeyliicum)
  • एला (Ellataria cardamomum), नागकेसर (Nagkesar)
  • शहद (Honey)

वृहनी गुटिका के फायदे एवं लाभ (Benefits of Vrihani Gutika)

यह अद्भुद रसायन निम्न रोगों को जड़ से उखाड़ फेंकने का सामर्थ्य रखता है :-

  • स्तम्भन दोष (Erectile Dysfunction)
  • स्वपन दोष (Nightfall)
  • वीर्य का पतलापन (watery Sperm)
  • शीघ्रपतन (Pre-mature ejaculation)
  • कामोत्तेजना की कमी (sexual desire)

2. वाजीकरण घृतं (Vajikaran Ghritam)

ये भी बहुत गुणकारी औषधि है | यह वाजीकरण रसायन मुख्यतः व्यक्ति के जननांग (Penis) की ताक़त बढाता है | इसमें निम्न घटक द्रव्यों का उपयोग होता है :-

  • उड़द, कपिकच्छु, जीवक, रिश्भक, ग्वारपाठा
  • मेदा, रिद्धि, शतावरी, मधुक, अश्वगंधा
  • विदारीकन्द एवं इक्षु जूस
  • शहद, वंशलोचन, शक्कर, पिप्पली

इस औषधि को रोजाना उपयोग करने से स्तम्भन दोष जड़ से ख़त्म हो जाता है | इसके साथ ही यह अन्य यौन कमजोरियों में भी फायदा पहुंचता है |

3. कामसुधा योग (Kamsudha Yog)

यह वर्त्तमान समय में यौन कमजोरियों के लिए सबसे गुणकारी एवं विश्वसनीय रसायन है | कामसुधा योग 20 से भी अधिक वाजीकरण द्रव्यों एवं खनिजों का अद्भुद योग है | यह सभी प्रकार की यौन समस्यों एवं शारीरिक क्षमता बढाने के लिए बहुत उपयोगी है |

कामसुधा योग
कामसुधा योग

सबसे अच्छी बात ये है की इसमें औषधियों को उनके सामान्य रूप में नहीं लेके उनका एक्सट्रेक्ट (सार द्रव्य) उपयोग में लिया जाता है | इस कारण यह सुरक्षित एवं प्रभावी वाजीकरण रसायनों में से एक है |

कामसुधा योग के फायदे :-

  • शीघ्रस्खलन या शीघ्रपतन को जड़ से खत्म कर देता है |
  • स्तम्भन में वृद्धि करता है |
  • कामोत्तेजना का संचार करता है |
  • आंशिक एवं पूर्ण नपुंसकता में लाभदायी है |
  • वीर्य को गाढ़ा करता है |
  • शुक्राणुओं की कमी को दूर करता है |

4. मेदादी योग (Medadi Yog)

यह वृद्धों में कामोत्तेजना बढाने एवं यौन शक्ति का संचार करने के लिए सबसे उपयुक्त वाजीकरण दवा है | उम्र बढने के साथ साथ व्यक्ति अपनी कामशक्ति में भी कमी का एहसास करता है | मेदादी योग का सेवन करने से वृद्ध भी पुनः नवयुवको वाला जोश एवं कामशक्ति प्राप्त कर सकते हैं | आइये जानते हैं इसके घटक द्रव्य :-

  • मेदा ( Asparagus racemosus)
  • पयस्या (Holostemma rheedianum),
  • जीवंती(Leptadonia reticulata)
  • विदारीकन्द (Pueraria tuberosa)
  • कंटकारी (Solanum xanthocarpum)
  • गोक्षुर (Tribulus terrestris)
  • उड़द (Black gram)
  • गेंहू (wheat)
  • चावल (Shali rice)

वाजीकरण आयुर्वेद की एक विशेष उपचार पद्धति है | जिसकी सहायता से आप शारीरिक एवं मानसिक सुख की प्राप्ति कर सकते हैं | वाजीकरण का मकसद सिर्फ यौन शक्ति बढ़ाना नहीं है अपितु यह आपके सर्वांगीण विकास में उपयोगी है |

धन्यवाद !

और पढ़ें – आयुर्वेद से यौन शक्ति कैसे पायें

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