पेट दर्द की 10 प्रशिद्ध आयुर्वेदिक दवा एवं घरेलु इलाज

पेट दर्द की दवा 

पेट दर्द आज एक आम समस्या के रूप में विद्यमान है | बच्चे, बूढ़े एवं युवा सभी कभी न कभी इस समस्या से जरुर झुझते है | इस रोग के कई कारण हो सकते है | जैसे यह सामान्य अपच, अजीर्ण या कब्ज आदि के कारण भी हो सकता है या फिर किसी अन्य गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है | अगर आपको लम्बे समय से पेटदर्द की समस्या है तो इसका उपचार (पेट दर्द की दवा) स्वयं न करके किसी योग्य चिकित्सक से इलाज करवाना चाहिए |

पेट दर्द की दवा

लेकिन कभी कभार होने वाला अधिकतर पेट दर्द गलत खान – पान एवं कमजोर पाचन का नतीजा होता है | अत: इस प्रकार के पेट दर्द में घरेलु उपचार से भी आराम पाया जा सकता है | आयुर्वेद चिकित्सा में उदर विकारों के लिए विभिन्न दवाएं उपलब्ध है जिनका चिकित्सकीय उपयोग करके आसानी से इस रोग पर काबू पाया जा सकता है | आयुर्वेदिक चिकित्सक पेटदर्द के रोग में रोग का कारण जानकर इसकी दवाओं का निर्धारण करते है |

सामान्य पेटदर्द के कारण 

  • खान – पान की गड़बड़ी |
  • अधिक मसाले दार भोजन का सेवन
  • कमजोर पाचन |
  • पेट में कीड़े होना |
  • क्षमता से अधिक भोजन करना |
  • कब्ज रहना |
  • अपच |
  • अजीर्ण रोग |
  • गैस की समस्या होना |
  •  असमय भोजन ग्रहण करना |
  • आंतो की विकृति |

पेटदर्द की 10 प्रशिद्ध आयुर्वेदिक दवा / Pet Dard ki Medicine

ये तो आप समझ ही गए होंगे की सामान्य पेट दर्द किन – किन कारणों से हो सकता है | इन्ही कारणों के आधार पर आयुर्वेदिक चिकित्सक उदर विकारों के लिए औषध का निर्धारण करते है | जैसे अगर आपको कमजोर पाचन के कारण पेटदर्द हो रहा है तो पाचन को सुधारने वाले आयुर्वेदिक योग का निर्धारण करते है या फिर कब्ज के कारण पेट दर्द होता हो तो कब्ज को ठीक करने वाली आयुर्वेदिक दवाओं का निर्धारण करके उपचार करते है |

यहाँ हमने सामान्य पेटदर्द में काम में ली जाने वाली आयुर्वेदिक दवाओं की सूचि उपलब्ध करवाई

1. अविपत्तिकर चूर्ण 

लौंग , निशोथ, पीपल, हरड आदि आयुर्वेदिक द्रव्यों के योग से इस चूर्ण का निर्माण किया जाता है | पेटदर्द की यह उत्तम आयुर्वेदिक दवा है | अगर आपको अपच एवं अजीर्ण आदि के कारण पेट दर्द की शिकायत है तो निश्चित रूप से इस दवा के सेवन से जल्द ही यह समस्या जाती रहती है | इसके साथ – साथ अगर आपको पेट में जलन, खट्टी डकारें आना, जी मचलाना और अम्लपित (Acidity) आदि की समस्याएँ है तो वे भी इसके सेवन से जाती रहती है |

पेटदर्द की इस दवा को हर घर में होना चाहिए | अविपत्तिकर चूर्ण का सेवन 2 से 5 ग्राम सुबह – शाम गुनगुने जल के साथ करना चाहिए | और पढ़ें अविपत्तिकर चूर्ण का सम्पूर्ण उपयोग 

2. हिंग्वाष्टक चूर्ण 

आयुर्वेद चिकित्सा के अंतर्गत उदर विकारों एवं गैस आदि का सबसे महत्वपूर्ण चूर्ण है | अगर आपका भोजन सही से न पचता हो, गैस की समस्या हो या पेट में दर्द आदि हो तो हिंग्वाष्टक चूरन के सेवन से इन सभी विकारों में उत्तम लाभ मिलता है | यह दुष्प्रभाव रहित औषधि है , लेकिन सिमित मात्रा में सेवन करना चाहिए |

पेट में दर्द, आफरा, खट्टी डकारें, गैस के कारण उदरशूल या पेट में भारीपन होने पर 3 से 6 ग्राम जल या छाछ के साथ सुबह शाम सेवन करना चाहिए | बाजार में यह पतंजलि, बैद्यनाथ एवं डाबर कंपनी का आसानी से उपलब्ध हो जाता है |

3. रसोनादी वटी 

पेट दर्द, पेट में आफरा एवं गुल्म आदि रोगों में इस आयुर्वेदिक गोली का सेवन फायदेमंद होता है | इस वटी का निर्माण लहसुन, पिप्पली, हिंग एवं सेंधा नमक आदि के योग से किया जाता है | सामान्य रूप से होने वाले पेट दर्द में रसोनादी वटी के सेवन से तुरंत आराम मिलता है | यह गोली पाचन की समस्या को सुधार कर उपरोक्त रोगों में लाभ पहुंचती है |

वटी का सेवन 2 वटी की मात्रा में सुबह – शाम करना चाहिए |

4. अग्निमुख चूर्ण 

खट्टी डकारें, जी मचलाना, अग्निमंध्य, अपच एवं उदरशूल आदि रोगों में अग्मिमुख चूर्ण के सेवन से लाभ मिलता है | इस आयुर्वेदिक दवा का निर्माण सोंठ, जीरा, सेंधा नमक, काला नमक आदि के योग से किया जाता है | इसके सभी औषध घटक द्रव्य पाचन को सुधारने व उदर विकारों में लाभदायक होते है | इसी कारण से अग्निमुख चूर्ण के सेवन से पेट दर्द में आराम मिलता है |

इसका सेवन 2 से 4 ग्राम जल के साथ भोजन के पश्चात करना चाहिए |

5. नारायण चूर्ण 

इस आयुर्वेदिक चूर्ण का उपयोग भी पेट दर्द की समस्या में किया जाता है | अगर आपको पेट में गैस , आफरा एवं गुल्म या जलोदर आदि के कारण पेट दर्द रहता है तो नारायण चूर्ण का सेवन करने से इस रोग में लाभ मिलता है | चूर्ण का निर्माण अजवायन, हरड, आमला एवं पीपल आदि के योग से किया जाता है |

पेट दर्द की दवा का उपयोग 2 से 4 ग्राम की मात्रा में भोजन के पश्चात करना चाहिए |

6. पंचकोल चूर्ण 

पंचकोल चूर्ण का उपयोग भी आयुर्वेद चिकित्सा में पेट से सम्बंधित विकारों के लिए किया जाता है | यह दीपन , पाचन की उत्तम आयुर्वेदिक दवा है | पेट दर्द, पेट में आफरा, गैस, कब्ज एवं विभिन्न प्रकार के अन्य उदर रोगों में अमृत सामान कार्य करता है | इसका सेवन 2 से 4 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ सुबह – शाम करना चाहिए |

7. लवण भास्कर चूर्ण 

अधिकतर उदरविकार पाचन की गड़बड़ी के कारण होते है | पाचन ठीक से न होने पर अपच, अजीर्ण, उदरशूल आदि की समस्या से व्यक्ति ग्रषित हो जाता है | इन सभी समस्याओं से बचने के लिए पाचन की समस्या होने पर लवण भास्कर चूर्ण का सेवन करना चाहिए | यह दीपन एवं पाचन का कार्य करके भोजन को ठीक से पचाने का कार्य करता है |

लवण भास्कर चूर्ण को 5 ग्राम की मात्रा में सुबह – शाम जल के साथ सेवन किया जा सकता है |

8. पेट दर्द में समुद्रादी चूर्ण 

सामुद्रादी चूर्ण भी पेट दर्द की उत्तम आयुर्वेदिक दवा है | इसका निर्माण समुद्र नमक, पिप्पल एवं यवक्षार के योग से किया जाता है | सभी प्रकार के उदर विकारों में इस चूर्ण के सेवन से अच्छे परिणाम मिलते है | चूर्ण का सेवन 2 से 3 ग्राम की मात्रा में चिकित्सक के निर्देशानुसार करना चाहिए |

9. अग्नितुण्डी वटी 

अग्नितुन्डी वटी का मुख्य कार्य भी पाचन को सुचारू करना होता है | इसके सेवन से भूख बढती है , पेट दर्द में आराम मिलता है , आफरा खत्म होता है एवं साथ ही सभी प्रकार के वात रोगों में लाभ मिलता है | दवा का सेवन 1 से 2 गोली चिकित्सक के परामर्शनुसार करना चाहिए |

10. विडलवणदी वटी 

कई रोगियों में पेट दर्द का कारण पेट में कीड़े होना होते है | इस प्रकार के रोगियों को आयुर्वेदिक चिकित्सा में इसका सेवन करवाया जाता है | विद्लाव्नादी वटी भूख न लगना, पेट में कीड़े होना एवं वायु गुल्म आदि में काफी फायदेमंद होती है | इसका सेवन 1 गोली चिकित्सक के परामर्शानुसार करना चाहिए |

पेट दर्द में उपयोगी सभी आयुर्वेदिक दवाएं 

इस सारणी से आप पेटदर्द में उपयोगी सभी आयुर्वेदिक दवाओं की लिस्ट देख सकते है | ये दवाएं – पेट दर्द की दवा – बाबा रामदेव की पतंजलि कंपनी, डाबर एवं बैद्यनाथ जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों की उपलभ्द हो जाती है –

पेट दर्द की आयुर्वेदिक दवाएं


पेट दर्द के अन्य घरेलु इलाज 

यहाँ हमने कुछ महत्वपूर्ण देशी घरेलु इलाज एवं देशी योग बताएं है जिनको अपना कर आप पेट दर्द का रामबाण इलाज कर सकते है | इन उपायों को सामान्य रूप से होने वाले पेटदर्द में अपनाना चाहिए |

पेट दर्द नाशक पोटली का निर्माण करना 

इस योग के निर्माण के लिए निम्न सामग्री होनी चाहिए

  1. काला तिल
  2. अजवायन
  3. बड़ी हर्रे की बक्कल
  4. समुद्री नमक
  5. गन्ने का पुराना सिरका

1 से 4 तक की सभी सामग्री को 20 – 20 ग्राम ले और गन्ने के पुराने सिरके को 60 ग्राम की मात्रा में लेना चाहिए | इन मात्राओं में लेने के पश्चात इन सभी सुखी चीजों को महीन पिसलें | अच्छी तरह महीन चूर्ण तैयार होने के बाद इसे सिरके में मिला ले और किसी बड़े मुंह की बोतल में रखें |

इसका प्रयोग जब दर्द हो उस समय करना चाहिए | इसे कपड़े की पोटली में रख कर , तवे पर गरम करना चाहिए एवं गरम गरम पोटली से पेट पर सेक करना चाहिए | पेट में दर्द वाली जगह पर इसका गरम – गरम सेक करने से लाभ मिलता है | जैसे ही सामग्री ठंडी होने लगे फिर से तवे पर पोटली को रख कर गरम कर लेना चाहिए और फिर से सेक करना चाहिए |

2 – 4 बार के प्रयोग से पेट दर्द में आराम मिलने लगता है | यह नुस्खाभी पेट दर्द की दवा के रूप में कार्य करती है |

उदररोग नाशक योग 

इस योग का निर्माण करने के लिए दही आधा सेर एवं 20 नग कच्चा केला लेना चाहिए | अब कच्चे केले को उबालकर छिल लें और उन्हें मसलकर तवे पर छोटी – छोटी रोटी के तरह सेक ले | अच्छी तरह सिकने के बाद इसका उपयोग करना चाहिए | यह देशी योग या इलाज पेट दर्द , संग्रहणी, अतिसार एवं सभी प्रकार के उदररोगों में रामबाण सिद्ध होता है |

इसका सेवन भूख लगने पर सुबह एवं शाम किया जा सकता है | इस योग का सेवन करते समय आहार में नमक एवं मिठाई का सेवन बंद कर देना चाहिए |

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धन्यवाद 

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