सिंहनाद गुग्गुलु – जाने इसके फायदे, निर्माण विधि एवं घटक द्रव्य

सिंहनाद गुग्गुलु (Singhnad Guggulu) – आयुर्वेद की यह दवा वातदोषों के उपचारार्थ उपयोग में ली जाती है | इसका प्रयोग आमवात , वातरक्त, रुमाटाइड पेन एवं संधिशूल में किया जाता है | शरीर में आमवर्द्धि एवं वात की वर्द्धि होने से आमवात, गठिया एवं संधिशूल जैसे रोग हो जाते है | सिंहनाद गुग्गुल सभी प्रकार के वात के कारण होने वाले दर्द में प्रभावी स्वास्थ्य लाभ देती है |

इन समस्याओं के अलावा इसका उपयोग कफज विकार जैसे श्वास – कास , कुष्ठ, गुल्म एवं उदरशूल आदि रोगों के साथ त्रिदोष शमन में भी किया जाता है |

सिंहनाद गुग्गुलु

सिंहनाद गुग्गुलु के निर्माण में आंवला, हरीतकी , बहेड़ा, शुद्ध. गंधक आदि द्रव्यों का इस्तेमाल किया जाता है | यहाँ हमने  सिंहनाद गुग्गुलु के घटक द्रव्यों की सूचि उपलब्ध करवाई है –

सिंहनाद गुग्गुलु के घटक द्रव्य 


1. आमलकी – 48 ग्राम

2. हरीतकी –  48 ग्राम

3. विभितकी – 48 ग्राम

4. शुद्ध गंधक – 48 ग्राम

5. शुद्ध गुग्गुलु – 48 ग्राम

6. एरंड तेल – 96 ग्राम (शास्त्रोक्त 192 ग्राम लेकिन एरंड तेल अधिक लेने से गुटिका का निर्माण नहीं होता)

7. जल – 576 मिली. (क्वाथ निर्माण के पश्चात 144 मिली बचता है)


सिंहनाद गुग्गुलु को बनाने की विधि 

इसके निर्माण में सबसे पहले हरीतकी, आमलकी एवं विभितकी इन तीनों द्रव्यों को कूटपीसकर चूर्ण बना लिया जाता है | इसके पश्चात इस तैयार त्रिफला चूर्ण को जल में डालकर क्वाथ का निर्माण किया जाता है | जब जल एक चौथाई बचे तब इसे आंच से उतार कर ठंडा कर लेते है |

अब इस तैयार त्रिफला क्वाथ में शुद्ध गुग्गुलु को डालकर आग पर गरम करते है, जब इस क्वाथ में गुग्गुल अच्छी तरह मिलजावे तब इसमें शुद्ध गंधक एवं एरंड तेल डालकर फिर से पकाते है | अच्छी तरह पाक होने पर इसे ठंडा करके वटियों का निर्माण कर लिया जाता है | इस प्रकार से सिंहनाद गुग्गुलु का निर्माण होता है |

बाजार में यह बैद्यनाथ, पतंजलि, धुत्पापेश्वर एवं डाबर कंपनी की सिंहनाद गुग्गुलु आसानी से उपलब्ध हो जाती है |

सिंहनाद गुग्गुलु के फायदे या स्वास्थ्य उपयोग 

इस आयुर्वेदिक दवा का इस्तेमाल निम्न रोगों में फायदेमंद होता है –

  1. गंभीर आमवात की यह उत्तम दवा है |
  2. शरीर में वातव्रद्धी होने से उत्पन्न रोगों में प्रयोग किया जाता है |
  3. जोड़ो के दर्द में लाभकारी है |
  4. संधिशूल एवं अन्य सभी वातशूल में भी दर्द निवारक का कार्य करती है |
  5. यह उत्तम एंटीबैक्टीरियल, एंटी गाउट एवं एंटीइंफ्लेमेटरी गुणों से युक्त होती है |
  6. वातरक्त (गठिया रोग) में चिकित्सार्थ प्रयोग किया जाता है |
  7. मांसपेशियों की जकड़न को दूर करती है |
  8. शरीर में बढे हुए यूरिक एसिड को कम करती है |
  9. श्वास एवं खांसी में भी अन्य सहायक औषधियों के साथ फायदेमंद साबित होती है |
  10. उदरशूल एवं कुष्ठ रोग के चिकित्सार्थ प्रयोग किया जाता है |
  11. त्रिदोषविकार के शमन हेतु |
  12. पाचन क्रिया को सुचारू करने में भी लाभदायक होती है |

सिंहनाद गुग्गुलु की सेवन विधि 

इसका सेवन 2 गोली की मात्रा में सुबह एवं शाम दो बार प्रयोग किया जा सकता है | अनुपान के रूप में हमेशां गरम जल का सेवन करना चाहिए अर्थात सिंहनाद गुग्गुल को गरम जल के साथ लेना चाहिए | औषधि ग्रहण से पहले अपने चिकित्सक से राय अवश्य लें |

साइड इफेक्ट्स 

इस औषधि के सेवन से शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं होते | अत: इसे लम्बे समय तक सेवन किया जा सकता है लेकिन गर्भवती महिलाओं को चिकित्सक के परामर्शनुसार सेवन करना चाहिए | अधिक रक्त स्राव जैसी समस्या में इस औषधि का सेवन बंद कर देना चाहिए |

आयुर्वेद की अधिकतर औषधियों के शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं होते | लेकिन भूलवश निर्देशित मात्रा से अधिक सेवन करने व गलत तरीके से दवा का उपयोग करने पर दुष्प्रभाव हो सकते है |

आपके लिए अन्य जानकारियां 

धन्यवाद ||

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