अस्थमा रोग से छुटकारे के लिए योग एवं प्राणायामों की सूचि

अस्थमा के लिए योग एवं प्राणायाम 

अस्थमा की समस्या आज दिन प्रतिदिन बढती जा रही है | शहर हो या गाँव आज सब जगह इस रोग से पीड़ितों की संख्या में आये दिन इजाफा हो रहा है | इसके बहुत से कारण है जो रोग पीड़ितों की संख्या में बढ़ोतरी कर रहे है जैसे – धूल – धुंए का वातावरण, खान- पान में बदलाव, मौसम में परिवर्तन , आलसी जीवन शैली, नशीले पदार्थों का सेवन , ऋतू अनुसार भोजन न करना आदि |

आधुनिक चिकित्सा में शायद अस्थमा को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता बल्कि इन्हेलर आदि के माध्यम से इसे कुछ कण्ट्रोल किया जा सकता है | आयुर्वेद एवं योग में इस रोग को खत्म किया जा सकता है | आयुर्वेद में शोधन चिकित्सा के द्वारा इस रोग को पूर्णतया ठीक किया जा सकता है वैसे ही योग के द्वारा भी अस्थमा रोग को कण्ट्रोल किया जा सकता है | अगर रोग शुरूआती अवस्था में है तो निश्चित ही योग एवं प्राणायाम के तरीकों से आप इस रोग से छुटकारा पा सकते है |

अस्थमा के लिए योग का वर्णन करने से पहले हम आपको अस्थमा रोग का संक्षिप्त विवरण देंगे |

क्या है अस्थमा रोग ?

अस्थमा / दमा या श्वास रोग मुख्यत: एक श्वसन प्रणाली का रोग है जिसमे रोगी को आसानी से श्वास – प्रश्वास करने की क्रिया में दिक्कत आती है | इस रोग में श्वास नलिकाओं में बलगम और इन्फेक्शन के कारण आये सुजन की वजह से रोगी श्वास लेने में दिक्कत महसूस करता है, साथ ही श्वांस लेते समय शु-शु की आवाज भी करता है | कभी – कभार रोग की गंभीरता पर रोगी को Asthmatic Attack भी आ सकते है | रोग की शुरुआत एलर्जी एवं सामान्य सर्दी जुकाम से होती है , फिर बाद में धीरे – धीरे रोग बढ़ता जाता है एवं अस्थमा का रूप ले लेता है |

अस्थमा के नियंत्रण में योग की भूमिका 

श्वास में सबसे अधिक शरीर की श्वसन प्रणाली प्रभावित होती है | योग की गहरी यौगिक श्वास क्रियाओं के माध्यम से श्वास लेने की दिक्कतों को कम किया जा सकता है | योग के प्राणायाम जैसे नाड़ी – शौधन प्राणायाम, भस्त्रिका प्राणायाम, सूर्यभेदी प्राणायाम आदि में श्वास – प्रश्वास की गति तीव्र और बलशाली होती है जिससे अस्थमा रोग में लाभ मिलता है | योग के कुच्छ आसन जैसे कन्धरासन, भुजंगासन, धनुरासन आदि के नियमित अभ्यास से अस्थमा रोग से छुटकारा पाया जाता है |

अस्थम (दमा) के लिए करें ये योग एवं प्राणायाम 

अस्थमा से छुटकारा पाने के लिए आप योग के इन आसनों एवं प्राणायामों को अपना सकते है |

1. सूर्य भेदन प्राणायाम

सूर्यभेदन प्राणायाम करने से अस्थमा रोग में काफी लाभ मिलता है | इस प्राणायाम की खासियत यह है की इसे करने से शरीर में उष्णता बढती है, जिसके कारण शरीर में स्थित वात एवं कफ का शमन होता है | सूर्य भेदी प्राणायाम की अधिक जानकारी के लिए आप इस आर्टिकल को पढ़ें – सूर्यभेदी प्राणायाम

सुर्यभेदन प्राणायाम

श्वास रोग से छुटकारे के लिए कुम्भक के समय को नियमित अभ्यास से बढाने का प्रयास करे | हठ योग में लिखा है की सुर्यभेदी प्राणायाम में कुम्भक तब तक करना चाहिए जब तक की शरीर से पसीना न निकल जाए |

2. उज्जायी प्राणायाम

इस प्राणायाम को करने से फुफुस पूरा फैलता है एवं श्वास की क्रिया बढती है साथ ही कफ का नाश होता है एवं जठराग्नि बढती है | इसके नियमित अभ्यास से अस्थमा में काफी आराम मिलता है |

उज्जायी प्राणायाम

विधि – सिद्धासन या पद्मासन में बैठ जाएँ | अब अपनी दोनों नासिका द्वारो से धीरे – धीरे वायु खींचे | वायु को ऐसे खींचे की वह शब्द करती हुई कंठ तक भर जाए | अब इसी स्थिति में कुछ समय कुम्भक करे | तत्पश्चात बाएं नासिका द्वार से रेचक (श्वांस छोड़ने) की क्रिया करे | श्वास अन्दर लेते समय छाती को यथासंभव फुलाएं |

3. अस्थमा के लिए भस्त्रिका प्राणायाम

अस्थमा के लिए योग

 

अस्थमा के लिए योग में भस्त्रिका प्राणायाम भी प्रमुख रूप से लाभकारी सिद्ध होता है | भस्त्रिका का अर्थ धौंकनी होता है इस में श्वास और प्रश्वास की गति तीव्र और बलशाली एवं सशक्त होती है | इसे अपनाने से फेफड़े मजबूत बनते है एवं इसी कारण से  अस्थमा (श्वास) रोग से छुटकारा पाया जा सकता है | यहाँ पढ़ें पूर्ण विवरण – भस्त्रिका प्राणायाम |

4. नाड़ी – शौधन प्राणायाम

अस्थमा के लिए यह प्राणायाम सबसे लाभदायक है | इसमें नाड़ी-शौधन का अभ्यास अन्य प्राणायामों में भी लाभ देता है | अस्थमा, टॉन्सिल्स, साइनस और कफ सम्बन्धी रोगों में यह काफी लाभ देता है |

अस्थमा के लिए प्राणायाम

विधि – नाड़ी शौधन प्राणायाम के लिए सबसे पहले सुखासन में बैठ जाएँ |  मेरुदंड, गर्दन व सिर एक सीध में रखें | बयां हाथ घुटने पर रखिये , दायें हाथ की अँगुलियों को दोनों भौंहों के बीचों बिच रखें | दोनों कंधे भी समानांतर रखें | अब दायें हाथ की तर्जनी को मस्तक के बीच में रखे एवं नासिका के दाहिनी तरफ अंगूठे को व बायीं तरफ के नासिका द्वार पर अनामिका अंगुली को रखें | अब दायें नासिका छिद्र को अंगूठे से दबाव डालकर बंद कीजिये | बाएं नासिका छिद्र से श्वांस लीजिये और उसी नासिका छिद्र से रेचक (श्वांस बाहर छोड़ना) कीजिये | पूरा ध्यान श्वास की तरफ रखें | पूरक एवं रेचक को मिलकर एक चक्र होता है | इस प्रकार से लगभग 10 चक्र पुरे करे |

5. पर्यांकासन 

श्वास रोगों में पर्यांकासन करने के बहुत से लाभ है | पर्यंक का अर्थ होता है बिस्तर अर्थात इस आसन को करने से साधक की स्थिति बिस्तर जैसी बनती है, इसीलिए इसे पर्यांकासन कहते है |

विधि – वज्रासन में बैठ जाएँ | पीठ की तरफ झुक जाएँ | इस आसन में सबसे पहले सिर के उर्ध्वभाग को जमीन से स्पर्श करवाएं | अब अपनी पीठ और गर्दन को ऊपर उठाकर पुल की तरह ढांचा बना ले | अपने हाथों को सिर के पास ले जाकर आपस में बांध ले | अब स्वाभाविक रूप से श्वास ले | लगभग 50 से 60 सेकंड इसी स्थिति में रुके | अब अपने हाथों को छोड़ दें एवं वज्रासन में वापिस आने के बाद अपने पैरों को सीधा करे | इसे करने से प्रष्ठीय संसथान पूर्णत: फैलते है , जिस कारण फुफ्फुस अच्छी तरह फ़ैल जाते है एवं श्वांस रोग में पूरा लाभ मिलता है |

6. अस्थमा के लिए उष्ट्रासन योग

उष्ट्र का अर्थ होता है ऊंट | अस्थमा से पीड़ितों को इस योग को अवश्य करना चाहिए | दमा रोगियों को इस आसन को करने से लाभ मिलता है एवं साथ ही यह आसन मोटापे को भी घटाता है |

विधि – वज्रासन में बैठ जाएँ और घुटनों के बल खड़े हो जाएँ | अब धीरे धीरे पीछे की तरफ झुकते हुए दाहिने हाथ से दाहिनी एड़ी और बाएं हाथ से बायीं एड़ी को पकडे | सिर को भी पीछे की तरफ झुका ले | अपने उदर प्रदेश एवं नाभि को आगे की और उभारें | सिर एवं मेरुदंड को अधिक से अधिक पीछे की और झुकाने का प्रयत्न करे | इस स्थिति में 10 से 15 सेकंड रुकें |

7. गतिमय दोलासन 

यह योग आसन फेफड़ों को मजबूत बना कर इनके सभी विकारों का भी शमन करता है | अत: अस्थमा से पीड़ितों को इस योगासन को भी अपनाना चाहिए |

विधि – सीधे खड़े हो जाए और अपने दोनों पैरों के बिच लगभग 3 फीट का अंतर बना कर रखे | अब दोनों हाथों को कानों से स्पर्श करवाते हुए ऊपर की तरफ तान दें एवं हाथों की अंगुलियाँ आपस में मिला ले | अब समकोण की आकृति बनाते हुए शरीर के उपरी भाग को निचे की तरफ झुकाएं एवं ढीला छोड़ दें और झूले की तरफ झुलायें | पुन: समकोण की स्थिति निर्मित करते हुए मूल अवस्था में आ जाये | इन्हें कम से कम 4 से 5 बार अपने शरीर को अंतिम अवस्था में पैरों के बिच झुलायें एवं शरीर को नीचे लाते समय मुहं से फेफड़ों की पूरी वायु बहार निकाल दें | मूल अवस्था में लौटते समय श्वास ले |

8. अस्थमा के लिए योग सर्वांगासन  

सर्वांगासन दो शब्दों से मिलकर बना है सर्व + अंग | सर्व का अर्थ है पूरा और अंग से तात्पर्य शरीर से है | इस आसन को करने से शरीर के सभी अंगो का आसन हो जाता है , अत: इसे सर्वांगासन कहते है | अस्थमा में इस योग आसन को अपनाना फायदेमंद होता है | सर्वांगासन की सम्पूर्ण जानकारी के लिए क्लिक करें – सर्वांगासन |

 

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