desi nuskhe, काली खांसी, स्वास्थ्य

खांसी होने पर अपनाये एक्यूप्रेशर और ये घरेलु उपचार या इलाज

खांसी के घरेलु और आयुर्वेदिक इलाज एवं उपाय

खांसी सर्दियोें मे होने वाली एक आम समस्या है। भले ही शुरूआती स्टेज में यह कोई बड़ा रोग प्रतित न हो लेकिन उपचार में देरी और आहार में लापरवाही के कारण भंयकर रोगों के रूप में परिवर्तित हो जाती है। लम्बे समय तक रहने वाली खांसी टीबी एवं अस्थमा जैसे रोग का कारण भी बन सकती है। अतः समय रहते इसका इलाज आवश्यक होता है।

खांसी के घरेलु और आयुर्वेदिक इलाज एवं उपाय

इस रोग का फेफड़ों से सीधा सम्बंध होता है। जब गले और फेफड़ो मे कोई संक्रमण या विकृति होती है तो खांसी की उत्पति होती है। इसके होने पर रोगी को जोर जोर से खांसना पड़ता है जिससे रोगी को बहुत अधिक पीड़ा होती है। छाती में दर्द होना, गले में दर्द होना एवं रोगी को बैचेनी आदि हो जातें हैं।

खांसी के कारण

इसके कोई निश्चित कारण नहीं है। क्योंकि खांसी कोई रोग नहीं है बल्कि अन्य किसी रोग का लक्षण मात्र होती है। जैसे अधिकतर खांसी की शुरूआत कफ या जुकाम के साथ होती है। सर्दि, न्यूमोनिया, दमा, ब्रोंकाइटिस एवं जिगर आदि की समस्या होने पर खांसी उत्पन्न हो जाती है। ठण्डी हवा लगने से, गले में संक्रमण होने, धुआं या धुल आदि के गले में चले जाने से, कफ की अधिकता होने से, अस्थमा आदि के कारण खांसी का रोग हो जाता है।

खांसी का रोग मुख्यतः दो प्रकार का होता है। सुखी खांसी और दूसरा कफज खांसी। सुखी खांसी में कफ नहीं होता एवं रोगी छाती में जकड़न महसुस करता है। तर खांसी या कफज खांसी में कफ की उपस्थिति होती है, इसमें जब रोगी खांसता है तब कफ निकालने को आतुर रहता है। जब कफ बाहर निकलता है तो रोगी को भी आराम मिलता है।

एक्यूप्रेशर से करे खांसी का इलाज

एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति में हर रोग के उपचार के लिए दबाव पद्धति को अपनाया जाता है | एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति के अनुसार मानव शरीर में हर अंग के प्रतिबिम्ब केंद्र होते है जिनपर दबाव देकर मनुष्य को रोगों से दूर रखा जा सकता है | प्राय: एक्यूप्रेशर को चीनी और जापानी चिकित्सा माना जाता है , लेकिन गहन अध्यन से पता चलता है की इसकी शुरुआत भी बौद्ध भिक्षुओं ने ही की थी|

इस चिकित्सा एक्यूप्रेशर में मानव शरीर के विभिन्न अंगो के प्रतिबिम्ब केन्द्रों पर प्रेशर देने से रोग का निवारण हो जाता है | मानव शरीर में लगभग 350+ से अधिक दबाव बिंदु होते है | प्रतिबिम्ब केन्द्रों पर प्रेशर देना औषध ग्रहण करने जैसा फलदायी होता है अर्थात जैसे हम औषध लेकर रोग का निवारण करते है उसी प्रकार दबाव देने से रोग का निवारण हो जाएगा |

खांसी रोग का सम्बन्ध श्वास प्रणाली से होता है, इसलिए इसके प्रकोप को दूर करने के लिए श्वास प्रणालियों के प्रतिबिम्ब केन्द्रों पर प्रेशर देने से रोग को नष्ट किया जा सकता है | निचे दी गई इमेज में चेहरे पर उपस्थित इसके प्रतिबिम्ब केंद्र पर प्रेशर देने से खांसी के साथ अस्थमा, गले की विकृति, शोथ, पीड़ा और श्वास लेने में होने वाली दिक्कतों को दूर किया जा सकता है |

खांसी के लिए एक्यूप्रेशर

श्वास प्रणाली से सम्बन्धित रोगों को नष्ट करने के लिए पिट्यूटर ग्रंथि, थायराईड, ओड्रेनल और पीनियल ग्रंथि के प्रतिबिम्ब केन्द्रों के साथ पांवो में उपस्थित प्रतिबिम्ब केन्द्रों पर दबाव देने से भी इसकी समस्या में लाभ मिलता है | निचे दिए गए चित्रों के माध्यम से आप इसके अन्य प्रतिबिम्ब केन्द्रों को देख सकते है –

खांसी के घरेलु उपचार                  खांसी का उपचार

दिए गए पॉइंट्स को 20 से 30 सेकंड तक प्रेशर दे और एसा 5 बार दोहराने से खांसी में आराम मिलता है |

खांसी में करे ये घरेलु एवं आयुर्वेदिक इलाज

  • अगर खांसी सुखी आ रही है तो भुनी हुई फिटकरी 10 ग्राम के साथ 100 ग्राम देशी खांड मिलाकर अच्छी तरह पिसले | इस चूर्ण की बराबर मात्रा में 14 पुड़ियाँ बना ले | रोग रात को सोते समय एक पुडिया गरम दूध के साथ सेवन करने से सुखी खांसी में आराम मिलता है |
  • 100 ग्राम कालीमिर्च और इतनी ही मात्रा में मिश्री – इन दोनों को बारीक़ पीसकर इसमें इतनी मात्रा में देशी घी मिलाएं की इस लुगदी से गोलियां बनायीं जा सके | अब छोटे बेर के बराबर आकृति की गोलियां बना ले | इन गोलियों को दिन में तीन या चार बार चूसने से दोनों प्रकार की कास (खांसी) में राहत मिलेगी | यह गोली गले की खरास और गले बैठने में भी लाभ देती है |
  • अगर कफ के कारण खांसी आ रही है तो अदरक को पीसकर इसका रस निकाल ले | अब इसमें बराबर मात्रा में शहद मिलाकर , दिन में तीन से चार बार एक – एक चम्मच की मात्रा में थोडा गरम करके इस्तेमाल करने से गले में अटका हुआ कफ निकल जाता है एवं खांसी भी रुक जाती है | बच्चों में इसकी एक चौथाई की मात्रा का प्रयोग कर सकते है |
  • अगर रात्रि के समय खांसी चलती हो तो बहेड़े के छिलके का टुकड़ा या अदरक का छोटा सा टुकड़ा मुंह में दबा कर सोने से खांसी आना बंद हो जाती है |
  • सुखी खांसी में पान के पते में अजवायन रख कर चबाएं एवं इसका रस निगल जाएँ | सुखी खांसी चलना बंद हो जाएगी |
  • अजवायन को खाकर ऊपर से गरम पानी पिने से भी कास रुक जाती है |
  • अगर शरीर में कफ की अधिकता के कारण खांसी आ रही हो तो आंवला चूर्ण और मुलेठी का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलकर सेवन करने से लाभ मिलता है | इससे शरीर में उपस्थित कफ आसानी से बाहर निकलता है एवं कफ के कारण चलने वाले कास में आराम मिलता है |
  • आयुर्वेदिक दवाओं से भी इस पर काबू पाया जा सकता है

  • किसी अंग्रेजी दवाई के सेवन से यदि कफ छाती में सुख गया हो तो 25 ग्राम अलसी को कुचलकर 350 ग्राम पानी में डालकर इसका काढ़ा बना ले | इस काढ़े को एक – एक चम्मच की मात्रा में दिन में चार बार सेवन करवाने से सुखा हुआ कफ बाहर निकल जाता है |
  • सौंठ, कालीमिर्च और हल्दी – इन तीनो को बराबर मात्रा में लेकर इनका चूर्ण बना ले | इस चूर्ण में से दिन में दो बार 2 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से कास में आराम मिलता है |
  • नीम की पतियों का चूर्ण बना कर इसमें शहद मिलाकर सेवन भी लाभदायक होता है |
  • आंवले के चूर्ण में शहद मिलकर सेवन करने से भी रुक जाती है |
  • लहसुन के रस को आधा चम्मच शहद के साथ सेवन करे |
  • दूध में छोटी पिप्पल डालकर इसको अच्छी तरह ओटा कर सुबह – शाम सेवन करने से भी खांसी में अच्छे लाभ मिलते है |
  • मकोय का साग बना कर सेवन करना काफी लाभदायक है |
  • लौंग को भुन कर चूसने से भी खांसी रुक जाती है |
  • कालीमिर्च , अदरक और तुलसी की चाय बना कर सेवन करने से भी जल्द रहत मिलती है |

खांसी में इन घरेलु प्रयोगों से निश्चित ही लाभ होता है | लेकिन खांसी होने पर अपने आहार पर ध्यान देना भी अति आवश्यक हो जाता है | पुराने चावल, ठंडे पेय पदार्थ, छाछ, तली – भुनी चीजें, फ़ास्ट फ़ूड और कफ को बढाने वाली सभी खाद्य पदार्थो का सेवन बंद कर देना चाहिए | पौष्टिक और सुपाच्य भोजन का इस्तेमाल करने से जल्द ही खांसी के रोग से छुटकारा मिलजाता है |

धन्यवाद |

 

author-avatar

About स्वदेशी उपचार

स्वदेशी उपचार आयुर्वेद को समर्पित वेब पोर्टल है | यहाँ हम आयुर्वेद से सम्बंधित शास्त्रोक्त जानकारियां आम लोगों तक पहुंचाते है | वेबसाइट में उपलब्ध प्रत्येक लेख एक्सपर्ट आयुर्वेदिक चिकित्सकों, फार्मासिस्ट (आयुर्वेदिक) एवं अन्य आयुर्वेद विशेषज्ञों द्वारा लिखा जाता है | हमारा मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद के माध्यम से सेहत से जुडी सटीक जानकारी आप लोगों तक पहुँचाना है |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *