मकोय : परिचय एवं चमत्कारिक स्वास्थ्य लाभ

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मकोय का परिचय

लगभग सम्पूर्ण भारत में पायी जाने वाली वनस्पति है जो अधिकतर आद्र और छायादार जगहों पर उगती है, इसके पौधे की अधिकतम लम्बाई 2 से 2.5 फीट तक हो सकती है | आयुर्वेद के नजरिये से देंखे तो यह  दिव्य औषधि है जिसे संस्कृत में काक्माची कहते है | इसके पत्ते मिर्च के पत्ते की तरह लट्टवकार 2 से 3 इंच लम्बे और 1 से 1.5 इंच चौड़े होते है | मकोय के फुल गुच्छो में लगते है जिनकी संख्या एक गुछे में 4 से 6 तक हो सकती है , इनका रंग सफ़ेद और आकार में बिलकुल छोटे होते है | इसके फल जिसे रसभरी  भी कह सकते है 1/4 इंच के व्यास में छोटे और गोल होते है पकने पर ये लाल , नील या पीले रंग के हो जाते है | ये फल पकने पर मीठे हो जाते है |

https://swadeshiupchar.in/2017/05/makoy-ke-chamtkarik-labh.html

मकोय त्रिदोष शामक अर्थात वात, पित्त और कफ विकारो को हरने में सक्षम होती है | यह नेत्र रोग, कोढ़, बवासीर, कफ , दमा, ज्वर , मधुमेह और पीलिये में लाभकारी औषधि है | यकृत शोधन में भी इस औषधि के बराबर कोई अन्य औषधि नहीं है इसके नियमित सेवन से यकृत संबंधी विकारो से छुटकारा मिलता है |


मकोय के गुण धर्म 

यह रस में तिक्त,गुण में लघु और स्निग्ध होती है अगर वीर्य और विपाक की बात करे तो  इसका वीर्य अनुष्ण और विपाक में यह कटु होती है |

मकोय के रोगप्रभाव 

यह त्रिदोष शामक ,दीपन ,पाचन, यकृत शोधक एवं उतेजक , शोथहर, रक्तशोधक, कुष्ठ्घन और विष्घन है |

मोकोय के प्रयोज्य अंग पंचांग और फल |

मकोय के फायदे 

 

  1. मकोय के फलो को सुबह के समय खली पेट लेने से अपच में लाभ होता है |
  2. मधुमेह में मकोय के बीजो का चूर्ण बना कर 3 ग्राम की मात्रा में सुबह – शाम लेने से आराम मिलता है |
  3. किडनी की बीमारी हो तो मकोय के पंचांग का काढ़ा बना कर सेवन करे | काढ़े के लिए आप 10 ग्राम मकोय का पंचांग ले ले और इसे 250 ml पानी में डालकर पकाए जब पानी 1/4 रह जावे तब इसे उतार कर  ठंडा करले और सुबह – शाम सेवन | जल्दी ही किडनी की समस्या में लाभ मिलेगा |
  4. हृदय सम्बंधित विकारो में 5 ग्राम मकोय के पंचांग का क्वाथ और 5 ग्राम अर्जुन की छाल का क्वाथ दोनों को मिलकर इनका काढ़ा बना कर सेवन करे | हृदय विकारो में चमत्कारिक लाभ मिलेगा |
  5. पीलिया हो गया हो तो मकोय के पत्तो का 5 ml रस निकाल ले और इसका सेवन पानी में मिलकर करे | पीलिये में आशातीत लाभ मिलेगा |
  6. अनिद्रा रोग में इसके जड़ का काढ़ा बना कर सेवन करना लाभदायक होता है |
  7. त्वचा से सम्बन्धित विकारो में मकोय की पतियों का पेस्ट बना ले इसका लेप ग्रसित जगह पर करे |  इसके इस्तेमाल से त्वचा के सभी रोग जैसे – खुजली, फोड़े – फुन्सिया और अन्य चर्म रोग ठीक हो जाते है |
  8. मुंह में छाले हो गए हो तो मकोय की 4 – 5 पतियों को चबाये जल्दी छालों से आराम मिलेगा |
  9. बवासीर की शिकायत में भी आप मकोय के काढ़े का इस्तेमाल करे | यह खुनी बवासीर में  अच्छा लाभ देता है |
  10. ज्वर होने पर भी आप इसके काढ़े का इस्तेमाल करे | कैसा  भी ज्वर हो तुरंत आराम मिलता है |
इसके आलावा भी मकोय बहुत से रोगों में लाभ कारी है जैसे – दमा , श्वास , कास, प्रतिस्याय , अनिद्रा, उल्टी, त्वचा रोग आदि |
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