चंद्रभेदी प्राणायाम – विधि , लाभ और सावधानियां

चंद्रभेदी प्राणायाम

प्राणायाम शारीरिक और मानसिक रूप से मनुष्य स्वास्थ्य प्रदान करता है | इससे पहले आपने प्राणायाम के प्रकारों में सूर्यभेदी प्राणायाम के बारे में पढ़ा | आज की इस पोस्ट में चंद्रभेदी प्राणायाम की विधि इसके लाभ और साधक के लिए सावधानियों के बारे में जानेंगे |

चंद्रभेदी प्राणायाम

चंद्रभेदी प्राणायाम ठीक सुर्यभेदी प्राणायाम के विपरीत है | इस प्राणायाम में की जाने वाली सभी क्रियाएँ भी सुर्यभेदी प्राणायाम के पूर्ण विपरीत की जाती है | पूरक की सभी क्रियाओं को बाएँ नासिका द्वार और रेचक की सभी क्रियाओं को दाहिने नासिका द्वार से की जाती है |

चंद्रभेदी प्राणायाम की विधि

  • सबसे पहले सुखासन में बैठ जाएँ |
  • अपनी गर्दन और कमर को सीधी अवस्था में रखे |
  • अब अपने बांये नासिका द्वार से पूरक (श्वास अन्दर) कीजिये |
  • पूरक की क्रिया धीरे – धीरे और सावधानी पूर्वक होनी चाहिए |
  • पूरक करने के बाद अपने दोनों नासिका द्वार को बंद करे |
  • अब कुछ समय के लिए कुम्भक करे |
  • कुम्भक के साथ जालन्धर और मूलबंध जरुर लगाये |
  • थोड़े समय के लिए स्वाभाविक विराम ले |
  • अब रेचक (श्वास छोड़ना) की क्रिया दाहिने नासिका द्वार से करे |
  • इस प्रकार यह एक चक्र पूरा हुआ |
  • कम से कम 8 – 10 चक्र पूरा करे और कुम्भक का समय भी यथसंभव बढ़ाने का प्रयास करे |

चंद्रभेदी प्राणायाम के फायदे

  • चन्द्रमा की तरह यह प्राणायाम भी शरीर को शीतलता प्रदान करता है |
  • पित्त के प्रकोप को कम करने में कारगर प्राणायाम है |
  • गर्मियों में विशेष लाभकारी है |
  • चंद्रानाडी सक्रिय होती है |
  • क्रोध को कम करने और मानसिक शांति में काफी लाभदायक है |
  • तनाव को खत्म करता है |
  • स्मरण शक्ति के संचार में लाभदायक प्राणायाम है |
  • चर्म रोगों में भी इस प्राणायाम को अपनाने से लाभ मिलता है |
  • हृदय के विकारों का शमन करता है |
  • पाचन क्रिया को सुचारू करने से फायदेमंद है |
  • हाई ब्लड प्रेस्सर को कंट्रोल करने में काफी लाभ देता है |

चंद्र्भेदी प्राणायाम में बरती जाने वाली सावधानियां

  • कफज विकारों से ग्रषित व्यक्ति इस प्राणायाम को न करे |
  • दमा या श्वास रोग से पीड़ितों को भी इस प्राणायाम को नहीं करना चाहिए |
  • निम्नरक्त चाप वाले रोगी भी इसे न अपनायें |
  • यह प्राणायाम शरीर को शीतलता प्रदान करता है अत: शीतकाल में इसे नहीं करना चाहिए |
  • ध्यान दे सूर्यभेदन और चन्द्रभेदन प्राणायाम को कभी एक दिन में नहीं करना चाहिए |
  • इस प्राणायाम में पूरक क्रियाएँ बाएँ नासिका द्वार से होती है एवं रेचक क्रिया दाहिने नासिका द्वार से होती है जो ठीक सूर्य भेदी प्राणायाम के विपरीत है |

धन्यवाद |

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