चोपचीनी / Chobchini – परिचय , गुण , प्रभाव एवं उपचार

चोपचीनी / Chobchini (Smilax China)

चोपचीनी

परिचय – चोपचीनी के बारे में प्राय सभी जानते है | भारतीय घरों में इसे मसाले के रूप में एवं आयुर्वेद में इसे औषध उपयोग में लिए जाता है | यह एक प्रकार की लता होती है जो जमीन पर फ़ैल कर बढती है | विशेष रूप से चीन देश में पायी जाती है | चोपचीनी वचा प्रजाति की होती है | चीन के अलावा ताइवान , कोरिया , जापान एवं अब भारत में भी आसाम , बंगाल , सिलहट एवं चिटगांव के पास उगाई जाने लगी है |

इसके पत्र अंडाकार, नुकीले 6 इंच से 18″ तक लम्बे और चौड़े होते है | चोपचीनी के फुल गुच्छों में लगते है , एवं फल डेढ़ इंच तक गोल परिधि वाले होते है जिनमे से एक या दो बीज निकलते है | पौधे की जड़ रक्ताभ वृण की होती है जिसे ही औषध एवं मसाले के रूप में काम लिया जाता है |

चोपचीनी के गुण एवं रासायनिक संगठन

यह शर्करा, सेपोनिन, वसा, गौंद एवं स्टार्च आदि तत्वों से पूर्ण होती है | इसका रस तिक्त , गुणों में यह उष्ण, दीपन , मलमुत्रादीशोधन होती है | चोपचीनी उष्ण वीर्य व कटु विपाक के गुणों से युक्त होती है | अपने इन्ही गुणों के कारण यह वात व्याधि , फिरंग, उपदंश , अपस्मार, उन्माद, वातिकशूल आदि विकारो में काफी फायदेमंद होती है |

सेवन मात्रा / प्रभाव / प्रयोज्य अंग / विशिष्ट योग

रोग प्रभाव में चोबचीनी वात एवं कफघन होती है | औषध उपयोग में इसके कंद (जड़) का इस्तेमाल किया जाता है | चोपचीनी की सेवन मात्रा 500mg से 1 ग्राम तक सेवन किया जा सकता है | चोबचीनी के योग से आयुर्वेद में चोपचीन्यादी चूर्ण एवं वातारिपाक आदि औषधियों का निर्माण किया जाता है |

चोपचीनी के पर्याय


संस्कृत – द्वीपांतर वचा |

हिंदी – चोबचीनी, चोपचीनी |

बंगाली – तोपचिनी, चोबचीनी |

अंग्रेजी – China root.

लेटिन – Smilax china.


चोपचीनी के फायदे / स्वास्थ्य लाभ / Chobchini Benefits In Hindi

  • बढ़ी हुई यूरिक एसिड को नियत्रण में लाने के लिए चोपचीनी का एक ग्राम चूर्ण सुबह – शाम लगातार सेवन करने से यूरिक एसिड लेवल में आता है |
  • यूरिक एसिड के लिए ही दूसरा प्रयोग आप चोबचीनी 50 ग्राम , गिलोयचूर्ण ,  अर्जुनछलका चूर्ण व् मेथी दाना इन सभी को 50-50 ग्राम की मात्रा में लेकर सभी को पीसकर चूर्ण बना ले | तैयार चूर्ण में से नित्य 2 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से यूरिक एसिड की समस्या जड़ से खत्म होती है |
  • स्वप्नदोष की समस्या में चोबचीनी व मिश्री को बराबर की मात्रा में मिलाकर नित्य सुबह – शाम 2 ग्राम की मात्रा में गाय एक देशी घी के साथ सेवन करने से स्वप्नदोष से छुटकारा मिलता है |
  • वात व्याधियों में चोपचीन्यादी चूर्ण का सेवन लाभकारी होता है |
  • अस्थमा रोग में चोपचीनी का काढ़ा बना कर सेवन करना लाभकारी होता है | चोबचीनी उष्ण वीर्य की होने के कारण कफ एवं वात व्याधियों में फायदेमंद होगी |
  • गावजबान एवं चोबचीनी का काढ़ा बना कर घुटनों पर मालिश करने से घुटनों के दर्द से आराम मिलता है | इस प्रयोग को आप गठिया रोग में भी अपना सकते है |
  • धातु – दुर्बलता में चोबचीनी , सौंफ ,  सफ़ेद मूसली , काली मूसली, मोचरस, सौंठ एवं विडंग इन सभी को बराबर की मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना ले | इस चूर्ण का सेवन रात्री में सोते समय दूध के साथ करे | धातु – दुर्बलता में लाभ मिलेगा |

धन्यवाद |

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