गठिया – संधिवात 

शरीर में स्थित वायु अगर प्रकुपित हो जाती है तो वह कई व्याधियो को जन्म देती है , जिनमे से प्रमुख है – आमवात अर्थात गठिया | गठिया रोग  शरीर के जॉइंट्स में सबसे पहले अपनी जगह बनता है | गठिया का उपचार वैसे तो सभी चिकित्सा पद्धतियों में उपलब्ध है लेकिन आयुर्वेद में इसका पूर्ण उपचार संभव है | आधुनिक मतानुसार यह रोग शरीर में यूरिक एसिड के बढ़ने के कारण होता है | यूरिक एसिड हमारे शरीर में बनता रहता है और मूत्र के द्वारा बाहर भी निकलता रहता है | लेकिन जब हमारी कुछ आदतों के कारण यह शरीर में इक्कठा होने लगता है तो यह गठिया रोग को जन्म देता है | यूरिक एसिड के कण सबसे पहले हमारे जॉइंट्स में इकट्ठा होते है इसी कारण शुरुआती गठिया रोग पैरो या हाथो के जॉइंट्स से शुरू होता है |

फोटो – viralwe.in

यूरिक अम्ल का हमारे शरीर में बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है हमारी दिनचर्या जैसे – कम पानी पीना , मांसाहार का सेवन करना , कब्ज की समस्या , लम्बे समय से गैस की समस्या रहना , अनियमित जीवनशैली , शराब का अधिक सेवन , ठंडे पेय पदार्थ जैसे कॉक आदि का सेवन आदि कारण है जो यूरिक एसिड को बढ़ाते है |

गठिया रोग के उपचार से पहले यूरिक एसिड का उपचार करना चाहिए , इसे शरीर से बाहर निकलने की विधि को अपनाना चाहिए | क्योकि गठिया रोग में यूरिक एसिड की सबसे ज्यादा भागीदारी होती है | यूरिक एसिड प्युरिन के चया – अपचय के दौरान बनता है और मांस एवं कोल्ड ड्रिंक में यह सबसे ज्यादा होता है , इसलिए गठिया के रोगी को मांस और कोल्ड ड्रिंक ( कॉक आदि ) से दूर ही रहना चाहिए |

आयुर्वेदिक उपचार 

इसके उपचार में सबसे महत्वपूर्ण है की जितना अधिक पानी पी सकते हो उतना अधिक पानी पियो – कम से कम 5 से 7 लीटर पानी तो पीना ही चाहिए | जिससे की शरीर में इकट्ठे हुए अवशिष्ट पदार्थ ज्यादा से ज्यदा मूत्र के द्वारा बाहर निकल जावे |

आयुर्वेद की पंचकर्म पद्धति से इस रोग का उपचार करवाना चाहिए | क्योकि पंचकर्म पद्धति से पुरे शरीर की सफाई हो जाती है और शरीर का पंचकर्म करवाने से औषधिया भी दुगना फल देती है | इसलिए गठिया रोग में औषधि सेवन से पहले किसी पंचकर्म स्पेशलिस्ट वैध्य से पंचकर्म और आयुर्वेदिक उपचार  करवाना चाहिए |

कुछ बेहतरीन घरेलु नुस्खे 

  • अगर गठिया रोग की प्रारम्भिक अवस्था है तो अरंडी के तेल से जॉइंट्स पर सुबह – शाम मालिस करे एवं अरंडी के पौधे की जड़ का चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में सेवन करे | जल्दी ही आराम मिलेगा |
  • गठिया रोग में आलू के रस का सेवन करना चाहिए | आलू के 60 ml रस को भोजन से पूर्व ले |
  • लहसुन की दो तीन गांठो का रस निकाल ले और इस रस में कपूर मिला कर पीड़ित स्थान में दिन में 3 समय मालिस करे |
  • पारिजात के 5-6 पत्तो को एक गिलास पानी में उबल ले जब पानी आधा रह जावे तब इसे उतार कर ठंडा करले | इसका सेवन सुबह – सुबह करे | अवश्य लाभ मिलेगा |
  • 100 ग्राम – हरेड, 50 ग्राम – सोंठ , 30 ग्राम – अजमोदा और 20 ग्राम – सेंधा नमक — इन सभी को कूट पिस कर चूर्ण बना ले और किसी शीशी में भर कर रख ले | रोज सुबह – शाम 5 ग्राम चूर्ण का सेवन करे | आशातीत लाभ मिलेगा |
  • सोंठ , कालीमिर्च, पीपल , सफ़ेद जीरा , हिंग , नमक और लहसुन इन सब को समान मात्रा में लेकर इनका चूर्ण बना ले | इस चूर्ण का उपयोग 3 ग्राम की मात्रा में सुबह – शाम करे | लाभ मिलेगा |
  • अडूसा के पत्तो पर एरंड तेल लगा कर इन्हें गरम करे और गरम – गरम ही इन्हें जॉइंट्स पर बांध ले | यह रात में सोते समय करे और सुबह खोले |
  • करेला का रस भी पीड़ित स्थान पर लगा सकते है |
  • आम की गुठलियों कूट कर इसे सरसों के तेल में पका ले और ठन्डे होने पर छान कर इस तेल का उपयोग करे |
  • बथुआ के पतों का रस निकाले | इस रस का सेवन एक चम्मच की मात्रा में महीने भर तक करे गठिया रोग में यह बहुत उपयोगी सिद्ध होता है |
  • कपूर 2 ग्राम और अफीम 1 ग्राम – दोनों को सरसों के तेल में पका ले और इस तेल को दुखते हुए जॉइंट्स पर लगावे | दर्द गायब हो जावेगा |
  • असवगंधा की जड़ का चूर्ण बना ले | इसका उपयोग 5 ग्राम की मात्रा में सुबह – शाम गरम दूध के साथ करे | जल्दी ही गठिया रोग में आराम मिलेगा | अस्व्गंधा चूर्ण बाजार से भी खरीद कर उपयोग में ले सकते है |
  • बाजार में मिलने वाला दशमूल काढ़ा ले आवे तथा इसका उपयोग काढ़ा बना कर करे | लाभ मिलेगा 
  • कायफल का तेल प्रभावित अंगो पर मले |
  • लहसुन, देवदारु ,एरंड ,सोंठ और नीम गिलोय इन सब को बराबर मात्रा में लेकर इनका चूर्ण बना ले | इसका उपयोग काढ़े के रूप में करे | एक गिलास पानी में 2 चम्मच चूर्ण को डाल कर गरम करे जब पानी आधा रह जावे तब छान कर इसको पि जावे | महीने भर में ही आपको लाभ मिल जायेगा |

पथ्य – अपथ्य 

गठिया रोग में पथ्य – अपथ्य का ध्यान रखना बहुत जरुरी है | इस रोग के रोगी को वात बढ़ाने वाले पदर्थो का सेवन नहीं करना चाहिए | दूध , दही , उरद की दाल , मछली ,मुली , गोभी, मांस और शराब का सेवन बिलकुल भी न करे | भोजन में चावल , लहसुन,करेला,बैंगन और सहिजन का सेवन अधिक मात्रा में करे |

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धन्यवाद 
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