Mail : treatayurveda@gmail.com

गठिया रोग – परहेज एवं उपचार

गठिया – संधिवात 

शरीर में स्थित वायु अगर प्रकुपित हो जाती है तो वह कई व्याधियो को जन्म देती है , जिनमे से प्रमुख है – आमवात अर्थात गठिया | गठिया रोग  शरीर के जॉइंट्स में सबसे पहले अपनी जगह बनता है | गठिया का उपचार वैसे तो सभी चिकित्सा पद्धतियों में उपलब्ध है लेकिन आयुर्वेद में इसका पूर्ण उपचार संभव है | आधुनिक मतानुसार यह रोग शरीर में यूरिक एसिड के बढ़ने के कारण होता है | यूरिक एसिड हमारे शरीर में बनता रहता है और मूत्र के द्वारा बाहर भी निकलता रहता है | लेकिन जब हमारी कुछ आदतों के कारण यह शरीर में इक्कठा होने लगता है तो यह गठिया रोग को जन्म देता है | यूरिक एसिड के कण सबसे पहले हमारे जॉइंट्स में इकट्ठा होते है इसी कारण शुरुआती गठिया रोग पैरो या हाथो के जॉइंट्स से शुरू होता है |

फोटो – viralwe.in

यूरिक अम्ल का हमारे शरीर में बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है हमारी दिनचर्या जैसे – कम पानी पीना , मांसाहार का सेवन करना , कब्ज की समस्या , लम्बे समय से गैस की समस्या रहना , अनियमित जीवनशैली , शराब का अधिक सेवन , ठंडे पेय पदार्थ जैसे कॉक आदि का सेवन आदि कारण है जो यूरिक एसिड को बढ़ाते है |

गठिया रोग के उपचार से पहले यूरिक एसिड का उपचार करना चाहिए , इसे शरीर से बाहर निकलने की विधि को अपनाना चाहिए | क्योकि गठिया रोग में यूरिक एसिड की सबसे ज्यादा भागीदारी होती है | यूरिक एसिड प्युरिन के चया – अपचय के दौरान बनता है और मांस एवं कोल्ड ड्रिंक में यह सबसे ज्यादा होता है , इसलिए गठिया के रोगी को मांस और कोल्ड ड्रिंक ( कॉक आदि ) से दूर ही रहना चाहिए |

आयुर्वेदिक उपचार 

इसके उपचार में सबसे महत्वपूर्ण है की जितना अधिक पानी पी सकते हो उतना अधिक पानी पियो – कम से कम 5 से 7 लीटर पानी तो पीना ही चाहिए | जिससे की शरीर में इकट्ठे हुए अवशिष्ट पदार्थ ज्यादा से ज्यदा मूत्र के द्वारा बाहर निकल जावे |

आयुर्वेद की पंचकर्म पद्धति से इस रोग का उपचार करवाना चाहिए | क्योकि पंचकर्म पद्धति से पुरे शरीर की सफाई हो जाती है और शरीर का पंचकर्म करवाने से औषधिया भी दुगना फल देती है | इसलिए गठिया रोग में औषधि सेवन से पहले किसी पंचकर्म स्पेशलिस्ट वैध्य से पंचकर्म और आयुर्वेदिक उपचार  करवाना चाहिए |

कुछ बेहतरीन घरेलु नुस्खे 

  • अगर गठिया रोग की प्रारम्भिक अवस्था है तो अरंडी के तेल से जॉइंट्स पर सुबह – शाम मालिस करे एवं अरंडी के पौधे की जड़ का चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में सेवन करे | जल्दी ही आराम मिलेगा |
  • गठिया रोग में आलू के रस का सेवन करना चाहिए | आलू के 60 ml रस को भोजन से पूर्व ले |
  • लहसुन की दो तीन गांठो का रस निकाल ले और इस रस में कपूर मिला कर पीड़ित स्थान में दिन में 3 समय मालिस करे |
  • पारिजात के 5-6 पत्तो को एक गिलास पानी में उबल ले जब पानी आधा रह जावे तब इसे उतार कर ठंडा करले | इसका सेवन सुबह – सुबह करे | अवश्य लाभ मिलेगा |
  • 100 ग्राम – हरेड, 50 ग्राम – सोंठ , 30 ग्राम – अजमोदा और 20 ग्राम – सेंधा नमक — इन सभी को कूट पिस कर चूर्ण बना ले और किसी शीशी में भर कर रख ले | रोज सुबह – शाम 5 ग्राम चूर्ण का सेवन करे | आशातीत लाभ मिलेगा |
  • सोंठ , कालीमिर्च, पीपल , सफ़ेद जीरा , हिंग , नमक और लहसुन इन सब को समान मात्रा में लेकर इनका चूर्ण बना ले | इस चूर्ण का उपयोग 3 ग्राम की मात्रा में सुबह – शाम करे | लाभ मिलेगा |
  • अडूसा के पत्तो पर एरंड तेल लगा कर इन्हें गरम करे और गरम – गरम ही इन्हें जॉइंट्स पर बांध ले | यह रात में सोते समय करे और सुबह खोले |
  • करेला का रस भी पीड़ित स्थान पर लगा सकते है |
  • आम की गुठलियों कूट कर इसे सरसों के तेल में पका ले और ठन्डे होने पर छान कर इस तेल का उपयोग करे |
  • बथुआ के पतों का रस निकाले | इस रस का सेवन एक चम्मच की मात्रा में महीने भर तक करे गठिया रोग में यह बहुत उपयोगी सिद्ध होता है |
  • कपूर 2 ग्राम और अफीम 1 ग्राम – दोनों को सरसों के तेल में पका ले और इस तेल को दुखते हुए जॉइंट्स पर लगावे | दर्द गायब हो जावेगा |
  • असवगंधा की जड़ का चूर्ण बना ले | इसका उपयोग 5 ग्राम की मात्रा में सुबह – शाम गरम दूध के साथ करे | जल्दी ही गठिया रोग में आराम मिलेगा | अस्व्गंधा चूर्ण बाजार से भी खरीद कर उपयोग में ले सकते है |
  • बाजार में मिलने वाला दशमूल काढ़ा ले आवे तथा इसका उपयोग काढ़ा बना कर करे | लाभ मिलेगा 
  • कायफल का तेल प्रभावित अंगो पर मले |
  • लहसुन, देवदारु ,एरंड ,सोंठ और नीम गिलोय इन सब को बराबर मात्रा में लेकर इनका चूर्ण बना ले | इसका उपयोग काढ़े के रूप में करे | एक गिलास पानी में 2 चम्मच चूर्ण को डाल कर गरम करे जब पानी आधा रह जावे तब छान कर इसको पि जावे | महीने भर में ही आपको लाभ मिल जायेगा |

पथ्य – अपथ्य 

गठिया रोग में पथ्य – अपथ्य का ध्यान रखना बहुत जरुरी है | इस रोग के रोगी को वात बढ़ाने वाले पदर्थो का सेवन नहीं करना चाहिए | दूध , दही , उरद की दाल , मछली ,मुली , गोभी, मांस और शराब का सेवन बिलकुल भी न करे | भोजन में चावल , लहसुन,करेला,बैंगन और सहिजन का सेवन अधिक मात्रा में करे |

post को अधिक से अधिक सोशल साईट पर share जरुर करे |
धन्यवाद 
Content Protection by DMCA.com
Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Shopping cart

0

No products in the cart.

+918000733602

असली आयुर्वेद की जानकारियां पायें घर बैठे सीधे अपने मोबाइल में ! अभी Sign Up करें

You have successfully subscribed to the newsletter

There was an error while trying to send your request. Please try again.

स्वदेशी उपचार will use the information you provide on this form to be in touch with you and to provide updates and marketing.