Mail : treatayurveda@gmail.com
पश्चिमोत्तानासन

पश्चिमोत्तानासन – कैसे करे ? इसकी विधि, लाभ और सावधानियां |

पश्चिमोत्तानासन 

"<yoastmark

पश्चिमोत्तानासन दो शब्दों से मिलकर बना है – पश्चिम + उत्तान | यहाँ पश्चिम से तात्पर्य है पीछे की और उत्तान का अर्थ होता है – शरीर को तानना | अत: इसका शाब्दिक अर्थ हुआ – शरीर को पीछे की और तानना | यह आसन अत्यंत आवश्यक आसनों में गिना जाता है | इसे करते समय शरीर के पीछे के भाग पर प्रभाव पड़ता है , इसलिए भी इसे पश्चिमोत्तानासन कहा जा सकता है | कुंडलिनी जागरण और मेरुदंड को लचीला बनाने में इस आसन के बराबर कोई भी आसन नहीं है | पेट की चर्बी कम करने एवं पैर की मांसपेशियां मजबूत करने में भी यह आसन लाभदायक सिद्ध होता है |

कैसे करे पश्चिमोत्तानासन  ?

पश्चिमोत्तानासन करने के लिए निम्न विधि को अपनाएं |

  • सबसे पहले समतल धरातल पर चटाई बिछा ले |
  • जमीन पर बैठ कर पैर सीधे लम्बवत रखें |
  • श्वास को छोड़े , अब सामने की तरफ झुकते हुए दोनों हाथों की अँगुलियों से दोनों पैरो के अंगूठे को छूने की कोशिश करे |
  • ध्यान दे पैरो को बिलकुल सीधा रखना है , अर्थात पैरो को तान कर रखना है |
  • घुटनों को ऊपर न उठने दें |
  • अब धीरे – धीरे सिर को घुटनों से स्पर्श करवाने की कोशिश करे |
  • हालाँकि यह आसन थोडा कठिन है लेकिन फिर भी निरंतर अभ्यास से आप इस आसन में पारंगत हो सकते है |
  • सिर को घुटनों से स्पर्श करवाते समय कमर को सीधी रखने की कोशिश करे |
  • इस आसन में अभ्यास ज्यादा मायने रखता है | अत: निरंतर अभ्यास करते रहने से अपने – आप ही कमर सीधी और सिर घुटनों से छूने लगेगा |
  • इस स्थिति में आने के बाद पुन: मूल अवस्था में लौट आये |
  • मूल अवस्था में आते समय श्वास अन्दर ले |

श्वास – प्रश्वास – सामने झुकते समय श्वास को छोड़े और वापिस आते समय श्वास अन्दर ले | इस आसन को 2 से 4 मिनट या अपने सामर्थ्य अनुसार 3 से 5 बार कर सकते है |

पश्चिमोत्तानासन के लाभ या फायदे 

शारीरिक द्रष्टि से पश्चिमोत्तानासन के निम्नलिखित लाभ है –

  • कुंडलिनी जागरण में यह आसन सहायक है | क्योंकि इस आसन में प्राण शुषमना से प्रवाहित होने लगते है , इसलिए यह कुंडलिनी जागरण में सहायक सिद्ध होता है |
  • शरीर की अतिरिक्त चर्बी को हटाता और शरीर को छरहरा बनता है |
  • पेट पर जमा चर्बी को कम करने में लाभदायक है |
  • लगातार अभ्यास से पैर की मांसपेशियां मजबूत बनती है |
  • मधुमेह रोग में भी इस आसन को करने से लाभ मिलता है |
  • शारीरिक एवं मानसिक शांति के लिए इस आसन को करना चाहिए |
  • पश्चिमोत्तानासन के निरंतर अभ्यास से गुर्दे और जिगर की क्रियाशीलता बढती है |
  • इस आसन को कई आचार्य’ब्रह्मचर्यासन’ भी कहते है | इसलिए ब्रह्मचर्या का पालन करने वालो के लिए यह आसन काफी फायदेमंद है | यह अध्यात्मिक उन्नति एवं मन को शांत रखने में कारगर आसन है |
  • सभी आयु के लोग इसे अपना सकते है |
  • स्त्रियों के प्रजनन अंगो के दोषों को दूर करने में यह आसन लाभदायक सिद्ध होता है |
  • शरीर के कद को लम्बा करने में पश्चिमोतासन लाभदायक है | निरंतर अभ्यास से शरीर की लम्बाई बढती है |
  • गठिया रोग , जांघो का दर्द , पिंडलियों का दर्द  आदि में इसके अभ्यास से लाभ मिलता है |
  • पीठ और कमर के स्नायु पुष्ट होते है और मज्जा तंतु के दोष दूर होते है |

पश्चिमोत्तानासन करते समय ये सावधानियां अपनाएं 

  • इस आसन को करते समय कभी भी जल्दबाजी और जबरदस्ती नहीं करे |
  • धीरे – धीरे अभ्यास से ही पैर के अंगूठे छू सकते है | अत: जबरदस्ती छूने की कोशिश न करे |
  • गर्भवती स्त्रियाँ इसे न करे |
  • तीव्र कमर दर्द और साइटिका से पीड़ित व्यक्ति योग्य योग गुरु की देख- रेख में इस आसन को करना चाहिए |
  • अल्सर और आंतो की समस्या वाले व्यक्ति इसे न करे |
  • इस आसन को शुरुआत में अधिक देर तक नहीं करना चाहिए |
  • पश्चिमोत्तानासन करने के तुरंत बाद भुजंगासन को करना चाहिए ताकि कमर में आराम मिले |

अन्य महत्वपूर्ण योगासन पढ़े –

सर्वांगासन की विधि और फायदे 

क्या है अष्टांग योग ?

धन्यवाद |

Content Protection by DMCA.com
Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Shopping cart

0

No products in the cart.

+918000733602

असली आयुर्वेद की जानकारियां पायें घर बैठे सीधे अपने मोबाइल में ! अभी Sign Up करें

You have successfully subscribed to the newsletter

There was an error while trying to send your request. Please try again.

स्वदेशी उपचार will use the information you provide on this form to be in touch with you and to provide updates and marketing.