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भुजंगासन

भुजंगासन – विधि , सावधानियां और फायदे

भुजंगासन

भुजंगासन दो शब्दों से मिलकर बना है – भुजंग + आसन । भुजंग का अर्थ होता है नाग या सर्प। इस आसन की आकृति फन उठाये सांप की तरह होती है इसीलिए इसे भुजंगासन कहा जाता है। अंग्रेजी मे इस आसन को कहा जाता है। कमर दर्द से पीड़ित व्यक्तियों के लिए आसन रामबाण सिद्ध होता है। यह आसन सम्पूर्ण शरीर को फायदा पहुंचाता है। फिर भी इस आसन को करते समय कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए।

भुजंगासन
भुजंगासन

भुजंगासन करने की विधि

भुजंगासन करने के लिए सबसे पहले समतल जगह पर एक साफ चट्टाई बिछालें अब

पेट के बल लेट जाएँ।

अपने पैरों को तानकर रखें और तलवों को ऊपर आसमान की तरफ रखें।

अब क्योंकि हाथों के सहारे सिर और धड़ को ऊपर उठाना है, इसलिए अपने हाथों को कंधो के नीचे रखें।

माथे को जमीन से लगा कर रखें।

धीरे-धीरे अपने हाथों के सहारे सिर और धड़ को जमीन से ऊपर उठायें।

धड़ को ऊपर उठाते समय श्वास को अंदर लें और कुछ देर रोकें।

शरीर की आकृति धनुष के समान बनालें।

पूर्ण आसन की स्थिती में अपनी हथेलियों पर जोर दें ताकि शरीर अच्छे से तना रहे। दृष्टि सीधी रखनी है।

अब कुछ समय यानि 10 से 15 सेकेण्ड पूर्ण स्थिती में रूकने के बाद वापस मूल स्थिती में आ जायें।

मूल स्थिती में आते समय श्वास को छोड़ते हुए आयें।

यह आसन 4 से 5 बार दोहरा सकते हैं।

पूर्ण स्थिती में श्वास-प्रश्वास को सामान्य चलने दें।

भुजंगासन के स्वास्थ्य लाभ या फायदे

यह आसन कमर दर्द और सर्वाइकिल से पीड़ित व्यक्तियों के लिए बहुत फायदेमंद है। इसके अलावा यह आसन सम्पूर्ण शरीर की काया-कल्प करने में भी महत्वपूर्ण है। पेट की चर्बी को हटाने की चाहत रखने वाले भी इस आसन को अपना कर अपने पेट की चर्बी हटा सकते हैं।

इस आसन से पेट और रीढ़ में खींचाव पैदा होता है, इसलिए यह शरीर को लोच प्रदान करता है और कब्ज को दूर करता है।

स्लिप डिस्क वाले रोगी जरूर आजमायें।

सर्वाइकिल, कमर दर्द, पीठ दर्द और लम्बे समय तक बैठे रहने से होने वाले दर्द में भुजंगासन काफि फायदेमंद होता है।

उदर सम्बधी रोग जैसे यकृत और गुर्दे की समस्या में यह आसन लाभ देता है।

महिलाओं के मासिक सम्बधी समस्याओं में भी यह आसन लाभदायक है।

अस्थमा से पीड़ित व्यक्तियों के लिए भी फायदेमंद है। क्योंकि इस आसन को करने से फेफड़ों में खिंचाव पैदा होता है और फेफड़े मजबूत बनते हैं।

मेरूदण्ड और मेरूदण्ड से सम्बधित सभी अंगो में यह आसन लाभ पहुँचाता है।

पेट की चर्बी कम करता है और शरीर को लचकदार एवं सुडोल बनाता है।

भुजंगासन करते समय सावधानियां

भुजंगासन करते समय निम्न सावधानियां बरते –

गर्भवती महिलाओं को यह आसन नही करना चाहिए।

हार्निया से पीड़ित व्यक्तियों को इस आसन से बचना चाहिए।

पेप्टिक अल्सर एवं ह्नदय रोग से पीड़ित रोगी योग्य योग शिक्षक की देखरख में करना चाहिए।

अधिक कमर दर्द से पीड़ित व्यक्ति इस आसन को करते समय दोनों पैरों के बीच थोडी जगह छोड़कर करें ताकि कमर पर खिंचाव कम पड़े।

शारीरिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति पैर के पंजो को तानकर रखें , जिससे की मांसपेशियों मे अधिक तनाव होने के कारण साधक को अधिक लाभ प्राप्त होता है।

धन्यवाद |

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