कोशिका / Cell in Hindi – कोशिका की रचना, विभाजन और कार्य |

Deal Score0
Deal Score0

क्या होती है कोशिकाएं / What is Cells in Hindi ?

17 वीं शताब्दी के आरंभ में सूक्ष्मदर्शी (Microscope) का अविष्कार हो गया था | सुक्षमदर्शी की खोज के बाद मनुष्य की क्षमताएँ और बढ़ गई , जो रचनाएँ नंगी आँखों से नहीं देखी जा सकती थी उनको देखने और गहन अध्यन करने में अधिक आसानी हो गई | इसी कड़ी में जब मनुष्य के अंगो का विस्तार पूर्वक अध्यन किया गया तो पता चला की मनुष्य का शरीर असंख्य सूक्ष्म इकाइयों से बना है जिन्हें बाद में कोशिकाएं कहा जाने लगा | मनुष्य के शरीर का सबसे छोटा , रचनात्मक और कार्यात्मक रूप कोशिका को कहा जा सकता है | cell in hindi detail 

cell in hindi

cell in hindi

इन्ही कोशिकाओं से आगे चलकर शरीर का निर्माण होता है | जब कोशिकाओं में विभाजन होता है तब अनेक नयी कोशिकाएं बन जाती है | सामान गुणों वाली, एक ही आकार और कार्य करने वाली कोशिकाएं मिलकर किसी विशेष उतक का निर्माण करती है | उतक से तत्परिय है जैसे – कोई पेशी , अस्थि आदि का निर्माण | बहुत से उतक मिलकर अंगो का निर्माण करते है जैसे – अमाशय , मष्तिष्क , हृदय आदि | इन्ही बहुत से अंगो के मिलने से किसी विशेष संस्थान का निर्माण होता है | इस प्रकार मानव शरीर का निर्माण हो जाता है |

मानव कोशिका केवल एक कोशिका से निर्मित होती है जिसे जाइगोट (Zygote) कहते है | इस युग्मनज का निर्माण स्त्री के डिम्बाणू और पुरुष के शुक्राणु के मिलने से होता है | जब जाइगोट का निर्माण हो जाता है तब कोशिकाओं में बहुगुणन की क्रिया शुरू हो जाती है | जैसे – जैसे भ्रूण की वर्धि होती जाती है शरीर में कोशिकाओं की मात्रा बढती जाती है |

कोशिका की सरंचना – Cell in Hindi

इस का कोई निश्चित आकर नहीं होता | यह लम्बी, चौकोर , आयताकार या फिर गोल किसी भी प्रकार से हो सकती है | इसकी सरंचना को समझने के लिए इसे तीन भोगों में बांटा जा सकता है | कोशिका के तीन मुख्य अंग होते है जो इस प्रकार है –

  • कोशिका कला (Cell Membrane)
  • कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm)
  • केन्द्रक (Nucleus)

 कोशिका कला (Cell Membrane)

से तात्पर्य कोशिका के चारो तरफ की झिल्ली | यह कोशिका में सबसे बहार चारों तरफ दो परतों वाली एक पतली झिल्ली होती है जो प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट एवं वसा के मिलने से बनी होती है | इसका कार्य कोशिका की चलनी के रूप में होता है जिससे कुछ ही पदार्थ जैसे जल, ओक्शिजन, कार्बोन-डाई ऑक्साइड एवं शर्करा आदि ही अन्दर जा सकते है | इसका प्रमुख कार्य जीवद्रव्य के अन्दर के लिक्विड को संतुलित बनाये रखने में सहायक  है | कोशिका कला रक्त से भोजन के पोषक तत्व एवं ओक्सिजन को ग्रहण करती है और त्याज्य पदार्थ कार्बनडाई-ऑक्साइड को बाहर निकालती है | यह अपने भीतर की सरंचनाओं की रक्षा करने का कार्य भी करती है |

  कोशिका द्रव्य (Cytoplasm)

प्रत्येक कोशिका के भीतर जीवद्रव्य भरा होता है | कोशिका के बिच में एक गोल और अंडाकार रचना होती है जिसे केन्द्रक या Nucleus कहा जाता है | जीवद्रव्य के केन्द्रक और कोशिका कला के बिच वाले भाग को कोशिकाद्रव्य कहा जाता है | इसी कोशिका द्रव्य के बिच में बहुत सी छोटी – छोटी अंडाकार या छड के समान रचनाएं होती है जिसे माइटोकांड्रिया (Mitochondria) कहते है |

कोशिका द्रव्य में गोल्जी उपकरण (Golgi apparatus) – जो लगभग सभी कोशिका में केन्द्रक के पास पायी जाने वाली एक नालिकाकर झिल्लीनुमा रचना होती है | यह उन कोशिकाओ में अधिक पाया जाता है जिनमे पदार्थों का उत्पादन या सरवन अधिक होता हो | इसके अलावा कोशिका द्रव्य में तारक काय (Centrosome), रिक्तिकाएं (Vacuoles), Endoplasmic reticulum, राइबोसोम और लाइसोसोम (Ribosomes and Lysosomes), Granulas आदि रचनाएँ पायी जाती है |

 केन्द्रक (Nucleus)

RBC को छोड़कर शरीर की सभी कोशिकाओं के बिच में एक गोलाकार या अंडाकार रचना होती है जिसे केन्द्रक कहा जाता है | केन्द्रक के बैगर कोशिका जीवित नहीं रह सकती | इसका कार्य जीवद्रव्य में होने वाली सभी जैविक क्रियाओं जैसे पाचन, श्वसन , वर्द्धि आदि पर नियंत्रण रखना होता है | कोशिका के विभाजन में भी केन्द्रक की प्रत्यक्ष भूमिका होती है |

केन्द्रक को चार भागों में बांटा जा सकता है –

  • केन्द्रकीय कला (Nuclear Membrane)
  • केन्द्रक द्रव्य (Nucleoplasm)
  • गुणसूत्र (Chromosomes)
  • केंद्रिका (Nucleolus)

कोशिका विभाजन / Cell Division

कोशिकाओं का विभाजन होता रहता है , तभी हमारे शरीर में कोशिकाओं की वर्द्धि होती है और उनसे नए उतकों का निर्माण होता है | कोशिकाओं का एक लाइफ साइकिल होती है उसके बाद कोस्खिकएं टूटने लगाती है अर्थात नष्ट होने लगती है | इन नष्ट हुई कोशिकाओं के स्थान पर नयी कोशिकाओं की आवश्यकता होती है | इसलिए कोशिका का विभाजन आवशयक हो जाता है | कोशिका के आकार में भी एक सीमा तक ही वर्द्धि होती है उसके बाद में कोशिका दो भागों में बाँटने लगती है जिसे ही कोशिका विभाजन कहते है |

कोशिका का विभाजन दो प्रकार से होता है –

  • सूत्रीय विभाजन (Indirect Division)
  • अर्द्धसूत्रीय विभाजन (Direct Division or Meiosis)

सूत्रीय विभाजन

यह मानव शरीर होने वाली स्रवाधिक कोशिका विभाजन की क्रिया है | इसमें प्रत्येक कोशिका से दो अलग – अलग पुत्री कोशिकाओं की उत्पति होती है जिनमे से प्रत्येक उसी समय विभाजित हुई कोशिका के समान होती है | सूत्रीय विभाजन मुख्यतया: कायिक कोशिकाओं (Somatic Cells) में अधिक होता है | जनन कोशिकाओं में अर्द्धसूत्रीय विभाजन होता है | सूत्रीय विभाजन में पुत्री कोशिकाओं में क्रोमोसोम की संख्या 23 जोड़ी अर्थात 46 होती है |

सूत्रीय विभाजन की चार अवस्थाएँ होती है –

  • Prophase – पूर्वावस्था
  • Metaphase – मध्यावस्था
  • Anaphase – पश्च्यव्स्था
  • :Telophase – अंतिम अवस्था

अर्धसूत्री विभाजन

इस प्रकार का कोशिका विभाजन जनन कोशिकाओं में होता है अर्थात शुक्राणु और डिम्बाणू में ही देखने को मिलता है | जनन कोशिकाएं अगुणित/Haploid होती है | इनमे 23 क्रोमोसोम का एक सैट होता है | जब गर्भाधान होता है तब शुक्राणु और दिम्बाणु के केन्द्रक संयुक्त होते है जिससे एक युग्मनज बनता है जिसमे 23 क्रोमोसोम शुक्राणु के और 23 क्रोमोसोम डिम्बाणू के होते है | यही दोनों मिलकर 46 क्रोमोसोम बनते है |

और पढ़ें – मानव पाचन तंत्र 

कोशिका के कार्य / Function of Cells Hindi

कोशिका जीवधारियों की सबसे छोटी इकाई है | इसलिए यह सरंचना और कार्य की द्रष्टि से महत्वपूरण इकाई है | इसके निम्न कार्य है –

  • शरीर में कोशिका श्वसन का कार्य करती है | फेफड़ों द्वारा जब वायुमंडल से ओक्सिजन ग्रहण की जाती है तब यह ओक्सिजन रक्त के द्वारा कोशिकाओं तक पंहुचती है | कोशिका से अवशिष्ट के रूप में कार्बन ऑक्साइड रक्त तक पंहुचती है | इस प्रकार ओक्सिजन को ग्रहण करने और कार्बोन डाई ऑक्साइड को शारीर से बाहर निकालने में यह महत्वपूर्ण होती है |
  • कोशिका भोजन के जारण का कार्य भी करती है | ग्रहण किये गए भोजन से जीवद्रव्य बनाने की क्रिया को Assimilation कहते है | जब पचा हुआ भोजन आंतो की दीवारों के द्वारा सोख कर रक्त में पंहुचाया जाता है | तब रक्त से यह विभिन्न कोशिकाओं तक पहुँचता है जहाँ इसका जारण होता है |
  • क्षतिग्रष्ट उतकों और कोशिकों के निर्माण का कार्य भी शरीर में कोशिकाओं के द्वारा किया जाता है |
  • शरीर से अवशिष्ट पदार्थो के उत्सर्जन का कार्य भी कोशिकाएं ही करती है |
  • प्रजनन और उत्पादन का कार्य प्रत्येक कोशिका में होता है | कोशिका विभाजन द्वारा ही जीवन संभव हो सकता है |

धन्यवाद |

Avatar

स्वदेशी उपचार आयुर्वेद को समर्पित वेब पोर्टल है | यहाँ हम आयुर्वेद से सम्बंधित शास्त्रोक्त जानकारियां आम लोगों तक पहुंचाते है | वेबसाइट में उपलब्ध प्रत्येक लेख एक्सपर्ट आयुर्वेदिक चिकित्सकों, फार्मासिस्ट (आयुर्वेदिक) एवं अन्य आयुर्वेद विशेषज्ञों द्वारा लिखा जाता है | हमारा मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद के माध्यम से सेहत से जुडी सटीक जानकारी आप लोगों तक पहुँचाना है |

1 Comment
  1. It’s good knowledge for me ……………………
    Thanks for it.

    Leave a reply

    Logo
    Compare items
    • Total (0)
    Compare
    0