पान खाने के ऐसे फायदे जिन्हें आप नहीं जानते – पान के फायदे

पान – पान के फायदे  

पान का इस्तेमाल भारतीय जीवन शैली में प्राचीन समय से ही होता आया है | भारत में पान का इस्तेमाल पूजा – पाठ , टोने – टोटकों और खाना खाने के बाद मुंह के जायके लिए प्रयोग किया जाता है | पान का उद्भव स्थल मलाया द्वीप है | भारत में यह दक्षिण प्रदेश और उत्तर पूर्वी प्रदेशों में उगाया जाता है | पान की पतियों का रस इनकी प्रजाति के आधार पर अलग – अलग होता है लेकिन गुणों  में इन प्रजातियों में ज्यादा अंतर नहीं पाया जात | पान की पतियाँ हृदयआकृति की  होती है जो स्वाद में कषाय होती है | पान की पतियों में एक  विशेष प्रकार का तेल होता है जिसके कारण ये स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होती है | इस पोस्ट में हम पान से होने वाले फायदे और इसके विभिन्न रोगों में घरेलु प्रयोग के बारे में जानेंगे |

पान खाने के फायदे
पान

पान के फायदे और रोगोनुसार घरेलु प्रयोग

पित्ती में पान के फायदे –

पित्ती विकार में खाने वाले पान की तीन पतियों के साथ एक चम्मच फिटकरी लेकर , पानी डालकर अच्छी तरह पीसले | इस पीसी हुई लुग्दी से  निकलती हुई पित्ती पर मालिश करने से पीती ठीक हो जाती है |

बच्चो की सर्दी में पान का उपयोग 

बच्चों को सर्दी लगने पर पान के पतों पर सरसों या तील का तेल लगा कर गरम करले | अब इन गरम – गरम पतों को बच्चे के सीने पर बांधे | इन पतों को बांधने से बच्चो की छाती खुल जाती है एवं सर्दी की समस्या नहीं रहती है |

खांसी होने पर पान का उपयोग  

दो पान के पतों को एक चम्मच पानी मिलाकर अच्छी तरह पिसले | अब 10 ग्राम अदरक को कूटकर इसको भी पीसे हुए पान के साथ मिलादे | इन दोनों को सूती कपडे में डालकर अच्छी तरह इनका रस निकाल ले | प्राप्त रस में एक चम्मच शहद मिलाकर चाटने से खांसी की समस्या जाती रहती है |

फोड़े – फुंसियो में पान के फायदे 

पान के पतों में एंटीफंगल गुण प्रचुर मात्रा में होते है | अत: कभी आप को फोड़ा – फुंसी हो जाए तो घबराने की आवश्यकता नहीं है | बस आप पान के एक पते को थोडा गरम करले और इस पर हल्का गरम तेल चुपड़ दे | इस पते को फोड़े – फुंसी वाली जगह बांधने से जल्द ही फोड़ा – फुंसी बैठ जाता है | तीन या चार स्थानिक प्रयोग काफी है |

आवाज मीठी होती है 

मीठा पान खाने से गले की खरास दूर होती है एवं आवाज मधुर होती है | यह गुण इसमें प्रयोग होने वाले गुलकंद और सुपारी के कारण होता है |

दुर्गन्ध नाशक है पान 

अगर घी या तेल में किसी प्रकार की गंध आती होतो , इनमे एक पता पान का डालकर अच्छी तरह गरम करले | आपके घी या तेल में आने वाली स्मेल जाती रहेगी |

उतेजक है पान 

पान में सुपारी का प्रयोग किया जाता है | सुपारी में एरेकोलिन नमक तत्व होता है जो हमारे स्नायु तंत्र को मजबूत करता है एवं स्नायु को उतेजक बनाता है |

कैल्शियम का अच्छा विकल्प है पान खाना 

पान में चुना और कत्था का इस्तेमाल किया जाता है , जो कैल्शियम के अच्छे स्रोत है  | पुरे दिन में तीन पान का इस्तेमल करने से शरीर को भरपूर कैल्शियम प्राप्त हो जाता है | तीन पान से अधिक पान का सेवन आपके लिए नुक्सान दायक भी हो सकता है क्योकि पान में चुने का इस्तेमाल किया जाता है अत: अधिक पान के सेवन से मुंह में छाले और त्वचा फट सकती है | अगर पान के अधिक सेवन से आपका भी मुंह फट गया हो तो , – मुंह में घी या शहद को लगाये |

अधिक पान खाने के नुकसान 

पान के फायदे के आलावा पान का अधिक इस्तेमाल भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता  है | दिन में चार से अधिक पान खाना आपके लिए नुकसान दायक हो सकता है | अत: सिमित मात्रा में ही पान का सेवन करे | पान खाने के बाद हमेशा मुंह की सफाई अच्छी तरह करनी चाहिए ताकि आपके दांत साफ़ और स्वस्थ रह सके | मीठा पान आपके लिए अच्छा होता है लेकिन इसमें भी सुपारी की कम मात्रा ले | क्योकि अधिक सुपारी खाने से शरीर में खून की कमी हो सकती है | पान में कभी भी जर्दा या तम्बाकू का इस्तेमाल न करे | क्योकि ये आपके लिए नुकसान दायक सिद्ध होते है |

ध्यान दे पान का सेवन नियमित तौर पर न करे | सप्ताह में एक या दो बार पान खाने से यह औषधि है लेकिन नित्य खाने से इसके कुछ नुकसान भी होते है | अत: प्रतिदिन पान का सेवन ना करे |

 

अगर आपकी  स्वास्थ्य से जुडी कोई समस्या है तो निचे दिए गए  Comment Box में हमें बता सकते है | उचित समाधान दिया जावेगा |

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1 . आयुर्वेद क्या है 

2.  कामवासना

3. Leech Therapy – जौंक चिकित्सा 

धन्यवाद |

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