desi nuskhe, udar rog, Uncategorized

पेट का कैंसर – परिचय , कारण व उपचार ( Stomach Cancer)

Post Contents

पेट का कैंसर

परिचय

पेट के अन्दर असामान्य कोशिकाओं की वर्द्धि को ही पेट का कैंसर कहते है | कैंसर के प्रकार में यह प्रकार ( पेट का कैंसर ) सबसे खतरनाक है , क्यों की पेट के कैंसर का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता या यू कहे की इसका पूर्वानुमान लगाना बहुत मुस्किल है | क्यों की इस कैंसर का कोई भी लक्षण कैंसर की पहली अवस्था में सामने नहीं आता | इस रोग के लक्षण इसके अंतिम अवस्था पर पहुँचने पे जाहिर होते है ,

इस लिए हम सोच सकते है की यह कैंसर कितना खतरनाक है | इसे बड़ी आंत का कैंसर भी कहते है | क्यों की यह पाचन तंत्र के निचले हिस्से से शुरू होता है | पेट का कैंसर आमाशय की भीतरी परत से शुरू होता है , इस लिए ये बता पाना मुस्किल होता है की कैंसर कितना अन्दर तक फैला हुआ है |

वर्तमान समय में पेट के कैंसर के मरीजो में बेतरतीब इजाफा देखने को मिलता है | इसका मुख्य कारण हमारी दिनचरिया , खान – पान व नशीले पदार्थो का सेवन है | पेट का कैंसर महिलाओ की अपेक्षा पुरुषो में अधिक होता है | ज्यादातर लोगो में इस रोग का पता 50 की उम्र के बाद चलता है |

 कारण

  • शराब, धुम्रपान , तम्बाकू या नशीले पदार्थो का ज्यादा सेवन
  • फ़ास्ट फ़ूड , तली – भूनी या ज्यादा मसालेदार भोजन का सेवन
  • पेट की कोई शल्यचिकित्सा
  • लम्बे समय से पेट का कोई रोग जैसे – कब्ज , गैस आदि
  • गैस्ट्रटिस और कब्जियत अगर लम्बे समय तक बने रहे तो वे भी पेट के कैंसर का कारण बन सकते है |

Symptoms ( लक्षण )

  • मन्दाग्नि या कम भूख लगना |
  • अचानक वजन का कम होना बैगर किसी वाजिब कारण के |
  • पेट में लम्बे समय से दर्द ( उदर शूल ) |
  • पेट में अस्पष्ट बैचनी , आमतौर पर नाभि से ऊपर |
  • थोड़ा सा भोजन करने पर पेट भरने जैसा अहसास |
  • जी मचलना |
  • उल्टी होना ( खून वाली व बैगर खून के साथ ) |

उपचार

पेट के कैंसर में तीन मुख्य उपचार हैं – सर्जरी , कीमोथेरपी  व रेडिएशन थेरेपी |इस बीमारी के इलाज के लिए वर्तमान समय में सिर्फ सर्जरी उपलब्ध है | कीमोथेरपी व रेडिएशन थेरेपी सिर्फ इसके लक्षणों व इसके परभाव को कम करने के उपाय में सामिल है | इसके आलावा इसका कोई प्रभावी उपचार किसी भी पद्दति में (चाहे वह एलॉपथी हो या फिर आयुर्वेद हो ) उपलब्ध नहीं है |

बचाव के उपाय

  • पेट के कैंसर से बचाव के लिए हमें नित्य भोजन के आधा घंटे बाद एक या दो कलि लहसुन की कच्ची ही छिल कर खानी चाहिए | ऐसा करने से पेट के कैंसर से बचा जा सकता है | अगर कैंसर हो भी गया हो तो लहसुन की कच्ची कलि को पीसकर पानी में घोल कर नित्य खाना खाने के बाद पीना चाहिए | इससे जल्दी ही पेट के कैंसर में लाभ मिलेगा |
  • हमेशा भोजन के साथ दही खाने से कैंसर की सम्भावना नहीं रहती |

    दही का उपयोग हमेशा दिन में ही करना चाहिए | रात्रि में दही का उपयोग वर्जित है |

  • तुलसी की चार – पांच पतिया रोजाना खाने से कैंसर का खतरा न के बराबर हो जाता है |वर्तमान समय में तुलसी का अर्क बाजार में उपलब्ध है जिससे हम लाभ उठा सकते है |
  • कैंसर से बचने के लिए तनाव मुक्त जीवन सैली को अपनाए क्यों नवीनतम खोजो से पता चला है कि मानसिक तनाव ही कैंसर का सबसे बड़ा कारण है |

About स्वदेशी उपचार

स्वदेशी उपचार आयुर्वेद को समर्पित वेब पोर्टल है | यहाँ हम आयुर्वेद से सम्बंधित शास्त्रोक्त जानकारियां आम लोगों तक पहुंचाते है | वेबसाइट में उपलब्ध प्रत्येक लेख एक्सपर्ट आयुर्वेदिक चिकित्सकों, फार्मासिस्ट (आयुर्वेदिक) एवं अन्य आयुर्वेद विशेषज्ञों द्वारा लिखा जाता है | हमारा मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद के माध्यम से सेहत से जुडी सटीक जानकारी आप लोगों तक पहुँचाना है |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.