वसंत कुसुमाकर रस के फायदे, औषधीय गुण, घटक एवं सेवन की विधि

वसंत कुसुमाकर रस (Vasant Kusumakar Ras): आयुर्वेद में हजारों दवाएं है जिनका उपयोग रोग चिकित्सार्थ किया जाता है | हमने यहाँ पर अधिकतर आयुर्वेदिक दवाओं के बारे में लिखा है एवं बाकि बची सभी दवाओं के बारे में भी आपको समय – समय पर जानकारी देते रहते है |

आज के इस लेख में हम आपको वसंत कुसुमाकर रस की शास्त्रोक्त एवं विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध करवा रहें है | इस लेख को पढने के बाद आप वसंतकुसुमाकर रस के बारे में सम्पूर्ण जान जायेंगे | यह आयुर्वेदिक औषधि बाजार में टेबलेट फॉर्म में आती है | आयुर्वेद की अधिकतर फार्मेसी इसका निर्माण करती है | बाजार में यह पतंजलि, बैद्यनाथ, धूतपापेश्वर वसंत कुसुमाकर रस के ब्रांड नाम से मिल जाती है |

दवा का नाम वसंत कुसुमाकर रस
प्रकार रस प्रकरण की दवा
घटक प्रवाल पिष्टी, रस सिंदूर, मोती पिष्टी एवं 14 अन्य
उपयोग मस्तिष्क विकार, बल वर्द्धक, वाजीकरण एवं रसायन
फार्मेसीपतंजलि, बैद्यनाथ, डाबर, धूतपापेश्वर
उपलब्धता ऑनलाइन एवं ऑफलाइन

वसंत कुसुमाकर रस क्या है ? (What is Vasant Kusumakar Ras)

यह आयुर्वेद की शास्त्रोक्त औषधि है | इसका वर्णन सिद्ध योग संग्रह में मिलता है | यह दवा नपुंसकता, शीघ्रस्खलन एवं मस्तिष्कीय विकारों में उपयोगी है | इसमें प्रवाल पिष्टी, रस सिंदूर, मोती पिष्टी, अभ्रक भस्म एवं वंग भस्म जैसे घटक द्रव्य है जिनको हल्दी रस, गन्ने के रस एवं कमल के फूलों के रस में भावना आदि देकर तैयार किया जाता है |

इस औषधि का प्रयोग मधुमेह, मूत्र विकार एवं नाड़ी दौर्बल्य में भी किया जाता है | चलिए अब इसके घटक द्रव्यों के बारे में जानते है कि इसमें कौनसी जड़ी-बूटियां एवं भस्म आदि है |

वसंत कुसुमाकर रस के घटक द्रव्य | Ingredients of Vasant Kusumakar Ras

  • प्रवाल भस्म – 4 भाग
  • रस सिंदूर – 4 भाग
  • मोती पिष्टी – 4 भाग
  • अभ्रक भस्म – 4 भाग
  • चाँदी भस्म – 2 भाग
  • स्वर्ण भस्म – 2 भाग
  • लौह भस्म – 3 भाग
  • नाग भस्म – 3 भाग
  • वंग भस्म – 3 भाग
  • कस्तूरी – 2 भाग
  • अडूसा रस – भावनार्थ
  • हल्दी का रस – भावनार्थ
  • गन्ने का रस – भावनार्थ
  • कमल के फूलों का रस – भावनार्थ
  • मालती के फूलों का रस – भावनार्थ
  • शतावरी का रस – भावनार्थ
  • केले के कंद का रस – भावनार्थ
  • चन्दन क्वाथ – भावनार्थ

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वसंत कुसुमाकर रस के फायदे | Benefits of Vasant kusumakar Ras

मधुमेह रोग में (Diabetes): यह दवा मधुमेह में बहुत लाभदायक है | मधुमेह के रोगी को जामुन की गुठली एवं शिलाजीत के साथ इस औषधि का सेवन करवाने से तुरंत मधुमेह में आराम मिलता है | इसमें चाँदी भस्म एवं स्वर्ण भस्म जैसे घटक है जो मधुमेह को ठीक करने में अच्छा कार्य करते है | चूहे पर हुई एक रिसर्च में जब इस दवा को दिया गया तो इसने ब्लड शुगर लेवल को कम कर दिया |

नपुंसकता में (Impotency): इम्पोटेंसी की समस्या में यह कारगर रूप से कार्य करती है | यह वीर्यवाहिनी नाड़ियों को बल देती है जननांगो में रक्त संचार को बढ़ा कर नपुंसकता को ठीक करने में सहयता करती है | आयुर्वेद चिकित्सा में इसे उत्तम वाजीकरण औषधियों में गिना जाता है |

वीर्यपतन में (Premature Ejaculation): शीघ्रस्खलन या वीर्य धारण की शक्ति कम होने पर आयुर्वेदिक चिकित्सा वसंत कुसुमाकर रस का प्रयोग धारोष्ण गोदुग्ध के साथ करवाते है | यह वीर्य को गाढ़ा करने का काम करती है | साथ ही वीर्य की उष्णता को भी कम करती है | इसमें रौप्य भस्म, प्रवाल पिष्टी एवं वंग भस्म है जो वीर्य को गाढ़ा करने एवं शीतलता देने का कार्य करते है |

पुराना नकसीर रोग (Nosebleed): वसंत कुसुमाकर रस का प्रयोग पुराने नकसीर रोग में किया जाता है | नकसीर की समस्या में इसे अनार के शर्बत, आंवला मुर्रबा एवं गुलकंद के साथ सेवन करवाने से अच्छा परिणाम मिलता है | यह रक्त की उष्णता को कम करके नकसीर के पुराने से पुराने रोग को भी ठीक करने का सामर्थ्य रखती है |

वृष्य एवं बलवर्द्धन (Vrishya): यह दवा बल वृद्धक एवं वृष्य मानी जाती है | अप्राकृतिक मैथुन एवं बचपन की गलतियों के कारण शुक्रवाहिनी नाडी कमजोर हो जाती है | एसे में शरीर भी कटने लगता है एवं दुबला पतला हो जाता है | इस समस्या में वसंत कुसुमाकर रस को अन्य बल वर्धक औषधियों जैसे कामसुधा, धातु पौष्टिक एवं अश्वगंधा पाक आदि के साथ सेवन करवाने से तुरंत राहत मिलती है |

रक्तप्रदर रोग में (Metrorrhagia): स्त्रियों में होने वाले रक्तप्रदर रोग में वसंत कुसुमाकर रस का प्रयोग करने से लाभ प्राप्त होता है | यह रोग रक्त के पतले होने के कारण होता है एवं धातुओं के क्षीण होने के कारण होना बताया गया है | इस स्थिति में रक्त को गाढ़ा करने के लिए वसंतकुसुमाकर रस का सेवन करने से लाभ मिलता है |

वसंत कुसुमाकर रस के औषधीय गुण

  1. यह औषधि हृदय, बल्य, एवं उतेजक है |
  2. वाजीकरण एवं रसायन के रूप में इसे गुणकारी माना जाता है |
  3. स्वर्ण, मोती, प्रवाल एवं अभ्रक के मिलकर बनी होने के कारण शरीर के सभी रोगों में गुणकारी है |
  4. स्त्री एवं पुरुषों के जननेद्रिय सम्बन्धी विकारों में यह फायदेमंद है |
  5. मधुमेह, बहुमूत्र एवं हर तरह के प्रमेह रोगों में गुणकारी औषधि है |
  6. वीर्य का गिरना एवं पतला होने जैसी समस्या में तुरंत राहत देती है |
  7. रोग के बाद आने वाली कमजोरी में भी यह अत्यंत लाभदायक रसायन है |
  8. बुढ़ापे एवं खून की कमी में इसका प्रयोग करना फायदेमंद है |
  9. योनी एवं गर्भास्य की खराबी में भी इसका प्रयोग किया जाता है |
  10. पुराने रक्तपित्त, कफ, खांसी, श्वांस एवं संग्रहणी रोग में लाभदायक है |

सेवन की विधि

इस आयुर्वेदिक रसायन का प्रयोग आयुर्वेदिक चिकित्सक के परामर्श अनुसार करना चाहिए | यह विभिन्न अनुपान भेद से रोगों पर कार्य करती है | अत: किस रोग में कौनसे अनुपान के साथ उपयोग करनी है यह आपका चिकित्सक ही निर्धारित करता है |

सामान्यत: इसकी 1 – 1 गोली सुबह – शाम रोग अनुसार विभिन्न अनुपान जैसे वीर्य विकारों में आंवले के मुर्रबे, रक्त – पित्त एवं रक्तप्रदर में वासा रस या शहद के साथ उपयोग की जानी चाहिए |

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