गुर्दे की पथरी के लिए 10 प्रमुख आयुर्वेदिक औषधि | Kidney Stone 10 Ayurvedic Medicine

गुर्दे की पथरी के लिए 10 प्रमुख औषधि: गुर्दे में पथरी होना एक आम समस्या है | यह अधिकांश लोगों में बिना कष्ट पहुंचाए सालों तक रोगी के गुर्दे में रह सकती है | गुर्दे की पथरी के लिए आयुर्वेद में उपयोग होने वाली औषधियों के बारे में इस लेख में आपको पूर्ण जानकारी मिलेगी | अगर आप भी गुर्दे की पथरी से पीड़ित है तो इन औषधियों के सेवन से पथरी की समस्या में आराम मिलेगा |

चलिए गुर्दे की पथरी के लिए 10 प्रमुख औषधि के बारे में जानने से पहले आपको पथरी क्यों होती है एवं इसके क्या लक्षण है | आदि की जानकारी उपलब्ध करवाते है |

लेख का नामगुर्दे की पथरी के लिए 10 प्रमुख औषधि आयुर्वेदिक
लेखक डॉ. मनोज पाण्डेय
लेखक का एक्सपीरियंस +8 Years
कुल शब्द 1609
रोग Kidney Stone (गुर्दे की पथरी)

गुर्दे की पथरी क्या है एवं क्यों होती है ?

पथरी को आयुर्वेद में अश्मरी के नाम से जानते है | पथरी कैल्शियम ओक्सालेट, मिनरल्स, यूरिक एसिड एवं सिस्टीन आदि लम्बे समय तक मिलकर क्रिस्टल बनाने लगते है एवं ये क्रिस्टल बड़े होकर पथरी का रूप ले लेते है | गुर्दे की पथरी का साइज़ छोटे कण से लेकर अखरोट के आकार तक का हो सकता है |

गुर्दे की पथरी के लिए 10 प्रमुख औषधि

यह पथरी कई रंग की हो सकती है | स्त्रियों की अपेक्षा पुरुषों में पथरी अधिक पाई जाती है | आयुर्वेद अनुसार जब वायु मूत्राशय में आये हुए शुक्र के साथ पित्त एवं कफ को सुखाती है तो यह पथरी का रूप ले लेती है | आयुर्वेद में पथरी को 4 प्रकार की बताया गया है |

गुर्दे की पथरी के लक्षण क्या है

पथरी होने पर रोगी में अधिकांश लक्षण प्रकट नहीं होते, लेकिन जब पथरी बढ़ी होने लगती है तो यह कई प्रकार के लक्षण दिखाती है एवं पीड़ा देती है –

  • साधारण से लेकर तेज दर्द
  • पेशाब में खून आना
  • झटके लगने पर दर्द होना
  • पथरी जब मूत्र मार्ग से गुजरती है तो भयंकर दर्द देती है
  • पथरी का दर्द कमर से लेकर जांघ और गुप्तांगो तक जाता है
  • पेशाब का रंग गहरा हो जाता है
  • मूत्र की मात्रा कम होती है
  • बहुत बार पेशाब आना रुक जाता है
  • लेकिन अगर गुर्दे में पथरी छोटी है तो इसके कोई भी लक्षण प्रकट नहीं होते इसका पता आधुनिक जांचो से ही चलता है

गुर्दे की पथरी के लिए 10 प्रमुख औषधि है ये कुछ आयुर्वेदिक दवाएं

पथरी रोग होते ही इसकी चिकित्सा करवानी चाहिए | यदि थोड़े दिन भी पथरी की समुचित चिकित्सा नहीं की जाती है तो इस रोग में औषधि सेवन से आराम नहीं मिलता फिर शल्य चिकित्सा से पथरी को निकलवाना पड़ता है | चलिए जानते है आयुर्वेद में उपयोग होने वाली गुर्दे की पथरी के लिए 10 प्रमुख औषधि के बारे में

1. पाषाणभेद चूर्ण गुर्दे की पथरी के लिए

पाषाणभेद को पत्थरी किलर भी कहते है | यह पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाला औषधीय पौधा है जिसका चूर्ण बनाकर पाषाणभेद चूर्ण का निर्माण होता है | पथरी की शिकायत में यह अत्यंत लाभदायक औषधि है | इसके सेवन से पथरी कट – कट कर गुर्दे से बाहर निकलती है |

आयुर्वेद में इसके सहयोग से पाषाणभेदादी घृत एवं पाषाणभेदादी चूर्ण आदि का निर्माण किया जाता है | वैसे इसके पतों से निर्मित चूर्ण का प्रयोग भी पथरी की समस्या में अत्यंत लाभदायक है |

सेवन की विधि एवं मात्रा: इससे निर्मित चूर्ण का सेवन सुबह – शाम 3 से 6 ग्राम की मात्रा में किया जाता है | अगर क्वाथ बना कर उपयोग में लिया जाता है तो 50 मिली तक की मात्रा में लिया जाना चाहिए |

2. हजरुल यहूद भस्म

हजरुल यहूद भस्म यूनानी की शास्त्रोक्त औषधि है | इस औषधि का प्रयोग मूत्र विकारों एवं अश्मरी की समस्या में प्रमुखता से किया जाता है | इसे पत्थरी नाशक औषधि माना जाता है यह किसी भी प्रकार से रुके हुए मूत्र को फिर से शुरु कर देती है | अगर पथरी शुरूआती अवस्था में है तो हजरुल यहूद भस्म के प्रयोग से यह आसानी से मूत्र मार्ग के माध्यम से बाहर निकल जाती है |

विधि एवं मात्रा: इसका प्रयोग 250 से 500 mg तक की मात्रा में यूनानी चिकित्सक की देख रेख में किया जाना चाहिए | गुर्दे की पथरी की शुरुआती अवस्था में इसके सेवन से तुरंत आराम मिलता है |

3. सिस्टोन टेबलेट (Himalaya Cystone tablet)

यह हिमालय कंपनी द्वारा बनाये जाने वाली प्रशिद्ध अश्मरी नाशक औषधि है | यह Kidney Stone (गुर्दे की पत्थरी) को बनने से रोकती है | मूत्रकृछ्ता में भी इसके सेवन से आराम मिलता है | इसके घटक पाषाणभेद एवं शिलापुष्प है, जो स्टोन को बनने से रोकती है |

विधि एवं मात्रा: 2 – 2 गोली दिन में 2 से 3 बार वैद्य परामर्शानुसार इसका सेवन करना चाहिए | आहार में चीनी, मीठे पदार्थ, मक्खन, घी एवं चर्बी चाय, कौफी एवं समस्त प्रकार के उत्तेजक पदार्थों से परहेज करना चाहिए |

4. डाबर स्टोनडब कैप्सूल एवं सिरप (Stondab Syrup and Capsule)

डाबर कंपनी की यह दवा किडनी स्टोन में काफी कारगर है | यह कैप्सूल एवं सिरप फॉर्म में आती है | इसमें रक्तपुनर्नवा, वरुण, गिलोय, अपामार्ग एवं पाषाणभेद जैसी जड़ी-बूटियां है | ये जड़ी-बूटियां पथरी खत्म करने का कार्य करती है | किडनी स्टोन में स्टोनडब टेबलेट एवं सिरप का प्रयोग वैद्य सलाह से किया जा सकता है | यह गुर्दे की पथरी के लिए प्रमुख 10 औषधियों में गिनी जाती है |

विधि एवं मात्रा: इसका सेवन 1 से 2 गोली सुबह शाम जल के साथ एवं सिरप का प्रयोग 1 से 2 teaspoon सुबह – शाम वैद्य परामर्श से किया जाना चाहिए |

5. बैद्यनाथ पथरिना टेबलेट (Baidyanath Pathrina Tablet)

बैद्यनाथ झाँसी आयुर्वेदिक फार्मेसी द्वारा भी गुर्दे की पथरी के लिए दवा का निर्माण किया जाता है | बैद्यनाथ पथरिना टेबलेट गुर्दे की पथरी में अच्छा कार्य करती है | यह शरीर में लिथिक एवं अल्कालिज़ेर के रूप में कार्य करती है | पेशाब में आई रूकावट को दूर करने एवं गुर्दे की पथरी को पेशाब के रस्ते निकालने में उपयोगी आयुर्वेदिक औषधि है |

इसमें 12 प्रकार की आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का समावेश है | इसमें वरुण, पाषणभेद, अपामार्ग, सगुनबीज, तुलसी, मंजिष्ट, कबाबचीनी एवं शिलाजीत आदि जड़ी – बूटियां है |

विधि एवं मात्रा: इसका सेवन 2 से 3 गोली की मात्रा में वैद्य सलाह अनुसार दिन में 2 से 3 बार किया जा सकता है | अनुपान के रूप में गुनगुना जल लेना चाहिए | यह मूत्र में संक्रमण को रोकती एवं घाव या मवाद की समस्या को भी खत्म करने का कार्य करती है |

6. गोक्षुरादी गुग्गुल है गुर्दे की पथरी के लिए प्रमुख औषधि

गोक्षुरादी गुग्गुल आयुर्वेद की शास्त्रोक्त औषधि है | यह मूत्रविकारों में प्रमुखता से प्रयोग होने वाली क्लासिकल मेडिसिन है | इसका प्रयोग किडनी स्टोन की समस्या में भी प्रमुखता से किया जाता है | गुर्दे की पथरी में गोक्षुरादी गुग्गुल का प्रयोग करने से पथरी कट कर पेशाब के रास्ते बाहर निकालने लगती है |

इस क्लासिकल मेडिसिन का निर्माण प्रत्येक फार्मेसी द्वारा किया जाता है | आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के साथ अन्य औषधीय योगों के साथ इसका प्रयोग कर सकते है |

विधि एवं मात्रा: गोक्षरादी गुग्गुल का सेवन चिकित्सकीय परामर्शानुसार 1 से 2 गोली दिन में दो बार सेवन की जा सकती है | साथ ही अनुपान के रूप में मौसमी का ज्यूस एवं गुनगुना जल प्रयोग किया जा सकता है |

7. दिव्य अश्मरीहर रस

पतंजलि द्वारा निर्मित यह औषधि अश्मरीहर के रूप में जानी जाती है | यह गुर्दे की पथरी में प्रयोग होने वाली प्रमुख आयुर्वेदिक दवा है | मूत्रविकारों में इसका प्रयोग किया जाता है | पेशाब में जलन, गुर्दे की पथरी, पेशाब का रुक – रुक के आना, दर्द एवं मवाद की समस्या में इसके सेवन से अच्छे परिणाम मिलते है |

गुर्दे की पथरी में यह तीव्रता से आराम देने वाली औषधि है | यह मूत्रल गुणों से युक्त आयुर्वेदिक दवा है | इसमें यवक्षार, हजरुल यहूद भस्म, कलमी शोरा एवं श्वेत पर्पटी जैसे घटक द्रव्य है |

विधि एवं मात्रा: 1 से 2 गोली की मात्रा में सुबह शाम वैद्य दिशा निर्देशानुसार प्रयोग करना चाहिए |

8. वृक्क्दोषहर क्वाथ (Vrikkdoshhar Kwath)

इस औषधि का निर्माण पाषाणभेद, गोखरू, पुनर्नवामूल, कुल्थी एवं वरुणछाल जैसे घटक द्रव्यों द्वारा किया जाता है | इसे सभी वृक्क दोषों में प्रयोग किया जाता है | यह गुर्दे की पथरी को निकालने में उपयोगी प्रमुख औषधि है | यह पथरी की पुनरावर्ती में भी अच्छा कार्य करती है एवं फिर से पथरी को शरीर में नहीं बनने देती |

यह Gall Bladder की पथरी में भी अत्यंत लाभदायक औषधि है |

विधि एवं मात्रा: इसका प्रयोग क्वाथ बना कर किया जाता है | क्वाथ बनने के लिए 10 ग्राम क्वाथ को 400 मिली पानी में उबालकर जब एक चौथाई जल बचे तब छान कर शहद मिलाकर सेवन करना चाहिए |

9. निरी केऍफ़टी सिरप (Neeri KFT Syrup)

एमिल फार्मेसी की यह औषधि किडनी के कार्य करने को सुचारू करने में प्रमुख रूप से उपयोगी है | यह रेनल सेल्स इंजुरी को ठीक करने में लाभदायक है | गुर्दे की पथरी में इसका प्रयोग करने से अच्छा परिणाम मिलता है | यह किडनी को सुचारू रूप से कार्य करने एवं पथरी को निकालने में उपयोगी साबित होती है |

इसमें पपीता, धनिया, पुनर्नवा, कासनी, मकोय, गिलोय, पलाश, गोखरू, वरुण आदि जड़ी-बूटियां है जो किडनी की पथरी में लाभ करती है |

विधि एवं मात्रा: इस सिरप का सेवन 5 मिली की मात्रा में दिन में दो बार वैद्य सलाह से सेवन की जा सकती है |

10. वरुणादि क्वाथ (Varunadi Kwath)

वरुणादी क्वाथ आयुर्वेद की शास्त्रोक्त औषधि है | यह गुर्दे की पथरी की प्रमुख औषधि मानी जाती है | इसमें वरुण एवं अन्य औषधीय जड़ी-बूटियों का समावेश है | इस आयुर्वेदिक दवा का प्रयोग समस्त प्रकार के मूत्रविकार, प्रोस्टेट, गुर्दे के विकार में किया जाता है | इसे गुर्दे की पथरी के लिए प्रमुख 10 औषधियों में गिना जाता है |

घटक – वरुण, शुंठी, गोखरू एवं पाषाणभेद

विधि एवं मात्रा: वरुणादि क्वाथ का सेवन काढ़ा बनाकर किया जाना चाहिए | काढ़ा बनाने के लिए 10 ग्राम वरुणादि क्वाथ को 400 मिली जल में उबालकर 1/4 भाग बचने पर छान कर प्रयोग में लेना चाहिए |

गुर्दे की पथरी के लिए प्रमुख 10 औषधियों की सूचि

  1. पाषाणभेद चूर्ण
  2. हजरुल यहूद भस्म
  3. हिमालय सिस्टोन टेबलेट
  4. स्टोनडब कैप्सूल एवं सिरप
  5. पथरिना टेबलेट
  6. गोक्षुरादी गुग्गुल
  7. अश्मरीहर रस
  8. पतंजलि वृक्क्दोषहर क्वाथ
  9. निरी केऍफ़टी सिरप
  10. वरुणादि क्वाथ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *