आयुर्वेद की महौषधि – मकरध्वज वटी | इसके जैसी चमत्कारिक यौन वर्द्धक औषधि कोई नहीं !

मकरध्वज वटी

मकर ध्वज वटी को आयुर्वेद में महा औषधि माना जाता है क्यों की यह सर्व रोग नाशिनी औषधि है | वैसे तो मकरध्वज वटी सभी रोगों में लाभकारी है किन्तु यौन कमजोरी में यह एक अमृत औषधि के समान काम करती है | वर्तमान समय में युवाओ के गलत आचरणों की वजह से भरी जवानी में ही बुढ़ापे के लक्ष्ण दिखाई देने लगते है | उनकी यौन शक्ति क्षीण हो जाती है और वे नए नए उपाय खोजते रहते है जिससे उनको स्वास्थ्य लाभ कम हानि अधिक हो जाती है | अगर आप भी यौन वर्धक दवाइयां ले ले कर थक चुके है तो आपको भी इस मकरध्वज वटी का सेवन किसी वैद्य के निर्देशन में शुरू कर देना चाहिए |

मकरध्वज वटी बनाने की विधि

मकरध्वज     – 10 ग्राम
कपूर            – 10 ग्राम
कालीमिर्च     – 10 ग्राम
जायफल       – 10 ग्राम
शुद्ध कस्तूरी   – 3 ग्राम

सबसे पहले मकरध्वज को खरल में डाल कर खूब घुटाई करे | अब कालीमिर्च और जायफल का महीन चूर्ण बना ले | जायफल और कालीमिर्च का चूर्ण तथा कपूर , कस्तूरी इन सब को मकरध्वज के साथ डाल कर खूब मर्दन करे | मर्दन करते समय खरल में थोड़े पानी का छिडकाव भी करते रहे | जिससे की इन सब की एक लुगदी बन जावे | जब यह मिश्रण कुछ गाढ़ा हो जावे तब इसकी 2 -2 रति की गोलियां बना ले |

सेवन विधि – 1 – 1 गोली का सेवन सुबह शाम मिश्री मिले दूध या मक्खन के साथ मिश्री मिला कर सेवन करे |

औषधि लाभ

इस योग के सेवन से ह्रदय , मष्तिष्क , वातवाहिनी एवं शुक्र वाहिनी नाडीयों पर विशेष प्रभाव पड़ता है और इन्हें शक्ति मिलती है | यह योग मानसिक और शारीरिक नापुसकता को दूर कर प्रयाप्त शक्ति प्रदान करता है

  • इसके सेवन से स्मरण शक्ति , स्तंभन शक्ति , विर्यबल और ओज की वर्द्धि होती है |
  • समस्त प्रकार के धातुविकार, विर्यनाश से उत्पन्न हुई लिंग की स्थिलता और नापुसकता को दूर कर , शीघ्रपतन , वीर्य का पतलापान और मधुमेह आदि व्याधियो को नष्ट करता है |
  • इस योग का उपयोग विवाहित और अविवाहित दोनों कर सकते है |

* योग का सेवन करते समय पथ्य और अपथ्य का अनुसरण जरुर करे |

 

धन्यवाद
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