रस सिन्दूर के फायदे एवं रोगानुसार अनुपान (उपयोग)

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यह एक उष्णवीर्य रसायन है | रक्त की गति बढ़ाना, रक्त का शोधन एवं हृदय की शक्ति बढाने के लिए बहुत गुणकारी औषधि है | रस सिन्दूर (Ras Sindoor) पारद एवं गंधक का कल्प होता है | कफ़ एवं श्वास विकारों में इसका सेवन बहुत फायदेमंद रहता है | यह बहुत प्रभावी उत्तेजक होता है | इसकी सहायता से दूषित कफ को शरीर से बाहर निकाला जा सकता है |

रस सिंदूर
डाबर रस सिंदूर

इस लेख में हम रस सिन्दूर से जुडी निम्न बातों को जानेंगे :-

  • रस सिन्दूर क्या है ?
  • इसे बनाने की विधि एवं घटक द्रव्य |
  • किन किन रोगों में उपयोगी है Ras Sindoor
  • इसका उपयोग कैसे करें |
  • यह कितने प्रकार का होता है?
  • रस सिन्दूर के फायदे क्या हैं ?
  • क्या इसके कोई साइड इफेक्ट्स (दुष्परिणाम) हैं ?
  • पतंजलि रस सिन्दूर एवं बैद्यनाथ में से कोनसा बेहतर है ?
  • Patanjali Ras Sindoor Price Baidyanath Comparision

रस सिन्दूर क्या है, बनाने की विधि एवं घटक द्रव्य |

यह पारद एवं गंधक के योग से निर्मित एक आयुर्वेदिक औषधि है | रस सिन्दूर बहुत ही उत्तम बलवर्धक योग है | यह आमवात, श्वास विकार, कफ विकार, वाजीकरण, धातु वृधि एवं हृदय बलकारी उत्तम रसायन है |

कैसे बनाते हैं एवं घटक क्या क्या हैं ?

इसे बनाने के लिए निम्न घटक द्रव्यों की आवश्यकता होगी :-

  • शुद्ध पारद
  • एवं शुद्ध गंधक

अब जानते हैं रस सिन्दूर बनाने की विधि के बारे में :-

  • शुद्ध गंधक एवं पारद लें (16 तोला)
  • दोनों को पत्थर के खरल में डाल कर अच्छे से घोटकर इसकी कज्जली बना लें |
  • ध्यान रखें कज्जली बहुत महीन होनी चाहिए |
  • अब इस कज्जली को काले रंग की मजबूत बोतल में भर लें |
  • बोतल को मिट्टी की हंडी में रख दें और हंडी को बोतल के गले तक मिट्टी से भर दे |
  • इस हंडी को बालुका यंत्र में रख कर 3 घंटे तक मंद आंच दे |
  • इसके बाद आंच को तेज कर दें व 3 – 4 घंटे तक देते रहें |
  • इस तरह से उत्तम एवं गुणकारी रस सिन्दूर तैयार हो जाता है |

रस सिन्दूर के प्रकार (Types of Ras Sindoor)

यह निम्न प्रकार का होता है :-

  • तलस्थ (अंतर्धुम )
  • अर्धगंधकजारित
  • द्विगुणगंधकजारित
  • षडगुण बलिजारित

रस सिन्दूर के फायदे (Benefits of Ras Sindoor)

उष्ण वीर्य वाली यह औषधि बहुत गुणकारी है | यह अनेकों रोगों को नष्ट करने की क्षमता रखती है | रोगानुसार इसका अनुपान अलग अलग तरह से करना होता है | कफ जन्य रोगों में इसका सेवन बहुत फायदेमंद होता है | रस सिन्दूर दूषित कफ को शरीर से बाहर कर सकता है |

आइये जानते हैं किन किन रोगों में फायदेमंद है रस सिन्दूर :-

  • रक्त की गति को बढाता है एवं दोष मुक्त करता है |
  • हृदय को बल प्रदान करता है |
  • यह उत्तेजक है, शरीर के सभी अंगो की क्रिया को बढाता है |
  • कफ जन्य विकारों को बहुत शीघ्र दूर करता है |
  • न्यूमोनिया, इन्फ्लुएंजा, श्वास विकार एवं कास में बहुत उपयोगी है |
  • मांसगत रोगों में बहुत फायदेमंद है |
  • यह उत्तम वाजीकर है |
  • शीघ्रपतन में भी इसका सेवन फायदेमंद रहता है |

रोगानुसार अनुपान एवं उपयोग

रस सिन्दूर का उपयोग अनेकों रोगों को दूर करने के लिए किया जा सकता है | रोगानुसार इसका उपयोग अलग अलग मात्रा एवं अन्य औषधियों के साथ करना होता है | आइये जानते हैं रोगानुसार उपयोग कैसे करें :-

  • रक्त प्रदर में :- 4 रत्ती पीपल की लाख के चूर्ण के साथ 1 रत्ती रस सिन्दूर |
  • ज्वर में :- गोदंती हरिताल भस्म के साथ तुलसी स्वरस से दें |
  • प्रमेह में :- कच्ची हल्दी स्वरस या गिलोय सत्व के साथ शहद में मिलाकर |
  • अर्श में :- छोटी हरड के साथ सेवन करें |
  • अपस्मार में :- बच के चूर्ण के साथ मांस्यादी क्वाथ से दें |
  • श्वास रोग में :- बहेड़े के छिलके के चूर्ण के साथ |
  • पीलिया रोग में :- इसे स्वर्ण माक्षिक भस्म एवं कसीस भस्म के साथ मिलाकर दारुहल्दी क्वाथ के साथ सेवन करें |
  • मूत्रविकार में :- शिलाजीत एवं छोटी इलायची के साथ |
  • वाजीकरण के लिए :- सेमल कंद एवं मूसली चूर्ण के साथ दें |
  • बलवर्धन के लिए :- गिलोय सत्व, प्रवाल भस्म एवं मक्खन के साथ सेवन करें |
  • स्वपन दोष में :- जायफल, लोंग, कपूर, अफीम एवं रस सिन्दूर का सेवन करें |

धातुवृधि के लिए रस सिन्दूर का उपयोग एवं फायदे |

धात की कमजोरी आज नवयुवकों में बहुत बड़ी समस्या बन गयी है | इससे व्यक्ति शारीरिक रूप से तो कमजोर होता ही साथ ही यौन शक्ति भी कम हो जाती है | रस सिन्दूर का अन्य औषधियों के साथ उपयोग करके धातु की कमी को दूर किया जा सकता है |

धातु वृद्धि के लिए 1 रत्ती रस सिन्दूर, बंग भस्म (1 रत्ती) एवं स्वर्ण भस्म चतुर्थांश रत्ती को मिलाकर मलाई के साथ सेवन करें | या लोंग , केसर, जावित्री, पीपल, कपूर, भांग, अफीम एवं नाग भस्म को मिलाकर चूर्ण बना लें | इस चूर्ण को रस सिन्दूर के साथ सेवन करें |

नुकसान या दुषपरिणाम (Side Effect)

सामान्यतः इसके कोई दुष्प्रभाव नहीं हैं | लेकिन पित्त प्रकृति के व्यक्ति के लिए इसका सेवन लाभदायी नहीं होता है क्योंकि यह उष्ण वीर्य वाला रसायन है | अगर पित्त प्रकृति का व्यक्ति इसका सेवन करे तो उसे साथ में प्रवाल पिष्टी जैसी शीत वीर्य वाली औषधियों का सेवन साथ में करना चाहिए |

Patanjali Ras Sindoor Price, Benefits, Uses

पतंजलि हमारे देश की अग्रणी आयुर्वेद दवाइयां बनाने वाली कंपनी है | आइये जानते है पतंजलि द्वारा निर्मित इस उत्पाद के बारे में :-

  • प्रोडक्ट नाम :- Ras Sindoor
  • मात्रा (Quantity) :- 1 ग्राम
  • कीमत (Price) :- 14 रूपए
  • उपयोग एवं फायदे (Uses and Benefits) :- मूत्र विकार, ह्रदय बलकारी, श्वास विकार, इम्युनिटी बढाने के लिए

Baidyanath Ras Sindoor Price, Benefits and Uses

बैद्यनाथ आयुर्वेद जगत में बहुत ही प्रतिष्ठित कंपनी है | इसके उत्पाद बहुत विश्वसनीय होते हैं |

Baidyanath रस सिंदूर
Baidyanath रस सिंदूर
  • प्रोडक्ट नाम :- Ras Sindoor
  • मात्रा (Quantity) :- 2.5 ग्राम
  • कीमत (Price) :- 85 रूपए
  • उपयोग एवं फायदे (Uses and Benefits) :- वाजीकरण, मूत्र विकार, ह्रदय बलकारी, श्वास विकार, इम्युनिटी बढाने के लिए

इसके अलावा आप डाबर एवं उंझा का रस सिदूर (Dabur Ras Sindoor) भी उपयोग में ले सकते हैं | ये उत्पाद भी विश्वसनीय हैं |

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यहाँ पर दी गयी जानकारी सिर्फ आपके सूचनार्थ है इसे चिकित्सकीय सलाह न मानें |

धन्यवाद

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