अभयारिष्ट (Abhyarishta) सिरप – फायदे, घटक द्रव्य एवं निर्माण विधि

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अभयारिष्ट Abhyarishta in Hindi :- आयुर्वेद में आसव एवं अरिष्ट कल्पना की औषधियों का अपना एक अलग महत्व है | ये दवाएं रोगों पर शीघ्र असर करती है एवं ग्रहण करने में भी आसान होती है | अपने इन्ही गुणों के कारण आसव – अरिष्ट कल्पना की दवाएं आयुर्वेद में विशेषरूप से सराहनीय मानी जाती है |

अभयारिष्ट भी अरिष्ट कल्पना की आयुर्वेदिक दवा है | यह पाचन, कब्ज एवं बवासीर में विशेषकर उपयोगी औषधि है | साथ ही भूख बढ़ाने, मूत्रल एवं आमपाचक जैसे गुणों से युक्त होने के कारण वैद्यों द्वारा विश्वनीय है |

आज इस आर्टिकल में हम आपको अभयारिष्ट के उपयोग, फायदे, घटक द्रव्य एवं बनाने की विधि का सम्पूर्ण विवरण देंगे |

अभयारिष्ट

अभयारिष्ट के घटक द्रव्य / Ingredients

इस औषधि के निर्माण में लगभग 15 आयुर्वेदिक द्रव्यों का प्रयोग होता है | आयुर्वेद की अरिष्ट कल्पना के तहत इसका निर्माण होता है | अरिष्ट कल्पना आयुर्वेद की वह कल्पना होती है जिसमे औषध द्रव्यों का क्वाथ बनाकर इनको महीने भर तक संधान करके औषधि का निर्माण किया जाता है |

अभयारिष्ट निर्माण विधि / Making Process

Time needed: 30 days.

अभ्यारिष्ट का निर्माण करने के लिए आयुर्वेद की अरिष्ट कल्पना का प्रयोग किया जाता है | अरिष्ट कल्पना के तहत सबसे पहले कुछ द्रव्यों का क्वाथ निर्माण किया जाता है फिर संधान पात्र में क्वाथ डालकर अन्य जड़ी – बूटियों को मिलाकर महीने भर के लिए निर्वात स्थान पर रखा जाता है |

  1. जड़ी – बूटियों का काढ़ा बनाना

    सर्वप्रथम हरीतकी, महुआ, दाख एवं वायविडंग को ऊपर बताई गई मात्रा में लेकर यवकूट करलें | अब इन सभी जड़ी – बूटियों को 10 गुणा जल में डालकर क्वाथ बना लें | जब पानी एक चौथाई बचे तब इसे आंच से निचे उतार कर ठंडा करलें |

  2. काढ़े में शेष जड़ी – बूटियों को मिलाना

    अब बाकी बची जड़ी – बूटियों को कूट लें | जब क्वाथ ठंडा हो जाए तो इन सभी जड़ी – बूटियों को काढ़े में मिला दें |

  3. गुड़ मिलाना

    गुड़ को भी कूटपीसकर छोटे – छोटे टुकड़ों में करलें | जब ये अच्छी तरह छोटे – छोटे टुकड़ों में हो जाये तो इस 2400 ग्राम गुड़ को भी क्वाथ में मिला दें और अच्छी तरह एक लकड़ी की साफ शलाका से एक सार करदें |

  4. संधान करना

    अब इस तैयार मिश्रण को ऊपर से अच्छी तरह बंद करके एक महीने के लिए निर्वात स्थान अर्थात जहाँ कोई आता – जाता न हो एवं धुप और हवा से सीधा सम्पर्क न हो एवं अँधेरा हो वहाँ इस पात्र को महीने भर के लिए रख दें |

  5. अभयारिष्ट को छानना

    महीने भर पश्चात संधान परिक्षण के बाद इसे छान कर उपयोग में लिया जा सकता है | इस प्रकार से अभयारिष्ट का निर्माण होता है |

अभयारिष्ट के फायदे / Abhayarishta Syrup Benefits in Hindi

  • कब्ज की समस्या में यह औषधि रामबाण की तरह कार्य करती है | अन्य औषधियों के तरह यह कब्ज को दूर तो करती ही है लेकिन साथ में बार – बार कब्ज बनने की प्रवृति को भी रोकती है |
  • बवासीर में फायदेमंद – बवासीर या अर्श आदि की समस्या का मुख्य कारण बिगड़ा हुआ पाचन एवं कब्ज होती है | अत: यह पाचन को सुधार कर कब्ज को ख़त्म करती है | कब्ज ख़त्म करके बवासीर को ठीक करने में सहायक सिद्ध होती है |
  • भूख की कमी – भूख न लगने की समस्या अधिकतर मन्दाग्नि एवं अजीर्ण के कारण होती है | अभयारिष्ट पाचक गुणों से युक्त आयुर्वेदिक दवा है | अत: यह पाचन संसथान के सभी विकारों को दूर करके भूख बढ़ाती है | खाया – पिए को अच्छे से पचाती है जिससे खुलकर भूख लगती है |
  • मूत्रकृच्छ – अर्थात पेशाब ठीक ढंग से न लगने की समस्या में यह फायदेमंद दवा है | इसमें मूत्रल गुण होते है जो मूत्र कम आने या न लगने की समस्या को ठीक करते है |
  • यकृत एवं आँतों की खराबी को ठीक करने में भी उत्तम है | कब्ज आदि के कारण आंते कमजोर हो जाती है | इसमें प्रयुक्त जड़ी – बूटियाँ आँतो को सुदर्ड करने एवं यकृत को बल देने में फायदेमंद है |

सेवन की मात्रा एवं विधि / Doses

अभयारिष्ट का सेवन 10 से 20 मिली की मात्रा में बराबर पानी मिलाकर सुबह – शाम किया जा सकता है | इसका सेवन आयुर्वेदिक चिकित्सक के परामर्शनुसार दिन में दो बार या एक बार जैसा वैद्य निर्धारित करें; करना चाहिए |

सावधानियां / Precautions

वैसे इस दवा के कोई ज्ञात साइड इफ़ेक्ट नहीं है लेकिन फिर भी उचित मात्रा में ही सेवन करना चाहिए | चिकित्सक के परामर्श के पश्चात ही छोटे बच्चों एवं कमजोर व्यक्तियों को दिया जाना चाहिए |

Note : – गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए | गर्भवती एवं प्रसूति अवस्था की महिलाओं के लिए यह आयुर्वेद में निषिद्ध औषधि है | अत: सेवन न करें |

धन्यवाद |

Mr. Yogendra Lochib

Mr Yogendra Lochib is a experienced and qualified Ayurveda Nurse & Pharmacist. He was Graduated (2009-2013) from Dr Sarvepalli Radhakrishnan Rajasthan Ayurved University, Jodhpur.He has Good Knowledge about Ayurvedic Herbs, Medicine, Panchkarma Procedure & Naturopathy. The Author believes in sharing the knowledge of Ayurveda (As it was shared 5000 years ago orally) using online platforms, and he is doing well.

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