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पारद क्या है ? इसके भेद, दोष एवं पारद शोधन की विधि

पारद खनिज पदार्थों में गिना जाता है | यह अन्य धातु मिश्रित एवं मुक्त दोनों अवस्थाओं में प्राप्त होता है | हमारे पौराणिक शास्त्रों के अनुसार यह दिव्य रसायन है जिससे सब कुच्छ संभव है |

पारद
image – en.wikipedia.com

यह मृत्यु पर विजय हासिल कर सकता है | शास्त्रों में पारद की उत्पति की कथाएं मौजूद है | शास्त्रों के अनुसार यह भगवान् शिव के वीर्य से उत्पन्न दिव्य खनिज पदार्थ है | जिसके सेवन से जरा, मृत्यु, असंभव को संभव करने जैसी शक्ति है |

निश्चित ही यह अतिउत्तम किस्म का दिव्य चमत्कारी रसेन्द्र है लेकिन शास्त्रोक्त वर्णित संस्कार एवं सिद्धि में अभी तक पूर्ण सफलता नहीं मिली है | पारद के शास्त्रोक्त वर्णित शोधन से इसे स्वास्थ्य उपयोगी बनाया जाता है |

पारद क्या है – पारद एक खनिज पदार्थ है जिसे भारतीय शास्त्रों में रसराज – रसेन्द्र आदि कहा गया है अर्थात यह सभी धातुओं में उत्तम है | यह मुक्त और मिश्रित दोनों अवस्थाओं में प्राप्त होता है |

पारद के भेद / Parad ke Bhed

आयुर्वेद में पारद के पांच भेद वर्णित है | ये सभी भेद पारद के प्राप्ति स्थान अर्थात स्थान भेद के आधार पर है | परन्तु वैसे इसका एक ही प्रकार है |

१. रस – रसनात्सर्वधातुना रस इत्यभिधीयते |

रस रत्न समुच्चय में में कहा गया है कि यह पारद सभी धातुओं का भक्षण कर लेता है अत: यह रस कहलाता है |

2. रसेन्द्र – रसोपरसराज त्वाद्रसेंद्र इति कीर्तित: |

अर्थात इसे रसों एवं उपरसों का राजा माना जाता है अत: इसे रसेन्द्र कहा जाता है | यह रसों एवं लोहों आदि को भस्म करता है इसलिए भी इसे रसेन्द्र कहते है |

३. सूत – सूते यस्मातसर्वसिद्धि तस्मात्सुत इति स्मृत: |

इससे सभी प्रकार की सिद्धियाँ जन्म लेती है | अर्थात सभी सिद्धियों को जन्म देने के कारण इसे सूत कहते है |

4. पारद – जन्म रोग, वृद्धावस्था, मृत्यु और दरिद्रता से यह मनुष्य को पार लगाता है | अत: इसे पारद कहते है |

५. मिश्रक – यह सभी कर्मों अर्थात सर्वकर्मों की योग्यता रखता है और सभी सिद्धियों को देने वाला होता है अत: इसे मिश्रक पारद कहते है |

पारद के दोष / Parad ke Dosh

बिना शोद्धित पारद बहुत ही विषैला जहर है | इसमें विभिन्न दोष पाए जाते है | आयुर्वेद के आचार्यो ने पारद के कुल १२ प्रकार के दोष बताये है |

शुद्ध पारद अत्यंत चमकीला होता है | यह रसकर्म के लिए आयुर्वेद के अनुसार ग्राह्य माना गया है |

जिस पारद का रंग पीला, धूम्रवर्ण या अन्य अनेक रंगों वाला हो तो उसे आयुर्वेद चिकित्सा में रस्कर्मार्थ प्रयोग में नहीं लिया जाता |

१. नैसर्गिक दोष – यह दोष पारद का प्राकृतिक दोष होता है | खानों में खनन के दौरान इसमें कई विष आदि मिल जाते है | इसके मुख्यत: तीन नैसर्गिक दोष होते है – १. विष, २. अग्नि और ३. मल

२. यौगिक दोष – यौगिक दोष वे दोष होते है जो पारद में अन्य किसी समान स्वाभाव वाले धातुओं आदि को मिला दिया जाता है | व्यापारी लोग अधिक मुनाफे के लिए इसमें वंग एवं नाग आदि धातुओं का मिश्रण इसमें कर देते है अत: यह दोष यौगिक दोष कहलाता है |

मुख्यत: यह दो प्रकार का होता है – १. वंग दोष एवं दूसरा २. नाग दोष

३. औपधिक दोष – पारद में ७ प्रकार के औपाधिक दोष संचित होते है | यह दोष इसमें स्वभावत: मिटटी, जल, कंकड़ एवं नाग या वंग के सम्पर्क में आने से होने वाला दोष होता है |

जैसे मिटटी में से कुच्छ दोष इसमें आ जाते है तो इसे भूमिज दोष की संज्ञा दी जाती है | इसी प्रकार पहाड़ो के कंकर आदि के दोष गिरिज दोष कहलाता है |

पारद का शोधन / Parad Shodhan / पारद शुद्ध करने की विधि

इसका शोधन मुख्यत: दो प्रकार से किया जाता है | एक साधारण शोधन एवं दूसरा विशिष्ट शोधन | अच्छी तरह से शोधन करने के पश्चात ही इसको औषधि उपयोग के लिए ग्रहण किया जाता है |

१. साधारण शोधन

पारद – 500 ग्राम

चुना – 500 ग्राम

रसोन – 500 ग्राम

सैन्धव लवण – 250 ग्राम एवं निम्बू का रस – आवश्यकतानुसार

शोधन की विधि – सबसे पहले खरल में पारद को डालें एवं अधोर मन्त्र पंचाक्षरी मंत्रो का जाप करें | अब चुने पर थोड़ा पानी डालकर इसे चूर्ण करलें | अनबुझे चुने पर जब पानी डाला जाता है तब यह गरम होकर चूर्ण रूप में हो जाता है |

चूर्ण होने के पश्चात इसे छलनी से छान लें | इस छने हुए चुने को खरल में पारद के साथ डालें एवं तीन दिनों तक 8 – ८ घंटे मर्दन करें |

इससे चुने में बहुत पारद मिल जायेंगे एवं चुने एवं इसका रंग काले रंग का हो जायेगा | अब जितना पारद चूर्ण से अलग हो उसे खरल से बाहर निकाल लें | शेष में गरम पानी डालकर इसको निकाल लें |

जल को धुप में सुखा कर निचे बचे हुए पारद को भी निकाल लें |

अब अलग निकाले गए पारद को रसोन के कल्क डालकर एवं साथ में सैन्धव मिलाकर मर्दन करें |

साथ – साथ में निम्बू का स्वरस भी डालते जाएँ एवं मर्दन करते जाएँ | इस प्रकार से इसका मर्दन लगभग तीन दिन तक करना है |

अब इस कल्क का रंग भी श्याम रंग का हो जायेगा | इसमें ऊपर से गरम पानी डालकर फिर से मर्दन करें एवं इक्कठा ऊपर का पानी किसी अन्य बर्तन में निकाल लें |

इस प्रकार कई बार करने से पारद निचे बैठा हुआ मिलेगा | यह पारद ग्राह्य होगा | लेकिन पारद का शोधन सावधानी पूर्वक करना चाहिए |

धन्यवाद |

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