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रूमी मस्तगी की परिचय – इसे मस्तगी या मस्तकी आदि नामों से जाना जाता है | अंग्रेजी में Mastic एवं लेटिन में Pistacia lentiscus Linn. नाम से जाना जाता है | इसका 15 फीट तक ऊँचा पेड़ होता है |

मस्तगी के पते सीधे पक्षवत होते है | फल 4 से 8 मिमी व्यास के होते है, आकार में गोल एवं रंग में काले होते है | रूमी मस्तगी के पोधे के तने एवं शाखाओं से गाढ़ा जम्मा हुआ गोंद प्राप्त होता है | इसी गोंद को बाजार में रूमी मस्तगी के नाम से जाना जाता है |

रूमी मस्तगी

रूमी मस्तगी की पहचान – मस्तकी के पौधे से प्राप्त होने वाले गोंद को ही रूमी मस्तगी के नाम से जाना जाता है | इसकी पहचान के लिए सबसे आसान तरीका है कि यह रंग में कुछ पिताभ श्वेत अर्थात पीलापन लिए हुए सफ़ेद होता है | यह छोटा गोल एवं लम्बा दोनों प्रकार से बाजार में बेचा जाता है |

जब इसे तोड़ा जाता है तब यह रंग विहीन होता है लेकिन स्पर्श मात्र से सफ़ेद चूर्णव्रत मालूम होता है | इसमें हल्की गंध एवं स्वाद में कुछ मीठापन (मधुर) होता है | इसे तोड़ने पर यह कणों में टूटती है एवं बाद में चिपचिपी हो जाती है |

रूमी मस्तगी के औषधीय गुण धर्म

रस – मधुर एवं कषाय |

गुण – लघु एवं रुक्ष |

विपाक – मधुर

वीर्य – उष्ण |

यह दोष्कर्म में वात एवं पित दोष को दूर करने वाली है | इसके साथ ही मूत्रल (पेशाब लगाने वाली), वृष्य (शक्तिदायक) एवं ग्राही है |

रूमी मस्तगी के फायदे या लाभ

आयुर्वेद के अनुसार इसे विशिष्ट यौन शक्ति वर्द्धक औषधि माना जाता है | यह यौन दुर्बलता को दूर करने में उत्तम सिद्ध होती है | रूमी मस्तगी के साथ, विदारीकन्द, अकरकरा, लौंग, दालचीनी, सालमपंजा, अश्वगंधा एवं जायफल आदि मिलाकर सेवन करने से सभी प्रकार की यौन कमजोरी में फायदा मिलता है |

कफज विकार – कफज विकारों में फायदेमंद है | यह तासीर में उष्ण होने से जमे हुए कफ को शरीर से बाहर निकालने का कार्य करती है | कफशमन के लिए इसके 2 से 3 ग्राम चूर्ण का सेवन करना चाहिए |

पेशाब रुक – रुक के आना – यह अच्छी मूत्रल औषधि है इसलिए मूत्रकृच्छ एवं अश्मरी जैसी समस्या में प्रयोग की जा सकती है | इस समस्या में इसे आधा से 1 ग्राम तक अधिकतम सेवन किया जाना चाहिए |

मुंह की दुर्गन्ध – रूमी मस्तगी की खुशबू मुंह में आने वाली दुर्गन्ध को दूर करती है | इसे थोड़ी मात्रा में चूसने से मुंह की दुर्गन्ध दूर होती है |

सुजन – सुजाक जैसे रोगों में भी इसे आधा से 1 ग्राम तक सेवन करवाना चाहिए | यह सभी प्रकार की सुजन को दूर करने में कारगर औषधि है |

मन्दाग्नि – जठराग्नि कमजोर पड़ने पर भूख कम लगने लगती है | रूमी मस्तगी मन्दाग्नि को खत्म करती है | यह जठराग्नि को सुचारू करके खुल कर भूख लगाती है |

दांतों की समस्या – रूमी मस्तगी अच्छी एंटीओक्सिडेंट गुणों से युक्त होती है | इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण भी होते है अत: मुंह की दुर्गन्ध दूर करने के साथ मसूड़ों को मजबूत करने का कार्य भी करती है |

गैस या आफरा – यह गैसट्राईटिस को ठीक करने में सहायता करती है | इसमें एंटी इन्फ्लामेंट्री औषधीय गुण होते हैं जो पेट में गैस, कब्ज एवं आफरा की शिकायत को दूर करती है |

रक्त स्राव – यह शरीर में होने वाले रक्तस्राव को दूर करने में भी सहायक औषधि है |

रूमी मस्तगी की प्राइस अर्थात मूल्य लगभग 30 ग्राम / Price – 600 रु. है | इसकी उपलब्धता के आधार पर यह थोड़ा महंगा द्रव्य है |

यौनशक्ति बढ़ाने के लिए रूमी मस्तगी का इस प्रकार करें प्रयोग

अगर इस औषधीय प्रयोग को नियमित निर्देशित मात्रा में बनाकर सेवन किया जाए तो निश्चित ही शीघ्रपतन जैसी समस्या पर विजय हासिल की जा सकती है | बेसक जड़ी – बूटियां असली एवं पुरे गुण धर्म वाली हो |

  • रूमी मस्तगी – 20 ग्राम,
  • सफ़ेद बहमन – 30 ग्राम,
  • पीली शतावरी – 25 ग्राम
  • अश्वगंधा – 25 ग्राम
  • सालम पंजा – 20 ग्राम
  • सालम मिश्री – 20 ग्राम
  • श्याह मूसली – 25 ग्राम
  • ईरानी अकरकरा – 15 ग्राम

ये सभी जड़ी – बूटियां ऊपर बताई गई मात्रा में खरीद लें | खरीदने के लिए किसी विश्वनीय स्थान का पता करें जहाँ औषधियां असली एवं गुण धर्म युक्त मिलती हो |

अब इन सभी का चूर्ण बना कर सहेज लें | इस चूर्ण का सेवन 5 ग्राम की मात्रा में गाय के धारोष्ण दुग्ध के साथ सेवन करें | शीघ्रपतन की समस्या से पूर्णत: निजात मिलेगी | इस योग का इस्तेमाल करते समय गरम एवं तेज मसालेदार भोजन का इस्तेमाल न करें

धन्यवाद |

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1 Comment
  1. रूमी मस्तगी – 20 ग्राम,
    सफ़ेद बहमन – 30 ग्राम,
    पीली शतावरी – 25 ग्राम
    अश्वगंधा – 25 ग्राम
    सालम पंजा – 20 ग्राम
    सालम मिश्री – 20 ग्राम
    श्याह मूसली – 25 ग्राम
    ईरानी अकरकरा – 15 ग्राम
    kya ye sari chizen subah ke nashte main dry fruits mix milk ke sath le sakte hain.aur ise kiten din tak liya ja sakta hai.

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